यह ‘शत्रु जिनका हम सामना करते हैं’ विषय पर हमारी बातचीत की श्रृंखला का तीसरा पाठ है। अपने प्रथम दो बातचीत में हमने, सबसे पहले शैतान के राज्य की प्रकृति और ढाँचे के विषय में बात किया। मैंने बताया कि दो विरोधाभाषी आत्मिक राज्य हैं, परमेश्वर का राज्य और शैतान का राज्य। दोनों ही आत्मिक हैं और इस समय दोनों ही स्वाभाविक आँखों से अदृश्य हैं परन्तु पूरी तरह वास्तविक हैं। और हमने शैतान के राज्य के प्रारंभ को देखने का प्रयास किया कि यह मूल रूप से लुसीफर नामक एक स्वर्गदूत से हुआ जिसने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह में स्वर्गदूतों के एक दल की अगुवाई की। और एक ऐसे क्षेत्र में अपना प्रतिद्वन्दी राज्य स्थापित किया जिसे नया नियम में ‘‘आकाश’’ कहा गया है। यह शब्द ‘आकाश’ वास्तव में इफिस्सियों की पत्री में पाँच बार आया है, जो कि धर्मशास्त्र का मुख्य भाग है जो कलीसिया के विषय में परमेश्वर के प्रकाशन को बताता है। मुझे लगता है कि यह कोई दुर्घटना नहीं है कि यहाँ जोर ‘आकाश’ पर है। यीशु मसीह की कलीसिया को स्वर्गीय स्थानों में स्थापित अन्य राज्य के विरुद्ध और उन लोगों के लाभ के लिये काम करना है जो भ्रम में हैं। मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि बाइबल में पहले पद से ही ‘‘आकाश’’ बहुवचन है। एक से अधिक स्वर्ग हैं और हमारे ग्रह और स्वर्ग में परमेश्वर की उपस्थिति वाले परमेश्वर के सिंहासन के मध्य कहीं परमेश्वर के विरोध में शैतान का राज्य है।

और तब हमने दूसरी बातचीत में शैतान के राज्य के मुख्य कार्यों पर चर्चा किया, प्रमुख तरीकों में से एक जिसमें उसकी सामर्थ्य प्रगट होती है, जो कि जादूटोना है। बहुत से लोगों के लिये जादूटोना एक पुरातन बात सुनाई पड़ती है, मानो मध्ययुगीन बात हो, जिसकी प्रासंगिकता बहुत पहले समाप्त हुई प्रतीत होती है। परन्तु यह पूरी तरह असत्य है। जादूटोना बहुत ही वास्तविक है और मुझे लगता है कि यह आज जितना सक्रिय है उतना मानव इतिहास में कभी नहीं रहा। और बहुत से देश जिन्हें एक पीढ़ी पहले मसीही कहा जाता था आज अत्यधिक जादूटोने की गतिविधियों से भरी पड़ी हुई है।

हमने तीन क्षेत्रों में जादूटोने की संक्षिप्त परिभाषा देने का प्रयास किया है। सबसे पहले, के रूप में, एक तरीका जिसमें मनुष्य का पतित स्वभाव अपने आपको अभिव्यक्त करता है, और मैंने तीन मुख्य शब्द दिए: जादूटोने का उद्देश्य बस अन्य लोगों को नियन्त्रित करना और उनसे वह काम कराना है जो आप कराना चाहते हैं। और यह वैध तरीका नहीं अपनाता है। जादूटोना बहुत निकटता से विद्रोह से जुड़ा हुआ है। यह परमेश्वर के विरुद्ध मनुष्य के विद्रोह का बाह्य परिणाम है।

दूसरे क्षेत्र में जादूटोना एक प्रकार से कई विभिन्न पहलुओं और चरणों के साथ है। बहुत से देशों में जादूटोने का पुरोहित जादूटोना करनेवाला कहलाता है। और आप धरती पर लेसमात्र भी जगह नहीं पाएँगे जहाँ पर लोग जादूटोने में सम्मिलित न हों, अधिकांशतः अति प्राचीन समय से। और संसार के बहुत से क्षेत्रों यह अब भी प्रचलित आत्मिक गतिविधि है।

और तब, तीसरा, हमने देखा, जो कि शैतान के प्रमुख प्रहारों में से एक है। पौलुस ने गलाती शहर के मसीहियों को लिखा और कहा, ‘‘हे निबुद्धि गलातियों, किसने तुम्हें मोह लिया?’’ और हमने देखा कि इस बात का प्रमाण इस तथ्य में था कि वे मोहित हो गए थे, कि क्रूस पर यीशु के कार्य छिप गए थे। और इसके कारण वे उन सभी लाभ प्राप्त करने से वंचित रह गए थे जो यीशु ने उनके लिये प्राप्त किया था। और दो मुख्य बातों में जादूटोने का यह कार्य अपने आपको प्रगट किया: आत्मा के बजाय देह पर आश्रित रहना; और कामुकता का परिणाम, और मैं आपको सलाह देता हूँ और मुझे नहीं लगता कि मैं अतिशयोक्ति कर रहा हूँ कि बहुत संभवतः खुले आम दावा करनेवाली अधिकांश कलीसियाएँ इस वर्णन का उत्तर देती हैं। यह पवित्र आत्मा के अलौकिक अनुग्रह और अलौकिक शक्ति से दूर हो गई हैं, अब मानवीय विधियों और मानवीय प्रयासों पर निर्भर हैं, और एक प्रकार से वैधानिक प्रणालियों में बन्ध कर रह गई है। कुछ स्थानों पर मैंने लोगों से कहा है कि मसीहियत नियमों का एक पुलिन्दा नहीं है और कई बार लोगों ने आश्चर्य से मेरी ओर देखा है। मैं सोचता हूँ, यदि मैंने कहा होता कि ‘‘परमेश्वर नहीं है’’, तो वे बहुत आसानी से मेरे कथन को स्वीकार कर लिये होते।

खैर, इस शाम हम शैतान के राज्य के, परमेश्वर के और यीशु मसीह की कलीसिया के प्रति शैतान के विरोध के अगले कार्य को देखने जा रहे हैं। और हम कुछ ऐसा विषय देखने जा रहे हैं जिसे मैंने ‘‘ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा’’ शीर्षक दिया है। सबसे पहले हमें 1 यूहन्ना का एक भाग निकालना होगा जहाँ पहली बार इसका वर्णन किया गया है। 1 यूहन्ना 2ः18 से आगे:

‘‘हे लड़कों, यह अन्तिम समय है, और जैसा तुमने सुना है, कि मसीह का विरोधी आनेवाला है, उसके अनुसार अब भी बहुत से मसीह के विरोधी उठे हैं; इस से हम जानते हैं, कि यह अन्तिम समय है (ध्यान दें कि जैसे जैसे हम युग के अन्त की ओर बढ़ते हैं, ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा का आगमन और उसका कार्य प्रगट होता जाता है)। वे (अर्थात् ये ख्रीष्ट विरोधी) निकले तो हम ही में से, पर हम (हम अर्थात् यीशु की कलीसिया) में के थे नहीं; क्योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं। और तुम्हारा तो उस पवित्र से अभिषेक हुआ है, और तुम सब कुछ जानते हो (या एक वैकल्पिक पाठ: तुम सब जानते हो, जो कि संभवतः सही है)। मैंने तुम्हें इसलिये नहीं लिखा, कि तुम सत्य को नहीं जानते, पर इसलिये, कि उसे जानते हो, और इसलिये कि कोई झूठ, सत्य की ओर से नहीं। झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र का इन्कार करता है। जो कोई पुत्र का इन्कार करता है उसके पास पिता भी नहींः जो पुत्र को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।’’

सबसे पहले, आइए मुझे, इस अजीब से वाक्यांश ‘‘ख्रीष्ट विरोधी’’ की संक्षिप्त व्याख्या करने का प्रयास करने दीजिए। सबसे पहले, आपको मन में यह ठान लेना है, कि ‘‘मसीह’’ शब्द यूनानी शब्द ‘‘ख्रीस्टस’’ से आया है जिसका सटीक अर्थ इब्रानी शब्द ‘‘मसीय्याह’’ के अर्थ के समान है, जिससे हमें मसीह शब्द मिलता है। यह अद्भुत है कि कितने यहूदी और मसीही नहीं जानते हैं कि मसीह और खीस्तुस दोनों ही एक ही बात के लिये प्रयुक्त दो विभिन्न शब्द हैं। तो जब हम ‘‘ख्रीष्ट विरोधी’’ कहते हैं, तो उसका अर्थ मसीह का विरोध करनेवाला होता है। और यदि हम मसीह शब्द का उपयोग करें तो संभवतः यह समझना हमारे लिये अधिक आसान होगा।

और तब पुनः, उपसर्ग... (यदि आप नहीं जानते हैं कि उपसर्ग क्या होता है, परेशान मत होईए। स्वर्ग उनके लिये भी खुला है जो नहीं जानते हैं कि उपसर्ग क्या है।) परन्तु इसके साथ ही, उपसर्ग ‘‘विरोधी’’ एक यूनानी उपसर्ग है। इसके दो अर्थ हैं और दोनो ही लागू होते हैं। सबसे पहले, इसका अर्थ है ‘‘विरुद्ध’’। अतः पहला अभियान मसीह के विरुद्ध है। दूसरा अर्थ ‘‘के स्थान पर’’ है। और इसलिये अन्तिम उद्देश्य सच्चे मसीह के स्थान पर झूठे मसीह को रखना है।

तो सबसे पहले, यह बल मसीह को बाहर करने के द्वारा कार्य करता है; और दूसरा, उसके स्थान पर एक झूठे मसीह को रखने के द्वारा। अतः पूरा कार्य दो चरणों में किया जाता है और जब आप इस बात को पहचानना प्रारंभ करते हैं, तब आप देखते हैं कि ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा ढोंगी कलीसिया में अधिकांश भाग में बहुत अधिक सक्रिय हो चुका है।

अमेरिका में रूत के और मेरे मित्र हैं जो ऐसी कलीसिया के सदस्य हैं जिन्हें पुरातन सुसमाचारीय धारा की कलीसिया कहा जाता है। मैं संप्रदाय का नाम लेना नहीं चाहता हूँ और एक दिन उन्होंने मुझ से कहा, उन्होंने कहा: ‘‘हमारी कलीसिया में आप बुद्ध के बारे में बात कर सकते हैं, आप सुक्रात के बारे में बात कर सकते हैं, आप प्लेटो के बारे में बात कर सकते हैं, आप मार्टिन लुथर किंग के बारे में बात कर सकते हैं, और किसी को कोई परेशानी नहीं होती। परन्तु यदि आप यीशु के बारे में बात करते हैं तो सब परेशान हो जाते हैं।’’ और यह क्या है? यह ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा है। यह सच्चे मसीह से मुक्ति पाने के अपने पहले चरण में है। परन्तु हम सबको मन में ठान लेना है कि यह शैतान के उद्देश्य का अन्त नहीं है। उसका उद्देश्य झूठे मसीह के द्वारा सच्चे मसीह को हटाना है। तो हम इसी विषय पर बात कर रहे हैं।

जब आप इसे देखते हैं तो यह प्रगट हो जाता है कि शैतान का यह विशिष्ट कार्य केवल वहीं लागू होता है जहाँ यीशु का प्रचार किया गया है। यदि आपने कभी यीशु के विषय में नहीं सुना है तो आप कभी भी यीशु का इन्कार नहीं कर सकते हैं। अतः जादूटोना भिन्न बात है। जादूटोना संपूर्ण पतित मानवजाति की बात है। वास्तव में, जैसा कि मैंने कहा, यह विभिन्न अभिव्यक्तियों और रूपों और संस्कारों सहित पतित मानवजाति का विश्वव्यापि धर्म है। परन्तु ख्रीष्ट विरोधी केवल वहीं प्रदर्शित हो सकता है, जहाँ पहले मसीह का प्रचार किया गया हो।

मत्ती के सुसमाचार में यह दर्ज किया गया है, यीशु की सेवा के प्रारंभ में, जंगल में उसकी परीक्षा के दौरान, उसने शैतान से कहा, ‘‘हे शैतान, दूर हो जा।’’ जो कि इसका अनुवाद करने का सामान्य तरीका है। परन्तु ऐसा अनुवाद करना बिल्कुल संभव है, ‘‘मेरे पीछे दूर चला जा।’’ और मैं विश्वास करता हूँ कि यह आत्मिक वास्तविकता है कि जहाँ कहीं यीशु और सुसमाचार का प्रचार किया जाता है, परमेश्वर विरोधी दावे को पीछे आने की अनुमति देगा। वास्तव में, मानवता बलपूर्वक सच्चे मसीही और झूठे के मध्य चुनाव करने जा रही है। यह हमारे साथ परमेश्वर के व्यवहार करने के तरीके का एक भाग है कि वह गलत विकल्पों को छोड़ेगा नहीं और सही चुनाव करना हमारी जिम्मेदारी है। मैं सोचता हूँ यह हमारी पीढ़ी के लिये पूरी तरह प्रासंगिक है। मैं मानता हूँ कि हमारी पीढ़ी को एक नहीं तो दूसरी रीति से निर्णय करनेवाली है: सच्चा मसीही या झूठा मसीही और मसीह विरोधी की आत्मा अत्यधिक सक्रिय है, जितना अधिक आपमें से बहुत से लोग सोचते हैं उससे कहीं अधिक, हम पर गलत निर्णय लेने का दबाव डालते हुए।

अब इस भाग में जिसे हमने 1 यूहन्ना अध्याय 2 में पढ़ा - शायद हमें 1 यूहन्ना 4 के 2 पद पढ़ना चाहिए, 3 और 4 पद।

परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में होकर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं (अब आपमें से कुछ लोग जिनके पास वैकल्पिक अनुवाद हैं, उनके पास छोटा संस्करण होगा: ‘‘हर आत्मा जो यीशु को मसीह नहीं मानती’’। अर्थ समान है); और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आनेवाला हैः और अब भी जगत में है।

यदि हम दोनों भाग को एक साथ देखें, वहाँ हम ख्रीष्ट विरोधी के तीन रूप देखते हैं। सबसे पहले, बहुत से मसीह विरोधी हैं और मानव इतिहास में बहुत से मसीह विरोधी प्रगट हुए हैं और अभिव्यक्त हुए हैं। मैं कुछ ही क्षण में उनमें से कुछ एक के बारे में बहुत संक्षिप्त में बोलूँगा।

दूसरा, ख्रीष्ट विरोधी है, से नहीं, परन्तु केवल एक। कि मैं मानता हूँ कि वह अन्तिम अभिव्यक्ति, की आत्मा का अन्तिम उत्पात होगा, जो जितना मैं जानता हूँ अब तक मानव इतिहास में प्रगट नहीं हुआ है। मैं अक्सर लोगों से कहता हूँ, ‘‘मुझे लगता है, कि मंच पर उसकी छाया पड़ चुकी है परन्तु हमने वास्तविक व्यक्ति को नहीं देखा है।’’ परन्तु इस युग के अन्त में धर्मशास्त्र यह स्पष्ट करता है, कि एक अन्तिम बहुत ही दुष्ट, बहुत अधिक सामर्थी शासक होगा जो थोड़े से समय के लिये संपूर्ण मानवजाति पर शासन करेगा जो कि ख्रीष्ट विरोधी होगा।

तीसरा रूप, ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा है। ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा वह आत्मा है जो प्रत्येक ख्रीष्ट विरोधी में होकर कार्य करती है। और यूहन्ना ने हमें ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा की कुछ चिन्ह बताए हैं जो बहुत महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले, यह परमेश्वर के लोगों के साथ सहभागिता रखने से प्रारंभ होता है क्योंकि पहला यूहन्ना की दूसरे अध्याय के 19वें पद में यूहन्ना कहता है:

वे (मसीही विरोधी) निकले तो हम ही में से, पर हम में के थे नहीं; क्योंकि यदि हम में के होते, तो हमारे साथ रहते, पर निकल इसलिये गए कि यह प्रगट हो कि वे सब हम में के नहीं हैं।

तो मसीह विरोधी हमेशा किसी न किसी प्रकार परमेश्वर के लोगों के साथ सहभागिता से प्रारंभ करते हैं, परन्तु वे वास्तव में उनमें से नहीं होते हैं और उस दौरान यह प्रगट हो जाता है। यह मसीह विरोधी की आत्मा का एक चिन्ह है।

दूसरा चिन्ह यह है, कि यह इन्कार करता है कि यीशु, मसीह है। 1 यूहन्ना 2ः22:

झूठा कौन है? केवल वह, जो यीशु के मसीह होने का इन्कार करता है; और मसीह का विरोधी वही है,...।

और तब यूहन्ना तीसरा चिन्ह बताते हुए आगे कहता है:

मसीह विरोधी वही है, जो पिता का और पुत्र इन्कार करता है।

यह बहुत महत्वपूर्ण है। मसीह विरोधी परमेश्वर के अस्तित्व का इन्कार नहीं करता है। वास्तव में, वह परमेश्वर का प्रतिनिधि होने का दावा करता है। जिस बात का वह इन्कार करता है वह परमेश्वरत्व में पिता और पुत्र के मध्य के संबन्ध का इन्कार करता है। और जहाँ कहीं आप इस इन्कार का सामना करते हैं वहाँ आप मसीह विरोधी आत्मा का सामना कर रहे हैं।

और मसीह विरोधी का चौथा चिन्ह वह है जो 1 यूहन्ना 4 अध्याय में दिया गया है, कि वह इन्कार करता है कि मसीह है - शायद उस मसीह में विश्वास करता है जो है, परन्तु इन्कार करता है कि मसीह आ चुका है।

आइए, मुझे उन चार लक्षणों को दोहराने दें, क्योंकि वे अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

• सबसे पहले ख्रीष्ट विरोधी परमेश्वर के लोगों के साथ प्रारंभ करता है।

• दूसरा, यह इन्कार करता है कि यीशु मसीह है। निश्चय ही यह मूर्तिपूजा नहीं हो सकती है क्योंकि मूर्तिपूजा ने तो यीशु के विषय में सुना ही नहीं है, ठीक है। यह केवल वहीं हो सकता है जहाँ यीशु का सुसमाचार प्रचार किया गया हो।

• यह परमेश्वरत्व में पिता/पुत्र के संबन्ध का इन्कार करता है। आवश्यक नहीं कि यह परमेश्वर का इन्कार करे परन्तु यह एक ऐसे परमेश्वर का इन्कार करता है जो पिता और पुत्र के रूप में प्रगट होता है।

• और चौथा, यह इन्कार करता है कि मसीह आ चुका है परन्तु बहुत संभव है कि यह सिखाता है कि मसीह आनेवाला है।

अब आइए, कुछ ऐतिहासिक उदाहरण लें और मुझे यह अंगीकार करना है कि जो मैं कहने जा रहा हूँ वह थोड़ा बहुत विवादित है।

सत्य के साथ समस्या यह होती है कि यह विवादस्पद होने के लिये उत्तरदायी है। निश्चय ही, मुझे किसी को दुःखी करने की इच्छा नहीं है और मुझे दूसरे धर्मों पर आघात करने की भी अभिलाषा नहीं है। मैं केवल सत्य को प्रस्तुत करना चाहता हूँ परन्तु मसीह विरोधी की आत्मा का प्रथम और सबसे प्रबल अभिव्यक्ति यहूदी धर्म में ही है।

हम हमेशा यही सोचने की आदी हैं कि मसीहियत एक प्रकार से यहूदी धर्म की शाखा है। और यहूदी लोग मूल रूप से आपसे यही कहेंगे। मुझे बताने दें, मैं यहूदी नहीं हूँ, यद्यपि मेरी पत्नी यहूदी हैं और हम यहूदी लोगों के बहुत ही करीब हैं। मैंने यह देखा है कि यह सत्य नहीं है। जो कुछ हुआ है वह यह है कि मसीहियत (अर्थात् यीशु और उसके शिष्यों की शिक्षा न कि कलीसिया की वे सारी बातें जो अब तक चलती आ रही हैं, परन्तु यीशु और उसके शिष्यों की शिक्षा) पुराना नियम के धर्म का सच्चा विस्तार है। और यहूदी धर्म को उसमें से काट डाला गया है। और जहाँ तक यहूदी लोगों की बात है यह बहुत ही महत्वपूर्ण है।

तो यह पहला लक्षण है। यह परमेश्वर के लोगों के साथ सहभागिता में प्रारंभ होता है। मैं यहूदी धर्म में विशेषज्ञ नहीं हूँ परन्तु यदि आप इसकी शिक्षाओं का विश्लेषण करें तो उसका अधिकांश भाग यीशु में विश्वास करने का अनुत्तरित इन्कार है। जो कुछ सिखाया जाता है उसमें से अधिकांश यीशु के दावों का इन्कार करना है।

निश्चय ही, यहूदी धर्म में ख्रीष्ट विरोधी की दूसरी अभिव्यक्ति बहुत सरल है। यह इन्कार करता है कि यीशु मसीह है परन्तु यह उस मसीह में विश्वास करता है जो आनेवाला है।

तीसरा, यह परमेश्वरत्व में पिता/पुत्र की संबन्ध का इन्कार करता है। यह परमेश्वर का पुत्र होने के यीशु के दावे का इन्कार करता है और स्वीकार नहीं करता कि परमेश्वर का पुत्र है।

और चौथा, जैसा कि मैंने कहा, यह इन्कार करता है कि मसीह आ गया है।

यह रोचक है कि केवल इस विषय को आधुनिक बनाने के लिये यरूशलेम में पिछली गरमी में (1988 में) इब्रानी भाषा में शहर के सभी प्रमुख सड़कों पर एक बहुत ही सुन्दर पोस्टर दिखाई दिया, जो यह कहता था: ‘‘मसीह आ गया है, और यदि आप उससे मिलना चाहते हैं, तो एक निश्चित रविवार को जैतुन के पर्वत पर जाएँ और वह वहाँ मिलेगा।’’ उसकी छपाई बहुत सुन्दर थी। मुझे नहीं मालूम कि किसने उसे छपवाया। मैं एक पत्रकार को जानता हूँ जो यह देखने के लिये वहाँ गया कि क्या हुआ परन्तु उसे वहाँ मसीह नहीं मिला। परन्तु यह केवल यह दर्शाने के लिये है कि यह मुद्दा कितना वास्तविक है। यदि आप एक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से बात करें और आप मसीह शब्द का उपयोग करें तो उनकी आँखों में कुछ बदल जाता है। क्योंकि यह एक ऐसा शब्द है जो यहूदी लोगों के लिये विशिष्ट रूप से महत्वपूर्ण है।

अब मैं आपको एक सुझाव, एक विचार देना चाहता हूँ जो मेरे पास है और आप मेरे साथ असहमत होने के लिये पूरी तरह स्वतन्त्र हैं। मैं क्षण भर के लिये मत्ती 27 अध्याय निकालना चाहता हूँ और केवल एक पद पढ़ें। मैं आपको बताता हूँ कि इस पद में मसीह विरोधी की आत्मा की पहली वास्तविक शक्तिशाली अभिव्यक्ति पाई जाती है। मत्ती 27 पद 21। यीशु को राज्यपाल पुन्तियुस पीलातुस के सामने लाया गया। पीलातुस यीशु में कुछ भी गलत नहीं पा सका, परन्तु यहूदी धार्मिक अगुवे लगातार उस पर आरोप लगाते रहे और उन्होंने सारी यहूदी जनता का उसके विरुद्ध होने के लिये उकसाया। और हमें मन में यह बात रखने की आवश्यकता है कि उस स्वभाव का कोई भी व्यक्ति एक सप्ताह पहले की उस भीड़ में अवश्य ही शामिल रहा होगा, जिन्होंने उसकी प्रशंसा की और यरूशलेम में उसका स्वागत किया और उसके मार्ग पर खजूर की डालियाँ बिछाई और कहा: ‘‘धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है।’’ जो कुछ ऐसा वर्णन करता है जिसे हमें अनदेखा नहीं करना चाहिए परन्तु वह मानवता पूरी तरह चंचल है। उनके स्वभाव को पूरी तरह बदलने में उन्हें एक सप्ताह से अधिक समय नहीं लगा परन्तु मैं नहीं मानता कि यह मानवीय स्वभाविक प्रतिक्रिया थी। मैं मानता हूँ कि अदृश्य क्षेत्र में भयानक आत्मिक युद्ध चल रहा था और दुर्भाग्यवशः मसीह विरोधी की आत्मा प्रबल हो गई और यह हुआ। पुन्तियुस पीलातुस ने यीशु को बाहर लाया और कहा, ‘‘यह तुम्हारा सौभाग्य है कि इस मौसम में मैं प्रतिवर्ष एक कैदी को रिहा कर देता हूँ। क्या मैं यीशु को छोड़ दूँ या बरअब्बा को छोड़ दूँ?’’ बरअब्बा एक राजनैतिक आन्दोलनकारी, एक हत्यारा, एक हिंसक आदमी था। उसने कभी किसी का भला नहीं किया था जब कि दूसरी तरफ यीशु ने कभी किसी की हानि नहीं की थी। उसने हजारों को चंगा किया था, हजारों को आशीष दिया था, हजारों को तृप्त किया था। यीशु के विरुद्ध होने का कोई तार्किक कारण दिखाई नहीं पड़ता था। यह तार्किक नहीं था, एक आत्मिक शक्ति कार्यरत थी और मुझे लगता है कि यह मुख्य पद है। मत्ती 27ः21।

हाकिम ने उन से पूछा, कि इन दोनों में से किस को चाहते हो, कि तुम्हारे लिये छोड़ दूं? उन्होंने कहा; बरअब्बा को।

और तो इस्राएल मेरी राय में एक प्रकार का प्रतिरूप होगा कि मानवता के साथ क्या होगा। क्योंकि मैं मानता हूँ कि संपूर्ण मानवता को अन्ततः इस चुनाव का सामना करना है, कौन से दो? क्या आपको धर्मी, चंगा करनेवाले उद्धार कर्ता यीशु चाहिए; या आपको दुष्ट, हिंसक, राजनैतिक विद्रोही बरअब्बा चाहिए? एक प्रकार से बरअब्बा मसीह विरोधी का प्रतिरूप है और वे बरअब्बा को चुनते हैं। आइए, हम उन पर उंगुली न उठाएँ। आईए, बहुत सावधान हों कि जब समय आए तो हम वही गलती न करें। वहाँ एक आत्मिक शक्ति थी जिसने पूरी भीड़ को अपने कब्जे में किया और उन्हें बदल दिया। और यह व्यक्तिगत रूप से विश्वास करते हैं कि मसीह विरोधी की आत्मा ने सबसे पहले मानवता को प्रभावित किया। और उसने एक प्रकार से यहूदी लोगों को अब तक अपने कब्जे में रखा हुआ है।

अब यीशु ने उन्हें चेतावनी दी - (यदि आप यूहन्ना 5 अध्याय पद 43 निकालें, इस दौरान वे उसके दावे पर विवाद कर रहे थे कि वह परमेश्वर का पुत्र मसीह है।)

मैं अपने पिता के नाम से आया हूं, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे।

अब यह बहुतायत से सत्य साबित हुआ है। दूसरे शब्दों में, ‘‘सच्चा मसीह मैं हूँ परन्तु तुम मुझे प्राप्त नहीं करोगे। यदि उसके नाम से कोई झूठा मसीह आता है तो तुम उसे स्वीकार करोगे।’’ और यहूदी विश्वकोश लगभग चालीस झूठे मसीहियों को दर्ज करता है जो तब से लेकर आए हैं और यहूदी लोगों द्वारा स्वीकार किए गए हैं। उनमें से एक, दो या तीन का नाम लें तो मुझे लगता है कि संभवतः सबसे प्रसिद्ध बार कोचबा था जिसने सन् 138 में रोम के विरुद्ध क्रान्ति का नेतृत्व किया था। तब क्रेते का मूसा था, मुझे लगता है पाँचवी सदी में। जिसने लोगों को राजी किया कि वे क्रेते से समुद्र में उतरें और वे मसीह से मिलेंगे और हजारों समुद्र में गए और डूब गए। और तब 1666 में जिसे आश्चर्यजनक वर्ष माना जाता है (सबोट्सफे) ने मसीह होने का दावा किया और उत्साहपूर्वक बड़ी भीड़ के द्वारा स्वीकार किया गया।

मैं नहीं कहता कि सारा यहूदी धर्म परन्तु यहूदी धर्म की गलत शिक्षाओं में से एक यह है कि वह जो हमें मन्दिर वापस फिर देगा वह मसीह है। मुझे निश्चय है कि मन्दिर का क्षेत्र, सारे यहूदी लोगों के लिये पवित्र क्षेत्र अब भी मुस्लिम मस्जिद के द्वारा कब्जा किया हुआ है और यहूदियों को उस क्षेत्र में जाने भी नहीं दिया जाता है यद्यपि पूरे क्षेत्र पर राजनैतिक रूप से यहूदियों का कब्जा है। और मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि यदि कोई राजनैतिक व्यक्तित्व का उदय होगा जो किसी न किसी प्रकार मध्यपूर्व में हस्तक्षेप करेगा और यहूदी लोगों के लिये वहाँ अपना मन्दिर बनाने का अधिकार प्राप्त करेगा, उन्हें वे उत्साहपूर्वक मसीह के रूप में उसकी प्रशंसा करेंगे। और वह संसार भर के सारे यहूदी समाज से अपील करेंगे और मैं आपसे कहता हूँ कि यह बात बहुत दूर नहीं है।

अब आइए, ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा की एक ओर मुख्य अभिव्यक्ति को देखें। यह मसीहियों के रूप में हमारे लिये बहुत ही महत्व की बात है कि इस समय इसके विषय में बहुत जानकारी रखें; अर्थात् इस्लाम, जो कि मुहम्मद के धर्म का नाम है। इस्लाम का अर्थ है, सिद्धता, पूर्ति, पूर्णता।

मुहम्मद नबी का उदय अरबी प्रायद्वीप में इस युग के सातवीं सदी में हुआ था, जिन्होंने नबी होने का दावा किया, उन्होंने दावा किया कि उन्हें धर्म का प्रकाशन एक गुफा में स्वर्गदूत के द्वारा प्राप्त हुआ जो तब इस्लाम बना। और उसने दावा किया कि यह धर्म इस्लाम पुराना नियम और नया नियम का सच्चा पूर्तिकरण था। उसने दावा किया कि मसीहियों और सुसमाचारों ने वास्तविक सत्य को विकृत कर दिया है परन्तु वह इस्लाम के द्वारा उसे पुनःस्थापित कर रहे थे। यही मुहम्मद का मूल दावा है। और उसने सबसे पहले इस पर विश्वास किया क्योंकि उसने मूर्तिपूजा को त्याग दिया था और चूँकि उसने मसीहियत के दावों को ठुकरा दिया था इसलिये यहूदी लोग उसके पीछे चल रहे थे किन्तु उसे निराशा हुई। और जब वे उसके पीछे नहीं चले तो वह उनके विरुद्ध हो गया और उनका सतानेवाला बन गया।

अब आइए, इस्लाम की शिक्षाओं पर विचार करें। व्यक्तिगत रूप से, यह मेरा व्यक्तिगत विचार है, वर्तमान समय में मुझे लगता है कि इस्लाम परमेश्वर के सत्य का विरोध करनेवाला संसार का सबसे भयावह ताकतवर बल है। यह एक त्रासदी है कि पश्चिम में बहुत से मसीहियों ने इस्लाम को पूरी तरह गलत रूप से समझा है और उसे कम आँका है। यदि यह एक बार ताकत पा लेता है तो वह सबसे पहले यहूदियों का पतन करेगा और तब मसीहियों का। मुस्लिम देशों में सदियों से मसीही और यहूदी लोगों को डिम्मी नाम से पुकारा जाता है, जिसका अर्थ है द्वितीय स्तर के लोग। उनमें से कुछ एक लोगों का अपने आस पास रहना इस्लाम को भाता है परन्तु उन्हें इतनी बुरी और पतित स्थिति में रखता है ताकि इस्लाम की श्रेष्ठता बड़ी आसानी से सब पर प्रगट हो।

1985 में रूत और मैं सुसमाचार का प्रचार करते हुए पाकिस्तान में थे। जो पहली बातें हमारे साथ हुई उनमें से एक यह था कि हमें कराची के मसीही समुदाय से मिलने के लिये ले जाया गया। और मैं अब भी उस शारीरिक बिमारी की भयंकर दशा को स्मरण करता हूँ जब कि मैंने वहाँ गन्दगी, गरीबी और दूषित हालत देखा।

गलियों में गन्दा पानी बह रहा था। वे बाहर खुले में शौच करने जाते थे। और यह पाकिस्तान के लोगों को मसीहियत की यही तस्वीर प्रस्तुत की जाती थी। यह उन पर ठीक बैठता था, आप समझे। वे उन्हें पूरी तरह दूर करना नहीं चाहते थे, वे मसीहियत के ऊपर इस्लाम की श्रेष्ठता साबित करना चाहते थे। उदाहरण के लिये, मुसलमान कभी भी शौचालय साफ नहीं करते थे। अतः पाकिस्तान में शौचालय साफ करनेवाले सारे लोग मसीही हैं। यह मूल रूप से मसीहियत का पाकिस्तानी दर्शन है। यह तो मात्र असंख्य उदाहरण में से एक उदाहरण भर है कि मुस्लिम देशों में कैसे मसीहियों और यहूदियों को पूरी तरह दबाया जाता है और तुच्छ अल्पसंख्यक हैं। किसी मसीही की शपथ इस्लामी कचहरी में स्वीकार नहीं किया जाता है। मुस्लिम के विरुद्ध मसीही का सबूत स्वीकार नहीं किया जाता है।

यह सच है कि इस्लाम कभी भी सर्वनाश जैसी भयावह अपराध का दोषी नहीं रहा है परन्तु उसका तेरह सदियों तक मसीहियत के दमन और अवमानना का इतिहास रहा है। आपमें से जो लोग इस बात की समझ नहीं रखते कि वे कैसे मसीहियों को अपमान भरी दृष्टि से देखते हैं उन्हें यह समझना कठिन है। आप देखें, जिन बातों को हम मसीही विरासत और परंपराओं के कारण श्रेष्ठ समझते हैं, जैसे दया और क्षमा, मुसलमानों के लिये वे कमजोरी भर हैं। आप देखें, मध्यपूर्व में वर्तमान स्थिति क्या है; पश्चिमी राजनीतिज्ञ, भले ही वे मसीही न हों उनका मसीही दृष्टिकोण होता है। उनकी एक पृष्ठभूमि होती है। वे करुणा, शान्ति, क्षमा के बारे में बात करते हैं। मुसलमानों के लिये यह मूर्खता है। मुस्लिम सोच के अनुसार बदला लेना पवित्र कार्य है। मैं पूरी तरह भिन्न आत्मा को सामने लाना चाहता हूँ क्योंकि यह हमेशा प्रगट नहीं होता है।

अब जैसे कि मैं यह बताता हूँ, इस्लाम में, उनमें से अधिकांश चिन्ह पाए जाते हैं। यह पुराना और नया नियम के साथ प्रारंभ हुआ इसने दावा किया यह परमेश्वर के उस प्रकाशन का परिणाम है। परन्तु यह मसीही विश्वास के मूलभूत सिद्धान्तों की कुछ बातों को ठुकराता है। यह क्रूस पर यीशु के प्रायश्चितकारी मृत्यु का इन्कार करता है। मुहम्मद ने सिखाया कि यीशु की मृत्यु नहीं हुई थी। एक स्वर्गदूत आया और उसे मृत्यु से पहले आत्मा बनाकर क्रूस से दूर ले गया। क्योंकि मृत्यु नहीं हुई, इसलिये प्रायश्चित नहीं है और चूँकि प्रायश्चित नहीं है इसलिये क्षमा नहीं है। और मुस्लिमों के लिये कभी भी पापों की क्षमा का कोई आश्वासन नहीं है।

दूसरा, और कट्टर तीव्रता के साथ वे इस बात का इन्कार करते हैं कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है। आप मुसलमानों से कह सकते हैं कि यीशु एक नबी है और वे आपकी बात सावधानी से सुनेंगे। वास्तव में, कुरान यीशु को एक नबी, और तो और एक बचाने वाला, एक मसीह मानती है। परन्तु जब आप कहते हैं कि वह परमेश्वर का पुत्र है, तो आप सबसे कट्टर तीव्र विरोध का सामना करते हैं। उस सुप्रसिद्ध मस्जिद में जिसे डोम ऑन् द रॉक कहते हैं, जो कि तत्कालिक सुलैमान के मन्दिर के स्थान पर बनाया गया है, अरबी भाषा में दो बार लिखा गया है कि परमेश्वर को किसी पुत्र की जरूरत नहीं है। जब तक इससे आपका सामना नहीं होता है, तब तक इस पर विरोध की तीव्रता का आपको अनुभव नहीं होगा।

और तब जैसा कि मैंने कहा, यह परमेश्वरत्व में पिता, पुत्र के संबन्ध का इन्कार करता है, तो आप देखें, यह रोचक बात है ये दोनों धर्म जिन्हें हमने देखा, यहूदी धर्म और इस्लाम का प्रादुर्भाव मध्यपूर्व से हुआ है। यदि आप इस्राएल में भ्रमण में जाएँ और आपके पास एक मार्गदर्शक हो तो वे एक बार आपसे यह कहेंगे कि मध्यपूर्व तीन एकेश्वरवादी धर्मों का प्रारंभिक स्थल है: यहूदी धर्म, मसीहियत और इस्लाम।

यह मेरा अनुमान है और मैं इसे सोचने के लिये आपके सामने रखता हूँ कि ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा ढोंगी मसीही कलीसिया में से यीशु का नाम दूर करने में सफल हो जाएगी। अन्ततः, हमारे पास यीशु के बिना एक मसीहियत होगा। यह एक नैतिक प्रणाली, एक वैधानिक प्रणाली, एक ऐसी प्रणाली होगी जिसमें सब प्रकार के प्रतियोगितायें और धर्म होंगे परन्तु यीशु नहीं होगा। और आप देखें, एक बार जब आपने यीशु को दूर कर लिया, फिर आप यहूदी धर्म, मसीहियत और इस्लाम के संश्लेषण के लिये मार्ग खोल दिया। मैं यह सोचने के लिये प्रवृत्त हूँ कि ख्रीष्ट विरोधी एक ऐसे धर्म का प्रारंभ करेगा जो यहूदी धर्म, इस्लाम और स्वधर्मत्यागी मसीही को एक करके बनाया जाएगा। मुझे लगता है, कि हम उसकी ओर ही जा रहे हैं। जब आप इस पर विचार करते हैं कि हाल ही के वर्षों में पोप और केन्टरबरी के आर्चबिशप दोनों ने मसीही कलीसियाओं में समारोह आयोजित किए हैं जहाँ इस्लामी पुरोहित और सभी प्रकार के हिन्दु, अमरिकी भारतीयों का एक साथ भाइयों के रूप में स्वागत किया गया। देखिए, आप समाचार पत्र में इस विषय में पढ़ सकते हैं परन्तु यह ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा है। इसका उद्देश्य यीशु को दूर करना है। वह ठोकर का कारण है। क्रूस ठोकर का कारण है। क्रूस पर यीशु को दूर कर दो और मसीहियत सब प्रकार के धर्मों के साथ शामिल हो सकता है और मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूँ कि हम उस ओर बढ़ रहे हैं, यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। मुझे लगता है कि हमें अपने विचारों और इन बातों के प्रति अपनी पहुँच में बहुत सावधान होना चाहिए। क्योंकि मुझे लगता है धोखा देनेवाली आत्मा कार्यरत है।

तब जैसा कि मैंने कहा, बहुत से कमतर ख्रीष्ट विरोधी व्यक्ति या प्रणालियाँ हो सकती हैं। उदाहरण के लिये, लगभग तीस वर्षों पूर्व मैं शैक्षणिक कार्य से केन्या में था। और एक प्रकार से मैं व्यक्तिगत रूप से केन्या के प्रथम राष्ट्रपति जेमो केन्याता का बहुत अधिक आदर करता हूँ। परन्तु केन्या की स्वतन्त्रता प्राप्ति के युग के दौरान जिसे वे माउ माउ (आपको शायद माउ माउ शब्द याद होगा) उत्थान कहते थे, माउ माउ के अनुयायियों ने उन सभी मसीही भजनों को ले लिया जो उन्हें मिशनरियों ने सिखाया था और यीशु के स्थान पर जोमों लिख कर उसे बदल दिया। तो यह पुनः ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा का एक सामान्य सा उदाहरण है। मैं नहीं कहता कि जोमों एक ख्रीष्ट विरोधी था, मुझे लगता है कि कुछ बातों में वह अच्छा व्यक्ति था यद्यपि वह कभी भी एक मसीही नहीं था। परन्तु मैं सोचता हूँ उसने एक अच्छा काम किया; मैं उसके आलोचकों की पंक्ति में खड़ा होना नहीं चाहता हूँ, परन्तु जो आत्मा कार्यरत था वह ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा था।

अब आइए, ख्रीष्ट विरोधी में ख्रीष्ट विरोधी की आत्मा का प्रगटीकरण पर आएँ। अब हम कुछ ऐसी बात देख रहे हैं जो कि जहाँ तक मैं जानता हूँ अब भी भविष्य की बात है। यदि यह भविष्य की बात नहीं है तो मैंने इसे अब तक पाया नहीं है। अतः, हमेशा गलती की संभावना बनी रहती है, और मैं किसी भी प्रकार से यह दावा करते हुए व्यवस्था को स्थापित नहीं कर रहा हूँ कि सब कुछ वैसा ही होगा जैसे मैं प्रस्तुत करता हूँ। परन्तु मैं आपको धर्मशास्त्र के इन महत्वपूर्ण पदों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ ताकि कम से कम आप उनसे अनभिज्ञ न रहें। ताकि आप अनजान न रहें कि शैतान क्या योजना बना रहा है और कुछ हद्द तक इस बात का अनुमान लगाने योग्य हों कि वह अपनी योजना की पूर्ति में कहाँ तक पहुँचा है।

सबसे पहले हम 2 थिस्सलुनीकियों अध्याय 2 निकालेंगे जो मुख्य रूप से ख्रीष्ट विरोधी के प्रगट होने, प्रकाशन और अभिव्यक्ति की बात करता है। यह प्रभु के वापस आने की तैयारी के बारे में भी बात करता है। और निश्चय ही, वे बहुत ही निकटता से एक दूसरे में पिरोए गए हैं क्योंकि प्रभु के वापस आने से पहले अन्तिम शैतानी कार्य ख्रीष्ट विरोधी होगा। वास्तव में, पौलुस कहता है, 2 थिस्सलुनीकियों 2ः8:

तब वह अधर्मी प्रगट होगा जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से मार डालेगा और अपने आगमन के तेज से भस्म करेगा।

व्यक्तिगत रूप से मेरा हीरो बनने का कोई उद्देश्य नहीं है। मैं इस बात के लिये तैयार हूँ कि ख्रीष्ट विरोधी के साथ यीशु व्यवहार करे। मैं सोचता हूँ कि केवल वही है जो कर सकता है। मैं सोचता हूँ कि अपने आगमन पर सच्चा मसीह झूठे मसीह के विषय में काम करेगा। मैं सोचता हूँ यह उसके आने के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। यह ख्रीष्ट विरोधी को पराजित करना, बाहर करना और फेंक देने के लिये है।

यदि हम 2 थिस्सलुनीकियों 2 अध्याय 1 पद पर आएँ, और तीसरे पद तक पढ़ें:

हे भाइयों, तुम अपने प्रभु यीशु मसीह के आने (यह इस भाग का विषय है और आना शब्द के लिये यहाँ पर यूनानी में परोसिया प्रयोग किया गया है जिसे सामान्य तौर पर यीशु मसीह के द्वितीय आगमन के लिये प्रयोग किया जाता है), और उसके पास अपने इकट्ठे होने के विषय में तुम से बिनती करते हैं (कलीसिया जिसे उससे मिलने के लिये उठा लिया जाएगा)। कि किसी आत्मा (जो कि एक झूठी भविष्यद्वाणी या झूठा शिक्षक है), या वचन, या पत्री के द्वारा जो कि मानों हमारी ओर से को, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुंचा है, तुम्हारा मन अचानक अस्थिर न हो जाए (परेशान हो जाएँ, धोखा न खाएँ); और न तुम घबराओ। किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्योंकि वह दिन न आएगा, जब तक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो।

जैसा कि कुछ भविष्यद्वाणी के सन्देश प्रसारित किए जाते हैं, जैसे, हाल ही में चल रहा था कि यीशु सितम्बर 12 को आ रहा है। मुझे नहीं मालूम कि यह ब्रिटेन में प्रसारित हुआ कि नहीं, परन्तु मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि संयुक्त राज्य में कई मसीहियों ने इस पर विश्वास किया। इस बात ने मुझे कम से कम अमेरिकी मसीहियों की विस्मित कर देनेवाली अथाह अज्ञानता से आश्चर्यचकित कर दिया। और मुझे नहीं मालूम कि अन्य देशों में मसीही अच्छे होते हैं; मैं सचमुच यह कहने के लिये तैयार नहीं हूँ। मेरा मतलब है, सैकड़ों ऐसे लोग थे जो इस शिक्षा पर भरोसा करते थे, जिसने कहा कि यीशु रोज होशन्ना पर आ रहा है, जो कि यहूदी नववर्ष है। मुझे अनुमान नहीं है कि वे सच में आश्चर्यचकित थे कि वह नहीं आया था। यही अद्भुत बात है। पूरी तरह गलत होने के बावजूद वे अब भी लोगों पर विश्वास रख सकते हैं।

किसी तरह, मैं यह समझता हूँ कि पौलुस ने ये शब्द क्यों लिखे? ‘‘किसी भी आत्मा, या वचन, या पत्री के द्वारा .... तुम्हारा मन अस्थिर न हो जाए।’’ देखिए, शैतान का तरीका कि वह लोगों को पौलुस के नाम से चिट्ठियाँ लिखने के लिये और उन पर पौलुस के नाम से हस्ताक्षर करने के लिये सक्षम था, मानो वे पौलुस के द्वारा लिखी गई हों।

एक बार मेरा एक मित्र था, एक सेवक और वास्तव में वह अब भी मेरा मित्र है। और जब वह एक कलीसिया में पासबान था तो अपना स्वयं की शिक्षा का टेप प्रसारित किया करता था (वह एक अच्छा भाई है और यदि मैं उसका नाम बताऊँ तो आप में से बहुत से लोग उसको जानेंगे)। एक निश्चित समूह था जिसके सिद्धान्त बहुत ही भ्रान्तिपूर्ण थे। उन्हें यह टेप मिला, उन्होंने इस टेप के दूसरे खाली तरफ उनसे बिना कहे अपनी स्वयं की शिक्षा रिकॉर्ड किया और उन्हें वापस लौटा दिया। और उसके बाद जब वे पास्टर की शिक्षा सुन रहे थे तो वे उस पूरी तरह भ्रान्तिपूर्ण शिक्षा को भी सुन रहे थे। यह कल्पना मत कीजिए कि शैतान के पास नस नहीं है, उसके पास अन्तहीन नस हैं। उसके नस की कोई सीमा नहीं है।

यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुंचा (तब भी कुछ लोग सिखा रहे थे कि वह आ चुका है) तुम्हारा मन अचानक अस्थिर न हो जाए और न तुम घबराओ। किसी रीति से किसी के धोखे में न आना (और मैं आप सबसे कहता हूँ, कोई आपको किसी रीति से धोखा न दे), क्योंकि वह दिन न आएगा जब तक धर्म का त्याग न हो।

‘‘अस्थिर हो’’ के लिये यूनानी में अपोस्टेसिया है, जिसका अर्थ स्वधर्म त्याग होता है। इसका अर्थ जान बूझकर प्रकाशित सत्य का इन्कार करना और मुझे लगता है, हम स्वधर्म त्याग के दिनों में जीवित हैं। मैं कुछ देर बाद उस पर आऊँगा।

जब तक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष (व्यवस्थाहीन व्यक्ति) अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो।

तो, ख्रीष्ट विरोधी के दो और नाम है। वह व्यवस्थाहीनता का पुरुष है। वह परमेश्वर के विरुद्ध मनुष्य के विद्रोह और परमेश्वर के व्यवस्था की त्याग का सर्वोच्च प्रगटीकरण है और वह विनाश का पुत्र है, वह जो कि खोई हुई अनन्तता के लिये ठहराया हुआ है। यह रोचक बात है कि नया नियम में केवल एक और व्यक्ति को विनाश का पुत्र कहा गया है, यहूदा इस्करियोती। वह एक झूठा प्रेरित था।

तो हम यहाँ पुनः यह प्रयोग देखते हैं कि यह व्यक्ति किसी दिन मसीही कलीसिया के साथ सहभागिता प्रारंभ करेगा। व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि वह चमत्कारी होगा, अति चमत्कारी होगा। मैं सच में यह कहता हूँ।

जो विरोध करता है और हर एक से जो परमेश्वर या पूज्य कहलाता है अपने आपको बड़ा ठहराता है।

हम कुछ समय के लिये उससे आगे नहीं बढ़ेंगे। परन्तु अब हमारे पास एक ही प्राणी के लिये तीन विभिन्न नाम हैं: ख्रीष्ट विरोधी, व्यवस्थाहीनता का पुरुष, और विनाश का पुत्र। और प्रकाशितवाक्य 13 में एक और महत्वपूर्ण नाम है। आइए, प्रकाशितवाक्य 13 निकालें, पद 1 के मध्य ये शुरू करें। यह एक दर्शन का भाग है जो यूहन्ना को मिला था।

और मैंने एक पशु को समुद्र में से निकलते हुए देखा, जिस के दस सींग और सात सिर थे; और उसके सिरों पर निन्दा के नाम लिखे हुए थे। और जो पशु मैंने देखा, वह चीते की नाई था; और उसके पांव भालू के से, और मुंह सिंह का सा था; और उस अजगर ने अपनी सामर्थ, और अपना सिंहासन, और बड़ा अधिकार, उसे दे दिया।

अजगर कौन है? शैतान, हाँ सही। यह पूरी तरह स्पष्ट है।

तो कोई व्यक्ति है जिसका उत्थान होनेवाला है जिसे शैतान अपनी शक्ति देगा। इस व्यक्ति को शैतान अपनी शक्ति क्यों देगा? क्योंकि यह इस व्यक्ति को संपूर्ण मानवजाति पर अधिकार पाने में सहायता करेगा और संपूर्ण मानवजाति को उसे एक बात को करने के लिये बाध्य करेगा जो शैतान सबसे अधिक चाहता है: उसकी आराधना करना। यह उसका लक्ष्य है, वह धैर्य पूर्वक और लगातार कई सदियों से जिस पर कार्य करता रहा है और वह इस समय अपने लक्ष्य की पूर्ति के बहुत ही करीब है:

और मैंने उसके सिरों में से एक पर ऐसा भारी घाव लगा देखा, मानो वह मरने पर है; फिर उसका प्राणघातक घाव अच्छा हो गया, और सारी पृथ्वी के लोग उस पशु के पीछे पीछे अचंभा करते हुए चले।

यहाँ पर एक प्रकार से झूठा पुनरूत्थान है। मुझे नहीं मालूम कि इस व्यक्ति की हत्या होगी; वह प्रगट रूप से मर जाएगा और पुनः जीवन प्राप्त करेगा। यदि हत्या के बाद जॉन् केनेडी पुनः जीवित होते, तो अमेरिका में यह हो चुका होता। बहुत से लोग होते जिन्होंने अपने आपको जॉन् केनेडी के हाथों बेच दिया नहीं होता। आगे पद 4 देखें:

और उन्होंने (पृथ्वी पर के लोगों ने) अजगर (वह कौन है? शैतान) की पूजा की, क्योंकि उस ने पशु को अपना अधिकार दे दिया था और यह कहकर पशु की पूजा की, कि इस पशु के समान कौन है?

यह चौथा शीर्षक है: पशु, जंगली पशु। यह यूनानी भाषा में एक शब्द है, जिसका अर्थ है जंगली प्राणी। चीता या शेर या ऐसा कोई शिकार करनेवाले पशुओं में से एक।

अब प्रकाशितवाक्य में दो व्यक्तियों के बीच में एक बहुत ही जानबूझकर किया गया विरोधाभास है। जंगली पशु जो कि शैतान का शासक है; और मेम्ना जो परमेश्वर का शासक है। मैं सोचता हूँ कि हममें से हर एक के लिये यह मन में रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि हम पशु का स्वभाव उत्पन्न नहीं करते हैं, परन्तु हमें मेम्ने का स्वभाव उत्पन्न करना है। आप देखते हैं, प्रभु यीशु मसीह की सेवा के प्रारंभ में पवित्र आत्मा उतरा था और किसी पर बैठने की खोज कर रहा था। वह किस प्रकार की प्रकृति की खोज कर रहा था? मेम्ना, हाँ सही। यूहन्ना बपतिस्मादाता ने कहा, ‘‘देखो, परमेश्वर को मेम्ना’’ और उस पर पवित्र आत्मा उतरा। मुझे लगता है, यह महान मुद्दों में से एक है जो हम सब के लिये है। क्योंकि वर्तमान संसार में सब कुछ इतना प्रतियोगी है, इतना तीव्र है, लोग इतने अतिवादी और हिंसक हैं कि यह बहुत आसान है कि पशु का स्वभाव हममें घुसपैठ करना प्रारंभ करे। परन्तु परमेश्वर हम में मेम्ने का स्वभाव चाहता है।

आइए, प्रकाशितवाक्य 5 में मेम्ने की एक छोटी तस्वीर देखें। हम बहुत सारा बात पढ़ सकते थे परन्तु हम बहुत नहीं पढ़ेंगे। 5 पद से शुरू करते हुए। यूहन्ना ने परमेश्वर के हाथ में पुस्तक का दर्शन देखा था और वहाँ पुस्तक खोलने योग्य कोई न मिला था। अतः यूहन्ना रो रहा था।

तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहर तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है (यह नाटकीय है क्योंकि यूहन्ना एक सिंह को ढूंढ रहा था और उसने क्या देखा)। और मैंने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखाः उसके सात सींग और सात आंखें थी; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं।

तो, सिंह एक मेम्ना है। यह जान बूझकर किया गया विरोधाभास है। तो परमेश्वर के नियुक्त शासक में पशु का स्वभाव नहीं है, उसमें मेम्ने का स्वभाव है। और तो वह सबसे अधिक ऊँचा किया गया है क्योंकि उसने अपना प्राण दिया है। चूँकि उसने अपने आपको दीन किया। चूँकि वह दया, करुणा के मार्ग पर चला, क्योंकि उसने अपनी गिरफ्तार करनेवालों और अपने सतानेवालों का विरोध नहीं किया और मैं सच में विश्वास करता हूँ कि इन दिनों कलीसिया इसी स्वभाव का प्रदर्शन करने जा रही है। और मैं नहीं मानता कि यह आसान है।

मैं आपको यह सलाह देता हूँ: यह एक लोकप्रिय सलाह नहीं है। मुझे लगता है कि कलीसिया उसी प्रकार अपने घर जा सकती है जैसे उसका प्रभु गया है, क्रूस के मार्ग से। मुझे लगता है कि हम जीतेंगे। जैसा कि भजन कहता है: ‘‘जब हम दुर्बल होते हैं, तब परमेश्वर की सामर्थ्य हमारी दुर्बलता में सिद्ध होती है।’’ मुझे लगता है कि यह एक पाठ है जिसे हम सीखने जा रहे हैं। और आज कलीसिया में बहुत सी शिक्षायें हैं जो सब कुछ बताती है कि हम क्या कर सकते हैं: अपनी सारी सामर्थ्य में और वह सब कुछ जो विश्वास कर सकता है, परन्तु मुझे लगता है कि यह सचमुच स्वाभाविक व्यक्ति, शारीरिक स्वभाव को बढ़ाना है, और इससे पहले कि हमारे लिये परमेश्वर का जो उद्देश्य है उसमें हम प्रवेश करें, उस स्वभाव को क्रूस पर चढ़ाना है।

हम मेम्ने की आराधना में बने रह सकते हैं परन्तु मुझे लगता है कि आप अपने लिये इसे पढ़ सकते हैं। आइए, अब प्रकाशितवाक्य 13 पर वापस जाएँ और इस वर्णन के कुछ हिस्सों पर सरसरी नजर डालें -

खैर कोई भी उसके साथ युद्ध नहीं करता है। उसके साथ ऐसा विचार करना भी आत्महत्या करना होगा। मैं नहीं कहता कि ऐसा होगा परन्तु जो बात मैं आपको बताना चाह रहा हूँ वह उस स्थिति के बारे में है, जिसका चित्रण यहाँ पर किया गया है।

और उस ने परमेश्वर की निन्दा करने के लिये मुंह खोला, कि उसके नाम और उसके तम्बू अर्थात् स्वर्ग के रहनेवालों की निन्दा करे।

वह परमेश्वर को खुली चुनौती देनेवाला है। वह गुप्त शत्रु नहीं है। वह अपनी मुट्ठी को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सम्मुख झटकता है। और पुनः हम में इस प्रकार की एक मनोवृत्ति पाई जाती है जो कि आज हम से बहुत करीब है।

और उसे यह अधिकार दिया गया (किसके द्वारा? मैं अनुमान लगाता हूँ कि परमेश्वर के द्वारा, एक डरावना विचार), कि पवित्र लोगों से लड़े, और उन पर जय पाए, और उसे हर एक कुल, और लोग, और भाषा, और जाति पर अधिकार दिया गया।

मेरा अनुमान है, यह हम हैं, मैं आशा करता हूँ कि यह हम हों। और फिर भी जब मैं कहता हूँ कि मैं आशा करता हूँ कि यह हम हैं, तो यह एक प्रकार की अस्पष्ट आशा है, है न? मैं एक सन्त होना चाहता हूँ, परन्तु क्या मैं चाहता हूँ कि पशु मेरे साथ युद्ध करे? अब आप दोनों विकल्पों के बीच चुनाव कर सकते हैं।

उसे सन्तों के साथ लड़ने और उस पर विजय पाने दिया गया।

देखिए, मैं आपके विचारों में यह बात बिठाना चाहता हूँ कि मसीहियत एक आसान विजय नहीं है। वास्तव में मुझे लगता है कि एक प्रकार से हमारे विश्वास में विजय पाने की इच्छा जुड़ी हुई है, पराजित परन्तु सचमुच पराजित नहीं।

आप देखें, यीशु इस संसार के मत के विषय में बहुत कम चिन्ता करता है। क्या आपने कभी इस विषय में सोचा है? उसकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति क्या थी? क्रूस पर एक लाश के समान। और उसने कभी उस प्रगटीकरण को सुधारने का प्रयास नहीं किया है और वह अपने विश्वास करनेवालों को छोड़कर कभी पुनः प्रगट नहीं हुआ। हम संसार के विचार की कितना अधिक परवाह करते हैं? क्या हम इससे अधिक परवाह करते हैं? पौलुस ने कहा: गलातियों 6ः14

पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।

थोड़ा और आगे चलें:

और पृथ्वी के वे सब रहनेवाले जिन के नाम उस मेम्ने की जीवन की पुस्तक में लिखे नहीं गए, जो जगत की उत्पत्ति के समय से घात हुआ है, उस पशु की पूजा करेंगे।

यह एक नाटकीय कथन है। उन लोगों को छोड़कर जिन्हें परमेश्वर ने अपने लिये चुना है, जिनके नाम जगत की उत्पत्ति से मेम्ने के जीवन की पुस्तक में लिखे गए हैं, सारी मानवजाति उसकी आराधना करेंगे।

तब हम इस दूसरे अति पापमय व्यक्ति को देखते हैं जिस पर हम यहाँ बहुत संक्षिप्त रूप में नजर डालेंगे। दूसरा पशु। अब हम पद 11 पर जा रहे हैं।

फिर मैंने एक और पशु को पृथ्वी में से निकलते हुए देखा, उसके मेम्ने के से दो सींग थे; और वह अजगर की नाईं बोलता था।

वह मेम्ने के समान प्रगट हुआ परन्तु उसकी आवाज वास्तव में अजगर की सी थी। मुझे लगता है, कि यह एक धर्म संबन्धी व्यक्ति है। सामान्य रूप से कहें तो उसे झूठा भविष्यद्वक्ता कहा गया है। और मुझे लगता है कि झूठा धर्म अपने आपको झूठे मसीह के साथ पंक्तिवद्ध करने जा रहा है। और मैं आपको सलाह देता हूँ कि यह वैसे भी हो रहा है। उदाहरण के लिये, चीन में जहाँ पर बिशप डिन्ग के अधीन वर्तमान समय में आधिकारिक तीन स्व-आन्दोलन ने अपने आपको पूरी तरह नास्तिक साम्यवादी शासन के साथ मिला दिया है और वास्तविक मसीहियों का मुख्य सतानेवाला है। मुझे लगता है, सोबियत रूस में भी बहुत कुछ ऐसा ही हुआ, जहाँ पर रशियन ऑर्थोडॉक्स कलीसिया का प्रमुख ने पूरी तरह स्तालिन का समर्थन किया और अब यह निर्णय लेने में परेशान हैं कि इस विषय में क्या कहें।

देखिए, मुझे लगता है, राजनैतिक शासक धर्म के महत्व को मानेंगे और अपनी ताकत के समर्थन के लिये धर्म के गलत स्वरूप को सहयोजन कर लेंगे।

और यह उस पहिले पशु का सारा अधिकार उसके साम्हने काम में लाता था, और पृथ्वी और उसके रहनेवालों से उस पहिले पशु की जिस का प्राणघातक घाव अच्छा हो गया था, पूजा कराता था।

हमारे पास उसमें आगे जाने के लिये समय नहीं है परन्तु झूठी त्रिएकता को देखिए। मध्ययुगीन प्राचीन कलीसिया जिसने लतीनी भाषा का उपयोग किया, वह डयाबोलोस सिनियस डेई ‘‘शैतान परमेश्वर का अनुकरण करता है’’ कहा करता था। वह वास्तव में कभी कुछ नया नहीं करता है। वह केवल इतना कर सकता है कि परमेश्वर की कृति की बुरी नकल करे। तो एक झूठी त्रिएकता है शैतान, पशु और झूठा भविष्यद्वक्ता। और वे एक ऐसा रूप प्रस्तुत करते हैं जो एक प्रकार से झूठी कलीसिया है।

आइए, समाप्त करते हुए जल्दी से 2 थिस्सलुनीकियों 2 अध्याय पर चलें। और अब हम उस मुख्य पद पर चलेंगे, पद 3:

किसी रीति से किसी के धोखे में न आना क्योंकि वह दिन न आएगा, जब तक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरूष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो।

अब जैसा कि मैंने कहा, ‘‘त्याग न हो ले’’ एक यूनानी शब्द है जिसमें हमें अंग्रेजी शब्द ‘‘धर्मत्याग’’ मिलता है और उसका प्राथमिक अर्थ प्रगट सत्य का जान बूझकर किया गया तिरस्कार होता है। मैं आपको सलाह देता हूँ कि आज के संसार में आप धर्मत्याग से घिरे हुए हैं। सदियों से कलीसिया के पुरुष और अगुवे रहे हैं जो दुष्ट, अनैतिक, लालची रहे हैं परन्तु उन्होंने खुलकर मसीही विश्वास के महान मूल सत्यों का इन्कार नहीं किया है। वास्तव में वे सत्य ऐसे माध्यम रहे हैं जिनका उपयोग उन्होंने अपनी सामर्थ्य को बनाए रखने में की है। परन्तु इस सदी के प्रारंभ में मैं सोचता हूँ शायद जर्मनी में आज कलीसियाई अगुवे, कलीसिया के अधिकृत प्रतिनिधि पाए जाते हैं जिन्होंने मसीही विश्वास कि सभी महान मूल सत्यों का इन्कार किया है: यीशु का ईश्वरत्व, कुँवारी से जन्म, उसकी प्रायश्चितकारी मृत्यु, उसका शारीरिक पुनरूत्थान और उसका वापस आना। और उनमें से बहुत से लोगों ने वर्तमान मसीही कलीसिया में आदर का स्थान पा लिया है और पा रहे हैं। ब्रिटेन में जैसा कि आप जानते हैं, मैं सोचता हूँ एंग्लिकन कलीसिया के दो-तिहाई बिशप ने उन कथनों के साथ अपने आपको समायोजित कर लिया है, जिसे मूल रूप से दढ़म के बिशप ने कहा था। मैं किसी पर लक्ष्य नहीं कर रहा हूँ, मैं केवल बता रहा हूँ, यह इस सदी का भविष्य है, जो कि मुझे लगता है किसी भी पिछली सदी में नहीं हुआ है। मुझे लगता है कि हमने झूठी शिक्षा का सामना कर लिया है। और आप कहते हैं, कलीसिया त्रुटि के विरुद्ध तटबन्ध है। तो शैतान को अपनी त्रुटि के साथ प्रवेश करने से पहले कलीसिया को भेदना होगा।

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