जादू-टोने का स्वभाव

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1989
Last Updated: अगस्त 2026
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डेरिक प्रिंस की पुस्तक 'द नेचर ऑफ विचक्राफ्ट' में अदृश्य शक्तियों के खिलाफ हम सभी के दैनिक संघर्ष को जानें। विद्रोह का अर्थ और शैतान के राज्य से उसका संबंध समझें, साथ ही बाइबिल के दृष्टिकोण से जादू-टोने का खुलासा करें। 'द एनिमीज वी फेस' श्रृंखला के भाग 2 में आत्मिक युद्ध के बारे में जानने के लिए वचन को अपनी मार्गदर्शिका बनाएं।
Transcript
यह “जिन शत्रुओं का हम सामना करते हैं” विषय पर हमारी चर्चा की श्रृंखला में दूसरी कड़ी है। हमारी पिछली चर्चा में हमने शैतान के राज्य की प्रकृति और संरचना पर विचार किया और देखा कि और हमने देखा कि उसका राज्य दो स्तरों पर संचालित है। ऊपरी स्तर स्वर्ग में, स्वर्गीय क्षेत्र में कहीं है जो कि परमेश्वर का स्वर्ग नहीं है और यह दृश्य स्वर्ग नहीं है। और इस ऊपरी में ऐसे स्वर्गदूत हैं जो परमेश्वर के विरोध में हैं। और तब निचले स्तर में ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर और मसीह यीशु के धर्मी शासन के अधीन नहीं हैं। जैसा कि मैं ने बताया कि वह मूल शब्द जो उन सभों की और इशारा करता है वह विद्रोह है। चाहे वे स्वर्गदूत हों या मनुष्य हों, वे सब परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह में हैं।
और तब हमने देखा कि क्या यूनान क्या रोम या कोई भी राष्ट्र, सारा मूर्तिपूजक संसार स्वर्गदूतों के शैतान के राज्य के नामकरण के विभिन्न तरीके हैं। और वे सभी शैतानी स्वर्गदूत हैं जो मूर्तिपूजक धर्मों और मूर्तिपूजक समाजों द्वारा पूजी गई है। इन शैतानी स्वर्गदूतों से संपर्क करने के लिए जो मार्ग अपनाया जाता है उसे विशेष रूप से जादू टोना कहा जाता है। आप कह सकते हैं कि जादू टोना पतित मानवता का धर्म है। इसके अनगिनत रूप और संस्कार हैं परंतु इसकी यह सामान्य विशेषता है कि इसके पास विभिन्न आत्मिक प्राणियों से संपर्क करने के विभिन्न तरीके होते हैं। कई अलग अलग संस्कार होते हैं। उनमें से ज्यादातर किसी न किसी प्रकार कामुक या क्रूर या अपवित्र करने वाली हैं। वे बातें जिन्हें मनुष्यों ने सदियों से किसी भी तरह शैतान और उसके राज्य का इष्टभाजन बनने के लिए किया है, यह वास्तव में सोचने में भयानक हैं।
मैं ने नस्लीय समूह के एक उदाहरण के रूप में अमेरिकी भारतीयों की चर्चा की जिनमें से अधिकांश शैतान की अधीनता से बाहर नहीं आ पाए हैं। और बस रुचि की खातिर, मैं नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका में पढ़ रहा था, कि वे अपने मुख्य अनुष्ठानों में से एक में, जिसे वे “सूर्य नृत्य” कहते हैं, काँटों को अपनी त्वचा में जकड़ते और फिर उन काँटों से लटकते हैं और उनकी त्वचा का एक बड़ा भाग फट जाता है। अपने ईश्वर की पूजा करने के लिए वे ऐसा करते हैं।
सारी पृथ्वी पर ऐसी पूजा के अनगिनत रूप हैं। जैसा कि मैंने कहा, किसी भी समाज में जाइए उसमें अब भी उनकी आदिम प्रकृति के चिन्ह दिखाई देते हैं और हर कहीं प्रत्येक भाषा में आप अलग-अलग नामों के साथ एक ही प्रकार के व्यक्ति को पाएँगे और यह झाड़फूँक करनेवाला होता है। और ऐसे बहुत से समाजों में सचमुच सबसे शक्तिशाली व्यक्ति झाड़फूँक करनेवाला होता है।
हमारे पास बाइबल में भी इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। यह कहता है कि फिलिप्पुस सामरिया गया और सामरिया के शहर में प्रचार किया। परन्तु वहाँ एक ऐसा व्यक्ति था जिसने पूरे शहर को अपने अधीन किया हुआ था। उसका नाम शिमौन था। वह एक जादूगर था जो कि झाड़फूँक करनेवाला होता है। और वचन कहता है कि उसके जादू के कारण संपूर्ण शहर उससे डरता था। यह एक प्रकार से एक असाधारण स्थिति नहीं है यह आदिम समाज का एक विशिष्ट चित्र है।
अतः विद्रोह और जादूटोने के मध्य सीधा संबन्ध है। जब मैं विद्रोह कहता हूँ तो मेरा तात्पर्य परमेश्वर के विरोध में विद्रोह है। 1 शमूएल 15:23 में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है। ये वे शब्द हैं जो शमूएल नबी द्वारा राजा शाऊल से तब कहे गए, जब वह स्वयं विद्रोही बन गए थे। उसने अपने ऊपर लगे विशेष आरोप और शमूएल नबी द्वारा परमेश्वर की ओर से दी गई आज्ञा को मानने से इन्कार कर दिया था। यहाँ शमूएल उसके व्यवहार के प्रति परमेश्वर के मूल्यांकन को बता रहा है और वह कहता है (आप पद 22 पढ़ सकते हैं):
शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम (और तब वह आगे जादूटोने की परिभाषा बताता हैद्ध है। देख बलवा करना और भावी कहनेवालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उस ने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है।
यहाँ शमूएल दो प्रकार की तुलनाएँ करता है। विद्रोह झाड़फूँक का प्रतिरूप हैय कठोरता मूर्तिपूजा का प्रतिरूप है। मैं मूर्तिपूजा पर और लम्बी बातचीत करने नहीं जा रहा हूँ लेकिन मुझे एक तरीका बताने दीजि, जिसमें कठोर व्यक्ति मूर्तिपूजक होता है। एक कठोर व्यक्ति मूर्तियों को अपना स्वयं का विकल्प बनाता है और यह मूर्तिपूजा का एक रूप है। आप देखें वतर् मान समय में कलीसिया में हमारी मनोवृति पर विचार करना बहुत रोचक है। हममें से अधिकांश ला ेग स्वीकार नहीं करेंगे कि अधिकांश लोग पीने वाले और खुलकर अनैतिक कार्य करनेवाले हैंय परन्तु कलीसिया में कितने कठोर लोग हैं? और परमेश्वर की नजरों में वे मूर्तिपूजक हैं। हम कलीसिया में किसी ऐसे व्यक्ति को स्वीकार नहीं करते जो एक लकड़ी की मूर्ति के साथ आते हैं और नीचे गिरकर कलीसिया के सामने आराधना करते हैं। हम कहते है ं कि हम इसे सहन नहीं करते। परन्तु हाय, मुझे भय है कि हम बहुत से कठोर लोगा ें को सहन करते हैं और प्रायरू हम उन्हें उसके साथ रहने देते हैं।
परन्तु आइर् ,, अब हम अपनी दूसरी तुलना में वापस आएँ। विद्रोह जादूटोने के समान ही पाप है। बहुत ही महत्वपूर्ण बात। जादूटोने का मूल विद्रोह होता है और जहाँ कहीं आप विद्रोह पाते हैं वहाँ आप जादूटोने की आशा कर सकते हैं। छुटकारे की सेवा में मैंने इस बात को जाना। उदाहरण के लिये, मैंने जाना कि यदि किसी व्यक्ति को जादूटोने की आत्मा से छुटकारा चाहिए। उन्हें अनिवार्य रूप से विद्रोह से भी छुटकारा चाहिए था। और इसके विपरीत, जहाँ आपका सामना विद्रोह की आत्मा से होता है, यह देखना अच्छा होता है कि क्या कोई जादूटोने की आत्मा भी काम कर रही है।
मुझे यूँहीं आपको बताने का प्रयास करने दीजि, कि यह कैसे आता है। आप देखें, विद्रोह परमेश्वर की वैध अधिकार का इन्कार करता है, ठीक उसी प्रकार जैसा राजा शाऊल ने परमेश्वर के वचन के अधिकार का इन्कार किया। परन्तु बिना अधिकार के आप जीवन में बहुत अधिक आगे नहीं बढ़ सकते हैं। अतः यदि आपके पास वैध अधिकार नहीं है, तो यह अवैध अधिकार के द्वारा प्रतिस्थापित होनेवाला है। और यदि आपके पास अवैध अधिकार है जो विद्रोह का समर्थन करता है वह जादूटोने की सामर्थ्य है। अतः सच में जहाँ कहीं आप अवैध अधिकार का उपयोग पाते हैं ता े अच्छा होगा कि आप जादूटोने का सामना करने के लिये तैयार हो जाएँ।
स ंयुक्त राज्य अमेरिका में 1960 के दशकों में एक स्पष्ट उदाहरण हुआ। यह विद्रोही पीढ़ी थी। उन्होंने लगभग सभी स्वीकृत अधिकारों के प्रति अपनी असहमति दिखाई-माता-पिता, कलीसिया, सरकार आदि- और वे विद्रोहियों की पीढ़ी बन गए। अब मैंने ऐसे बहुत से लोगों में काम किया है। उनमें से बहुत से जिन्होंने प्रभु से मुलाकात किया वे आज मेरे मित्र हैं। परन्तु अधिकांशतरू बिना एक भी अपवाद के वे सभी जो विद्रोह में थे वे मनोगत में चले गए, शैतानी अलौकिकता में चले गए, जादूटोने में चले गए। यह आत्मिक अनुभव का तर्क है। बहुत जल्द या देर में बिना जादूटोने के शक्ति के अधीन आ, विद्रोह में बहुत गहराई तक जड़ पकड़े रहना लगभग अस ंभव है।
यदि हम क्षणभर के लिये राजा शाऊल का उदाहरण देखें, शायद आपको वह कहानी याद होगी, उसने पकड़े गए सभी जानवरों को घात करने के विषय में शमूएल के निदर् ेश का पालन नहीं किया। और उसने उन्हें अपने पास रखा और उसने उन्हें परमेश्वर को चढ़ाने के लिये “उत्तम” कहा। परमेश्वर ने कहा, “मुझे तुम्हारे बलिदान में रुचि नहीं है क्योंकि यह अनाज्ञाकारिता में से आता है।” अब इस्राएल के राजा के रूप में शाऊल ने स्वयं इस्राएल के सारे जादूटोना करनेवालों को बाहर किया था। परन्तु अपनी मृत्यु से ठीक पहले, निराशा में, जब वह परमेश्वर से नहीं सुन पा रहा था वह स्वयं एक जादूटोना करनेवाले को बुलवाया। यह एक दुर्घटना नहीं है, यह कारण और प्रभाव है। मैं इस बात पे जोर देना चाहता हूँरू जहाँ कहीं विद्रोह होता है जल्द या बाद में वहाँ झाड़फूँक होता है। और दूसरी बात यह हैरू कि जब आप झाड़फूँक, शैतानी अलौकिकता, मनोगत को उसके सभी रूपों में सुलझाना चाहते हैं तो यदि आप केवल मनोगत को सुलझाएँगे तो आप विद्रोह के मूल कारण को नहीं सुलझाते हैं।
अब मैं आपको इस बात की एक छोटी तस्वीर देना चाहता हूँ कि झाड़फूँक क्या होता है। यह कुछ ऐसा है जिसे परमेश्वर ने मुझे तब बताया जब मैं स्नातोकोत्तर पाठ्यक्रम पूरा किया था। मैंने इसके लिये आवेदन नहीं दिया था मुझे यूँही ं प्रवेश मिल गया। मुझे और रूत को एक साथ प्रवेश मिला। मैं आपको स ंक्षिप्त रूप में बताता हूँ कि यह कैसे हुआ। हमारे विवाह का बमुश्किल एक साल ही हुआ था जब 1979 में हम स ंयुक्त राज्य के मध्य में एक सम्मेलन में थे और यह एक पारिवारिक सम्मेलन था और विषय पारिवारिक संबन्धों पर आधारित था। परन्तु बीच में एक युवक खड़ा हुआ। मुझे नहीं लगता कि मैं कभी उससे मिला था और मुझे नहीं मालूम कि वह कौन था। लेकिन उसने एक बहुत ही शक्तिशाली भविष्यद्वाणी की जो सौभाग्यवश रिकाॅर्ड हो गया जिससे मैं उसका लिखित स ंस्करण देख सका। और इस भविष्यद्वाणी में परमेश्वर ने कहा कि अब तक जो कुछ वह झाड़फूँक के विरुद्ध करता रहा है वह केवल प्राथमिक लड़ाई मात्र है। परन्तु उस समय से, 1979 से वह झाड़फूँक के विरुद्ध संपूर्ण युद्ध का , ेलान कर रहे थे और जो कारण उसने कहा वह यह है, श्चूँकि जादूटोने ने ऐसे करोड़ों लोगा ें को बन्धन में रखा है जिन्हें मैं अपने अन्तिम समय की सेना में चाहता हूँ।” और तब उसने हमसे कुछ और कहा जिसे हमने उस समय वास्तव में नहीं समझा। उसने कहा, श्यदि तुम इस लड़ाई में मेरे साथ शामिल होगे--- (और हमने जान लिया कि वह हमें शामिल हा ेने के लिये बुला रहे हैं और हम शामिल हुएद्ध तो तुम्हारा सामना ऐसे लोगों से होगा जो श्राप के अधीन हैं, जो उन परिवारों पर पीढ़ी दर पीढ़ी बना हुआ है। परन्तु तुमको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, तुम उन्हें मुक्त हो सकोगे।श् अब उस समय वह मेरे और रूत के लिये एक कथन मात्र था, परन्तु लगभग दस वर्षों के कालान्तर में हमारा सामना ऐसे हजारों लोगों से हुआ है जिनका परिवार कई पीढ़ियों से श्राप के अधीन रहा है और परमेश्वर ने, अपने अनुग्रह में होकर हमें उन्हें मुक्त करने की योग्यता दी है। यह मुझे निश्चय देता है कि यह भविष्यद्वाणी परमेश्वर की ओर से है क्योंकि इसमें एक ऐसी भविष्यद्वाणी थी जिसके विषय में हम कुछ नहीं जानते थे जो पूर्ण रीति से पूरी हुई।
तो इस प्रकार मैं झाड़फूँक के बारे में जान सका। वास्तव में, मैं ने बहुत कुछ पहले ही झाड़फूँक का सामना कर लिया था। मैं निश्चित ही एक प्रकार से सोचता हूँ, कि मैं छुटकारे की सेवा में नया था। और उन दिनों में मैं एक बहुत ही विवादास्पद व्यक्तित्व था। कुछ लोग मुझसे प्यार करते थे, कुछ लोग मुझसे घृणा करते थे परन्तु बहुत कम लोग उदासीन थे। और ऐसे बहुत से मामलों में जिन्हें मैंने सुलझाया। जिस व्यक्ति को छुटकारा चाहिए था उसमें जादूटोने की आत्मा थी।
अब उन दिनों में बहुत ही कट्टर पेन्टीकोस्टल था और मैं अब भी एक पेन्टीकोस्टल हूँ परन्तु अब उतना कट्टर नहीं, और वे लोग जिन्हें छुटकारे की आवश्यकता थी वे बहुत कुछ पास्टर की बेटी या डीकन की पत्नी या चचर् के एकल कलाकार के समान थे। मेरा मतलब है, उन अन्तिम प ंक्ति के ला ेग जिन्हें छुटकारे की आवश्यकता है। और मैं सचमुच में इसके विषय में चिन्तित हुआ। मैंने कहा, “हे परमेश्वर, मैं आशा करता हूँ कि मैं कुछ ऐसा नहीं करता हूँ जो सही नहीं है, तो कृपया यह करें।श् मैं ने कहा, “क्या आप मुझे बताएँगे कि जादूटोना क्या है?” और मुझे लगता है कि जो उत्तर उसने दिया वह यह हैरू जादूटोना किसी भी आत्मा के उपयोग से लोगा ें को नियन्त्रित करने और उनसे अपना मनचाहा काम करवाने का प्रयास है, और वह आत्मा निश्चय ही पवित्र आत्मा नहीं है। और तब उसने कहा, एक प्रकार का स्वाभाविक परिणाम रू श्यदि किसी व्यक्ति में एक आत्मा है जिसका वह उपयोग करता है, यह पवित्र आत्मा नहीं है, क्योंकि पवित्र आत्मा परमेश्वर है और कोई भी परमेश्वर का उपयोग नहीं करता।श् मैं इस बात को पुनः कहूँगा रू जादूटोना किसी भी आत्मा के उपयोग से लोगा ें को नियन्त्रित करने और उनसे अपना मनचाहा काम करनेवाने का प्रयास है, और वह आत्मा निश्चय ही पवित्र आत्मा नहीं है।
और तब मैंने देखा कि क्यों कलीसिया जादूटोना करनेवालों से भरी हुई है और कई ऐसे लोग हैं जो महसूस करते हैं कि उन्हें ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो किसी न किसी प्रकार उनका मनचाहा काम कर सकते हैं। उनमें से अधिकांश इस बात को नहीं समझते कि वे क्या कर रहे हैं।
अब मैं जादूटोने के तीन पहलुओं को लेना चाहता हूँ। सबसे पहला, शरीर के काम के रूप में जिसे बहुत से लोग नहीं समझते हैंय दूसरा, एक दुष्ट आत्मिक सामर्थ्य के रूप में, और तीसरा कलीसिया के भीतर जादूटोने का कार्य।
आइर् ,, सबसे पहले शरीर के काम को लें। गलातियों अध्याय 5, पद 19 और 20 में वर्.िात शरीर के कामों की सूची निकालें। अब मैं कहना चाहता हूँ कि विभिन्न अनुवादों में अलग-अलग शब्दों का उपयोग किया गया है। कुछ अनुवादों में जादूटोना, कुछ अनुवादों में झाड़फूँक और आदि कहा गया है। कुछ ही देर में मैं आपको झाड़फूँक के तीन मुख्य शाखाओं का खाका बताऊँगा( जो कि झाड़फूँक, भावी कहना और तन्त्र मन्त्र है। परन्तु यहाँ इस भाग में आप पाएँगे कि कुछ अनुवाद जादूटोना कहता है कुछ तन्त्र-मन्त्र कहता है। मैं आपको बताता हूँ कि वे एक ही शक्ति के अलग-अलग नाम है। तो पौलुस गलातियों 5 अध्याय के 19 पद में कहता हैरू
शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात् व्यभिचार, गन्दे काम, लुचपन, मूत्ति पूजा, टोना---(परन्तु पुराना कि ंग्स जेम्स अनुवाद झाड़फूँक कहता हैद्ध।
तो शरीर के कामों की सूची के ठीक मध्य में मूर्तिपूजा और टोना है। अर्थात् वे मनुष्य के पतित सांसारिक प्रकृति की अभिव्यक्ति है और मैं कहता हूँ इसी प्रकार शरीर, पतित मानवीय प्रकृति काम करती है। हम अपनी गिरी हुई प्राकृतिक अभिलाषा में लोगों को नियन्त्रित करते हैं। हम चाहते हैं कि लोग वह कार्य करें जो हम चाहते हैं और बहुधा इसके लिये हम अवैध तरीके अपनाते हैं।
अब मैं कहता हूँ कि इस प्रकार के कार्यों में तीन मुख्य शब्द होते हैं और मैं चाहता हूँ कि आप सावधानी पूर्वक सुनें। क्योंकि जहाँ कहीं आप आपका सामना इन बातों से होगा वहाँ आपका सामना जादूटोने से होता है। और हो सकता है कि आपने अब तक इस बात को नहीं समझा है। तीन मुख्य शब्द हेरफेर, धमकाना, और हावी होना है। अब अन्तिम उद्देश्य हावी होना, लोगों को नियन्त्रित करना और लोगों से अपना मनचाहा कराना है। दो वैकल्पिक मार्ग हैं रू एक, हेरफेर करना और दूसरा हावी होना है। यह स्थिति और उद्देश्य पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस मार्ग को अपनाएगा। परन्तु चाहे वे हेरफेर का उपयोग करें या वे हावी होने का उपयोग करें अन्तिम उद्देश्य नियन्त्रित करना है, यह हावी होना है।
अब स्वाभाविक में, हम अब तक कुछ अलौकिक के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। वास्तव में समाज के हर क्षेत्र में शरीर के काम के रूप में जादू टोना चल रहा है। आप में से कुछ यहाँ से बाहर जाने वाले हैं और आप चीजों को एक अलग तरह के प्रकाश में देखने जा रहे हैं। मुझे आशा है कि इससे पहले कि आप अपने पति या अपनी पत्नी या अपनी दादी या अपनी सास, या जो कोई भी हो, पर आरोप लगायें, पहला काम जो आपको करना है, वह अपने आप को आइर् ने में देखना है, स्वयं की जाँच करना है। ठीकघ्
मुझे आपको कुछ उदाहरण देने दीजिए। उदाहरण के लिए, मेरे पारिवारिक जीवन में। अब, चाहे लोग इसे पस ंद करें या नहीं, परमेश्वर ने परिवार में एक निश्चित क्रम में ठहराया है। पति पत्नी के सिर है। लोग परिवार को उसके सिर के बल पर खड़ा कर सकते हैं, लेकिन परमेश्वर ने आदेश नहीं बदला है। और पति और पत्नी के अधिकार के नीचे बच्चे होते हैं, जो परमेश्वर के क्रम में, अपने माता पिता के अधिकार के अधीन होते हैं। अब, क्या जादू टोना करने वाला परेश्वर द्वारा निर्धारित क्रम को अलग रखने के लिए या तो हेरफेर का उपयोग करते है या धमकी का।
आइर् ,, पहले बच्चों को लंे। बच्चे बड़े शा ेषक होते हैं। आपको बूढ़े होने की जरूरत नहीं है। एक पाँच वर्ष का बच्चा एक बड़ा शोषक हो सकता है। मान लीजि, चाय या कॉफी के समय पर उनकी सामाजिक स्थिति पर निर्भर करते हु, एक माँ के कुछ मेहमान हैं। और आपकी शब्दावली के आधार पर कुछ कुकीज़ या बिस्किट हैं। और पाँच वर्ष की बच्ची जानती है कि माँ नहीं चाहती कि वह बिस्कुट या कुकीज लें। लेकिन वह जानती है कि जब मेहमान वहाँ पर हैं, तब माँ के लिए न कहना बहुत ही कठिन है। तो जब मेहमान वहाँ पर हैं तो वह भीतर आती है और कहती है, श्माँ, क्या मैं एक कुकी ले लूँ।घ्श् और आप देखें, माँ क्या करने जा रही है? शायद वह उसे लेने देती है। उसका शोषण किया गया।
कई वर्षों पूर्व मेरी पहली पत्नी और मैं एक पेंटिकोस्टल परिवार के बगल में आगे रहते थे - पिता, माँ और मुझे लगता है कि बेटी लगभग तीन साल की थी। उन दिनों में लोग किराने की खरीदारी के लिए शनिवार की रात को जाया करते थे। तो जब वे किराने की खरीदारी के लिए बाहर जाने के लिए कपड़े पहते, तो छोटी लड़की जो एक छोटी परी थी, उनके साथ खुशी से लड़खड़ाते हु, चलती। जब वे रविवार की सुबह रविवारीय स्कूल जाना चाहते, तो वह छोटी प्राणी, अपने पीठ के बल लोटती और अपने पैरों को हवा में उठा लेती ताकि उन्हें उस जगह पर जाने से रोके जहाँ वे जाना चाहते थे। अब उस छोटी लड़की को कारण तो नहीं पता, लेकिन उसमें एक शक्ति थी जिसे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं थी कि उसके माता किराने की दुकान पर जायें, लेकिन उसमें एक ऐसी ताकत थी जिसे इस बात से बड़ी आपत्ति थी कि उसके माता पिता ऐसी जगह पर जायें जहाँ वे परमेश्वर का वचन सुन सकते थे।
तो आप इस पर काम करना करते है ं। मेरे एक साथी उपदेशक ने कहाः छह सप्ताह का एक छोटा बच्चा अपनी खाट में है और वह गीला है और जरूरत है कि उसका डायपर या इसकी नैपी बदली जाए। तो वह रोता है, माँ आती है, उसे बदलती है और उसे आलिंगन में लेती है, जो निश्चय ही उसे पसंद है। खैर, अगली बार जब बच्चे को आलिंगन की आवश्यकता है तो वह रोता है, भले ही उसकी नैपी गीला नहीं है। आप देखें, क्या है? हेरफेर। पतित मनुष्य के लिए यह स्वाभाविक है।
यह बच्चे ही नहीं, यह माता और पिता हो सकते हैं। अब एक औरत के लिए काम करने का सामान्य तरीका तिकड़म करना है। एक पिता के लिए यह धमकी है। लेकिन उनमें से प्रत्येक का एक ही उद्देश्य हैः दूसरे को नियंत्रित करो। तो अगर पत्नी की बात पूरी नहीं होती, वह आँसू बहाने लगती है, खाना जला देती है और अपने पति का जीवन दुखी बना देती है। तो अंत में, वह क्या करता है? वह हार मान लेता है। या फिर पति यह सब करता है। अब, यह होने के कई अलग अलग तरीके है ं, लेकिन पति एक जानवर हो सकता है। वह एक बुरे स्वभाव वाला एक मजबूत आदमी हो सकता है। और अगर उसे कोई रास्ता नहीं मिलता है, वह चिल्लाता है, और हिंसक हो जाता है और धमकाता है। और पूरे परिवार छिप जाता है। जिस बात से बचना चाहते हैं वह पिताजी की एक और डाँट है। वह क्या कर रहा है? वह उन्हें डरा रहा है। उसका उद्देश्य क्या है? अपनी बात मनवाना।
आप देखि,, पति और पत्नी के बीच मतभेद होना अच्छा हो सकता है। ईश्वरीय क्रम यह है कि वे आमने सामने प्रार्थनापूर्वक इस पर बात करें, और परमेश्वर को खोजें। लेकिन छल कभी भी असली मुद्दांे का सामना नहीं करता है। यह हमेशा पीछे पीछे रहता है। असली मुद्दों को कभी प्रकाश में नहीं लाया जाता। इस देश में भी बहुत से ऐसे विवाहित द ंपति हैं जो कभी भी अपने मतभेद को सच में नहीं बताते हैं। परन्तु दोनों ही एक दूसरे के पीछे चलते हैं कि दूसरे की इच्छा को पता करें। यह तिकड़म है।
कलीसिया का उदाहरण लें, कलीसिया में तिकड़म के बहुत से उदाहरण हैं। हम एक पिन्तेकुस्त कलीसिया का उदाहरण लेंगे। मुझे नहीं लगता कि बहुत सी कलीसियाएँ हैं। मैं पिन्तेकुस्त विश्वासियों के बारे में अधिक नहीं जानता। मैं , ंग्लीकन लोगों के साथ कुछ पुराना होऊँगा परन्तु फिर भी पिन्तेकुस्त कलीसिया का उदाहरण लें। एक युवा पास्टर हैय यह उसकी पहली पास्तरीय सेवा है। उस कलीसिया में केवल सौ ला ेगों के आस-पास हैं और वह थोड़ा परेशान और डरपोक है और वहाँ दो बहुत ही आत्मिक बहनें हैं। मेरा मतलब है केवल आत्मिक नहीं बहुत ही आत्मिक। और वे जानते हैं कि कलीसिया का स ंचालन कैसे किया जाना चाहिए। वे पास्टर के साथ बैठकर इस पर चर्चा नहीं करते हैं परन्तु उनमें से एक को अन्यभाषा मिलती है और दूसरा अनुवाद करता है। और उनके मध्य में वे पास्टर से कहते है ं कि क्या करना है। आप सोचते है ं कि यह नहीं होता है? मैं आपको बता सकता हूँ कि यह होता है। यह क्या है? यह तिकड़म है।
बहुत से अन्य क्षेत्र हैं जिसमें व्यवसायिक लोग एक दूसरे का शोषण करते है ं। बाॅस अपने सेक्रेटरी का शोषण कर सकता है या सेक्रेटरी अपने बाॅस का शोषण कर सकती है। मैं इस शाम बहुत अधिक समय नहीं ले सकता हूँ। परन्तु आप देखते हैं जिस विषय में कह रहा हूँ वह पतित व्यक्ति के लिये स्वाभाविक है। यह शरीर के काम के रूप में जादूटोना है और इसके तीन लक्षण तिकड़म, धमकाना और हावी होना है। और मैं कहना चाहता हूँ कि जहाँ कहीं आप इन बातों को पाते हैं उनके पीछे जादूटोने की आत्मा होती है।
और जब आपकी आँखें खुलती हैं तो इसे सुलझाना बहुत ही आसान हो जाता है। जादूटोने की सबसे सामान्य चाल आपको दोषी महसूस कराना होता है। श्जब मैं बिमार था तो आप मुझे देखने क्यों नहीं आएघ् मैं बिल्कुल अकेला था!श् वे कभी भी इस तथ्य को नहीं समझते हैं कि दूसरे व्यक्ति को करने के लिये बहुत कुछ काम है। मैंने इसे जाना हैरू यदि मैं कभी किसी ऐसे व्यक्ति को पाऊँ जो मुझे दोषी ठहराता है तो मैं रूकता हूँ और स्वयं से पूछता हूँ, “उनके द्वारा क्या काम कर रहा है?” जितना कि मैं धर्मशास्त्र को समझता हूँ पवित्र आत्मा लोगों को दोषी नहीं ठहराता है, वह पाप, धार्मिकता और न्याय के विषय कायल करता है। वह विशिष्ट बातों पर अपनी उंगुली रखेगा और कहेगा, श्तुमने यह गलत किया है। तुम्हें यह करना है। तुम्हें पश्चाताप् करना और उसे सही करना है।” परन्तु दोषी ठहराना कुछ ऐसा है जिसे आप कभी समाप्त नहीं करते। श्क्या मैंने काफी कर लिया है या मुझे और करना चाहिए था? मैंने क्या गलत कहा है? वह अब कलीसिया में मुझसे बात क्यों नहीं करती है?
जादूटोने का एक और काम आपको यह महसूस कराना है कि उस व्यक्ति का विचार और सहमति ही महत्वपूर्ण है। श्यदि तुम यह न करो, तो मैं तुम्हें सहमति नहीं दूँगा।श् वे ऐसा कहते नहीं हैं परन्तु उनकी भावना यही है। पुनः, जब मेरा सामना इस बात से होता है तो मैंने स्वयं से पूछना सीखा हैरू श्क्या उस व्यक्ति की सहमति मेरे लिये इतना महत्वपूर्ण है कि मैं उस व्यक्ति के द्वारा स्वयं का शोषण हा ेने देने जा रहा हूँ।” और सामान्य रूप से मेरा निष्कर्ष यह होता है, इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता है!
अब हम आगे बढ़ने जा रहे हैं। मुझे याकूब 1 अध्याय पद 14 में इससे स ंबन्धित कुछ बातों को देखने दीजिए। शक्ति, नियन्त्रण और ज्ञान की यह चाहत प्रत्येक मानवजाति की एक दृढ़ विशेषता है। और हमारे ऊपर शक्ति पाने के लिये शैतान इस अभिलाषा का शोषण करता है। याकूब यही कहता हैरू
परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
तो आप में शक्ति, नियन्त्र.ा, प्रशंसा, ज्ञान की यह अभिलाषा पाइर् जाती है। यह हममें उत्पन्न हुआ है। परन्तु यदि शैतान उसका उपयोग करना शुरू कर सकता है, तो वह हमें अपने अधीन करेगा। आप आज इस देश में ऐसे लोगों की गिनती नहीं कर सकते हैं जो इस बात में शामिल हैं। मुझे निश्चय है कि इस देश में आज इस बात में शामिल ला ेगो ं की स ंख्या 75 प्रतिशत के आस पास है। शैतान इस प्रेरणा का उपयोग करता है। शक्ति की अभिलाषा, नियन्त्रण की अभिलाषा और ज्ञान की अभिलाषा। वह कौन सी अभिलाषा थी जो सबसे पहले मानवजाति को परेशानी में डालाघ् क्या आपने कभी सोचना बन्द कर दियाघ् एक शब्द में बताइर् , कि आदम किस बात की अभिलाषा कर रहा था? ज्ञान, हाँ ठीक है। और जब उसने एक अवैध रीति से ज्ञान पाने का प्रयास किया तो वह शैतान का बन्धक बन गया। ज्ञान की अभिलाषा के द्वारा अनगिनत करोड़ों ला ेग इस छल में फँसते हैं। श्जब मेरा बेटा मर गया तो वह कहाँ गयाघ्श् वे किस परिणाम पर पहुँचते हैं? वे एक आत्मायन के पास जाते हैं। श्क्या मेरा विवाहित जीवन अच्छा होगाघ्श् तो ला ेग क्या करते हैं? वे किसी भावी कहनेवाले के पास जाते हैं। यही प्रेरणा है। शैतान इसी बात का शोषण करता है।
अब आइर् ,, हम जादूटोने को एक आत्मिक शक्ति के रूप में देखें। अब हम कुछ ऐसे विषय पर बात कर रहे हैं जो कि अलौकिक है। यह मानवीय योग्यता से बढ़कर है। यह समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि सभी अलौकिकता परमेश्वर की ओर से नहीं आती है। उसमें से बहुत शैतान की ओर से आता है। मैं मानता हूँ मनुष्य के लिये केवल दो ही अलौकिकत श्रोत उपलब्ध हैं रू परमेश्वर या शैतान। कोई भी अलौकिक सामर्थ्य जो परमेश्वर की ओर से नहीं आता है वह शैतान की ओर से आता है। जैसा कि मैंने पहले कहा, परमेश्वर का राज्य ज्योति का राज्य है। प्रायरू आप जानते हैं कि परमेश्वर के राज्य में आप कहाँ पर हैं। शैतान का राज्य अन्धकार का राज्य हैरू आप नहीं जानते हैं कि आपको क्या छल रहा है, आप पर क्या नियन्त्रण कर रहा है, आपको क्या प्रेरणा दे रहा है।
मुझे लगता है, कि तीन मुख्य शाखाएँ हैं जिसे हम अंग्रेजी भाषा में वर्णन कर सकते हैं। कुछ अन्य भाषाओं में हो सकता है आपको थोड़ा बहुत भिन्न शब्दों का उपयोग करना पड़े। वे और मैं प्रत्येक का थोड़ा चित्रण करने का प्रयास करूँगा। मुझे लगता है कि वे शैतानी अलौकिकता के पूरे क्षेत्र को वर्.िात करेंगे।
अब झाड़फूँक शक्ति भुजा है। इसका उत्पाद शक्ति होता है और यह ऐसी बातों के द्वारा कार्य करता है। मुझे लगता है कि जादूटोने की सबसे शक्तिशाली एकमात्र हथियार श्राप होता है। यह एक बहुत ही पुरानी प्रथा है। यदि आप गिनती 22 अध्याय निकालें, तो हम देखते हैं कि बालाम कुछ ऐसा काम करता था जिसे हम मन्त्र और श्राप कहते हैं, एक जादूटोना करनेवाला। आज भी हमारा सामना जिन लोगों से होता है उनमें वर्गीकृत करने मे ं सबसे कठिन व्यक्तियों में से एक बालाम है क्योंकि वह परमेश्वर और शैतान दोनो ही अलौकिक श्रोतों के प्रति उपलब्ध था। इस प्रकार के कई लोग पा, जाते हैं और उनसे व्यवहार करना सबसे कठिन होता है। क्योंकि कभी कभी वे सही होते हैं और कभी कभी वे गलत होते हैं। यदि एक व्यक्ति केवल परमेश्वर के प्रति खुला हुआ हो तो वह सही होगा( यदि एक व्यक्ति केवल शैतान के प्रति खुला हुआ हो तो वह गलत है। परन्तु वे लोग जिनसे व्यवहार करना बहुत कठिन होता है और हर एक कलीसिया में ऐसे लोग पा, जाते हैं, वे ऐसे लोग हैं जो कभी कभी परमेश्वर और कभी कभी शैतान के प्रति खुले हु, होते हैं। मैं आपसे कहता हूँ कि उनके साथ कार्य करने के लिये एक पास्टर को अन्तदर् ृष्टि, अधिकार और साहस की आवश्यकता है।
अब आइर् ,, देखें कि मोआब के राजा बालाक ने झाड़फूँक करनेवाले बालाम से क्या कहा। गिनती 22 अध्याय पद 10 में वास्तव में बालाम परमेश्वर को बता रहा है कि बालाक से उसे क्या प्रस्ताव मिला। बालाम ने परमेश्वर से कहारू
सिप्पोर के पुत्र मोआब के राजा बालाक ने मेरे पास यह कहला भेजा है, कि सुन, जो दल मिस्र से निकल आया है उस से भूमि ढ ंप गई हैय इसलिये आकर मेरे लिये उन्हें शाप दे( सम्भव है कि मैं उनसे लड़कर उनको बरबस निकाल सकूंगा।
अब बाइबल की संस्कृतियों में यह मानक अभ्यास है। लड़ाई जाना राजाओं और अन्य राजाओं के लिये सामान्य बात थी, समतल भूमि में ही युद्ध करना नहीं बल्कि अलौकिक भूमि पर भी युद्ध करना। तो वे दूसरे लोगों को श्राप देने के लिये अपने जादूटोना करनेवाले के पास जाते थे। 19वीं सदी ईसा पूर्व में मिस्र के फिरा ैन द्वारा दि, ग, श्रापों की एक सूची है और उन्होंने 66 राष्टंों के विरुद्ध इन श्रापों की घोषणा की है। देखि,, कि उन्हें किस बिन्दु पर श्राप दिया गया। आप उन्हें एक ऐसे स्थान पर लाते हैं जहाँ उन्हें आप पराजित कर सकते है। यह बहुत ही रोचक बात है। जब गोलियत दाऊद के विरुद्ध आया तब उसने अपने देवताओं के नाम पर उसे श्राप दिया। यह असभ्यता का एक प्रदर्शन मात्र नहीं था, वह सचमुच यह कह रहा था रू “मेरे देवता तुम्हारे परमेश्वर के साथ काम कर सकते हैं।” तो एक निश्चित अर्थ में प्राचीन युद्ध केवल दो देशों के बीच युद्ध नहीं होता था परन्तु वह उन देशों के ईश्वरों के मध्य ताकत की परीक्षा के रूप में देखा जाता था। उदाहरण के लिये, जब परमेश्वर ने मिस्र के साथ व्यवहार किया और इस्राएल को बाहर लाया, तब भजन कहता है, श्उसने मिस्र के देवताओं का न्याय किया।श् केवल स्वभाविक शासक ही नहीं परन्तु आत्मिक शासक भी तो बालाम को एक अच्छे शापकर्ता के रूप में बुलाया गया। यह उसका कार्य था।
कुछ वर्षों मैंने और रूत ने बाथ का दौरा किया। उन्होंने उसी दौरान एक अन्यजातीय मन्दिर का उत्खनन किया था और उन्होंने पाया कि मन्दिर में याजकों के मुख्य कार्यों में से एक आनेवाले लोगा ें के लिये श्राप लिखना था। वे अच्छा श्राप लिखने के लिये अपने ऊपर भरोसा नहीं रखते थे तो याजक का कार्य एक व्यक्ति के विरुद्ध भयानक श्राप लिखना होता था जिन्हें वे बर्बाद देखना चाहते थे। इस बात पर मत मुस्कुराईए। आप मुस्कुराते हैं और सोचते है ं कि यह मजाक है, परन्तु विश्वास कीजि, कि यह काम करता है। यदि किसी बात में कुछ सच्चाई नहीं है तो लोग हजारों वर्षों तक उसे करते नहीं रहते।
तब हम भावी कहने पर के विषय में देखते हैं, जिसे सबसे आधुनिक अनुवाद में भविष्य कहना कहा गया है। यह जादूटोने का ज्ञान का पक्ष है। अब उत्पाद सामर्थ्य नहीं है परन्तु ज्ञान है जो, जैसा कि मैंने बताया वह पहला कारण है जिसने मनुष्य को पाप के लिये उकसाया। अब प्रेरितों 16 अध्याय में एक चित्रण पाया जाता है जो कि बहुत स्पष्ट है। प्रेरितों 16 पद 16 और आगे। जब पौलुस और सीलास पहली बार सुसमाचार प्रचार करने के लिये फिलिप्पी पहुँचे तब यह हुआ।
जब हम प्रार्थना करने की जगह जा रहे थे, तो हमें एक दासी मिली जिस में भावी कहनेवाली आत्मा थी।
अब वास्तव में, यूनानी भाषा जो कहता है वह अजगर की आत्मा रखना या अजगर की आत्मा है। दूसरे शब्दों में साँप की आत्मा। और याद रखि,, अन्यजातीय समाज में हमेशा से साँप को असाधारण ज्ञान और बुद्धि का श्रोत माना गया है। वाशिंग्टन डी-सी- में एक सुप्रसिद्ध स्त्री है जो कि प्रसिद्ध भावी कहनेवाली है जिसने अपनी स्वयं की जीवन कथा में कहा कि जब साँप उसके साथ बिस्तर में आया, तब उसमें सामर्थ्य आइर् ।
अब जो बात मैं आपसे कहना चाहता हूँ वह यह है कि इस लड़की ने जो कुछ कहा वह पूरी तरह सच था और उसने प्राकृतिक माध्यम से उसे नहीं जाना। वह एक गुलाम लड़की थी रू
और भावी कहने से अपने स्वामियों के लिये बहुत कुछ कमा लाती थी। (चूंकि वह गुलाम थी, अतः जो कुछ लाभ उसे मिलता था वह उसका नहीं परन्तु उसके स्वामियों का होता थाद्ध वह पौलुस के और हमारे पीछे आकर चिल्लाने लगी कि ये मनुष्य परम प्रधान परमेश्वर के दास हैं, जो हमें उद्धार के मार्ग की कथा सुनाते हैं।
क्या यह अद्भुत नहीं था? यह पूरी तरह सच था। कभी कभी मैंने टिप्पणी की है कि समकालीन मिशनों में वह स्त्री कलीसिया की हमेशा के लिये विशेषाधिकार प्राप्त सदस्या होती। यह पहचानने में वह पहली व्यक्ति थी कि पौलुस और सीलास वास्तव में कौन थे। परन्तु परमेश्वर की आत्मा में पौलुस जानता था कि यह एक छल की आत्मा है, एक भावी कहनेवाली आत्मा है। अन्त में वह मुड़ा और उसने उसे यीशु के नाम से बाहर आने की आज्ञा दी और वह बाहर आइर् और अब वह लड़की भावी कहने की स्थिति में नहीं रही। उन्हें जो नुकसान हुआ था उसके कारण उसके स्वामी इतने क्रोधित हु, कि पौलुस और सीलास को न्यायाधीश के सामने लाया और आप बाकी कहानी जानते हैं। संपूर्ण नगर में भारी उथल-पुथल मच गई क्योकि एक अकेली गुलाम लड़की को छल की आत्मा से छुड़ाई गई थी। देखि,, उस समय पौलुस न केवल शैतान के राज्य के विरुद्ध स्वभाविक रीति से कार्य कर रहा था परन्तु स्वर्गीय स्थानों में शैतान के राज्य में हस्तक्षेप किया गया। क्योंकि कलीसिया के विरुद्ध उनकी रणनीति बिगड़ गई थी। यह एक उल्लेखनीय बात है कि जहाँ कहीं पौलुस गया वहाँ उथल-पुथल मच गई थी। और बाद में 2 कुरिन्थियों में उसने कहारू “शैतान का एक दूत मुझे घूँसा मारता था।” मुझे लगता है कि यह पूरी तरह सही था। यह एक दृष्टान्त नहीं था। यह शैतान का एक दूत था जिसने हर उस स्थान पर द ंगा आयोजित किया जहाँ पौलुस गया। तो क्यों न हम द ंगा करेंघ् हो सकता है हम शैतान की बहुत अधिक परवाह नहीं करते। मैं सचमुच में मानता हूँ कि जब कलीसिया उस तरह की होती है जैसा होना चाहिए , तो बहुत दंगे होंगे। बहुत सी जागृतियाँ भी होंगी। मुझे नहीं मालूम कि बिना दंगे के हम कितनी जागृति देख सकते हैं। तो आपको निर्णय करना है। क्या यह मूल्यवान है?
फिर टोने पर आते हैं। मुझे लगता है कि टोना का प्रयोग हमेशा इस प्रकार से नहीं होता है। यह वस्तुओं के द्वारा कार्य करता हैरू औषधियाँ, आकर्ष.ा, कुछ भी जो सौभाग्यशाली कहा जाता है, जैसे कि एक सौभाग्यशाली घोड़े की नाल। यह सब मनोगत है। लोग ऐसी वस्तुएँ धारण करते है ं जो उन्हें सौभाग्य प्रदान करता है। यह प्रेम की औषधि द्वारा भी कार्य करता है। यह बहुत ही सामान्य बात है। आप जानते हैं, “मैं चाहता हूँ कि यह व्यक्ति मेरे प्रेम में पड़ जाए। अतः मैं झाड़फूँक करनेवाले के पास जाता हूँ और एक औषधि लेता हूँ, उसके खाने में मिला देता हूँ और उसके बाद वह मेरे प्यार में पड़ जाएगा।” और निश्चय ही, कुछ हद्द तक कुछ काम करता है।
रूत और मैं, हम भाइयों और बहनों के साथ जाम्बिया में थे। हमने उन सभी स्त्रियों के लिये प्रार्थना की जो बाँझ थीं और जिनके बच्चे नहीं थे। अफ्रीकियों के लिये यह एक वास्तविक विपदा थी। हमारे सामने लगभग चार सौ स्त्रियाँ इकट्ठी हुई। इससे पहले कि हम प्रार्थना करें, किसी ने प्रश्न किया (वे सभी ढोंगी मसीही थेद्ध रू श्आपमें से कितने लोग बाँझपन से छुटकारा पाने के लिये दवा लेने जादूटोना करनेवाले के पास गए हैंघ्श् और उनमें से केवल दो लोगा ें ने हाथ उठाया। देखि,, हम कुछ ऐसी बात नहीं कर रहे हैं जो अनोखी या असाधारण हैं।
भावी कहना, संगीत के द्वारा भी काम करता है। आपको स्मरण होगा कि हमने देखा था कि बहुत स ंभव है लूसीफर स्वर्ग में संगीत का मुखिया था। वह संगीत के विषय में बहुत कुछ जानता है। वह उसकी ताकत को जानता है और समकालिन संगीत के विषय में बहुत कुछ, जिसे “एसिड राॅक” कहा जाता है और कुछ अन्य, जादूटोने से स ंबन्धित है। आप एक युवा व्यक्ति को देखि, जो एक घन्टे तक यह सुनता रहा है और उसकी आँखें खो सी जाती हैं, वास्तविकता से उनका संबन्ध नहीं रहता है।
और तब भावी कहने की एक और मुख्य शाखा नशा है। भावी कहने के लिये यूनानी शब्द की उत्पत्ति सीधे-सीधे नशे के लिये प्रयुक्त यूनानी शब्द से हुआ है और संपूर्ण नशा स ंस्कृति, एसिड राॅक और आदि के अपने सभी बातों के साथ इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यह टोना की बातें हमारी संस्कृति में काम कर रही है। और लगभग वे सभी लोग जो यीशु मसीह के पास आते हैं उन्हें उस सामर्थ्य से छुटकारे की आवश्यकता है। वास्तव में, मैं स्वयं ऐसे स्थान पर आया हूँ कि जहाँ यदि मैं नहीं समझता हूँ कि दुष्टात्माओं से कैसे व्यवहार करना है, तो मुझे सन्देह है कि समाज के इस विशेष भाग में काम करने का अधिक लाभ नहीं है।
आइर् ,, प्रकाशितवाक्य 9:21 में टोना का उदाहरण देखते हैं। खैर, यह भविष्य के दृश्य का वर्णन करता है, मैं मानता हूँ कि मानव इतिहास में जब परमेश्वर का न्याय प्रगट होता है और दुष्टों पर यह आ पड़ता है और पद 20 और 21 में वचन कहता हैरू
“और बाकी मनुष्यों ने जो उन मरियों से न मरे थे, अपने हाथा ें के कामों से मन न फिराया, कि दुष्टात्माओं की, और सोने (मूर्तिपूजा पहली बात हैद्ध और चान्दी, और पीतलए और पत्थर, और काठ की मूरतों की पूजा न करें, जो न देख, न सुन, न चल सकती हैं (ध्यान दें कि मूर्तिपूजा के साथ कौन सी बात हैद्ध। और जो खून, और टोना, और व्यभिचार, और चोरिया ं, उन्होंने की थीं, उन से मन न फिराया।श्
और टोना शब्द, कुछ संस्करणों में “नशा” का वैकल्पिक अनुवाद है। और टोना के साथ यौन अनैतिकता और हिंसा भी होती है और हमारे समकालीन सभ्यता में हिंसा की जबरदस्त लहर टोना का काम है। तो जब आप इस विषय में प्रार्थना करना चाहते हैं तो केवल शाखाओं के लिये प्रार्थना मत कीजि,, आपको जड़ के साथ भी काम करना है।
अब हम इस विषय के तीसरे क्षेत्र में आते हैं जो कि और एक क्षेत्र ऐसा है जहाँ कुछ मसीहियों को बिल्कुल भी नहीं मालूम है कि वास्तव में क्या चल रहा है। मैं गलातियों 3 अध्याय निकालकर पहले पाँच पढ़ना चाहता हूँरू
हे निबुद्धि गलातियों किसने तुम्हें मोह लियाघ्
क्या आपने कभी इस आत्मसात किया है? वे चमत्कारी मसीही, पिन्तेकुस्त मसीही थे। वे प्रभु को जानते थे, वे बचाए गए थे, उन्होंने पवित्र आत्मा पाया था, वे चमत्कारों के साक्षी बन रहे थे परन्तु वे मोहित थे। और मोहित शब्द के लिये मानक यूनानी शब्द यही है। यह बात पर्याप्त रूप से रोचक है कि यह अब भी आधुनिक यूनानी भाषा में उपयोग किया जाता है। बुरी आँख के लिये आधुनिक यूनानी शब्द वस्कानिया है। मुझे यह पता चला कि क्योंकि एक यूनानी कट्टर याजक कुछ वर्षों पूर्व मेरे पास आ, जिसने प्रभु यीशु को जान लिया था और उन्होंने मुझ से कहा, “मेरे लिये प्रार्थना कीजिए। मैं इस वस्कानिया से छुटकारा पाना चाहता हूँ।” यह यहाँ प्रयुक्त शब्द के समान ही शब्द है।
हे निबुद्धि गलातियों किसने तुम्हें मोह लियाघ् तुम्हारी तो मानो आँखों के सामने यीशु मसीह क्रूस पर दिखाया गया।
पौलुस को कैसे पता चला कि जादूटोने का कार्य हो रहा है? क्या प्रमाण था? बहुत महत्वपूर्.ा! जादूटोना ने उस प्रकाशन को छिपा लिया था जो उन्होंने क्रूस पर चढ़ा, गए यीशु मसीह से प्राप्त किया था। जादूटोने का मुख्य उद्देश्य कलीसिया में क्रूस पर चढ़ा, गए यीशु मसीह की वास्तविकता को छुपाना है।
अब आगे के पदों में देखें कि क्या हुआ।
मैं तुम से केवल यह जानना चाहता हूं, कि तुम ने आत्मा को, क्या व्यवस्था के कामों से, या विश्वास के समाचार से पायाघ् (ध्यान दें कि उन्होंने पवित्र आत्मा पाया था। पौलुस कहता हैरू तुम्हें यह कैसे मिलाघ् मूसा की व्यवस्था को मानने के द्वारा या विश्वास के साथ सुसमाचार सुनने के द्वाराघ्द्ध क्या तुम ऐसे निर्बुद्धि हो, कि आत्मा की रीति पर आरम्भ करके अब शरीर की रीति पर अन्त करोगेघ् (मैं सच में यह सोचने के लिये बाध्य हूँ कि यह पद अधिकांश कलीसियाओं के प्रवेश द्वार पर लगाया जाना चाहिएद्ध क्या तुम ने इतना दुख योंही उठायाघ् परन्तु कदाचित व्यर्थ नहीं। सो जो तुम्हें आत्मा दान करता (क्या आपने देखा कि उन्हें आत्मा का दान मिलाघ्द्ध और तुम में सामर्थ के काम करता है, वह क्या व्यवस्था के कामों से या विश्वास के सुसमाचार से ऐसा करता है?
तो मूल समस्या थी कि एक बुरे शैतानी शक्ति के द्वारा को छिपा दिया गया था जो भीतर आइर् थी। और दो समस्याएँ जो आइर् ं वे कामुकता और विधिपरायणता थी। वे परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त करने के एक मार्ग के रूप में उसकी इच्छा को पूरा करने, उसको प्रसन्न करने, और सभी प्रकार के नियमों को मानने के द्वारा शारीरिक प्रयास करने लगे थे। वे मसीह की मृत्यु की उद्देश्य से चुक गए थे। अन्तिम परिणाम पद 10 में बताया गया है।
सो जितने लोग व्यवस्था के कामों पर भरोसा रखते हैं, वे सब श्राप के आधीन हैं, क्योंकि लिखा है, कि जो कोई व्यवस्था की पुस्तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह श्रापित है।
दूसरे शब्दों में पौलुस कहता है, श्व्यवस्था के मानने के द्वारा धार्मिकता प्राप्त करने के लिये यदि तुम वापस चले ग, होते तो तुमकों हर समय सारी व्यवस्था का पालन करना पड़ता अथवा तुम श्राप के अधीन होते, क्योंकि जब इस्राएल कनान देश में आया तो पहली बात जो उन्हें करनी थी वह यह थी कि यदि वे हर समय व्यवस्था का पालन न करें तो अपने ऊपर एक श्राप की घोषणा करे।श् कभी कभी थोड़ा बहुत व्यवस्था का पालन कर लेना आपका कुछ भला नहीं करता है। यदि आप व्यवस्था का पालन करने के द्वारा धर्मी ठहरा, जानेवाले हैं, ता े आपको हर समय सारी व्यवस्था का पालन करना पड़ेगा। और परमेश्वर की दृष्टि में हममें से कोई भी कभी व्यवस्था के द्वारा धर्मी नहीं ठहरा, जाते हैं। यह शैतान का धोखा है। यह एक ऐसा धोखा है जो प्राथमिक रूप से मनुष्य के गर्व को सामने लाता है। जैसा कि पौलुस कहता है कि यदि अब्राहम कामों के द्वारा धर्मी ठहराया गया होता तो उसके पास घमण्ड करने के लिये कुछ होता परन्तु परमेश्वर के सामने नहीं। क्योंकि वचन कहता है, श्अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया और इसके कारण वह धर्मी गिना गया।श् आप देखें, मूल रूप से हममें से सभी गर्व करने के लिये कुछ न कुछ चाहते हैं। किसी न किसी प्रकार से हममें से हर एक अपने पड़ोसी की तुलना में थोड़ा और धर्मी होना चाहते हैं। और यदि हम कुछ नियमों का पालन करते हैं तो हम किसी न किसी प्रकार हम अपने आपको समझा सकते हैं कि वह हमें धर्मी बनाता है।
वर्षों पूर्व जब मैं ब्रिटिश सेना में था और मैंने प्रभु को जाना, तो मैं प्रभु का गवाह बना और चूँकि मैं ऐसा जीवन जीता था जो मेरे साथी सैनिकों से बिल्कुल ही भिन्न था, उनमें से बहुत से मेरे पास आते और मुझसे बात करते और मैं उनसे कहता, श्नहीं, मैं धार्मिक नहीं बना हूँ, मैं बचाया गया हूँ।श् और तब मैं उनसे उद्धार के बारे में बात करता। लगभग सभी की पहली प्रतिक्रिया होती कि उन्हें मुझे कुछ नियमों की सूची बताना पड़ता जिनका वे पालन करते थे। और प्रत्येक के पास एक सूची होती थी जिसे उन्होंने अपने विशिष्ट जीवन के साथ सिल लिया था। दूसरे शब्दों में परमेश्वर की धार्मिकता पाने के लिये उसकी शतार् ें को पूरा करने के लिये मनुष्य की पहली प्रतिक्रिया होती, “मैं एक व्यवस्था का पालन करूगाँ।श् बहुत से स्थानों पर मैंने कहा है और कभी कभी मैंने मसीहियों को झटका भी दिया हैरू एक बार जब हम इसे इस स्तर तक नीचे ले आते हैं तब हम क्रूस के दर्शन को खो देते हैं और हम परमेश्वर की शक्ति को खो देते हैं।
अब, शैतान क्यों क्रूस को छुपाना चाहता है? आइर् ,, मुझे बीच में इसे बताने दीजि, रू जब मैं सारी पृथ्वी में यात्रा करता रहता हूँ और विभिन्न पृष्ठभूमि के मसीहियों के बीच सेवा करता हूँ, मैं मानता हूँ कि कलीसिया में दो मुख्य जरूरतें पाइर् जाती हैं। पहला, यीशु के क्रूस की केन्द्रीयता को उसका सही स्थान देना क्योंकि यह एक मात्र बात है जो पूरी तरह किसी भी अन्य धर्म से अलग करता है। किसी अन्य धर्म में इस प्रकार का कुछ भी नहीं है। और जब हम क्रूस को और उसके अद्वितीयता को अलग स्थान देते हैं ता े हम नियमों को मानने के द्वारा जीवन बिताने की ओर वापस जा रहे हैं। मानवीय मनोविज्ञान। देखि,, मनोविज्ञान आपको बता सकता है कि गलत क्या है, परन्तु यह आपको सही काम करने योग्य नहीं बना सकता है। वह सामर्थ्य केवल एक ही श्रोत से आता है जो कि क्रूस है।
दूसरा, और उसकी संबन्धित समस्या यह है कि कलीसिया को चाहिए कि वह यीशु को पुनः उसका शीर्ष स्थान दें क्योंकि परमेश्वर ने उसे कलीसिया में सब बातों का सिर बनाया है और समस्या यह है कि कलीसिया वास्तव में मूल रूप से यीशु की नेतृत्व को स्वीकार नहीं करता है। सिर वह वस्तु है जो निर्णय लेता है, देह अनुसरण करता है। कितनी कलीसियाओं में सचमुच पवित्र आत्मा के माध्यम से यीशु के द्वारा निर्णय लिए जाते हैं? वास्तव में, कितनी कलीसियायें निर्णय लेने के लिये यीशु मसीह को आमन्त्रित करते हैं? आइर् ,, केवल सुनें कि उसे क्या कहना है। समस्या क्या है? कौन सी शक्ति काम कर रही है आप मुझे बताइर् एघ् जादूटोना, हाँ, यह सही है।
आप देखें, मैंने आपको बिमारी बता दी है। यदि आप इस बात का उपयोग करेंगे तो यह पूरी रीति से आपकी मनोवृत्ति को और बहुत सी बातों में आपकी दृष्टिकोण बदल देगा जो बहुत निकट से आपको परेशान करती है। क्योंकि शैतान अन्धेरे में काम करना चाहता है। वह नहीं चाहता कि लोग जाने कि वह क्या कर रहा है या कैसे कर रहा है। मैं आपको बताता हूँ कि आज रात यहाँ इस विशेष सन्देश का प्रचार करने में मुझे भयानक व्यक्तिगत विरोध का सामना करना पड़ा है और मैं जानता हूँ कि ऐसा क्यों हुआ। क्योंकि यह सन्देश उन बातों को प्रकाश में ला रहा है जिन्हें शैतान प्रकाश में लाना नहीं चाहता है। चाहे यह स्वाभाविक में शरीर के काम के रूप में जादूटोने की प्रकृति हो या यह अलौकिकता में जादूटोने की प्रकृति हो। और अन्तिम बात जो वह चाहता है यह है कि मसीही लोग ये जानें कि कलीसिया में जादूटोना काम कर रहा है।
शैतान क्यों क्रूस को छुपाना चाहता है? मुझे आपको तीन कारण बताने दीजिए। अपने छुड़ा, हुये लोगों के लिये यह परमेश्वर के प्रबन्ध का एक मात्र आधार है। और कोई आधार नहीं है। इब्रानियों 10:14 कहता हैरू
क्योंकि उसने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र कि, जाते हैं--।
क्रूस पर यीशु के बलिदान के द्वारा परमेश्वर ने सब कुछ पूरा कर दिया है जिसे मानव इतिहास के किसी भी युग में किसी भी मनुष्य के लिये आवश्यक है। यह सब कुछ क्रूस के द्वारा किया गया है।
अब क्रूस के विषय में हमारा समायोजन प्रगतिशील है। हम पवित्र कि, जा रहे हैं। जो कुछ यीशु ने किया वह सिद्ध, पूर्.ा, और अन्तिम है। परन्तु हमारा समायोजन प्रगतिशील है। मैं नहीं मानता कि यहाँ, मुझ सहित, कोई भी ऐसा व्यक्ति है जिसने अब तक उन सब बातों को समायोजन कर लिया है जो क्रूस के द्वारा उसके लिये उपलब्ध है। परन्तु यदि हम पवित्रीकरण की प्रक्रिया से होकर गुजरें, पवित्र कि, जाएँ, परमेश्वर के प्रति धर्मी ठहरें, परमेश्वर के विचार रखें, उसकी तरह जीएँ, तो हम अधिकाधिक समायोजित करेंगे। परन्तु यदि जादूटोना प्रवेश करता है, तो जादूटोना क्रूस को छुपा लेता है। और यद्यपि हम राजा की सन्तान के रूप में जीते हैं, हम भिखारियों और क ंगाला े के समान जीने लगेंगे। क्योंकि जो कुछ लाभ हमें परमेश्वर ने दिया वह केवल क्रूस के द्वारा हमारे पास आता है।
शैतान बहुत ही चतुर है। वह जानता है कि ठीक कहाँ चा ेट करना है। वह जानता है कि यदि वह क्रूस को छुपा सकता है तो कलीसिया उस पर निर्भर होगी।
दूसरा कारण यह है कि शैतान के पूर्ण पराजय का कारण क्रूस था। मैं सारे स ंदर्भ नहीं पढूँगा परन्तु क्रूस के द्वारा यीशु ने शैतान को एक संपूर्ण अनन्त और स्थिर पराजय प्रदान किया। शैतान इसे बदल नहीं सकता है परन्तु जो वह कर सकता है वह यह है कि हमसे इस तथ्य को छिपा ले ताकि हम आगे को विजय में न जीएँ, चँूकि हम उस विजय को नहीं समझते हैं जो हमारे लिये जीता गया है।
क्रूस की तीसरी विशेषता यह है कि सच्चे मसीही जीवन के लिये यह एकमात्र श्रोत है। आप पहाड़ी उपदेश को जितना चाहें उतना दोहरा सकते हैं और हर प्रकार के मनोविज्ञानी कहेंगे कि ला ेगों को इसी प्रकार जीना चाहिए। परन्तु उस प्रकार जीने के लिये हमें केवल एक ही रीति से योग्यता मिलती है। वह क्रूस पर यीशु के बलिदान के द्वारा है। क्योंकि उसका बलिदान पुराने मनुष्यत्व, शारीरिक स्वभाव को दूर करता है। पौलुस कहता है, “हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया है।” थोड़ा आगे वह गलातियों की पत्री में कहता है, श्वे जो मसीह के हैं, उन्होंने अपने शरीर को उसकी सारी अभिलाषाओं के साथ क्रूस पर चढ़ा दिया है।” जब तक आप अपने शारीरिक स्वभाव पर क्रूस को लागू करना नहीं सीखते हैं तब तक वह आप प्रभुता रखता है। आप उस पर प्रभुता नहीं रख सकते हैं। रोमियों 6 अध्याय में पौलुस कहता है, श्हमारा पुराना मनुष्यत्व क्रूस पर चढ़ाया गया है, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें।श् यही क्रूस का प्रावधान है।
मैंने बताया है, मेरी एक , ंग्लिकन पृष्ठभूमि है और उसके कारण मेरे पास आनेवाली बहुत सी अद्भुत बातों के लिये मैं परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहता हूँ, परन्तु मैं जानता हूँ कि यहाँ आपमें से कुछ लोग इस बात को पसन्द करेंगे परन्तु उन दिनों, बहुत पुरानी बात नहीं है, हम प्रत्येक रविवार को 11:15 को एक सामान्य अंगीकार किया करते थे और एक बात जो हम कहा करते थे वह यह था, श्हम दुरूखी अपराधियों को क्षमा कर।श् और मैं अपने चारों ओर के लोगांे को देखा करता और सोचता, “यह निश्चय ही एक अच्छा वर्णन है।” परन्तु मैंने अपने आप से कहा, “धर्म यदि हमें एक दुरूखी अपराधी मात्र बनाता है तो धर्म से क्या लाभ है?” और मेरा अन्तिम निष्कर्ष यह था, “मैं धर्म के बिना एक अपराधी हो सकता हूँ, परन्तु इतना अधिक दुरूखी नहीं।” तो मैंने यह किया। परन्तु आप देखें, एक और बात जो मैंने अपने आप से कहा वह यह था, रविवार की सुबह मैंने अपने पापों का अंगीकार किया परन्तु मैं जानता हूँ कि मैं इस सप्ताह बाहर जा रहा हूँ और पुनः वही पाप करनेवाला हूँ। क्या मैं उन पापों का अंगीकार करने के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने जा रहा हूँ जिन्हें मैं आगे भी करनेवाला हूँ? अब मैं निष्ठाहीन नहीं था। मैं अज्ञानी नहीं था। मुझे नहीं मालूम था कि मेरे भीतर उस विद्रोही पुराने स्वभाव को मार डालने के लिये एक प्रावधान किया गया है। परन्तु यह क्रूस के द्वारा किया गया है।
आइर् ,, अब जो मैंने यहाँ लिखा है उसे पढ़ें रू उस सामर्थ्य के बजाय जो क्रूस पर से आती है, जादूटोना शारीरिक प्रयासों और विधि-सम्मत साधनों का विकल्प बनता है। आप दस नियम बनाते हैं और लोग उन्हें नहीं मानते हैं। तो आप कहते हैं, श्हम बीस नियम बनाएँगे और वे अब भी कम ही मानेंगे, इसलिये आपने चालीस नियम बनाएँ। परन्तु नियमों को बनाने से लोग धर्मी नहीं बनते हैं। क्या आप यह जानते हैं? आज यहूदी धर्म में 613 नियम पा, जाते हैं। मेरे पोतों में से एक अति-धार्मिक कट्टर यहूदी समूह का भाग है और वे कहते हैं, श्हम उनमें से 32 मानते है ंएश् और वे किसी से भी बढ़कर मानते है ं। विषय की सच्चाइर्यह है कि हम सारे नियम रख सकते हैं, परन्तु हम उन्हें मानते नहीं हैं। नियमों पर वापस जाना हमारे जीवन में जादूटोने का प्रभाव होता है। मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि कलीसिया के प्रायरू प्रत्येक बड़े भाग में यह हुआ है। आप मेरे साथ असहमत हो सकते हैं। मैं मानता हूँ कि कलीसिया में परमेश्वर का प्रत्येक बड़ा हलचल कुछ उल्लेखनीय जीवन्त और शक्तिशाली कार्य किया है परन्तु एक या दो पीढ़ी के भीतर उन्होंने क्रूस का दर्शन खो दिया और वे शारीरिक प्रयास और नियम और स ंस्थाआ ें और ऐसी बातों का पालन करने लगे।
यिर्मयाह 17:5 का स ंदर्भ देते हु, मुझे समाप्त करने दीजि, रू
श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
देखें, यही वह श्राप है जो जादूटोना कलीसिया के ऊपर लाता है। अब हम अलौकिक अनुग्रह और परमेश्वर की सामर्थ्य पर भरोसा नहीं कर रहे होते हैंय हम स्वयं के श्रेष्ठत्तम प्रयासों पर भरोसा कर रहे हैं।
कोड: MV-4263-100-HIN









