समय के अंत में

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1970
Last Updated: अगस्त 2026
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'समय के अंत में' के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा पर निकलें - "आधारशिला रखने" श्रृंखला का भाग 8। यह उपदेश अंतिम दो सिद्धांतों पर प्रकाश डालता है: मृतकों का पुनरुत्थान और अनंत न्याय। यह प्रेरणादायक संदेश आपको इस जीवन से परे अपनी दृष्टि को विस्तारित करने के लिए आमंत्रित करता है, प्रभु के अनंत प्रेम और महिमा को अपनाते हुए।
Transcript
अब हम अपनी घोषणा पर आयेंगे। यह यहूदा की पत्री के अंतिम दो पदों से लिया गया है, जो कि बहुतों के लिये बहुत परिचित है क्योंकि यह प्रायः कलीसियाई आराधनाओं में उपयोग किया जाता है।
अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष करके खड़ा कर सकता है। उस अद्वैत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।
सोचिये, कि वह हमें उसकी महिमा के सामने निर्दोष बनाकर खड़ा करने के योग्य है। हमारा परमेश्वर कैसा महान है जिसकी हम सेवा करते हैं।
अब, मैंने पिछले सत्रों में मूल सिद्धांतों में से प्रथम चार सिद्धांतों पर बात की है। मुझे देखने दें कि क्या मैं उन्हें पुनः याद कर पाता हूं कि नहीं। मृत कामों से पश्चाताप, परमेश्वर के प्रति विश्वास, बपतिस्मा का सिद्धान्त, हाथ रखना।
अब, आज सुबह मेरा संदेश का शीर्षक था, "परमेश्वर की सामर्थ्य का संचारण करना" और इसमें हाथ रखने के उस विशिष्ट मुद्दे पर विचार किया गया। आप में से कुछेक के लिये मुझे यकीन है कि आपको यह देखना आश्चर्यजनक होगा कि कलीसियाई जीवन और काम में हाथ रखने का महत्वपूर्ण भाग होता है।
अब हमारे पास दो महत्वपूर्ण सिद्धांत शेष हैं, जो कि बहुत ही उत्साहित करने वाले हैं, मृतकों का पुनरुत्थान और अनंत न्याय। परन्तु इससे पहले कि मैं उन पर जाऊं, मैं अगले दो सत्रों में उन पर जाना चाहता हूं, इन दोनों को मैं एक विषय के अंतर्गत करना चाहता हूं, जिसे मैंने "समय के अंत में" नाम दिया है। क्योंकि आपको समझना है कि जब हम इन दो अंतिम सिद्धांतों पर आयेंगे तो वे हमें समय से परे और अनंतता में ले जायेंगे। यह उनके महत्वपूर्ण कामों में से एक है, कि हमें केवल इसी जीवन पर ध्यान नहीं लगाना है। मैं इतने सारे मसीहियों को देखता हूं जो केवल इसी संबंध में ही सोचते हैं परमेश्वर उनके लिए इस जीवन में क्या करेंगे। वह तो बस उन सब बातों का छोटा सा अंश मात्र है जो परमेश्वर ने हमारे लिये किया है।
मैं प्रकाशितवाक्य 10 से एक पद पढ़ना चाहता हूं। मुझे बहुत सावधान रहना होगा क्योंकि दर्शनशास्त्र में मेरी पृष्ठभूमि के कारण मैं कभी कभी कुछ निश्चित विचारों में चला जाता हूं। यह प्रकाशितवाक्य 10:5,6 में एक स्वर्गदूत के बारे में बात करता हैः
और जिस स्वर्गदूत को मैंने समुद्र और पृथ्वी पर खड़े देखा था, उसने अपना दहिना हाथ स्वर्ग की ओर उठाया। और जो युगानुयुग जीवता रहेगा, और जिसने स्वर्गदूत को और जो कुछ उसमें है, और पृथ्वी को और जो कुछ उस पर है, और समुद्र को और जो कुछ उसमें है सृजा उसी की शपथ खाकर कहा, अब तो और देर न होगी।
अब आपके सारे संस्करण कहेंगे, "अब और देर नहीं होगी," जो कि सही अर्थ हो सकता है, परन्तु धर्मशास्त्र वास्तव में जो कुछ कहता है, वह है, "अब और समय नहीं लगेगा।" और हम बहुत जल्द एक बिंदु पर पहुंचते हैं, जबकि हम में से प्रत्येक के जीवन में और अधिक समय नहीं होगा। किसी ने कहा है, सब घड़ियों की घड़ी मनुष्य का हृदय होता है, और जब मनुष्य का हृदय धड़कना बंद करता है तो सारी घड़ियां चलना बंद कर देती हैं। हममें से प्रत्येक व्यक्तिगत रूप से समय से परे एक नये क्षेत्र, आत्मिक क्षेत्र में, चले जाते हैं।
याद रखें, अनंत काल का समय एक बहुत लंबी अवधि नहीं है, यह विशुद्ध रूप से बिल्कुल अलग क्षेत्र है, कुछ ऐसा जिसे हम शायद ही समझ सकते हैं।
मैं सच में इस बयान की तारीफ करता हूं, "वह रहस्य जिसे परमेश्वर ने बनाया है", क्योंकि समय एक रहस्य है। यह कुछ ऐसा है जिसमें मैं एक दार्शनिक के रूप में पचास वर्षों से अधिक समय से पहले से गहराई से शामिल रहा हूं, क्योंकि यह मुझे बताता है क्योंकि बाइबिल यह स्पष्टतः कहती है। समय एक रहस्य है। भौतिकविद हमें बताते हैं कि यदि कुछ वैज्ञानिकों को एक अंतरिक्ष यान से भेज दिया जाये जो प्रकाश की आधी गति से चलती हो और एक दूर के ग्रह या स्टार पर जाएं और वापस आयें तो उनके समय के हिसाब से उन्होंने दो सप्ताह का समय लगेगा लेकिन पृथ्वी के समय से यह कहें तो यह दो पीढ़ियों का समय होगा। जब वे वापस आयेंगे तो अपने परपोतों से मिलेंगे। यह बात हमारे मन को भ्रमित करता है, है न? आप देखें, समय एक रहस्य है।
समय के माप के बारे में मुझे कुछ और कहने दीजिये। जितना कि हम यह समझते हैं, यह एक मानवीय पर्यवेक्षक पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, एक वैज्ञानिक कहेंगे, "हां, निश्चित पत्थर पर या एक निश्चित घाटी में एक निश्चित जमाव के कारण, या चाहे कुछ भी हो या परमाणु धूल के संचय के कारण, हम विश्वास करते हैं कि एक लाख साल बीत चुके हैं।" मैं कह सकता था, कि मैं विश्वास भी करता हूं लेकिन मैं विश्वास करता हूं कि यह आपके कहने से एक लाख गुना अधिक तेजी से हुआ है। अतः केवल एक वर्ष बीता है। प्रमाण में चाहे कुछ भी हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। दूसरे शब्दों में, यह एक व्यक्तिगत समीक्षक कथन है कि समय ही किसी को कुछ बनाता है। यह कहने में मुझे संतुष्टि है कि यह एक भेद है। परन्तु मन में सोच लें, एक दिन हम समय के पार अनंतता में जाने वाले हैं।
2 कुरिन्थियों 4:17-18 अनंत और तात्कालिक के बीच अंतर बताता है। 2 कुरिन्थियों 4:17-18 में पौलुस कहता हैः
क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश....
और जब आप उन सब के बारे में सोचते हैं जिसमें से होकर पौलुस गुजरा, जब वह हल्का सा क्लेश कहता है, तो मेरे प्यारे भाई और बहन, आप किसके बारे में चिंता कर रहे हैं? क्या तुम्हें उससे तुलना करने के लिए कुछ मिल गया है? हमें अपनी गहरी वेदनाओं के बारे में मत बताईये जब तक कि आप अपने आप को पौलुस द्वारा माप न लें। या, मुझे अपनी वेदनाओं के बारे में मत बताने दीजिये।
क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त जीवन महिमा उत्पन्न करता जाता है।
हमेशा याद रखें कि जब आप दबाव के तहत हैं तो यह आपके लिये कुछ कर रहा है। यह आपके लिए कहीं अधिक से अधिक और महिमा का शाश्वत वजन ला रहा है। अब, इब्रानी भाषा में वजन के लिए और महिमा के लिए शब्द अनिवार्य रूप से समान ही हैं। तो, यह विचार, हिब्रू में, एक यहूदी के रूप में, वह एक वजन जो परमेश्वर ने हमारे लिए तैयार किया है, महिमा के बारे में बोल रहा है।
और फिर वह कहता हैः
और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं,
और यह मन में रखें कि जब आप अनन्त पर अपनी आंखें रखते हैं, तो दुःख आपके जीवन में अच्छा काम ही करता है। यदि आप अनन्त पर से अपनी आंखें हटा लें और सिर्फ अपनी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें और खुद के लिए खेद महसूस करना शुरू करते हैं, तो आपके दुःख आपके लिये कुछ भी भला नहीं कर रहे हैं। यह केवल आपके लिए, हमारे लिए, काम करता है।
और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।
तो, पौलुस हमारे सामने दो भिन्न भिन्न क्षेत्र रखता हैः दृश्य क्षेत्र, जो कि शारीरिक और भौतिक है और जो तात्कालिक है - अदृश्य क्षेत्र, जो आध्यात्मिक और अदृश्य है। और स्मरण रखें, इस जीवन में समय की धारा में हम जिन बातों का सामना करते हैं वह तात्कालिक है। हम कुछ ऐसा करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं जो अनन्त है।
इस बात को मन में रखना बहुत आवश्यक है। मैंने हाल ही में मनन की एक पुस्तक पढ़ी है और मैं एक बहुत ही साधारण कथन कहता हूं। यह कहता है कि हम एक पतित संसार में रहते हैं। मैंने अपने आप से कहा कि यह सही है। यदि हम निष्पक्ष रूप से ईमानदार हैं तो, जैसा कि आज हम जानते हैं, आज संसार में प्रसन्नता से बढ़कर कहीं अधिक क्लेश है, शांति से कहीं अधिक तनाव है। स्वास्थ्य से बहुत अधिक बिमारी है। संसार का सुंदर चित्र मत बनाईये क्योंकि यह ऐसा नहीं है। हम एक पतित संसार में जी रहे हैं, ऐसा संसार जो पाप से भ्रष्ट और दागी हो गया है। हम ऐसे एक संसार में हैं। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमारा अंतिम मंजिल इस संसार में नहीं है।
1 कुरिन्थियों 15:19 में पौलुस ने कुछ ऐसा कहा है जिसने मुझे सच में प्रभावित किया है। जिन मसीहियों से मैं मिला हूं उनके विषय में मैंने बहुत सोचा है।
यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं।
उस पर कुछ समय के लिये विचार करें। यदि आप जो कुछ मसीह से आशा कर रहे हैं वह इसी संसार का है तो आप सबसे दयनीय हैं। फिर भी मैं बहुत से मसीहियों से मिलता हूं जो इस जीवन में जो कुछ होता है उसमें ही व्यस्त रहते हैं। मसीहियत के बारे में उनका विचार इस संसार में परमेश्वर से कुछ पाना है जो नये नियम के लिये पूरी तरह अनजाना है। हममें से प्रत्येक के जीवन में समय के अंत के बारे में और अनंतता के बारे में विचार करने के लिये पवित्रात्मा द्वारा दबाव में आना बहुत ही स्वास्थ्यकर होगा।
इब्रानियों 13:14 में लेखक कहता हैः
क्योंकि यहां हमारा कोई स्थिर रहने वाला नगर नहीं, बरन हम एक आनेवाले नगर की खोज में हैं।
अब क्या आपके विषय में यह सच है? आपका शाश्वत जीवन कहां है? क्या यह इस संसार में है या क्या आप समझते हैं कि यह केवल अस्थायी है। जैसा वे कहते हैं हम तो केवल गुजर रहे हैं। हमारी स्थाई मंजिल अनंतता में है। यदि आप केवल अभी की बातें ही देखते हैं तो आप अनंतता में एक अप्रसन्न व्यक्ति होंगे, एक निराश व्यक्ति होंगे। आप हमेशा शिकायत करते रहेंगे कि "मेरे अनुसार सब कुछ नहीं चल रहा है। परमेश्वर मेरी प्रार्थनाओं का जवाब नहीं दे रहा है।" कारण यह है कि आपका दृष्टिकोण गलत है। आपको अनंतता के दृष्टिकोण से देखना है।
मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं, कि परमेश्वर लंबे समय की खातिर अनंतता के छोटे से हिस्से का बलिदान नहीं देगा, क्योंकि समय स्थाई नहीं है, अनंतता है। मैं आपसे पूछता हूं, अनंतता के लिये आप अपने स्वयं के जीवन में कितना बना रहे हैं? नीतिवचन की पुस्तक में धर्मशास्त्र कहता है कि परमेश्वर ने हमें बुद्धि के द्वारा स्थायी धन दिया है। मैंने अपने आप से यह कहते हुए काफी समय बिताया है कि स्थायी धन क्या है? वे बैंक में का धन नहीं हैं, वे स्टॉक या शेयर नहीं हैं, वे हमारी चमचमाती कारें नहीं हैं, घर जिसमें हम रहते हैं, या स्विमिंग पूल नहीं है। उनमें से कोई भी स्थायी धन नहीं हैं। स्थायी धन क्या हैं? यीशु ने कहाः
जो कुछ तुम्हारे पास है उसे बेचकर कंगालों को दो और तुम्हें स्वर्ग में धन मिलेगा।
यही स्थायी धन है। यीशु ने कहाः
जो कुछ तुम सुसमाचार के लिये दोगे, परमेश्वर अनंतता में उसका सौ गुना तुम्हें देगा।
यह दस हजार प्रतिशत है। कितने व्यवसायी दस हजार प्रतिशत का अवसर अस्वीकार करेंगे?
और तब एक और बात जो मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है। जब हमारा जीवन समाप्त होता है तब हमारे उपहार नहीं रहेंगे। हमारे सभी आध्यात्मिक उपहार, हमारी भविष्यवाणी, हमारे चमत्कार, हमारे ज्ञान के शब्द सभी का अंत होगा। हम उन्हें अपने साथ नहीं ले जायेंगे, वे केवल इस दुनिया के लिए ही हैं, केवल समय के लिए हैं। उन्हें हमारे साथ नहीं ले जाया जाएगा। लेकिन एक बात हम अपने साथ ले जायेंगे, क्या आप जानते हैं कि वह क्या है? हमारा चरित्र। चरित्र स्थायी है। हम अपने चरित्र में क्या हैं यह निर्धारित करेगा कि हम अनंत काल में क्या होंगे। यही बना रहने वाला, स्थायी धन, एक शुद्ध, बलवान, भक्त, मसीही चरित्र का निर्माण करना है।
अब हमें वापस इस विषय पर आना है। अगली बात जो मैं आपसे करना चाहता हूं वह महत्वपूर्ण है कि हम बाइबिल की भविष्यवाणी की एक बुनियादी समझ रखें। दुर्भाग्य से, बहुत सारे लोग भविष्यवाणी की झूठी, आकर्षक, उथली व्याख्याओं द्वारा फिर गये हैं और उन्होंने वास्तव में विश्वास खो दिया है। खैर, अपने साथ ऐसा नहीं होने दें। कुछ अच्छे का दुरुपयोग आपको कुछ अच्छे से दूर करने न पाये। उदाहरण के लिए, मेरे जीवन में, जो कि काफी लंबा रहा है, मैंने किसी न किसी प्रकार समय समय पर आत्मा के सभी वरदानों का दुरुपयोग देखा है। लेकिन यह मेरे लिये आत्मा के वरदानों का तिरस्कार करने का कारण नहीं बना है, यह सिर्फ अधिक सावधान बनाता है कि मैं कैसे उनका उपयोग करता हूं। बाइबल की भविष्यवाणी के बारे में भी यह सच है। हमें उसकी जरूरत है। इसके बिना, मुझे लगता है कि हम अंधेरे में ठोकरें खाते हुए चल रहे हैं। हमें सावधान होना है कि हम इसे लागू करें।
मैं 2 पतरस 1:19, 20, 21 पर जाने वाला हूंः
और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है।
भविष्यद्वक्ताओं का वचन बाइबल की भविष्यवाणी है, अर्थात लिखित भविष्यवाणी। यद्यपि हमारे जीवनों में नबूवत के वरदानों का अपना स्थान है परन्तु हम अभी उसके बारे में बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन मैं बाइबल की लिखित भविष्यवाणी के बारे में बात कर रहा हूं, अर्थात लिखित वचनः
कि वह एक दीया है, जो अन्धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है
इस बात पर ध्यान दें। आप भविष्यवाणी के वचन को तुच्छ नहीं समझ सकते हैं क्योंकि पतरस कहता है कि उस पर ध्यान करते रहो क्योंकि वे अंधियारे स्थानों पर चमकने वाले प्रकाश हैं। यह संसार जिसमें हम आज रहते हैं वह निसंदेह एक अंधकार का स्थान है। इसके अतिरिक्त, यह और भी अंधकारमय होता जा रहा है। हमें एक ज्योति की आवश्यकता है जो हमें अंधकार में से ले जाये। परमेश्वर ने जो ज्योति प्रदान की है वह धर्मशास्त्र का भविष्यवाणी का वचन है।
अब आप अद्भुत रूप से बचाये और एक अच्छे मसीही हो सकते हैं परन्तु अंधकार में चलते रहते हैं क्योंकि आपने स्वयं को भविष्यवाणी के वचन के लिये स्वयं को उपलब्ध नहीं कराया है और उसका उपयोग नहीं किया है। यदि आप अंधकार में चलते हैं तो आप ठोकर खायेंगे और आप दौड़ नहीं पायेंगे और आपको पता नहीं चलेगा कि आप कहां जा रहे हैं। सच में आपको पता नहीं चलेगा कि आपके चारों ओर क्या हो रहा है। यह भविष्यवाणी के वचन को समझ न पाने के कारण होता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।
और तब पतरस कहता है कि हमें ध्यान करने की आवश्यकता हैः
जो अन्धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।
यह यीशु का आगमन नहीं है। यह एक आंतरिक, व्यक्तिपरक, व्यक्तिगत अनुभव है जहां सुबह का तारा जो सूर्य के उदय के तुरंत बाद आता है, हमारे दिल में चमकता है। और आप जानते हैं कि यह क्या करता है? यह कहता है कि यीशु वापस आ रहा है। और हम उत्साहित होते हैं।
प्रिय भाइयों और बहनों, अगर आपको कभी भी प्रभु की वापसी के बारे में उत्साहित नहीं किया गया है तो आपके लिए इसका बहुत मतलब नहीं रह गया है। यह मानवता के लिए एकमात्र उम्मीद है। और कुछ भी कभी मानव जाति की सभी हताश जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते हैं। लोग आकाश में पाई के रूप में सोचते हैं। मुझे इस पर यकीन नहीं है। मैं विश्वास करता हूं कि यह पूरी तरह यथार्थवादी है। वास्तव में, मैं विश्वास करता हूं कि राजनेताओं से मानवता की समस्याओं को हल करने की उम्मीद करना पूरी तरह से अवास्तविक है। वे एक लंबे समय के लिए कोशिश करते रहे हैं और मुझे लगता है कि यह गंदगी से बढ़कर उसमें रहने की आदत बदतर होती है। मैं सोचता हूं कि मानवता की समस्याओं के लिए एक मानव समाधान की उम्मीद करना अवास्तविक है। यही मानवतावाद का शिक्षण है लेकिन मानवतावाद एक मसीही विरोधी बल है जो आज दुनिया की अधिकांश सरकारों में काम पर रही है।
इसलिए हमें भविष्यवाणी की जरूरत है। ठीक है? क्या मैंने आपको इस बात पर कायल किया है? पतरस आगे कहता है कि यह मनुष्यों से शुरू नहीं होता है, लेकिन यह परमेश्वर की ओर से आता है।
अब मुझे जल्दी से बाइबल की भविष्यवाणी को समझने के लिए आपको दो कुंजियां देने दें। इसमें मेरे साथ समस्या यह है कि यदि मैं यह प्रारंभ कर दूं तो फिर इसमें से बाहर निकलना मुश्किल होगा। लेकिन व्यवस्थाविवरण 29:29 में मूसा ने इस्राएल की संतानों से कहाः
गुप्त बातें हमारे परमेश्वर यहोवा के वश में हैं, परन्तु जो प्रगट की गई हैं वे सदा के लिये हमारे और हमारे वंश में रहेंगी, इसलिये कि इस व्यवस्था की सब बातें पूरी ही जायें।
तब मूसा ने कहा, दो प्रकार की चीजें होती हैं, गुप्त बातें और प्रकाशित की गई बातें। वह कहते हैं, कि गुप्त बातें परमेश्वर की हैं, उन्हें कोई नहीं समझ सकता है। जो बातें प्रगट की गई हैं वे हमारे कार्य करने के लिए हैं। मुझे लगता है कि क्यों लोग भविष्यवाणी के अध्ययन को कठिन बना दे रहे हैं वह इसलिये है कि वे गुप्त बातों को समझने का प्रयास कर रहे हैं, और साथ ही साथ वे उन बातों का पालन नहीं कर रहे हैं जो प्रगट की गई हैं।
जब मैं भविष्यवाणी पर बात करता हूं तो लगभग हमेशा कोई न कोई मेरे पास आता है और कहता है, "पूर्व, मध्य या बाद?" आपको मालूम है कि इसका क्या अर्थ है? पूर्व-क्लेश, मध्य-क्लेश, बाद-क्लेश। आपको मालूम है कि मैंने क्या उत्तर दिया? मैं नहीं जानता। मैं शर्मिंदा नहीं हूं। इसके अलावा, मैं नहीं मानता कि किसी को मालूम है। मैं नहीं सोचता कि यीशु को भी मालूम है क्योंकि वचन कहता है कि उस दिन और उस घंटे को कोई नहीं जानता, पुत्र भी नहीं, केवल पिता जानता है। तो यदि मुझे कुछ पता नहीं है जो यीशु को भी नहीं मालूम मुझे शर्मिंदगी नहीं है। देखें? समस्या यह है कि लोग उन बातों को जानने के इच्छुक हैं जिन्हें नहीं जाना जा सकता है। और क्या आप जानते हैं कि उसके पीछे की प्रेरणा क्या है? गर्व है। यह सब मंशा से सबसे खतरनाक है। यदि हमने सच्चाई जान ली है और उसका पालन करते हैं, तो परमेश्वर हमें कुछ और देगा। यदि हम यह नहीं मानते हैं तो वह हमें और अधिक नहीं देगा। आप कहते हैं, "परमेश्वर कृपया हमें अगला दिखाईये।" वह कहता है, "जो कुछ मैंने तुम्हें पहले से दिखा दिया है उस पर तुमने कार्रवाई नहीं की है।" क्यों मैं तुम्हें और अधिक दिखाऊं?
तो यह बाइबल की भविष्यवाणी के प्रभावी उपयोग के लिए महत्वपूर्ण कुंजी है। उन बातों को समझने का प्रयास कीजिये जो परमेश्वर चाहता है कि हम समझें और उन बातों के बारे में परमेश्वर को परेशान मत कीजिये जिन्हें वह नहीं चाहता है कि हम समझें।
और दूसरी बात, जो कुछ परमेश्वर आप पर प्रगट करता है, उसे मानिये, उस पर चलिये। मेरी राय में, बाइबल की भविष्यवाणी का एक स्पष्ट प्रकाशन मत्ती 24:14 में निहित हैः
और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जायेगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जायेगा।
इसलिए कब अंत आएगा? जब राज्य का यह सुसमाचार सभी राष्ट्रों की गवाही के रूप में पूरी दुनिया में प्रचार किया जायेगा। यह किसका काम है? हमारा है। मुझे खुशी है कि आपने ऐसा कहा। यदि हम उस पर काम नहीं कर रहे हैं, यदि हम उस प्रकाशन का पालन नहीं कर रहे हैं, तो परमेश्वर हमें और अधिक क्यों बताये? लेकिन आप उस प्रकाशन पर काम शुरू करते हैं, तो आप सभी राष्ट्रों में राज्य के सुसमाचार का प्रचार करने के लिये जो कुछ उचित है उस रीति पर स्वयं को समर्पित करना प्रारंभ करते हैं तो आपको यह देखकर हैरानी होगी कि परमेश्वर अगला क्या प्रगट करता है। परन्तु यदि आपने उस पर कार्रवाई नहीं की है तो वह आपको क्यों और अधिक दिखाये। वह नहीं दिखायेगा।
हम इस युग अंत की एक तस्वीर पर वापस आने जा रहे हैं। मैं कुछ सामान्य बातें बताने जा रहा हूं कि इस युग के अंत के करीब आने पर क्या बातें होंगी। मुझे लगता है कि हम इस युग के बहुत ही करीब हैं, यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। मैं तिथियां निर्धारित नहीं करना चाहता लेकिन मैं विश्वास करता हूं कि अगले पचास साल के भीतर किताब में जो कुछ लिखा है वह सब कुछ पूरा होगा। मैं नहीं कहता कि यह होगा लेकिन यह कहता हूं कि मैं यह विश्वास कर सकता हूं यह होगा।
मैं इस युग के अंत की कुछ विशेषताओं को बताना चाहता हूं। मैं आपको तीन महत्वपूर्ण विशेषतायें बताना चाहता हूं। यशायाह 60:1-2। मैं जो कहना चाहता हूं वह यह है कि जैसे जैसे युग का अंत निकट आ रहा है, धार्मिकता और दुष्टता दोनों बढ़ जायेंगी। धार्मिकता बढ़ेगी और दुष्टता भी। ज्योति चमकेगी और अंधकार भी। ज्योति चमकेगी और गहरा अंधकार भी होगा। हम ज्योति और अंधकार, धार्मिकता और दुष्टता दोनों के बीच के इस विलोम के आदी हो गये हैं। यशायाह 60:1-3 में प्रभु अपने लोगों से बात करता है और वह कहता हैः
उठ, प्रकाशमान हो, क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है। और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। देख, पृथ्वी पर तो अन्धियारा और राज्य राज्य के लोगों पर घोर अन्धकार छाया हुआ है परन्तु तेरे ऊपर यहोवा उदय होगा, और उसका तेज तुझ पर प्रगट होगा। और अन्यजातियां तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आयेंगे।
यह परमेश्वर के लोगों के लिये युग के अंत में एक प्रतिज्ञा है। परमेश्वर की महिमा हम पर चमकेगी और गहन अंधकार के बीच में जो कि सब देशों पर छाया हुआ है, वे जिनके पास सत्य के लिये हृदय है प्रकाश की खोज में वे अंधकार से बाहर परमेश्वर के लोगों के पास आयेंगे। परन्तु अंधकार की समाप्ति की आशा मत कीजिये। वह जारी रहेगा और वह और गहरा होगा। परन्तु ज्योति और उज्ज्वल होगी।
प्रकाश और अंधकार के बारे में एक अद्भुत तथ्य है जो सृष्टि की रचना से परे जाती है। जहां भी प्रकाश अंधकार से मिलता है कौन जीतता है? प्रकाश, सही बात है। बस, इसे मन में रखें। यदि हम प्रकाश हैं तो हम जीतेंगे।
और तब गेहूं और जंगली पौधों का दृष्टांत। मैं उस वर्णन को पढूंगा नहीं, क्योंकि समय नहीं है, परन्तु दृष्टांत एक किसान के बारे में है जिसने अपने खेत में अच्छे बीज बोये और तब रात में शत्रु आया और जंगली बीज बो दिये, जो दिखता तो गेहूं के समान ही था परन्तु केवल एक बात है, उसमें फल नहीं लगेगा, उसमें कभी कुछ भी अच्छा नहीं फलेगा। खेत में काम करने वालों ने कहा, "क्या हम जाकर जंगली पौधों को उखाड़ दें?" किसान ने कहा, "नहीं, क्योंकि जब तुम जंगली पौधों को उखाड़ने का प्रयास करोगे तो कुछ गेहूं भी उखड़ सकता है। उन दोनों को एक साथ बढ़ने दो।" और तब वचन की व्याख्या करते हुए यीशु कहता है, कटनी युग का अंत है। वह कहता है कि युग के अंत में स्वर्गदूत आयेंगे और धर्मियों के बीच से दुष्टों का नाश करेंगे। दुष्टों को बांध लिया जायेगा और आग में डाल दिया जायेगा और धर्मी अपने पिता के राज्य में पुत्रों की तरह चमकेंगे। परन्तु यह जान लें, कि युग के अंत तक गेहूं और जंगली पौधे साथ-साथ बढ़ेंगे।
यदि आपको सुनिश्चित करना है कि आप गेहूं हैं, जंगली पौधे नहीं तो अपने फल को देखिये क्योंकि यही फर्क है।
युग के अंत तक कलीसिया पूरी तरह शुद्ध होने नहीं जा रही है। और हम यह करने नहीं जा रहे हैं। स्वर्गदूत यह करने जा रहे हैं।
और तब प्रकाशितवाक्य 22 में, धर्मशास्त्र के अंत से ठीक पहले, यीशु का ही एक वचन। प्रकाशितवाक्य 22:10-12।
फिर उसने मुझसे कहा, इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातों को बन्द मत कर, क्योंकि समय निकट है। जो अन्याय करता है, वह अन्याय ही करता रहे, और जो मलिन है, वह मलिन बना रहे, और जो धर्मी है, वह धर्मी बना रहे, और जो पवित्र है, वह पवित्र बना रहे।
यह परमेश्वर की ओर से आता है इसलिये यह एक उल्लेखनीय कथन है। परमेश्वर कहता है, यदि आप अधर्मी हैं तो वैसे ही रहिये, आपके लिये लंबा समय नहीं है। यदि आप गंदा होना चाहते हैं, तो और अधिक गंदे रहिये। यदि आप धर्मी हैं तो और अधिक धर्मी बनिये। यदि आप पवित्र हैं तो और अधिक पवित्र बनिये। क्योंकि यह मार्गों को अलग अलग करना है।
और फिर यीशु अगली सांस में कहते हैंः
देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूं और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है।
तो यह प्रभु की वापसी से तुरंत पहले है। दुष्ट और धर्मी दोनों अलग अलग हैं, दुष्ट अधिक दुष्ट हो रहा है, धर्मी और अधिक धर्मी हो रहे हैं।
मेरा कहना है कि आध्यात्मिक प्रकाश में कोई यथास्थिति नहीं होगी। आप स्थिर नहीं रह सकते। आपको या तो आगे या पीछे जाना होगा। नीतिवचन की पुस्तक कहती है कि धर्मी के मार्ग प्रकाशमान ज्योति के समान होता है, जो सिद्ध दिन के आते आते और अधिक से अधिक चमकता है। धर्म यह एक जड़ता नहीं है, यह एक मार्ग है। यह कुछ ऐसा है जिसमें आप प्रवेश कर जाते हैं। यदि आप भीतर प्रवेश करते हैं तो ज्योति अधिक से अधिक चमकदार होती जाती है। यदि आप कल के प्रकाश से आज जी रहे हैं तो पीछे जाने वाले बनने जा रहे हैं, आप धर्म के मार्ग में नहीं हैं।
ठीक है। तो दो बातें वे हैं।
तो इन सब के बीच में यीशु हमें लूका 21 में सांत्वना के कुछ खूबसूरत शब्द प्रदान करता है। लूका 21:25-28। लूका 21:25-28 युग के अंत के बारे में बात करते हुएः
और सूरज और चान्द और तारों में चिन्ह दिखाई देंगी, और पृथ्वी पर, देश देश के लोगों को संकट होगा, क्योंकि वे समुद्र के गरजने और लहरों के कोलाहल से घबरा जायेंगे। और भय के कारण और संसार पर आनेवाली घटनाओं की बांट देखते देखते लोगों के जी में जी न रहेगा क्योंकि आकाश की शक्तियां हिलाई जायेंगी।
संपूर्ण ग्लोब हिलाया जाने वाला है।
तब वे मनुष्य के पुत्र को सामर्थ और बड़ी महिमा के साथ बादल पर आते देखें।
यही यीशु का आगमन है। वह यह कहता है, वह अपने शिष्यों से कहता हैः
जब ये बातें होने लगें, तो सीधे होकर अपने सिर ऊपर उठाना, क्योंकि तुम्हारा छुटकारा निकट होगा।
तो कैसे आप सभी अशांति और संघर्ष पर प्रतिक्रिया करते हैं? क्या आप उदास और हतोत्साहित होते हैं या आप कहते हैं, "परमेश्वर की स्तुति हो, हमारा छुटकारा बहुत पास है?" देखिये, आपकी प्रतिक्रिया बताती है कि आपका हृदय कहां है?
यीशु ने एक नए युग के जन्म के समय होने वाली पीड़ा के बारे में बात की और उसका मत्ती 24 में वर्णन किया। हम कुछ समय बाद उसमें जायेंगे। वे बहुत अप्रिय हैं। मैंने कभी भी एक बच्चे को जन्म नहीं दिया है लेकिन मुझे लगता है कि यह एक आसान अनुभव कभी भी नहीं है। जन्म देने की पीड़ा इसके साथ जुड़ी हुई है। सवाल यह है कि क्या आप बच्चा चाहते हैं? यदि आप बच्चा चाहते हैं, तो आपको जन्म देने का कष्ट उठाना पड़ेगा। कोई जन्म देने की पीड़ा नहीं, कोई बच्चा नहीं। तो फिर आप पुनः अपने खुद के रवैये की जांच कर सकते हैं कि आप कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। यदि आप कहते हैं, कि चीजें बद से बदतर हो रही हैं, "ओह यह बहुत निराशाजनक है, मुझे बड़ी पीड़ा हो रही है। परमेश्वर कहां है? मैं उसे कुछ भी करते नहीं देख रहा हूं।" आप जन्म देने की पीड़ा को खारिज कर रहे हैं। क्या वास्तव में इसका मतलब है कि आप बच्चे के लिए इंतजार नहीं कर रहे हैं। बच्चा क्या है? यह पृथ्वी पर परमेश्वर के राज्य का जन्म है। यह बिना जन्म की पीड़ा के नहीं होगा। जन्म की पीड़ा की गारंटी दी जाती है। हमें यह निर्धारित करना है कि हम उन्हें कैसे प्रतिक्रिया देंगे?
इस बीच, जैसे कि मैंने कहा, इन सबमें कलीसिया के पास पूरा करने के लिए एक कार्य है। वो क्या है? मैंने नहीं सुना। सभी राष्ट्रों में राज्य का सुसमाचार प्रचार करना। मत्ती 24 में पद 7 में शुरुआत करते हुए जन्म के कष्ट की तस्वीर पर नजर डालते हैंः
क्योंकि जाति पर जाति और राज्य चढ़ाई करेगा।
जातीय संघर्ष, जाति के विरुद्ध जाति....
क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भूइडोल होंगे। ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी।
आपने देखा? तो आपको बच्चा चाहिये? तो आपको पीड़ा सहनी होगी। और कोई विकल्प नहीं है।
और तब यीशु कहता है, और 'तब' की एक श्रृंखला ही है।
तब वे क्लेश दिलाने के लिये तुम्हें पकड़वायेंगे और तुम्हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे।
आप कौन हैं? मैंने नहीं सुना। हां, सही कहा। आप हम हैं। यह अच्छा व्याकरण नहीं है परन्तु यह सत्य है। वे मुझको और आपको, मसीहियों को पकड़वायेंगे। यीशु के नाम के कारण हमसे सब देशों के द्वारा घृणा की जायेगी। पद 10,
तब बहुतेरे ठोकर खायेंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे।
कौन बहुतेरे? बहुत से मसीही। दबाव बहुत अधिक होगा, वे हार मान लेंगे। अपनी चमड़ी बचाने के लिये वे अपने सह विश्वासियों को धोखा देंगे। चीन और सोवियत यूनियन में यह एक या दो दशकों तक होता रहा है। मेरा विश्वास कीजिये, यह वहां तक ही सीमित नहीं होगा। पद 11ः
और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमायेंगे।
और मेरा विश्वास कीजिये, संसार झूठे नबियों से भरा हुआ है और उनमें से बहुत कलीसिया के भीतर हैं। हम उसमें नहीं जायेंगे, मैं चाहूंगा कि आप उसका अध्ययन करें।
और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठंडा हो जायेगा।
क्या हम आज दुनिया में अराजकता बढ़ते देख रहे हैं? हां या नहीं? मैं नहीं सोचता कि कोई नहीं कहेगा। यीशु ने यही तो कहा है। अराजकता बढ़ जायेगी और उसने कहा कि परिणाम क्या होगा? कई मसीहियों का प्रेम ठंडा पड़ जायेगा। वहां प्यार के लिए शब्द, अगापे है, मसीही प्यार के लिए विशेष रूप से प्रयुक्त शब्द। तो, दुनिया में अराजकता के दबाव में हम में से कुछ अपने प्यार को ठंडा पड़ने देंगे।
अगला पद बहुत महत्वपूर्ण है, पद 13ः
परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।
दरअसल यूनानी अधिक विशिष्ट है, वचन कहता है, "परन्तु जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।" तो आप कैसे बचे रहते हैं? आपको सहन करना है, हां। अब आप बचे हैं, लेकिन उद्धार में बने रहने के लिये आपको सहना है। और मैं लोगों से कहता हूं, और कोई भी वास्तव में यह कहने के लिए मुझे आशीर्वाद नहीं देगा, धीरज करना सीखने के लिये सिर्फ एक ही रास्ता है और वह है धीरज धरना। तो यदि आप अभी सहने के बीच में हैं तो, ध्यान रखें, परमेश्वर आपको युग के अंत तक इसके माध्यम से जीने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। आपने देखा?
और फिर वचन कहता हैः
और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जायेगा।
आप कहते हैं, "ठीक है, जब सब कुछ आसान हो जायेगा तब हम बाहर जायेंगे और सुसमाचार प्रचार करेंगे।" नहीं, नहीं, नहीं! समय कठिन से और कठिन होता जा रहा है। अब बाहर जाने और सुसमाचार प्रचार करने के लिए हिम्मत की आवश्यकता पड़ती जा रही है। क्या आपके पास साहस के अलावा कोई और अभद्र शब्द है? यह बहुत ही अमेरिकी है। क्या आपको इसका अमेरिकन अनुवाद पता है? पेट की सहनशक्ति। यही हमें जरूरत है। साहसपूर्ण मसीही। स्थिति कठिन हो रही है, यह कोई आसान होने नहीं जा रही है। आप सोचते हैं अभी यह बहुत कठिन है, ठीक है, और कठिन होने से पहले शीघ्रता करें।
आप देखें, यीशु को जो कलीसिया चाहिये वह विरोध या सताव से बिखरने वाली नहीं है, वह उसके प्रति, और उसके उद्देश्यों और उसके कार्यों के प्रति समर्पित है।
अब, उन घटनाओं को देखें जो यीशु की वापसी से जुड़ी हुई हैं, और मैं आपको घटनाओं की एक छोटी सूची दूंगा, पर जरूरी नहीं कि यह सही क्रम में हों। क्या आप जानते हैं कि क्यों। क्योंकि मुझे सच में पता है कि यह क्रम में नहीं है। मालूम है, क्यों? क्योंकि मैं सच में नहीं जानता कि सही क्रम क्या है। मैं बाइबल के कुछ विद्वानों से मिला हूं जो सच में विश्वास करते हैं कि उन्हें सही क्रम पता है। दिक्कत यह है कि वे एक दूसरे से सहमत नहीं होते थे इसलिये वे दोनों सही नहीं हो सके। मैं इसे प्रभु पर छोड़ने के लिये तैयार हूं। देखिये, मैं एक व्यस्त इंसान नहीं हूं। मैं उत्तरों के लिये परमेश्वर पर दबाव नहीं डालता हूं। एक बार दाऊद ने कहा, "जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाये हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है। हे इस्राएल, अब से लेकर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!"
मेरे लिये यह बहुत ही सुस्पष्ट है, मुझे आशा है कि आप नहीं सोचेंगे कि मैं अशिष्ट हूं। परन्तु वर्षों पूर्व मैं अफ्रीकियों के विशाल सम्मेलनों को संबोधित किया करता था। पहली दो पंक्तियों पर दूध पिलाने वाली माताओं का कब्जा होता और जब कभी बच्चा रोने लगता वहीं मेरे सामने ही वे बच्चे को दूध पिलाने लगतीं। अतः मुझे दूसरी या तीसरी पंक्ति के पार देखने की आदत हो गई। परन्तु मैंने क्या ध्यान दिया? जब भूख लगती तो एक बच्चा आसमान सिर पर उठा लेता और बच्चा मां द्वारा भोजन तैयार करते तक इंतजार करता। दाऊद ने कहा, "निश्चय मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाये हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।" बाइबल की भविष्यवाणियों को समझने की कुंजी पवित्रात्मा को आपके ध्यान को उन बातों पर लगाने देना है जो वह आपको निर्दिष्ट समय में दिखाना चाहता है। दूध पीने वाला बच्चा मत बनिये।
ठीक है। अब यहां कुछ घटनायें दी गई हैं। सच्चे मसीहियों का पुनरुत्थान और न्याय। सबसे पहले हवा में उठा लिया जाना। हवा में उठा लिये जाने के बारे में आप कैसा महसूस करते हैं? 1 थिस्सलुनीकियों 4। कुछ मसीही विद्वान कहेंगे कि नये नियम में हवा में उठा लिया जाना शब्द नहीं पाया जाता है। यह एक सीधा सादा उत्तर है क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस अनुवाद का उपयोग करते हैं। मैं ऐसे अनुवाद का उपयोग कर सकता था, यह पूरी तरह सटीक अनुवाद होगा। प्रेरित पौलुस के द्वारा प्रभु यही कहता है, 1 थिस्सलुनीकियों 4:15ः
क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुमसे यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
वे जो मर गये हैं। दूसरे शब्दों में, यह तथ्य कि प्रभु के आने पर हम जीवित होंगे, इसका यह तात्पर्य नहीं कि हम मरे हुओं से पहले वहां पहुंचेंगे। इसके विपरीत, पौलुस कहता है,
क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा, उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जायेगी...
मुझे नहीं मालूम कि लोग एक गुप्त हवा में मिलन में कैसे विश्वास करते हैं। मेरे लिये इससे बढ़कर कुछ भी अधिक सार्वजनिक नहीं होगा कि स्वर्ग से एक चिल्लाहट, एक महादूत की आवाज और परमेश्वर की तुरही के साथ घोषणा की जाये। मेरा मतलब है, उसके अंत में क्या गोपनीयता रह जाती है?
...... जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
उससे पहले हम जो जीवित हैं, बदल जायेंगे।
तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिये जायेंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
अब "उठा लिये" पूरी रीति से अच्छी तरह से "हवा में उठा लिया जाना" अनुवाद किया जा सकता है। "हवा में उठा लिया जाना" शब्द लैटिन भाषा के शब्द से आया है जिसका अर्थ है, "जबरन कुछ को जब्त करना"। और यूनानी में ऐसे शब्द का प्रयोग किया गया है जैसे एक घर में चोर प्रवेश करता है। यह मूल रूप से एक अचानक, बलपूर्वक हड़पने को इंगित करता है। यह एक भेड़िया भेड़ के बीच आने और झुंड में से एक भेड़ ले जाने जैसा शब्द का उपयोग करता है। यीशु और चोर के बीच सिर्फ एक अंतर होता है, तो आपको मालूम है वह क्या है? चोर जो उससे संबंधित नहीं है, उसे ले जाता है और यीशु अपने आगमन पर जो उससे संबंधित है, उसे ले जाता है।
तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिये जायेंगे, कि हवा में प्रभु से मिलेंगे और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
और पौलुस कहीं और कहता है कि हम एक आंख की झपकी में, एक पल में बदल जायेंगे। यह मेरे लिए बहुत रोमांचक है। यदि आप उत्साहित नहीं होते हैं, तो ठीक है, यह आपकी समस्या है। यहां हम हैं, हम एक दूसरे को देखते हुए, हम इस बैठक में बैठे हैं। वॉरेन मेरी पत्नी को देख रहा है और वह पलक झपकाए। अचानक वह पूरी तरह से बदल गई है, वह एक शानदार, सुंदर, चमकदार जीव है। वह भी बदल गया है। वह विस्मय में उसे देख रही है। यह लंबा समय नहीं लेता है। एक पल में, पलक झपकाते ही, हम पूरी तरह से बदल जायेंगे। क्या आप विश्वास करते हैं कि परमेश्वर ऐसा कर सकता है? मैं करता हूं। यह रोमांचक लगता है। यदि आप उत्साहित नहीं होते हैं तो मुझे नहीं मालूम कि वास्तव में आपके साथ गलत क्या है।
हवा में मिलन के बाद मसीहियों का न्याय आता है। कुछ मसीहियों को यह पता नहीं है, लेकिन हमारा न्याय पहले किया जाएगा। पतरस ने कहा, न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होना चाहिये। परमेश्वर का घर क्या है? चर्च। 2 कुरिन्थियों 5:10। अब, जब हम अनन्त न्याय के बारे में बात करते हैं तो इस पर वापस आयेंगे लेकिन यहां हम एक क्षण के लिये देखें। 2 कुरिन्थियों 5:10ः
क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाये कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किया, हो पाये।
जिस शब्द का अनुवाद दिखाई देना किया गया है उसका अर्थ वास्तव में प्रगट होना है। मैं सोचता हूं कि यह एक बहुत ही भयावह शब्द है। हमारे बारे में सबकुछ पूरी तरह से जाना जाएगा, कोई रहस्य नहीं होगा। हम सब मसीह के न्याय आसन के सामने प्रकट किये जायेंगे। यूनानी में न्याय आसन बेमा है, यह ऐसा स्थान है जहां एक रोमी अधिकारी न्याय करते समय बैठता था। यहीं पर यीशु का न्याय करते समय पीलातुस बैठ गया था। एक अलग दृश्य है, बचे हुओं के न्याय के लिये एक महान श्वेत सिंहासन है, वहां नहीं मसीहियों का न्याय है। और रोमियों 8:1 मन में रखेंः
सो अब जो मसीह यीशु में हैं उन पर दंड की आज्ञा नहीं।
यह दोषी ठहराने वाला न्याय नहीं है। यह हमारी सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने और उचित प्रतिफल देने वाला न्याय है। पौलुस कहता है, कि हम सबको मसीह के न्याय आसन के सामने खड़ा होना होगाः
....ताकि हरेक अपने कामों के अनुसार प्रतिफल पाये जो उसने शरीर में होकर किये हैं, चाहे भला हो या बुरा।
और ध्यान दें कि केवल दो ही विभाग हैं, भला या बुरा। अपनी पहली पत्री में यूहन्ना कहता है, कि सब प्रकार की अधार्मिकता पाप है। जो कुछ भी धार्मिकता नहीं है, वह पापमय है। यह ऐसा है मानो किसी ने आपको कुटिल शब्द का वर्णन करने के लिये कहे। मैं इसे इस प्रकार करूंगा, मैं उन्हें एक सीधी रेखा दिखाऊंगा और कहूंगा कि जो कुछ भी उस रेखा से भिन्न है वह टेढ़ा है। हो सकता है यह एक अंश ही अलग हो या फिर नब्बे अंश परन्तु यह टेढ़ा है।
और धार्मिकता के साथ भी यही है। जो कुछ भी अधार्मिक है वह पापमय है। जो कुछ भी भला नहीं है वह बुरा है। बीच का कोई रास्ता नहीं है। यह शत्रु का धोखा है जिसे उसने कलीसिया पर थोपा है, "ठीक है, जो कुछ सही है मैं वह नहीं करता हूं लेकिन मैं सच में वह नहीं करता हूं जो बुरा है।" यह संभव नहीं है। या तो पहला या दूसरा ही हो सकता है।
यह मसीह का न्याय सिंहासन है। तब हम ख्रीष्ट विरोधी और उसके बलों के फेंके जाने के बारे में पढ़ते हैं। अब 1 यूहन्ना 4 में यूहन्ना तीन तरह से ख्रीष्टविरोधी के बारे में कहता हैः ख्रीष्टविरोधी की आत्मा, बहुत से ख्रीष्टविरोधी और ख्रीष्टविरोधी।
ख्रीष्टविरोधी की आत्मा वह आत्मा है जो बहुत से प्रत्येक ख्रीष्टविरोधी में होकर काम करता है।
दूसरी सदी ई. से ही बहुत से ख्रीष्टविरोधी रहे हैं। सबसे उल्लेखनीय में से एक बार कोच्बा था जिसने मसीह होने का दावा किया और रोमियों के विरुद्ध अंतिम विद्रोह में यहूदियों की अगुवाई की जिसे बुरी तरह कुचल दिया गया और संपूर्ण देश मार डाला गया या फिर गुलाम बना लिया गया। 17वीं सदी में शब्बाटाईड नामक एक और व्यक्ति था जिसने दावा किया कि वह मसीह है और कहा कि वह यहूदियों को मध्य पूर्व ले जायेगा और उन्हें उनके देश में बसायेगा, उसे तुर्कियों के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उसे इस्लाम धर्म में दीक्षित किया गया। तो यह बड़ी निराशाजनक थी। यहूदी इनसाईक्लोपीडिया चालीस झूठे नबियों के बारे में बताती है कि जो यीशु के समय से लेकर यहूदियों के पास आये हैं। यीशु ने कहा, बहुत से मेरे नाम से यह कहते हुए आयेंगे कि "मैं मसीह हूं," और बहुतों को भरमायेंगे। अतः बहुत से ख्रीष्टविरोधी और कलीसिया में बहुत से ख्रीष्टविरोधी हो सकते हैं, हमें इस बारे में और अधिक विशिष्ट होने की आवश्यकता नहीं है।
परन्तु ख्रीष्टविरोधी अब तक नहीं आया है। मैं व्यक्तिगत रूप से विश्वास करता हूं कि मानव इतिहास के रंगमंच पर उसकी छाया पड़ चुकी है, परन्तु वह अब तक प्रगट नहीं हुआ है। जो कुछ दुष्ट और शैतानी है उसका वह अंतिम अवतरण होगा। जब वह मानवता पर शासन करता है तो वह साढ़े तीन वर्षों तक करेगा, वह मानव इतिहास का सबसे बुरा दौर होगा। परमेश्वर इसकी अनुमति देगा क्योंकि वह मानव जाति से कहता है, "ठीक है तुमने अपना चुनाव कर लिया है। देखो, तुमने क्या चुना है, तुमने मुझे ठुकराया है, तुमने मेरे पुत्र को ठुकराया है। यह विकल्प है। स्वयं की सहायता कीजिये।"
क्या आपने कभी देखा है कि परमेश्वर कभी भी सिद्धांत मात्र नहीं सिखाता है। नहीं। आप कह सकते हैं, "परमेश्वर, मैंने सच में वह सिद्धांत सीख लिया है।" "यह ठीक है," परमेश्वर कहता है अब आईये यह देखें कि इसने आपके जीवन में काम किया है।" मानवता के बारे में यह सच होने जा रहा है। मानवता अब तक का सबसे भयावह सबक लेने जा रही है। देखो, पुंतियुस पीलातुस ने यहूदियों के सामने दो लोगों, यीशु और बरब्बा को लाया। बरब्बा एक अपराधी, एक हिंसक व्यक्ति, एक अलगाववादी था। उसने कहा, "मैं इनमें से किसे मुक्त करूं?" और उन्होंने कहा, "हमें बरब्बा दो और यीशु को क्रूस पर चढ़ाओ।" इस युग के अंत में मानव जाति भी कुछ ऐसा ही करेगी। वे कहेंगे, "हमें यह मसीह नहीं चाहिये, हमें अपनी पसंद का अगुवा चाहिये। यह होशियार, योग्यतापूर्ण और अलौकिक रूप से सामर्थी पुरुष, हमें वह चाहिये।" और आप जानते हैं, क्या हुआ, यहूदी लोगों ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने पीलातुस से यह भी कहा, "कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं है।" यहूदियों के लिये यह कहना बहुत अधिक आश्चर्य की बात है, और उन्नीस सदियों से उन पर कैसर का शासन था और उन पर बरब्बाओं का उनकी ओर से छूट मिलती थी। वास्तव में यह यहूदी इतिहास का सार है। यही बात मानवजाति के साथ भी होने जा रहा है। हमें वह सब मिलने वाला है जो हम मांगते हैं। वे जो यीशु का चुनाव करते हैं वे उसके शासन के अधीन होंगे। हम में से जो यीशु का इंकार करेंगे वे ख्रीष्टविरोधी के शासन के अधीन होंगे।
मुझे आगे जाना है। प्रकाशितवाक्य 19:19-21 ख्रीष्टविरोधी का फेंक दिया जाना। यहीं पर यीशु सफेद घोड़े पर स्वर्ग से प्रकट होगा। क्या आप विश्वास करते हैं कि स्वर्ग में घोड़े होते हैं? मैं विश्वास करता हूं। आप चाहे करें या न करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!
और उस पर एक सवार है, जो विश्वासयोग्य, और सत्य कहलाता है, और वह धर्म के साथ न्याय और लड़ाई करता है (पद 11)।
ध्यान दें, यीशु युद्ध करता है।
उसकी आंखें आग की ज्वाला हैंः और उसके सिर पर बहुत से राजमुकुट हैं, और उसका एक नाम लिखा है, जिसे उसके सिवा और कोई नहीं जानता।
और तब पद 15 में कहता हैः
और जाति जाति को मारने के लिये उसके मुंह से एक चोखी तलवार निकलती है, और वह लोहे का राजदंड लिये हुए उन पर राज्य करेगा, और वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के भयानक प्रकोप की जलजलाहट की मदिरा के कुंड में दाख रौंदेगा।
यह परमेश्वर के द्वारा अभिषिक्त शासक के रूप में दुष्टों का न्याय करने के लिये आने के बारे में है।
और तब वह थोड़ा आगे उसी अध्याय में कहता है, पद 19-21ः
फिर मैंने उस पशु......।
यह बहुत रोचक है, बाइबल की अंतिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में दो चरित्र हैं, दोनों एक दूसरे के विरोधी हैं। एक मेम्ना है और दूसरा पशु है। मेम्ना यीशु है और पशु ख्रीष्टविरोधी है। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में "मेम्ना" शब्द अठ्ठाईस बार आया है। ख्रीष्टविरोधी के संदर्भ में "पशु" शब्द तेईस बार आया है। यही पशु और मेम्ने के बीच का अंतिम समय का संघर्ष है। और आप जानते हैं कि कौन जीतेगा। मेम्ना, बिल्कुल सही। और यह हमारे लिये एक सबक है क्योंकि हम हिंसा से नहीं जीतते हैं, हम घृणा से नहीं जीतते हैं, हम कठोर होने के द्वारा नहीं जीतते हैं, हम यीशु के समान अपना जीवन दे देने के द्वारा जीतते हैं। आपको याद है प्रकाशितवाक्य के पांचवें अध्याय में यूहन्ना रो रहा था क्योंकि मुहरें खोलने के लिये कोई नहीं था? प्राचीनों में से एक ने कहा, "मत रो, कोई बात नहीं, यहूदा के गोत्र का सिंह सामर्थी हुआ है।" प्रियों, ध्यान रखें, कि यीशु अब भी यहूदा के गोत्र का सिंह है। देखो, हमें यहूदा से क्या नाम मिलता है? यहूदी। अतः वह अब भी यहूदी है। वह केवल तैंतीस वर्ष तक ही यहूदी नहीं बना। वह अब और अनंतता के लिये यहूदा के गोत्र के रूप में पहचाना जाता है। ध्यान रखें, जब आप यहूदियों के साथ मिल जाते हैं तो आप यीशु के भाईयों और बहनों के साथ मिलते हैं। आप सावधान रहें।
फिर मैंने उस पशु और पृथ्वी के राजाओं और उनकी सेनाओं को उस घोड़े के सवार, और उसकी सेना से लड़ने के लिये इकट्ठे देखा। और वह पशु और उसके साथ वह झूठा भविष्यद्वक्ता पकड़ा गया, जिसने उसके साम्हने ऐसे चिन्ह दिखाये थे, जिनके द्वारा उसने उनको भरमाया, जिन्होंने उस पशु की छाप ली थी, और जो उसकी मूरत की पूजा करते थे, ये दोनों जीते जी उस आग की झील में जो गन्धक से जलती है, डाले गये। और शेष लोग उस घोड़े के सवार की तलवार से जो उसके मुंह से निकलती थी, मार डाले गये, और सब पक्षी उनके मांस से तृप्त हो गये।
यह कचरा एकत्र करने का परमेश्वर की प्रणाली है। यह पक्षियां हैं। वे सब कुछ साफ कर देंगी। वे केवल साफ हड्डियां ही छोड़ेंगी। आप यहेजकेल में पाते हैं कि उनका उन हड्डियों को दफन करने का एक तरीका है, हम उसमें नहीं जायेंगे। परन्तु वह सब आगे की बात है।
अब, इन सब के बीच में इस्राएल, यहूदी लोग, उन्नीस सदियों के लिए इतिहास के केंद्र से विस्थापित किये गये थे वे इतिहास के केंद्र में वापस आ रहे हैं। मुझे नहीं मालूम कि आपने कभी ध्यान दिया है या नहीं, आज इस्राएल एक बहुत छोटा सा देश है। यह वेल्स से भी छोटा, न्यू हैम्पशायर से भी छोटा है, इसमें लगभग एक मिलियन यहूदी और एक मिलियन अन्य लोग रहते हैं। फिर भी यह प्रतिदिन, यहां तक कि न्यूजीलैंड में भी समाचार में बना रहता है। रूथ और मैंने देखा है कि इस्राएल के एक समाचार के बिना शायद ही कोई दिन बीतता है। आप जानते हैं, क्यों? क्योंकि इस्राएल युग के अंत में केंद्रीय स्थान पर वापस आ रहा है। अंत आने पर वे यहीं पर होंगे।
अब, रोमियों 11 एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रकाशन है। रोमियों 11:25-26। ये शब्द अन्यजातीय पृष्ठभूमि से आने वाले मसीहियों अर्थात गैर यहूदी लोगों के लिए पौलुस द्वारा संबोधित किये गये शब्द हैं। आप में से कितने लोग जानते हैं कि आप में से ज्यादातर अन्यजाति हैं। मैं एक अन्यजाति व्यक्ति हूं, वॉरेन एक अन्यजाति व्यक्ति है। रूथ एक यहूदिन है। लेकिन वह अल्पसंख्यक है। जो लोग मसीही नहीं हैं वे मूर्तिपूजक हैं लेकिन जो लोग यहूदी नहीं हैं वे अन्यजाति हैं। कुछ लोगों को यह समझना मुश्किल है। पौलुस अन्यजाति पृष्ठभूमि से आने वाले के लिए लिख रहा है और इस तरह से वह कहता है। रोमियों 11:25।
हे भाइयो, कहीं ऐसा न हो, कि तुम अपने आप को बुद्धिमान समझ लो, इसलिये मैं नहीं चाहता कि तुम इस भेद से (जो परमेश्वर ही जानता है) अनजान रहो,.....
अभिमानी नहीं बनो। खुद के बारे में जितना आपको सोचना चाहिए उससे अधिक मत सोचो। रहस्य क्या है?
जब तक अन्यजातियां पूरी रीति से प्रवेश न कर लें, तब तक इस्राएल का एक भाग ऐसा ही कठोर रहेगा।
ध्यान दें, यह भाग में सख्त होना है। पूरे यहूदी लोग कभी भी पूरी तरह से कठोर नहीं रहे हैं, हमेशा हर पीढ़ी में यहूदी रहे हैं जिन्होंने यीशु पर विश्वास किया। कभी कभी वे एक बहुत छोटे से अल्पसंख्यक थे। लेकिन इस्राएल की कठोरता हमेशा के लिये नहीं है लेकिन अब तक है। कब तक? जब अन्यजातियों की पूरी संख्या न आ जाये। जब तक कि कलीसिया अपना काम न करे और सभी राष्ट्रों के लिए राज्य का यह सुसमाचार प्रचार न करे। और इस बीच प्रभु ने अन्यजातीय फसल को एकत्र करना प्रारंभ कर दिया है। मैं अपने आप विश्वास करता हूं कि अब तक की सबसे बड़ी फसल आगे आने वाली है जिसे कलीसिया ने कभी देखा हो। मैं विश्वास करता हूं कि लाखों लोग परमेश्वर के राज्य में आने वाले हैं। लेकिन मन में रखें कि यह इस्राएल की बहाली के लिए तैयारी है।
और तब पद 26 में पौलुस आगे कहता हैः
और इस रीति से सारा इस्राएल उद्धार पायेगा।
इस्राएल एक मात्र राष्ट्र है जिसके बारे में बाइबल कहता है कि सारा राष्ट्र उद्धार पायेगा। यह नहीं कहता कि सारा न्यूजीलैंड, यह नहीं कहता कि सारा ब्रिटेन। यह नहीं कहता कि सारा अमेरिका, सारी रशिया, परन्तु सारा इस्राएल बचाया जायेगा।
दूसरी तरफ आपको मन में रखना है कि सारा इस्राएल का अर्थ वर्तमान समय में जीवित सारा इस्राएल नहीं है क्योंकि रोमियों 9:27 में पौलुस यशायाह का संदर्भ देता है। वह कहता हैः
और यशायाह इस्राएल के विषय में पुकारकर कहता है, कि चाहे इस्राएल की सन्तानों की गिनती समुद्र के बालू के बराबर हो, तौभी उनमें से थोड़े ही बचेंगे।
बचे हुए वे हैं जिन्हें परमेश्वर ने पहले से जान लिया है और अपने लिये चुन लिया है। अतः सारे यहूदी लोग नहीं जो इस समय इस्राएल में जीवित हैं परन्तु यह बचे हुओं के बारे में है जिन्हें परमेश्वर अपना बनाने के लिये महाक्लेश और परख में से होकर निकालेगा।
तब यीशु अन्यजाति देशों का न्याय करते हुए आयेगा। योएल 3:1-2 में इसका चित्रण दिया गया है। यह समझना हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है जो यहूदी नहीं हैं। योएल 3:1-2ः
क्योंकि सुनो, जिन दिनों में और जिस समय मैं (परमेश्वर कह रहा है) यहूदा और यरूशलेम वासियों को बंधुआई से लौटा ले आऊंगा।
दूसरे शब्दों में, इन दिनों जबकि हम जीवित हैं, जब परमेश्वर यहूदियों को सौ से अधिक देशों में से गुलामी से वापस उनके अपने देश ला रहा है, तो परमेश्वर कहता हैः
उस समय मैं सब जातियों को इकट्ठी करके यहोशापात की तराई में ले जाऊंगा.....
और इब्रानी में यहोशापात का अर्थ होता है, "प्रभु न्याय करता है।"
उस समय मैं सब जातियों को इकट्ठी करके यहोशापात की तराई में ले जाऊंगा, और वहां उनके साथ अपनी प्रजा अर्थात् अपने निज भाग इस्राएल के विषय में जिसे उन्होंने अन्यजातियों में तितर-बितर करके मेरे देश को बांट लिया है, उनसे मुकद्दमा लड़ूंगा।
यह अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसे हमें समझने की जरूरत है। परमेश्वर इस आधार पर जातियों का न्याय करने जा रहा है कि उन्होंने कैसे यहूदी लोगों से व्यवहार किया है। और विशेष रूप से वह एक बात के लिए उनका न्याय करने जा रहा है, कि कैसे उन्होंने उनके देश को विभाजित कर दिया है। विभाजन के लिये आधुनिक राजनीतिक शब्द क्या है? विभाजन। निश्चित रूप से राष्ट्रों ने यही किया है और अब भी यह करने की कोशिश में व्यस्त हैं। परमेश्वर उनसे क्रोधित है। हमें जो अपने देश से प्यार करते हैं, तत्काल प्रार्थना में रहने की जरूरत है कि हमारा राष्ट्र इस्राएल के लिए परमेश्वर की योजनाओं के खिलाफ गठबंधन न करे।
यह नहीं कहता कि वहां किसी भी यहूदी का न्याय होगा। मेरा व्यक्तिगत विचार यह है कि चूंकि यहूदी लोग पहले से ही स्वयं के न्याय, महाक्लेश से गुजर चुके होंगे। किसी ने सालों पहले विचार करने लायक कुछ कहा। "परमेश्वर प्रत्यक्ष रूप से यहूदियों को आशीर्वाद देता है, वह यहूदियों के माध्यम से अन्यजातियों को आशीर्वाद देता है, वह अन्यजातियों के माध्यम से यहूदियों का न्याय करता है।" मुझे लगता है कि बार बार समय और समय में इतिहास में ऐसा होता रहा है।
तो, इस्राएल महान क्लेश में अपने न्याय से गुजरेगा। उनका न्याय किया जाता, लेकिन फिर जिन राष्ट्रों ने उन्हें सताया है उनका न्याय किया जाएगा। मत्ती 25 में यीशु कहते हैं - मैं सोचता हूं कि उन पदों को पढ़ ही दूं क्योंकि इतना स्पष्ट है, कि यह नये नियम में योएल 3 है। मत्ती 25 के अंतिम पद, पद 31ः
जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आयेगा, और सब स्वर्गदूत उसके साथ आयेंगे, तो वह अपनी महिमा के सिंहासन पर विराजमान होगा....।
मत्ती 25:32 में भी यही दृश्य है।
और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जायेंगी, और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकरियों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा।
और यदि आपने उस अध्याय का अध्ययन किया है तो आपको विभाजन का आधार मिल जाएगा कि कैसे उन्होंने यीशु के भाइयों से व्यवहार किया है। तो, जातियों को पता करने की जरूरत है। हमें अपने राष्ट्र को सूचित रखने की जरूरत है। हमें बोलने और अपने देश को चेतावनी देने की जरूरत है। "जिस प्रकार आपने परमेश्वर के लोगों और इस्राएल के साथ व्यवहार किया है, उसी तरह आपका न्याय किया जायेगा।"
अब, इसके आगे, पृथ्वी पर मसीह के राज्य की स्थापना की जाएगी। जब कभी आप प्रभु की प्रार्थना करते हैं, जिसे अकसर आप करते हैं, जो आप नहीं समझ सकते, वह यह है कि आप पृथ्वी पर मसीह के राज्य की स्थापना के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। पहली याचिका है कि "तेरा राज्य आये।" यह अन्य सभी याचिकाओं पर तरजीह लेता है। जब आप प्रार्थना कर रहे हैं तो आप यीशु की वापसी और पृथ्वी पर उसके राज्य की स्थापना के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अब इसका वर्णन यशायाह 24:19 में किया गया है। आप देखें, बाइबल की भविष्यवाणियों का ज्ञान होना कितना महत्वपूर्ण है? यशायाह 24:19, एक प्रकार से यह, युग का अंत है। प्रकाशितवाक्य में कई बार दोहराया गया है। यह तस्वीर हैः
वह मतवाले की नाईं बहुत डगमगायेगी, और मचान की नाई डोले, वह अपने पाप के बोझ से दबकर गिरेगी और फिर न उठेगी।
यही पृथ्वी है, वह ग्रह, जिस पर हम रहते हैं।
उस समय ऐसा होगा कि यहोवा आकाश की सेना को आकाश में और पृथ्वी के राजाओं को पृथ्वी ही पर दंड देगा।
प्रभु दो राज्यों के साथ व्यवहार करेगाः आकाश में शैतान का राज्य और पृथ्वी पर मनुष्य का राज्य। वह उन सबको दंडित करेगा जो यीशु के एक व्यक्ति में उसके धर्मी शासन से मना करेंगे।
वे बंधुओं की नाईं गड्ढे में इकट्ठे किये जायेंगे और बन्दीगृह में बन्द किये जायेंगे और बहुत दिनों के बाद उनकी सुधि ली जायेगी।
अब मुझे यह पद पसंद है, यह अंत हैः
तब चन्द्रमा संकुचित हो जायेगा और सूर्य लज्जित होगा, क्योंकि सेनाओं का यहोवा सिय्योन पर्वत पर और यरूशलेम में अपनी प्रजा के पुरनियों के साम्हने प्रताप के साथ राज्य करेगा।
प्रभु का राज्य उसकी राजधानी जो कि यरूशलेम है, में फिर से स्थापित किया जाएगा। क्यों सूरज लज्जित हो और चंद्रमा का अपमान हो? मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसी बात है जिसका मुझे उत्तर देना चाहिये। लूका 9:26 यीशु की वापसी का एक वर्णन है। लूका 9:26, यीशु ने कहाः
जो कोई मुझ से और मेरी बातों से लजायेगा, मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्वर्गदूतों की, महिमा सहित आयेगा, तो उससे लजायेगा।
बस उस बारे में सोचिये। यीशु अपनी ही महिमा, पिता की महिमा और पवित्र स्वर्गदूतों की महिमा में आ रहा है। उस महिमा की प्रतिभा कुछ ऐसा है जिसकी हम कल्पना भी नहीं शुरू कर सकते हैं और फिर भी यह हमारी आंखों को चोट नहीं देगा। लेकिन तब सूर्य और चंद्रमा को पीछे हटना और कहना पड़ेगा कि "जिस प्रकाश का हम प्रस्ताव देते हैं उसकी यीशु के साथ आने वाले प्रकाश से कोई तुलना नहीं है।" इसीलिये वे शर्मिंदा हो जाएंगे।
मुझे जल्दी से आगे जाना है और मैं आपको संदर्भ दे दूंगा, वचन निकालने के लिये मेरे पास समय नहीं है।
अगली बात जो होगी वह यह है कि यीशु एक हजार साल के लिए अपने राज्य को स्थापित करेगा। बाइबल का कहना है, एक हजार साल, एक दिन के बराबर है। इसलिए, यह परमेश्वर की गणना में एक दिन है।
तब शैतान को उसकी कैद से कुछ समय के लिये छोड़ दिया जायेगा और वह बाहर जाकर देशों में विद्रोह फैलायेगा। प्रभु हस्तक्षेप करेगा और देशों पर अंतिम न्याय लायेगा और ख्रीष्टविरोधी और झूठे नबी के साथ शैतान को आग की झील में डाल दिया जायेगा जो पहले से वहां हैं। वर्तमान स्वर्ग और पृथ्वी समाप्त हो जायेंगी और नया आकाश और नयी पृथ्वी प्रकट होगी। शेष सभी मृतक श्वेत सिंहासन के सामने न्याय के लिये खड़े होंगे।
अब कल, यदि परमेश्वर सहायता करे और उसकी इच्छा हो और हम जीवित हों, तो हम परमेश्वर के अनंत न्याय पर विचार करेंगे। परमेश्वर आपको आशीष दे।
कोड: MV-4167-100-HIN









