पवित्र आत्मा प्राप्त करें

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1986
Last Updated: अगस्त 2026
Read Time: 39
डेरेक प्रिंस के प्रवचन "पवित्र आत्मा प्राप्त करें" को खोजें, जहां वे परिवर्तन के समय पवित्र आत्मा प्राप्त करने और उसके बाद पवित्र आत्मा में बपतिस्मा के बीच अंतर करते हैं। वे इन अनुभवों के गहरे प्रभाव को ईसाइयों के लिए बाइबिल सिद्धांतों के आधार पर जोर देते हैं, जो 'आध्यात्मिक उपहारों का अभ्यास' श्रृंखला के भाग 1 में है।
Transcript
एक बार फिर, ''पवित्र आत्मा प्राप्त करें'' शीर्षक से। यह संपूर्ण नया नियम का केंद्रीय विषय है। यह एक ऐसा विषय है जिसने पूरी तरह हर मसीही को अत्ंयत चिंतित किया है हर मसीही से पवित्र आत्मा प्राप्त करने की आशा की जाती है। दुर्भाग्य से कलीसिया के ही भीतर,, विशेष रूप से, क्या हम कहें, कलीसिया का इव्हेंजलिकल, पेंटिकोस्टल, कैरिस्मैटिक विभाग - इनमें इस बात के प्रति बहुत बड़ा भ्रम और नासमझी है कि पवित्रात्मा प्राप्त करने का अर्थ क्या होता है। उदाहरण के लिए, आपके अच्छे बैपटिस्ट कहेंगे, ''हाँ, मैं ने तब पवित्रात्मा पाया था जब नया जन्म पाया था। प्राप्त करने के लिए अधिक कुछ नहीं है।'' पेंटेकोस्टल कहेंगे, '' नहीं, जब आप ने नया जन्म पाया था तब आपको बपतिस्मा नहीं मिला था।'' आपको तब तक पवित्रात्मा नहीं मिलता है जब तक कि आपको आत्मा में बपतिस्मा नहीं मिल जाता और अन्य भाषा में बात नहीं करते। और वे पाने पर बल देते हैं वरना एक दूसरे के साथ नाराज हो जाते हैं।
अब जैसा कि अधिकांश मामलों में सच्चे मसीही बाइबल के आधार पर असहमत होते हैं, सच यह है कि उन में से हर एक कुछ एक बातों में सही हैं और कुछ एक बातों में गलत। और मैं विश्वास करता हूँ कि इस भ्रम को दूर करने में मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ। विषय की सच्चाई यह है कि नया नियम दो भिन्न मार्गों के विषय में बात करता है, जिसमें लोग पवित्रात्मा प्राप्त करते हैं। जब हम इन दो मार्गों में भेद करते हैं तो तो फिर भ्रम नहीं रह जाता है। दो मार्गों को परिभाषित करने के लिये मै नया नियम से दो ऐतिहासिक स्थितियों का उपयोग करने ज रहा हूँ, उन्हें परिभाषित करने और उनके मध्य भेद करने के लिये।
मैं दो रविवारों, मसीही कलीसिया के लिये अति महत्वपूर्ण दो रविवारों का संदर्भ बताने जा रहा हूँ। पहले को मैं पुनरुत्थान दिवस और दूसरे को जो सात सप्ताहों के बाद आया, मैं पेंटेकोस्टल रविवार कहता हूँ। अब उन दोनों रविवारों को विश्वासियों ने पवित्रात्मा पाने का अनुभव किया। परन्तु वह भिन्न था। और जब हम प्रत्येक अनुभव की प्रकृति देख सकते हैं तो हम समझ सकते हैं कि हम इससे व्यक्तिगत संबंध में कहाँ हैं। क्या मैं ने पवित्रात्मा पाया है? पवित्रात्मा पाने में क्या शामिल है?
इसलिये मैं, सबसे पहले, पुनरुत्थान रविवार का विवरण पढ़ना चाहता हूँ जब पहली बार यीशु अपने शिष्यों के समूह को दिखाई दिया जैसा कि यूहन्ना 20 में दर्ज है। यूहन्ना 20ः19-22ः
उसी दिन जो सप्ताह का पहिला दिन था, ...
निश्चय ही आप जानते हैं कि सप्ताह का पहला दिन वह है जिसे हम रविवार कहते हैं। सब्त सप्ताह का सातवाँ दिन होता है, रविवार एक सप्ताह का प्रारंभ होता है। इब्रानी में यह योम रेशोन, प्रथम दिन कहलाता है। तो इब्रानी भाषा सप्ताह के दिनों के लिये अपने शीर्षकों में बाइबल के प्रति कहीं अधिक ईमानदार है। दुःखद है कि अंग्रेजी में और अधिकांश यूरोपीय भाषाओं में हमारे सप्ताह के दिनों के नाम अन्यजातीय देवताओं के नामों पर रखे गये हैं। जैसे वेडनेसडे (बुधवार) वोडेनडे है। थर्स डे थोर्सडे है। रविवार सूर्य का दिन है,, आप समझे? यह एक दुखद तथ्य है कि जिस रीति से हम सप्ताह के दिनों को परिभाषित करते हैं उस के अनुसार हम बहुत ही अन्यजातीय हैं। जबकि इब्रानी में यह दिन एक, दिन दो, दिन तीन, दिन चार, दिन पाँच दिन छः है। तब दिन सात सब्त है, , और तब रविवार योम रेशोन है। उदाहरण के लिये यदि आप जीते हैं, जैसा हम यरूशलेम में जीते हैं, तो सप्ताह का व्यस्ततम दिन रविवार है। सब कुछ ठहर सा जाता है। सब्त में वे आराम कर रहे होते हैं और तब हर कोई सप्ताह के प्रथम दिन की तैयारी करते हैं और इस्राएल में विश्वासियों की अधिकांश या बहुत सी सभायें शनिवार को आराधना करती हैं, क्योंकि रविवार काम करने का दिन है। आप समझे? मैं इसे यूँहीं कह रहा हूँ इसका कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं हैं!
तो आईए वापस पद 19 पर चलें।
उसी दिन जो सप्ताह का पहला दिन था संध्या के समय जब वहाँ के द्वार जहाँ चेले थे यहूदियों के डर के मारे बन्द थे। तब यीशु आया और बीच में खड़े होकर उनसे कहा, ''तुम्हें शान्ति मिले।'' और यह कहकर उसने अपना हाथ और पँजा उनको दिखाए।
उसने ऐसा क्यों किया? उन्हें यह जताने के लिये वे उसी देह को देख रहे हैं जिसे उन्होंने क्रूस पर छिदा हुआ देखा था। महिमामय रीति से रूपान्तरित परन्तु अब भी समान देह।
तब चेले प्रभु को देख कर आनन्दित हुए। यीशु ने फिर उनसे कहा, ''तुम्हें शान्ति मिले, जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।'' यह कह कर उसने फूँका और उनसे कहा, ''पवित्र आत्मा लो।''
अब मैं उस अन्तिम पद पर टिप्पणी करना चाहूँगा जिसे मैंने पढ़ा। सामान्य भाषा में फूँका शब्द के अनुवाद के लिये जो शब्द उपयोग किया गया है वह वही शब्द है जो सँगीत वादक बाँसुरी से सँगीत निकालने के लिये फूँकता है। मेरे लिये सलाह यह नहीं है कि यीशु दूर खड़ा हुआ और सामुहिक रूप से उन पर फूँका परन्तु उसने उनमें से प्रत्येक पर फूँका और जब उसने यह कहा, ''पवित्र आत्मा लो''।
यूनानी भाषा ''काल'' के विषय में बहुत संवेदनशील है। आदेशात्मक के एक से अधिक काल होते हैं और यह काल विशेष सूचित करता है कि जब उसने वचन कहे, तब उन्हें प्राप्त करना था। तो उस समय उन शिष्यों में से प्रत्येक ने पवित्र आत्मा प्राप्त किया। इस विषय में कोई सवाल नहीं उठता।
उसका निहितार्थ क्या था? मेरा मानना यह है कि उस बिन्दु पर वे पुराना नियम के उद्धार से नया नियम के उद्धार में पहुँच गए। आप समझे? पुराना नियम में उद्धार पाए हुए लोग थे। एक ऐसे बलिदान पर विश्वास करने के द्वारा उन्होंने उद्धार पाया था जो अब तक चढ़ाया नहीं गया था। परन्तु भविष्यद्वाणियों और संकेतों के द्वारा प्रतिज्ञा की गई थी, तो उनके विश्वास ने आगे आनेवाली किसी बात को देखा जो अभी अपूर्ण थी। परन्तु नया नियम में हम बलिदान में, क्रूस पर यीशु के बलिदान में, विश्वास के द्वारा बचाए जाते हैं, जो कि ऐतिहासिक रूप से पूर्ण हो चुका है। जब यीशु की मृत्यु हुई तो उसने कहा, ''पूरा हुआ।'' हम एक पूर्ण हो चुके कार्य की ओर मुड़कर देखते हैं।
अब नया नियम के उद्धार का अनुभव करने के लिये पौलुस कहता है, कि दो बातें आवश्यक हैं। रोमियों 10ः9:
कि यदि तू अपने मुँह से यीशु को प्रभु जान कर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया तो तू निश्चय उद्धार पाएगा।
तो नया नियम के उद्धार के लिये दो शर्तें हैं। आप यीशु को प्रभु के रूप में अंगीकार कीजिए और आप विश्वास कीजिए कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया है। ठीक है? उन शिष्यों ने यीशु को पहले ही प्रभु मान लिया था, परन्तु यह पहला क्षण था जब परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया था। उन्होंने पुराना नियम के युग को पार कर नया नियम के युग में प्रवेश किया था और यह एक स्वरूप है और उनके साथ यह पुनरूत्थित यीशु को आमने-सामने देखने और उससे फूँकी गई आत्मा प्राप्त करने के द्वारा हुआ।
अब आत्मा के लिये यूनानी भाषा में शब्द ''न्यूमा'' है, जो कि हवा और श्वास के लिये भी प्रयुक्त होता है। तो जब उसने उन पर फूँका और कहा, ''पवित्र आत्मा लो'' तो वह कह रहा था, कि पवित्र श्वास प्राप्त करो। उनके मध्य यह व्यक्ति से व्यक्ति तक सीधा लेन-देन था। वे नई सृष्टि के भाग बने। आपका मन प्रथम सृष्टि से पीछे की ओर जाता है। जब परमेश्वर ने बगीचे में मिट्टी से एक बनाया ताकि उसे एक जीवित प्राणी बनाएँ उसने क्या किया? उसने उसमें जीवन का श्वास फूँका और वह सृजित हो गया, वह एक जीवित प्राणी बन गया। नई सृष्टि इसी रीति को अपनाती है। परन्तु यह बगीचे में परमेश्वर नहीं परन्तु पुनरूत्थित उद्धारकर्ता है जो मृत्यु में से होकर गुजरा है और कब्र से बाहर आया है और जो अपने शिष्यों में ऐसा जीवन फूँकता है जो पूरी तरह विजयी है। यह एक ऐसा जीवन है जिसने पाप और शैतान और मृत्यु और कब्र पर विजय पाया है। यह पुनरूत्थित उद्धारकर्ता का श्वास था।
मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि यह हर किसी के लिये एक स्वरूप है जिन्हें नए उद्धार में प्रवेश करना है। मैं नहीं मानता कि बिना यीशु से मुलाकात किए आप बचाए जा सकते हैं। मेरा तात्पर्य यह नहीं है कि जैसा चेलों ने यीशु को देखा वैसा आप भी देखें, परन्तु मैं विश्वास नहीं करता कि यीशु के अलावा यीशु मसीह की सच्ची कलीसिया में आने का और कोई मार्ग है। उसने कहा, ''द्वार मैं हूँ, मेरे द्वारा यदि कोई प्रवेश करे तो वह उद्धार पाएगा।'' तो मैं मानता हूँ कि यह प्रत्येक व्यक्ति के लिये नया जन्म की एक रीति है। हमें यीशु से मुलाकात करना है। केवल एक सिद्धान्त पर विश्वास करना या कलीसिया में शामिल होना ही नहीं, परन्तु पुनरूत्थित मसीह के साथ एक व्यक्तिगत मुलाकात हो और उससे परमेश्वर की श्वास प्राप्त करें जो कि पवित्र आत्मा है और नई सृष्टि बनें। हम मृत्यु से जीवन की ओर जाते हैं।
मैं स्मरण करता हूँ, जब मैंने विश्वयुद्ध द्वितीय में ब्रिटिश सेना में सेना के बैरक कक्ष में यीशु से - दृश्य रूप से नहीं - आमने-सामने मुलाकात किया था। मुझे उद्धार की कोई सैद्धान्तिक जानकारी नहीं थी। मैं नहीं कह सकता था कि मैंने नया जन्म पाया है, मुझे नहीं मालूम था कि उद्धार पाने के लिये मुझे क्या करना था, परन्तु मेरा विश्वास कीजिए मैं बचाया गया। मैंने बाद में सिद्धान्त पाया परन्तु मैं यीशु से मुलाकात कर लिया था। प्रिय मित्रों, मैं आपको इतना बताना चाहता हूँ कि यह नहीं हो सकता कि आप यीशु से मिलें और न बदलें। आप एक कलीसिया में सम्मिलित हो सकते हैं और बिना बदले रह सकते हैं। अपने सिर से आप हर प्रकार की बातों पर विश्वास कर सकते हैं और बिना परिवर्ति त हुए रह सकते हैं। परन्तु जब आप पुनरूत्थित मसीह से मिलते हैं तो यह रूपान्तरित करनेवाला होता है और यह स्थायी होता है। यह 45 साल पहले की बात है, यह परख के समय बना रहा। मेरे लिये उसमें कुछ भी सैद्धान्तिक नहीं था। वास्तव में उसमें शिष्यों के लिये नहीं था। उनमें त्वरित धर्मशास्त्रीय प्रकाशन नहीं था। उन्होंने यीशु से मुलाकात किया और पवित्र आत्मा पाया। ईश्वरीय अनन्त पुनरूत्थान जीवन। अविनाशी जीवन। जीवन जो अपराजय है। इसके विषय में बाद में यूहन्ना कहता है, ''जो कोई परमेश्वर से जन्मा है, वह संसार पर जय पाता है।'' अपने में वह जीवन रखते हुए आप पराजित नहीं किये जा सकते है, वह अपराजय है। उसने सारी दुष्टता को जीत लिया है। वह सर्वोच्च है। वह अद्भुत है।
अब इस बिन्दु पर मैं अपनी रूपरेखा में से पढ़ता हूँ। इस दौरान् शिष्यों ने ईश्वरीय अनन्त पुनरूत्थान जीवन प्राप्त किया, परन्तु उन्हें अब भी सेवा के लिये दिशा निर्देश चाहिए था। बहुत दिन नहीं हुआ था जब पतरस पुनः मछली पकड़ने चला गया था। उसे अब भी नहीं मालूम था कि उसके लिये परमेश्वर की मँजिल क्या है और उन्होंने यरूशलेम के नगर पर कोई प्रभाव नहीं डाला। यरूशलेम वैसा ही रहा। वे प्रतिदिन मन्दिर में परमेश्वर की स्तुति और धन्यवाद करते थे परन्तु इससे यरूशलेम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। और यीशु ने इस अनुभव के बाद पुनरूत्थान रविवार और स्वर्गारोहण समय के दौरान् कहा था। यीशु ने उनसे कहा, ''और अधिक प्राप्त करना है, यह मत सोचो कि तुम्हें सब कुछ मिल गया है।'' जब मैं ऐसे लोगों से मिलता हूँ, जो मुझ से कहते हैं ''जब मैं बचाया गया तो वह सब कुछ मुझे मिल गया।'' मैं कहता हूँ, ''यदि आपको मिल गया है, तो मुझे दिखाओ। मैं वह देखना चाहता हूँ, वह कहाँ है?'' यह दिखना चाहिए।
मैं दो भाग पढ़ना चाहता हूँ जिसमें यीशु ने बहुत स्पष्ट किया कि नया जन्म के द्वारा उन्हें जो कुछ मिला था, यद्यपि वह अद्भुत था परन्तु उन्हें अब भी बहुत कुछ प्राप्त करना था। लूका 24ः48-49। और इस बात को जान लें कि ये वचन उसके स्वर्गारोहण के कुछ ही समय बाद कह गए हैं, मानो उसके पुनरूत्थान के चालीस दिन बाद।
''तुम इन सब बातों के गवाह हो (वह शिष्यों से बात कर रहा है) और देखो, जिसकी प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है मैं उसको तुम पर उतारूँगा और जब तक स्वर्ग से सामथ्र्य न पाओ, तब तक तुम इसी नगर में ठहरे रहो।''
तो उसने कहा कि और आना है। पिता की प्रतिज्ञा को तुमने अभी तक प्राप्त नहीं किया। परन्तु जब तुम उसे प्राप्त करोगे तो मेरे गवाह होने के लिये तुम सामथ्र्य पाओगे।
और तब पुनः प्रेरितों 1ः4-5 में वचन कहता है:
''और उनसे मिलकर उन्हें आज्ञा दी कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता के प्रतिज्ञा की पूरे होने की बाट जोहते रहो जिसकी चर्चा तुम मुझसे सुन चुके हो।''
और तब वह व्याख्या करता है, कि पिता की प्रतिज्ञा क्या है:
''परन्तु यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।''
यही पिता की प्रतिज्ञा है। किसी ने हिसाब लगाया है कि बाइबल में परमेश्वर की सात हजार प्रतिज्ञायें हैं। परन्तु यह प्रतिज्ञा अपने बच्चों के लिये पिता की प्रतिज्ञा है। ''तुम पवित्र आत्मा से बपतिस्मा पाओगे।''
और तब पद 8 में उसने प्रतिज्ञा की व्याख्या किया। उसने कहा:
''परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा, तब तुम सामथ्र्य पाओगे और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।''
तो यही पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के प्रतिज्ञा है। और उद्देश्य: गवाह होने के लिये सामथ्र्य पाना। यह अब तक नहीं हुआ था। यह पुनरूत्थान रविवार अनुभव के लगभग चालीस दिनों के बाद था जहाँ उन्होंने नया जन्म में पवित्र आत्मा पाया था। परन्तु यीशु ने कहा, एक और अनुभव आ रहा है जिसमें तुम मेरे गवाह होने के लिये सामथ्र्य पाओगे। और प्रत्येक पृष्ठभूमि से बाइबल के लगभग सभी टीकाकार सहमत हैं कि दूसरी प्रतिज्ञा पिन्तेकुस्त के दिन पूरी हुई।
तो अब हम प्रेरितों के काम 2 निकालते हैं और हम कुछ पद पढ़ते हैं जो प्रतिज्ञा की पूर्ति की वर्णन करती है। सबसे पहले, हम अध्याय 2 के प्रथम चार पद पढ़ेंगे।
''जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। एकाएक आकाश से बड़ी आन्धी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहाँ वे बैठे थे, गूँज गया। और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। वे सब पवित्र आत्मा से भर गए, और जिस प्रकार आत्मा उन्हें बोलने की सामथ्र्य दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।''
अब यह प्रतिज्ञा की पूर्ति है। मैं आपको इस अनुभव के अगले तीन चरण बताना चाहता हूँ। सबसे पहले, पवित्र आत्मा एक शक्तिशाली आन्धी की तरह उतरा और घर में भर गया जहाँ वे बैठे थे। ध्यान दें, कि शाब्दिक रूप से बाप्टाईज़ शब्द का अर्थ डुबाना होता है। यह एक निर्विवाद भाषाई तथ्य है। तो हर बपतिस्मा डुबाना होना चाहिए। जल में बपतिस्मा पानी में डूबना है। परन्तु पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पवित्र आत्मा में डूबना है। अब देखें, पानी के बपतिस्मा में आप पानी के भीतर जाते हैं और उससे बाहर आते हैं। परन्तु पवित्र आत्मा के बपतिस्मा में पवित्र आत्मा आप पर उतरता है और आपको ऊपर से डुबाता है। आप स्वीमिंग पुल में उतरने, बपतिस्मा पाने या नियाग्रा जलप्रपात के नीचे चलने से तुलना कर सकते हैं। उनमें से प्रत्येक डूबना है। परन्तु दूसरा, ऊपर से डुबाना है।
मुझे याद आता है, जब मैंने पहली बार नियाग्रा जलप्रपात देखा था, आप उसके नीचे बिना डूबे आधा सेकेण्ड भी खड़े नहीं रह सकते हैं। परन्तु यह एक ऐसा डूब नहीं है जिसमें आप भीतर जाते हैं परन्तु यह एक डूब है, जिसमें वह ऊपर से आप पर आता है। और इस प्रकार उस उपरौठी कोठरी में उपस्थित शिष्यों में से हर एक उस बिन्दु पर पवित्र आत्मा में डुबाया गया जो कि ऊपर से उतरा। वचन कहता है, कि वह उस स्थान पर भर गया जहाँ वे बैठे थे, तो वे पवित्र आत्मा में पूरी तरह भीग गए - चरण एक।
चरण दो, वचन कहता है, कि वे सब पवित्र आत्मा से भर गए। प्रत्येक ने भरे जाने तक पवित्र आत्मा पाया।
और चरण तीन है जिसे मैं छलकना कहता हूँ। पवित्र आत्मा ने उन्हें जैसी सामथ्र्य दी थी उन्होंने नई भाषा में बात करना प्रारंभ किया। मत्ती 12ः34 में यीशु यह कहता हैः
''क्योंकि जो मन में भरा है, वह मुँह पर आता है।''
दूसरे शब्दों में जब आपका हृदय छलकने पर हो तो यह छलकना आपके मुँह की बातचीत के द्वारा होता है। तो यह धर्मशास्त्र सम्मत है। जब वे भर गए और अधिक थाम नहीं सके तो वे छलक उठे। जैसा आत्मा ने उन्हें बोलने को दिया वैसा उन्होंने बोलना प्रारंभ किया। वे अनुभव के तीन चरण हैं। ऊपर से डुबाना, भरना और उमड़ना।
अब सैद्धान्तिक रूप से आप किसी भी बिन्दु पर रोक सकते हैं। हो सकता है वे डुबाए गए हों परन्तु भरे हुये नहीं थे। या हो सकता है वे डुबाए गए हों और भरे हुए हों, परन्तु उमड़ नहीं रहे हों। परन्तु मेरा प्रश्न यह है कि हम क्यों उत्तम से कम पर समझौता कर लें? मैं अक्सर कैथलिकों को प्रचार करता हूँ और जब मैं ऐसा करता हूँ मैं अक्सर उन्हें नया नियम में से उनके दो पसन्दीता चरित्र स्मरण दिलाता हूँ - मरियम और पतरस - दोनों ने इसे उस रीति से प्राप्त किया। मैं उनसे कहता हूँ, ''यदि उन्होंने इस रीति से प्राप्त किया, तो आपको क्यों किसी और रीति से प्राप्त करना चाहिए?'' जब मैं इस प्रकार कहता हूँ, तो मैंने सैकड़ों कैथलिकों को कुछ ही क्षणों में पवित्र आत्मा पाते हुए देखा है।
अब मुझे इस दूसरे अनुभव पर अपनी टीका पढ़ने दीजिए। ''इन शिष्यों ने अब इस अलौकिक सामथ्र्य को प्राप्त किया।'' आइ ए, इन शब्दों पर जोर देते हैं। यह प्रकट हुआ। हर कोई जानता था कि यह हुआ है। यह एक भीतरी अनुभव मात्र नहीं था। यह अलौकिक था और यह सामथ्र्य थी। उन्होंने गवाही देने के लिये साहस प्राप्त किया जो उनके पास पहले नहीं था। उन्होंने नया जन्म पाया था परन्तु उनमें गवाही देने की साहस नहीं था। उन्होंने धर्मशास्त्र में अन्तर्दृष्टि पाई। अगले कुछ ही पलों में बिना किसी अनुक्रमाणिका के, बिना किसी नोट्स के पतरस खड़ा हुआ और कहा, ''योएल भविष्यद्वक्ता ने यह भविष्यद्वाणी की थी।'' एक घण्टा पहले वह यह नहीं कह सकता था। उसके पास अन्तर्दृष्टि नहीं थी। तुरन्त ही धर्मशास्त्र उनके लिये एक नई रीति से जीवन्त बन गया। और तीसरी बात वे प्रेरितीय कार्य के लिये भेजे गए। पिन्तेकुस्त के बाद पतरस ने कभी मछली पकड़ने जाने के बारे में बात नहीं किया और अन्ततः संपूर्ण यरूशलेम में प्रभाव महसूस किया। कुछ ही घण्टों में यरूशलेम में हर कोई जान गया कि कुछ अनोखी बात घटी है।
अब जब वे नया जन्म प्राप्त थे तो ऐसा नहीं हुआ था। परन्तु जब उन्होंने पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया तो यह हुआ। आप में से कितने लोग अनुभव से जानते हैं कि यह बहुत समय तक छुपा हुआ नहीं रह सकता है? क्या आप ने कभी ध्यान दिया, इसने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया? किसी ने मेरे मित्र बाॅब ममफोर्ड से पूछा, ''बपतिस्मा का क्या प्रमाण है?'' उसने उत्तर दिया, ''संकट।''
अब यहाँ नीचे इस छोटे से योग को देखिए। मैं दो रविवारों को आस-पास रखना चाहता हूँ। बायें हाथ पर पुनरूत्थान रविवार और दायें हाथ पर पिन्तेकुस्त रविवार। और आप देखें इसमें तीन अन्तर हैं। मेरे मूल अभिलेख में नीचे जो आश्चर्यसूचक चिन्हें है वह यहाँ ऊपर है परन्तु कोई बात नहीं। पुनरूत्थान रविवार, पुनर्जीवित मसीह, पिन्तेकुस्त रविवार, ऊपर उठाया गया महिमामय मसीह। पुनरूत्थान रविवार, फूँकी गई आत्मा, पिन्तेकुस्त रविवार, उण्डेली गई आत्मा। पुनरूत्थान रविवार, परिणाम जीवन था। पिन्तेकुस्त रविवार, परिणाम सामथ्र्य था। दोनों एक दूसरे का विरोध नहीं करते। यह दोनों में से चुनाव का प्रश्न नहीं हैं, दोनो ही परमेश्वर के सभी लोगों के लिये उसकी योजना है। परन्तु यह तथ्य कि आपके पास पुनरूत्थान रविवार का अनुभव है, इसका यह तात्पर्य नहीं कि आपको पिन्तेकुस्त रविवार के अनुभव की आवश्यक नहीं है। क्या यह आपके लिये स्पष्ट है? तो बापटिस्ट लोग जो कहते हैं, ''जब मैं बचाया गया, तो वह मुझे मिल गया था।'' वह सही है, परन्तु उसने पूरा प्राप्त नहीं किया। वास्तव में, सच कहूँ तो मैं नहीं सोचता कि हममें से अधिकांश ने पूरा पा लिया है। मैं सोचता हूँ कि हममें से अधिकांश को और अधिक पाना है। मैं आशा करता हूँ कि आपके लिये यह स्पष्ट है। मेरी बात कहूँ, तो जब मैंने उसे देखा और दोनों रविवारों को एक दूसरे के समकक्ष रखा, तो मुझे कोई समस्या नहीं थी - कि किसने पवित्र आत्मा पाया है, किसने पवित्र आत्मा नहीं पाया है। परमेश्वर का प्रत्येक नया जन्म प्राप्त सन्तान नए जीवन के रूप में पवित्र आत्मा पाया है। परन्तु प्रत्येक नया जन्म प्राप्त परमेश्वर की सन्तान को नया नियम के अनुसार पवित्र आत्मा बपतिस्मा पाने और गवाही देने के लिये अलौकिक सामथ्र्य पाने की आवश्यकता है। वे आपस में टकराते नहीं हैं, वे एक दूसरे में सही बैठते हैं।
अब हममें सही स्थान पर आश्चर्यसूचक चिन्ह लगाया है। पवित्र आत्मा लो। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि यह एक सिफारिश नहीं है, यह एक आज्ञा है। यीशु प्रायः सलाह नहीं देते हैं, वह आज्ञा देते हैं। यहाँ कुछ बहुत महत्वपूर्ण बात है। नया नियम में प्रेरितों के काम 2 अध्याय से आगे पवित्र आत्मा प्राप्त करना हमेशा पिन्तेकुस्त के दिन के अनुभव की ओर सँकेत करता है। ठीक है? यह नया नियम में प्रयोग की गई भाषा है। यह दूसरी बातों को किनारे नहीं करता है, परन्तु इसका अर्थ है, प्रेरितों के काम 2 अध्याय से आगे। जहाँ कहीं यह पवित्र आत्मा पाने के बारे में बात करता है, तो यह पिन्तेकुस्त रविवार के अनुभव के बारे में है।
आइ ए, जल्दी से तीसरे उदाहरण को देखें। प्रेरितों के काम 8, सामरिया में फिलिप्पुस के जाने और उनसे मसीह का प्रचार करने की बाद की घटनायें। प्रेरितों 8ः12 में वचन कहता है:
''परन्तु जब उन्होंने फिलिप्पुस की प्रतीति की... तो लोग क्या पुरुष क्या स्त्री बपतिस्मा लेने लगे।''
यीशु ने कहा, ''सारे जगत में जाओ और सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो कोई विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा।'' तो हमें यह जानना है कि उन सामरियों ने उद्धार पाया। उन्होंने विश्वास किया, उन्होंने बपतिस्मा लिया, परन्तु उनका अनुभव पूर्ण नहीं था और उन्हें फिलिप्पुस से अधिक कुछ नहीं मिला। अब हम पद 14 पढ़ते हैं:
''जब प्रेरितों ने जो यरूशलेम में थे सुना, कि सामरियों ने परमेश्वर का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहन्ना को उनके पास भेजा। और उन्होंने जाकर उनके लिये प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा पायें...।''
वे बचाए गए थे, परन्तु प्रेरितों ने उनके लिये प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा पाएँ। पुनरूत्थान रविवार का आनन्द नहीं परन्तु पिन्तेकुस्त रविवार का अनुभव। पद 16:
क्योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था।
ध्यान दें, कि जहाँ कहीं वचन पवित्र आत्मा के बपतिस्मा के विषय में बात करता है वहाँ वह हमेशा सूचित करता है कि पवित्र आत्मा ऊपर से उतरा है। वह उनमें से किसी पर नहीं उतरा था। वे केवल प्रभु यीशु के नाम से बपतिस्मा पाए थे। वे बचाए गए, बपतिस्मा प्राप्त विश्वासी थे परन्तु उन पर पवित्र आत्मा न उतरा था।
''तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया।''
ठीक है? वहाँ तीन बार हमें बताया जाता है कि इन बपतिस्मा प्राप्त विश्वासियों को पवित्र आत्मा पाने की आवश्यकता थी। पुनरूत्थान रविवार का अनुभव नहीं परन्तु पिन्तेकुस्त रविवार का अनुभव।
और तब प्रेरितों 10ः47 में कुरनेलियुस की घर की घटना। आपको याद है पतरस वहाँ गया और उन्हें यीशु की गवाही बताया और पवित्र आत्मा उतरा। उसने पतरस के सन्देश को बाधित किया और ये सारे अन्यजाति अन्यभाषाओं में बात करने लगे। और पतरस की टिप्पणी यह थी:
''क्या कोई जल की रोक कर सकता है कि ये बपतिस्मा न पाएं जिन्होंने हमारी नाई पवित्र आत्मा पाया हैं।''
वह इस तथ्य को सूचित कर रहा था कि उन्होंने उन्हें अन्यभाषाओं में बात करते सुना है। तो उन्होंने पिन्तेकुस्त रविवार की रीति पर पवित्र आत्मा पाया था।
और तब प्रेरितों के काम 19ः2 में जब पौलुस पहली बार इफिसुस आया वह कुछ शिष्यों से मिला। परन्तु उसने महसूस किया कि उनके अनुभव में कुछ कमी है। अतः उसने उनसे यह प्रश्न पूछा:
''क्या तुमने विश्वास करते समय पवित्र आत्मा पाया? उन्होंने उससे कहा, हमने तो पवित्र आत्मा की चर्चा भी नहीं सुनी।''
अब यदि हर किसी ने विश्वास करते समय स्वतः ही पवित्र आत्मा पाया होता, तो यह एक अर्थहीन प्रश्न होता। है कि नहीं? अतः वह नया जन्म पाने के बारे में बात नहीं कर रहा था, वह पिन्तेकुस्त रविवार के अनुभव के बारे में बात कर रहा था।
अब मैं बहुत व्यवहारिकता में आना चाहता हूँ। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कैसे प्राप्त करना है। निःसन्देह आप में से बहुतों ने प्राप्त किया है। मैं सोचता हूँ कि यह असंभव है कि इस प्रकार के एक समूह में आपमें से सबने पा लिया है। केवल मैं ही आपमें से उन लोगों के लिये नहीं कह रहा हूँ जिन्होंने नहीं पाया है - यद्यपि आप सबसे पहले मेरे मन में थे - परन्तु मैं आपको यह रीति के तौर पर ही बता रहा हूँ कि किस प्रकार पवित्र आत्मा प्राप्त करना है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं जानता हूँ कि यह ऐसा होता है। मैंने अनुभव में इसे सिद्ध किया है। मैं सिद्धान्त नहीं बता रहा हूँ। रूत और मैं जाम्बिया में अब से दो वर्ष पूर्व एक दल के साथ थे और वहाँ जाम्बिया के एक अन्दरूनी भाग में सात हजार अफ्रीकियों का समूह था। मैंने बहुत सावधानीपूर्वक और योजनाबद्ध तरीके से उन्हें क्रूस पर किया गया कार्य, श्राप से छुटकारा, दुष्टात्माओं से छुटकारा सिखाया - जो अफ्रीका में आवश्यक है। और तब चैथे रविवार को मैंने उन्हें पवित्र आत्मा पर शिक्षा तक पहुँचाया। मैंने उन्हें ठीक वही सिखाया जो मैं आपको सिखा रहा हूँ। तब मैंने कहा, ''अब मैं आपको सिखाना चाहता हूँ कि कैसे प्राप्त करना है।'' जब मैं ने उन्हें पाने के बिन्दु तक पहुँचाया, तो मैं ने कहा, ''अब से मैं नहीं चाहता हूँ कि आप अपनी भाषा में एक और शब्द कहें - केवल नई भाषा।'' लगभग एक मिनट तक निस्तब्धता छाई रही। और तब एक व्यक्ति नई भाषा में बात करने लगा और मैं सोचता हूँ कि अगले तीस सेकेण्ड के भीतर कम से कम चार हजार लोगों ने एक ही समय पर पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया।
यह एक मात्रा में नहीं। मैंने कई जगहों पर इसकी नकल देखी है। मैं कुछ समय पहले अस्टिंया में एक कैथलिक परिवार में था। कैथलिक पुरोहित ने मुझे आमन्त्रित किया कि लोगों को बपतिस्मा और अन्य भाषाओं में बात करने के बारे में बताऊँ। जब कैथलिक कलीसिया में पुरोहित आपको मौका दे रहे हैं तो आप चूक नहीं सकते हैं। मेरा मतलब था कि आप उसी प्रकार हैं मानो एलिय्याह भविष्यद्वक्ता हो। तो मैंने उन्हें वही बात बताई जो मैं आपको बता रहा हूँ। कलीसिया में लगभग नौ सौ लोग थे। जब मैंने कहा, आपमें से कितने लोग पाना चाहते हैं तो लगभग 500 लोग सामने आए। मैंने उन्हें सामान्य निर्देश दिए और वे अन्यभाषाओं में बात करते हुए चले गए और तब अन्यभाषाओं में गाते हुए। मैं आपको बताऊँगा कि मैं सोचता हूँ कि सुन्दर पत्थरों और संगमरमरों ने ऐसे शब्द सुने जो उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। कैसा अद्भुत दृश्य! पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाए हुए 500 नए लोग प्रभु की आराधना कर रहे हैं, अन्य भाषाओं में गीत गा रहे हैं। एक बार जब आप कैथलिकों को ढ़ीला छोड़ दें तो उन्हें रोकने वाला कोई नहीं हैं। आप नहीं बता सकते हैं कि वे कहां जाकर रूकेंगे। क्या यह सही है और क्या यह सही सिद्धान्त है? जब तक यह कैथलिक कलीसिया में अधिकारियों की ओर से आता है, यह सही है। इस पर कहने के लिये तो बहुत कुछ है, परन्तु यह समस्या भी उत्पन्न करती है।
अब मैं एक और बहुत महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूँ। पवित्र आत्मा में बपतिस्मा का अभिन्न छाप अन्यभाषा में बात करना है। कुछ लोग इसे प्रमाण कहते हैं। वास्तव में, मैं इसे बपतिस्मा की परिणिति कहता हूँ। यह डूब नहीं है, यह भरना नहीं है, परन्तु यह क्या है? यह छलकना है। अब आप उमड़ने में कमी को रोक सकते हैं। पौलुस इफिस्सियों और कुरिन्थियों दोनों में पवित्र आत्मा की छाप प्राप्त करने के विषय में बात करता है। एक छाप वह है जो किसी वस्तु पर लगाया जाता है। चाहे वह कुछ भी हो, एक पैकेट या और कुछ, यह उसे दृश्य रूप से चिन्हित करता है। यह अदृश्य नहीं है, यह कुछ ऐसा है, जो उसे अन्य सबसे अलग करता है। पवित्र आत्मा की छाप यही है। यह उन लोगों को बाकी सबसे अलग करता है। एक बार जब आपने पवित्र आत्मा पा लिया तो आप एक चिन्हित व्यक्ति बन जाते हैं। मनुष्यों द्वारा चिन्हित और शैतान के द्वारा भी चिन्हित और आगाह किया हुआ।
अब वह छाप जिसे मैं नया नियम में देखता हूँ - यह मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण है - अन्यभाषा पर बात कर रहा है। मैं ये चार टिप्पणियाँ करता हूँ, पहला, यह छाप था जिसे प्रेरितों ने प्राप्त किया था। उन्होंने लगभग दस दिनों तक विलम्ब किया परन्तु एक बार जब उन्होंने अन्यभाषा में बात किया तो फिर कभी विलम्ब नहीं किया और संयोग से, किसी ने भी उसके बाद कभी बपतिस्मा के लिये विलम्ब नहीं किया। यह विचार धर्मशास्त्र सम्मत नहीं है कि आपको हफ्तों, महीनों या वर्षों तक इन्तजार करना है। पिन्तेकुस्त के बाद कभी विलम्ब नहीं किया गया। एक बार मैं एक पिन्तेकुस्त कलीसिया में एक व्यक्ति से मिला, उसने कहा, ''मैं पिछले 25 वर्षों से बपतिस्मा का इन्तजार कर रहा हूँ।'' मैंने कहा, ''मैं आपकी समस्या जानता हूँ, आप चाहते हैं परमेश्वर सब कुछ करे।'' उसने कहा, ''हाँ, सही है, मैं सब कुछ परमेश्वर की ओर से चाहता हूँ।'' मैंने कहा, ''आपको यह कभी नहीं मिलेगा। परमेश्वर अपना काम करेगा, आपको अपना काम करना है।'' मैं आसानी से मान सकता हूँ कि बिना अन्यभाषा में बात किए वह अनुग्रह के पास गया। पिन्तेकुस्त के बाद विलम्ब करना धर्मशास्त्र सम्मत नहीं है।
यह छाप कि जिसे प्रेरितों ने प्राप्त किया था, यह छाप कि जिसे उन्होंने दूसरों में पहचाना था। महत्वपूर्ण उदाहरण कुरनेलियुस का घराना था। पतरस तो विश्वास भी नहीं करता था कि अन्यजाति मसीही बन सकते हैं। जैसा ही उसने उन्हें अन्यभाषाओं में बात करते सुना, उसने कहा, ''उन्हें बपतिस्मा दो, उन्होंने भी हमारे समान प्राप्त किया है।'' उसने फल का इन्तजार नहीं किया, उसने इस बात की जाँच नहीं की कि क्या उन्हें सिद्धान्त मालूम हैं; उसने कहा, उन्होंने प्राप्त किया है। उन्होंने कभी किसी छाप की माँग नहीं की। और नया नियम कोई अन्य वैकल्पिक छाप नहीं देता है।
अब इस बात पर वापस आते हुए कि किस प्रकार प्राप्त करना है। सबसे पहर्ले आइ ए लूका 11ः11-13 देखें। ये प्रोत्साहन के वचन हैं। यीशु बात कर रहे हैं, वह कहते हैं:
''तुम में से कौन पिता होगा, कि जब उसका पुत्र रोटी माँगे, तो उसे पत्थर दे; या मछली माँगे, तो मछली के बदले उसे सांप दे? या अण्डा माँगे तो उसे बिच्छू दे?''
सारांश में, वह कह रहा है कि एक पिता जिसका बच्चा उससे कुछ अच्छा माँग रहा है, तो वह कभी भी उसे कुछ बुरा नहीं देगा। तब वह इस बात को हमारे स्वर्गीय पिता पर लागू करता है। वह कहता है:
''अतः जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएँ देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने माँगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।''
आप देखें, मैंने मसीहियों को कहते सुना है, कि पवित्र आत्मा माँगना धर्मशास्त्र सम्मत नहीं है और वह वास्तव में माँगने की जिम्मेदारी हमें सौंपता है। इस बात को मन में ठान लें, यदि आप नया जन्म प्राप्त परमेश्वर की सन्तान हैं और आप पुत्र यीशु के द्वारा जो कि एकमात्र मार्ग है, अपने पिता परमेश्वर के पास आते हैं; यदि आप धर्मशास्त्र सम्मत और कोई भली वस्तु माँगते हैं तो कभी भी कुछ बुरा प्राप्त नहीं करेंगे। यह आपके लिये आश्वासन है। परन्तु माँगने की जिम्मेदारी आप पर डाली जाती है।
और तब माँगने के वास्तविक कदमों के लिये हम यूहन्ना 7 निकालें, और हम पद 37-39 पढ़ेंगे।
''पर्व के अन्तिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आए और पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्रशास्त्र में आया है, 'उसके हृदय में से...'''
परन्तु यह बहुत ही सभ्य है। बाइबल कहती है, ''उसके हृदय में से।'' एक छोटे लड़के के रूप में एंग्लीकन कलीसिया में बड़े होते हुए मुझे याद है, मैं हमेशा थोड़ा चकराया रहता, जब वे उस भाग को पढ़ते कि कलीसिया में आप हृदय से बढ़कर और बुरा क्या बोल सकते हैं। इस विषय की सच्चाई यह है कि यह यहीं से आता है। हममें एक क्षेत्र होता है, यूनानी भाषा में यह शब्द रोचक है। इसका अर्थ है, 'एक प्रकार का अवतल स्थान'। यह वही मूल शब्द है जिसका उपयोग स्वर्ग की तिजोरी के लिये किया गया है। तो विश्वासी की देह में एक ऐसा क्षेत्र होता है जो पवित्र आत्मा के लिये आरक्षित है। क्या आप यह जानते हैं? देखिए, बहुत अधिक आत्मिक मत बनिए। यह आपकी देह में पवित्र आत्मा को नीचे ले आता है। उसके उदर से बाहर। जब मैं ने सेना के बैरक कक्ष में बपतिस्मा पाया, बिना किसी और की उपस्थिति के मैंने इसे अपने उदर में महसूस किया। मैंने सोचा कि अब अगला क्या होने जा रहा है। तब मैंने जोर से परमेश्वर से कहा, ''यदि आप चाहते हैं कि मैं अन्यभाषा में बात करूँ तो मैं यह करने के लिये तैयार हूँ।'' मै महत्वाकाँक्षी नहीं था। जैसे ही मैंने यह कहा उसी क्षण वह आग मेरे उदर से मेरी छाती, मेरे गले तक जा पहुंचा। अगली बात जो मैंने जाना मेरे मुँह के पिछले हिस्से में रबर के टुकड़े के समान कुछ उछल रहा था। मैंने जाना कि यह मेरी ही जीभ थी। मैं ने अपना मुँह खोला और ये अजनबी आवाज़ बाहर आने लगे। परन्तु यह मेरे लिये हमेशा बहुत ही उज्वल रहा है, कि यह मेरे उदर में प्रारंभ हुआ और यीशु ने यही कहा।
''उसमें से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।''
क्या यह एक अनोखा रूपान्तरण नहीं है? हमारे पास एक प्यासा मनुष्य है, जिसके पास स्वयं के लिये पर्याप्त नहीं है। वह पवित्र आत्मा प्राप्त करता है और वह नदियों का सोता बन जाता है - नदी नहीं लेकिन जीवन के जल की नदियाँ। कैसा रूपान्तरण!
अब सुसमाचार के लेखक के द्वारा टिप्पणी की गई है।
परन्तु यीशु ने यह आत्मा के विषय में कहा, जो उस (यीशु) में विश्वास करनेवाले पाने पर थे।
ठीक है। विश्वासियों को पवित्र आत्मा पाना है।
क्योंकि पवित्र आत्मा अब तक दिया नहीं गया था। क्योंकि अब तक यीशु की महिमा नहीं हुई थी।
इस अर्थ में पवित्र आत्मा तब तक नहीं दिया जा सकता था, जब तक यीशु की महिमा न हो। कब यीशु की महिमा हुई? कब वह स्वर्ग पर चढ़ा और पिता की दाहिनी ओर अपना स्थान लिया?
यदि आप वापस प्रेरितों 2 पर जाएँ, कुछ समय के लिये संक्षिप्त रूप में, तो आप देखेंगे कि प्रेरितों 2ः32-33 में पतरस उन घटनाओं का सारांश बता रहा है जो पिन्तेकुस्त के दिन हुआ था।
इसी यीशु को परमेश्वर ने जिलाया जिसके हम सब गवाह हैं। इस प्रकार परमेश्वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्च पद पाकर और पिता से वह पवित्र आत्मा प्राप्त करके जिसकी प्रतिज्ञा की गई थी उसने यह उण्डेल दिया है, जो तुम देखते और सुनते हो।
तो महिमान्वित मसीह ने पिता से पवित्र आत्मा का वरदान पाया और उसे चेलों पर उण्डेल दिया। और ध्यान दें, परिणाम कुछ ऐसा था जिसे सुना और देखा जा सकता था। यह एक अदृश्य आन्तरिक अनुभव नहीं था, यह एक ऐसा अनुभव था जिसने उनकी देहों को प्रभावित किया और उनकी इन्द्रीयों को प्रभावित किया।
हम वापस यूहन्ना 7 पर आते हैं, कि किस प्रकार प्राप्त करना है। यहाँ मैंने चार सरल कदम देखे हैं। समस्या यह नहीं है कि यह जटिल है, समस्या यह है कि यह सरल है। लोग जो धर्मवैज्ञानिक मन रखते हैं और कठिनाई चाहते हैं, उन्हें यह कई बार विश्वास करने और अमल करने के लिये बहुत ही सरल लगता है। वे कदम क्या क्या हैं? पहला, प्यासा हो। यदि कोई प्यासा है। ठीक है। यह आपकी योग्यता है। जरूरी नहीं कि आप धर्मशास्त्र के पदों को दोहराएँ, यहाँ तक कि आपको अपनी दशमांश देने का हिसाब रखने की भी जरूरत नहीं है, परन्तु आपको प्यासा होना है। यह अनिवार्य है। जब लोग मेरे पास आते हैं तो मैं उनसे कहता हूँ, ''इसे याद रखो, बपतिस्मा उन लोगों के लिये है जो प्यासे हैं और छुटकारा उन लोगों के लिये है, जो निराश हैं।'' जब लोग छुटकारे के लिये मेरे पास आते हैं तो कई बार मैं उनसे कहता हूँ, '' देखो, मैं आपकी सहायता नहीं कर सकता हूँ। आप निराश नहीं हैं। जब आप निराश होंगे तब वापस आईए।''
हाँलाकि, अभी हम उस विषय में बात नहीं कर रहे हैं, हम पवित्र आत्मा पाने के बारे में बात कर रहे हैं। यह एक विशेष प्रकार के लोगों के लिये, प्यासे लोगों के लिये है। यह तब तक धर्मवैज्ञानिकों के लिये नहीं है जब तक वे प्यासे न हों। यह अति आत्मिक लोगों के लिये नहीं है, यह प्यासों के लिये है। तो यदि आप बहुत ही अपर्याप्त, बहुत कमजोर और सचमुच में उन बातों को उत्पन्न करने में असमर्थ पाते हैं जो परमेश्वर आपसे चाहता है, तो आप इसके लायक ठहरेंगे। यही आपकी योग्यता है। आप जानते हैं, आपके जीवन में जितना परमेश्वर है उससे अधिक आपको चाहिए। यही प्यासा होना है। परमेश्वर यही माँग करता है।
दूसरा, यीशु ने कहा, ''मेरे पास आओ।'' भाई डेविड डुप्लेसिस ने बहुत ही स्पष्ट रीति से कहा है। पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देनेवाला केवल एक ही है और उसका नाम यीशु है। मुझे सुनाई नहीं दिया। यीशु, हाँ, ठीक है। तो यदि आप पवित्र आत्मा में बपतिस्मा चाहते हैं, तो आपको बपतिस्मा देनेवाले के पास जाना चाहिए। कोई और स्थान नहीं है जहाँ आपको यह मिल सकता है। कोई मनुष्य पवित्र आत्मा में बपतिस्मा नहीं देता है, वे पानी में बपतिस्मा देते हैं, परन्तु केवल यीशु पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देता है। हमारे लिये सौभाग्यशाली है, कि यीशु ने कहा, ''वह जो मेरे पास आता है उसे मैं किसी रीति से न निकालूँगा।'' तो यदि आप आते हैं तो आप जानते हैं कि वह आपको स्वीकार करेगा।
अगली बात क्या है जो आपको करना है? यही वह स्थान है जहाँ यह बहुत ही व्यवहारिक और बहुत ही सरल बनता है जहाँ धार्मिक लोगों को समस्या होती है। आपको पीना है। आपकी इच्छा के विरुद्ध पीने के लिये कोई आप पर दबाव नहीं डाल सकता है। आप पुरानी कहावत जानते हैं। ''आप एक घोड़े को पानी के पास लेकर जा सकते हैं, किन्तु आप उसे पीने के लिये मजबूर नहीं कर सकते।'' कलीसिया के सदस्यों के बारे में भी यह सत्य है। कोई और आपको पीने के लिये बाध्य नहीं कर सकता है। यह आपकी इच्छा का निर्णय होता है और यह इतना सरल होता है कि आपको करना है। मैं लोगों को यह कहता हूँ। किसी ने भी कभी अपना मुँह बन्द रख कर पवित्र आत्मा में बपतिस्मा नहीं पाया है। ऐसा कभी नहीं होगा। आपको अपनी शारीरिक अस्तित्व को खोलना और परमेश्वर की आत्मा में पीना प्रारंभ करना है। आप दृश्य जल नहीं पी रहे हैं परन्तु आप परमेश्वर का अदृश्य आत्मा पी रहे हैं, जो यीशु आप पर उण्डेल रहा है। वह क्यों इसे आप पर उण्डेल रहा है? क्योंकि आपने उसे कहा है। यह इतना सरल है। उसने कहा, ''यदि आप आते हैं, तो मैं यह करूँगा।''
अब पीने का सबसे सरल तरीका साँस अन्दर खींचना प्रारंभ करना है। मैंने सैकड़ों लोगों को एक ही समय पर यह करते देखा है, परन्तु मैं आपसे कहता हूँ, एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं था जो पाने में असफल रहा। लोग जो वहाँ खड़े दर्शक बनकर खड़े थे, उन्हें कुछ नहीं मिला। मैं इसलिये यह कह रहा हूँ क्योंकि यही समस्या है। देखें, लोग आत्मसंकोची होते हैं। ''ठीक है, उन्होंने कभी भी मुझे कलीसिया में यह करने के लिये नहीं सिखाया।'' शायद नहीं।
एक और चरण। आपने पी लिया है। अब आपको प्रवाह को निकालना है। ''उसमें से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।'' परन्तु उसने पवित्र आत्मा के विषय में यह कहा। तो अन्तिम चरण, उमड़ना है। यह कैसे होता है? बातचीत में मुँह के द्वारा। ''जो हृदय में भरा है, वही मुँह पर आता है।'' इसलिये यह एक अलौकिक उमड़ना भी होगा। जो भाषा आप जानते हैं उसे आप नहीं बोलेंगे, आप एक ऐसी भाषा बोलेंगे जो पवित्र आत्मा आपको देता है। ऐसी भाषा जिसे आपने कभी नहीं सुना, जिसे आप नहीं समझते, जिसे आप कभी नहीं सिखा और शायद इसे आप कभी नहीं समझेंगे।
आप कैसे जानेंगे कि यह सही है। उत्तर यह है कि आपने सही चीज माँगी है। परमेश्वर ने आपको लिखित ग्यारन्टी दिया है। लूका 11ः11-13, यदि आप सही चीज माँगेंगे तो कभी भी आपको गलत चीज नहीं मिलेगा। मैं चाहता हूँ कि आप सब यह कहें, ''यदि आप सही चीज माँगेंगे, तो आपको कभी भी गलत चीज नहीं मिलेगा।'' अब अपने पड़ोसी की ओर मुड़िए और उससे यह कहिए, ''यदि आप सही वस्तु मागेंगे, तो आपको गलत चीज नहीं मिलेगा।'' ठीक है? अब हम समझ गए हैं।
अब मुझे शैतान के दो आपत्तियों पर बात करने दीजिए। यदि मैं यहाँ उन लोगों से हाथ खड़ा करने के लिये कहता जिन्होंने पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया है, तो मैं 90 प्रतिशत लोगों को हाथ खड़ा करते हुए पाता। आपत्ति नम्बर एक, पुराना दोष लगानेवाला आपके बगल में ही है। और जब आप अन्यभाषा में बात करना प्रारंभ करते हैं वह कहता है, ''यह वास्तविक नहीं है, आप स्वयं यह कर रहे हैं।'' कुछ क्षण के लिये अपने हाथों को खड़ा कर दीजिए - आपमें से कितने हैं। आप देखें, लगभग यहाँ उपस्थित सभी। ठीक है। उत्तर क्या है? आपके पास उत्तर होना चाहिए। उत्तर यह है, ''शैतान तुम सही हो, मैं स्वयं यह कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ, लेकिन पवित्र आत्मा मुझे भाषा दे रहा है।'' प्रेरितों 2 में आप देखते हैं, वचन कहता है, ''वे लोग जैसा पवित्र आत्मा ने उन्हें दिया था, वैसा ही बात करना प्रारंभ किया।'' बात करने का काम पवित्र आत्मा ने नहीं किया। उसने उन्हें शब्द दिए, उन्होंने बात किया। इसलिये मैंने उस व्यक्ति से कहा जिसने 25 वर्षों से विलम्ब किया था, वह बिना प्राप्त किए अपने कब्र में चला जाता, क्योंकि वह चाहता था कि सब कुछ परमेश्वर करे। सब कुछ परमेश्वर नहीं करता। आप अपना भाग कीजिए, परमेश्वर अपना भाग करेगा। परमेश्वर वह आपको बुलवाने नहीं जा रहा है। मैंने लोगों को कहते सुना है कि पवित्र आत्मा ने मुझसे वह करवाया, यह करवाया। मैं यह नहीं मानता। पवित्र आत्मा कभी भी परमेश्वर के एक सन्तान से ऐसा वैसा नहीं करवाता है। प्रेरित पतरस ने कहा, ''पवित्र आत्मा ने मुझे जाने से मना किया।'' उसने नहीं कहा, ''उसने मुझे जाने दिया।'' आपके पास स्वयं की इच्छा शक्ति है और परमेश्वर कभी भी उसके पार नहीं जाएगा। क्योंकि उसने आपको उसी प्रकार बनाया है। बात करने का निर्णय आपको करना है। अपना मुँह बन्द करके आप बात नहीं कर सकते।
मैंने बहुत से लोगों की सहायता की है। मैं कहता हूँ, ''देखिए, अपना मुँह खोलिए, अपना जीभ चलाइ ए, स्पष्ट रीति से बात कीजिए, हर शब्द बनाईए। आप चालक की सीट पर हैं। आप निर्णय लेते हैं। आपकी इच्छा स्वीच है। शक्ति है परन्तु केवल आप ही उसे प्रारंभ या चालू कर सकते हैं।
ठीक है। तो शैतान को उत्तर यह है, ''ठीक है शैतान, मैं स्वयं यह कर रहा हूँ, मैं बात कर रहा हूँ और पवित्र आत्मा मुझे शब्द दे रहा है।''
अगली आपत्ति यह है, कि आपको कैसे पता चलेगा आपको सही बात मिली है? यह मूर्खता प्रतीत होती है। ठीक है। कोई भी भाषा जो नहीं मालूम वह मूर्खता लगती है। मैंने संसार के कई हिस्सो में कई ऐसी भाषाएँ सुनी है जिन्हें मैं नहीं जानता। मेरे लिये वे सभी अजनबी हैं। एक अनजानी भाषा अजीब सा लगता है परन्तु आपको कैसे पता चलेगा कि आपको सही बात मिली है? ठीक है। हमने अभी एक दूसरे से कहा है। हम कैसे जानते हैं कि हमें सही बात मिली है? क्योंकि हमने सही बात माँगा और परमेश्वर ने हमें आश्वासन दिया है कि यदि हम सही चीज माँगेंगे तो हमें कभी गलत वस्तु नहीं मिलेगी। भाइयों और बहनों, इस बात का आधार विश्वास है। परमेश्वर के पास आने का और कोई मार्ग नहीं है। ''वह जो परमेश्वर के पास आता है, उसे (क्या करना है) विश्वास करना चाहिए कि परमेश्वर है (इतना काफी नहीं है)। और वह उन लोगों को प्रतिफल देता है जो उसे खोजते हैं।''
अब केवल एक ही बात रह जाती है और वह प्राप्त करना है। आपमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने कुछ इस मायने में पवित्र आत्मा में बपतिस्मा नहीं पाया है और आपके पास यह छाप नहीं है। हो सकता है आपने पाया हो परन्तु आप के पास उमड़ना नहीं है। और आप में से कुछ ऐसे हैं जिनमें से बहाव तो हुआ है परन्तु आपको नहीं मालूम कि यह सही है और आपमें कभी इतना विश्वास या साहस नहीं रहा कि इसे करते रहें। आपने कभी भी वास्तविक छुटकारा नहीं पाया है। यदि आप आज सुबह यहाँ इस सभा के समाप्त होने से पहले पूर्ण छुटकारा पाना चाहते हैं तो मैं आपकी सहायता करना चाहता हूँ। मैं आपको अपने पैरों पर खड़ा होने के लिये कहने जा रहा हूँ। चकित मत होईए। अब आप जब खड़े हैं तो मैं आपसे एक प्रार्थना करवाने जा रहा हूँ जिसके द्वारा आप यीशु के पास आ सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं। हमारे पास अधिक समय नहीं है इसलिये यदि आप पाना चाहते हैं तो अभी आप अपने पैरों पर खड़े हो जाइ ए। जहाँ कहीं आप हैं चकित मत होईए, शर्मिन्दा मत होईए। इसमें शर्मिन्दा होने की बात नहीं है। ये सामान्य बात है कि श्रेष्ठत्तम पाने के लिये परमेश्वर के पास जाएँ।
आपमें से कुछ ऐसे हैं जो सुनिश्चित नहीं हैं कि उन्हें मिला है। आपने कुछ शब्द कहे, आपके होंठ हिले परन्तु आप सच में नहीं जानते। मैं चाहता हूँ कि आप खड़े भी हो जाएँ क्योंकि आप एक स्पष्ट नदी पा सकते हैं। मैं लोगों से कहता हूँ, ''स्मरण रखो, यह बात एक पोखर नहीं है, यह एक नदी है। यह बहती रहती है, बहती रहती है, बहती रहती है।'' आप यह नहीं कहते हैं कि मैं ने सन् 1974 में एक बार अन्यभाषा में बात किया था। मुद्दा यह नहीं है, यह नदी नहीं है, यह पोखर है।
कोई भी जो खड़ा होना चाहता है, आप ऐसा करें। हमारे पास कितना समय बचा है, कोई मुझे बताएँ। पाँच मिनट। ठीक है। यह काफी है। हम पाँच मिनट में इसे समाप्त कर लेंगे। यह वास्तव में एक अद्भुत बात है। ठीक है? इसमें अधिक समय नहीं लगेगा।
अब मैं जोर से एक प्रार्थना करने जा रहा हूँ और मैं चाहता हूँ कि आप वाक्य दर वाक्य मेरे पीछे यह दोहरायें। इस बात को मन में रखें कि आप मुझ से प्रार्थना नहीं कर रहे हैं, आप बपतिस्मा देनेवाले प्रभु यीशु से प्रार्थना कर रहे हैं। मैं आपसे वे बातें कहलवाऊँगा जो आपको एक प्यासा व्यक्ति निरूपित करेगा जो उसके पास आ रहा है। जब आप अन्तिम शब्द कह लेंगे तो हम आमीन कहेंगे तो आप प्रार्थना करना बन्द करना जान जाएँगे। इसके पश्चात् कोई प्रार्थना मत कीजिएगा। ठीक है? आप क्या करते हैं? आप पीना प्रारंभ करते हैं। ठीक है? आपको हाँफने की आवश्यकता नहीं है, शान्त भाव से परमेश्वर की आत्मा को भीतर लें। प्रभु के साथ अपने आपको बन्द कर दीजिए, इस बात को भूल जाइ ए कि यहाँ बहुत सारे लोग हैं। तब यहाँ विश्वास के क्षण उत्पन्न होते हैं जब आप नई भाषा बोलना प्रारंभ करते हैं। आपमें से कुछ लोग इसी समय यह कर रहे हैं। आपको आवाज़ की बाधा को तोड़ना है। आपको चिल्लाने की आवश्यकता नही है, आपको रोने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु आपको इतना जोर से कहना है कि आप स्वयं सुन सकें, ताकि जब आप इस स्थान से बाहर जाएँ तब आप जानें, आपने अन्यभाषा से स्वयं को बात करते सुना है। ठीक है? स्मरण रखें, जब हम आमीन में पहुँचते हैं, तो और अंग्रेजी नहीं, और फिलिप्पीनों नहीं, कोई और भाषा नहीं, स्पेनीस, चीनी या जापानी। ठीक है? शब्द ये हैं।
''प्रभु यीशु, मैं विश्वास करता हूँ कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं और यह भी कि मेरे पापों के लिये आपने क्रूस पर मृत्यु सहा और पुनः मृतकों में से जी उठा। क्षमा प्राप्ति और शुद्धिकरण के लिये मैं आप पर भरोसा रखता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि आपने मुझे परमेश्वर की सन्तान के रूप में ग्रहण किया है। और चूंकि आपने मुझे स्वीकार किया है, इसलिये मैं स्वयं को परमेश्वर की सन्तान के रूप में स्वीकार करता हूँ। यदि इस समय मेरे हृदय में किसी प्रकार की नाराजगी है, किसी के प्रति कोई क्षमा न की गई कोई बात है, तो मैं उसे छोड़ देता हूँ। मैं हर उस व्यक्ति को वैसा ही क्षमा करता हूँ जैसा परमेश्वर ने मुझे क्षमा किया है। यदि मैं कभी किसी गलत शिक्षा में शामिल हुआ हूँ तो मैं इसे पाप मानता हूँ। मैं आपकी क्षमा की प्रार्थना करता हूँ और मैं इस समय यीशु के नाम से अपने आपको शैतान के हर संपर्क और झूठी सामथ्र्य से मुक्त करता हूँ। और अब प्रभु यीशु, पवित्र आत्मा में अपने बपतिस्मादाता के रूप में आपके पास आता हूँ। मैं अपनी देह को पवित्र आत्मा का मन्दिर बनने के लिये आपको सौंपता हूँ। मैं आपसे विनती करता हूँ कि मेरी जीभ को धार्मिकता का हथियार बनाएँ ताकि एक नई भाषा में आपकी आराधना करूँ। अब मैं इसे विश्वास के साथ स्वीकार करता हूँ और इसके लिये यीशु के नाम में आपको धन्यवाद करता हूँ। आमीन।''
अब आइ ये पीना प्रारंभ करें। भीतर सांस लें, उसे भीतर लें। तब बोलना प्रारंभ करें। जब आप बोलते हैं तो अपना मँुह खोलें, अपना मँह और अपना होंठ चलायें, और उसे अपनी आवाज दें। आपमें से बहुत से अभी यह करने के लिये तैयार हैं। ठीक है। जब आपके होंठ और आपकी जीभ चलती हैं, तो उसे अपनी आवाज दीजिये। ठीक है। आपको लज्जित होने की आवश्कता नहीं है कि पवित्रात्मा भीतर आ गया है। वह एक आदरणीय मेहमान है। हालेलुयाह, प्रभु धन्यवाद।
आइ ये हम सब अपने पाँवों पर खड़े हों और साथ मिलकर अन्य भाषा में परमेश्वर की आराधना करें। धन्वाद प्रभु यीशु, धन्यवाद यीशु। प्रभु हम आपकी स्तुति करते हैं। हम आपको महिमा देते हैं। हालेलुयाह, आमीन।
अब उत्तेजित होना लाजिमी है। ठीक है? कुछ क्षण स्वयं आनंद लें। आमीन। प्रभु हम आपका धन्यवाद करते हैं। हम आपकी स्तुति करते हैं। यीशु मसीह प्रभु है। आमीन। उसने पाप और मृत्यु पर और कब्र पर जय पाई है। वह मृतकों में से जी उठा है। वह पिता की दाहिनी ओर जा बैठा है। स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार यीशु को दिया गया है। उसकी स्तुति करें। उसका धन्यवाद करें।
अब अपने पड़ोसी की ओर फिरें और कहें, ''परमेश्वर की स्तुति हो।'
कोड: MV-4154-100-HIN









