हम आपको संपूर्ण भजन 124 देने जा रहे हैं।

‘‘इस्राएल यह कहे, कि यदि हमारी आेर यहोवा न होता, यदि यहोवा उस समय हमारी ओर न होता जब मनुष्यों ने हम पर चढ़ाई की, तो वे हम को उसी समय जीवित निगल जाते, जब उनका क्रोध हम पर भड़का था, हम उसी समय जल में डूब जाते और धारा में बह जाते; उमड़ते जल में हम उसी समय ही बह जाते। धन्य है यहोवा, जिस ने हम को उनके दातों तले जाने न दिया! हमार जीव पक्षी की नाईं चिड़ीमार के जाल से छूट गया; जाल फट गया, हम बच निकले! यहोवा जो आकाश और पृथ्वी का कत्र्ता है, हमारी सहायता उसी के नाम से होती है।’’

आमीन।

अब उन लोगों के प्रति पूरे आदर के साथ वे कहते हैं, सत्यों के साथ मुझे भ्रम में मत डालो। मैं आपको इस्राएल के विषय में तथ्यों की एक श्रृंखला देना चाहता हूँ। सबसे पहले, इस्राएल उस राष्टं का नाम है जो इस्राएल के वंशजों इसहाक और याकूब का है और बाद में वे यहूदी कहलाए। तो वास्तव में, आज इस्राएल और यहूदी बहुत कुछ एक समान हैं। वे हमेशा ऐसे नहीं थे।

इस्राएल नाम पुराने नियम में दो हजार पाँच सौ बार से ज्यादा देखने को मिलता है। अब यदि बाइबल में इंग्लैण्ड या स्काॅटलैण्ड या बेल्स या आयरलैण्ड शब्द बाइबल में इतनी बार आता तो हम सब यह मान लेते कि जब तब आप इंग्लैण्ड या स्काॅटलैण्ड या बेल्स या आयरलैण्ड के बारे में कुछ न कुछ नहीं जानते हैं, तो आप बाइबल को पूरी तरह नहीं समझ पाते हैं। इस्राएल के विषय में भी यही लागू होता है। जब तक आप इस्राएल के विषय में कुछ न कुछ नहीं जानते हैं, तब तक आप बाइबल को पूरी तरह नहीं समझ सकते हैं।

नया नियम में यह 79 बार आता है। मेरी पुस्तक में 77 की सूची है लेकिन किसी ने इसे कम्प्यूटर में देखा और उसे दो और मिला जिससे मैं चूक गया था। लेकिन इससे निष्कर्ष में परिवर्तन नहीं होता है और यह कभी भी कलीसिया का वर्णन नहीं करता है। मुझे पुनः यह कहने दीजिए। नया नियम में इस्राएल शब्द 79 बार आता है और कभी भी यह कलीसिया का चित्रण नहीं है।

यहूदी शब्द पुराना नियम में 84 बार आता है और नया नियम में 192 बार आता है। दूसरी तरफ, मसीही शब्द नया नियम में केवल तीन बार आता है।

अब मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूँ कि इस्राएल एक अनोखे लोग हैं। इस्राएल के समान और कोई नहीं है। मुझे इस बात को जोड़ने दीजिए कि जहाँ तक मैं जानता हूँ मैं एक यहूदी नहीं हूँ। यदि मैं होता तो यह मुझे परेशान नहीं करता, परन्तु मुझे नहीं लगता कि मैं हूँ। मैं सबसे पहले इस्राएल की अद्वितीयता के बारे में बताना चाहता हूँ जिसका वर्णन 1 इतिहास 17 अध्याय 21 पद में दाऊद द्वारा किया गया है। दाऊद परमेश्वर से प्रार्थ ना कर रहा है और वह कह रहा है:

फिर तेरी प्रजा इस्राएल के भी तुल्य कौन है? वह तो पृथ्वी भर में एक ही जाति है, उसे परमेश्वर ने जाकर अपनी निज प्रजा करने को छुड़ाया, इसलिये कि तू बड़े और डरावने काम करके अपना नाम करे, और अपनी प्रजा के साम्हने से जो तू ने मिस्र से छुड़ा ली थी, जाति जाति के लोगों को निकाल दे।

दाऊद कह रहा है, कि इस्राएल के समान और कोई अन्य राष्टं नहीं है जिसे परमेश्वर ने अन्य राष्टंों से छुड़ाया है। यह एक अपरिवर्तनीय तथ्य है। यह ऐसा ही है, यह अद्वितीय है।

तब, निर्गमन 19 में हमारे पास वह प्रतिज्ञा है जो परमेश्वर ने इस्राएल को तब दी जब वे उसके द्वारा व्यवस्था और दस आज्ञाएँ दिये जाने से पहले सीनै पर्वत की घाटी में इकट्ठे थे। और वह मूसा से यह कहता है: निर्गमन 19ः6

और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। जो बातें तुझे इस्त्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही है।

ऐसा और राष्टं नहीं है जिससे परमेश्वर ने ये वचन कहे हों। और तब रोमियों 9ः4 और 5 पद में पौलुस कई विशिष्ट खूबियों की सूची देता है जो केवल इस्राएलियों और यहूदियों पर लागू होता है। रोमियों 9ः4, 5, वह अपनी निज प्रजा के विषय में बात करता है जिसे वह इस्राएली कहता है। और तब वह कहताा है:

वे इस्त्राएली हैं; और लेपालकपन (परमेश्वर ने एक राष्टं के रूप में, निज प्रजा के रूप में उन्हें गोद लिया है) का हक्क और महिमा (यह परमेश्वर की उपस्थिति का अलौकिक प्रगटीकरण है जो इस्राएल के साथ तब तक था जब तक वे आज्ञाकारिता में चलते रहे) और वाचाएं (बाइबल में इस्राएल के राष्टं बनने के पहले की वाचााआें को छोड़कर सारी वाचाएँ इस्राएल से बान्धी गई हैं) और व्यवस्था (व्यवस्था केवल इस्राएल को दी गई) और उपासना (जो केवल इस्राएल को दी गई) और प्रतिज्ञाएं (केवल इस्राएल को। और तब वह कहता है) उन्हीं की हैं। पुरखे (और याद रखिए कि सारे पुरखे उसी वंश से आए हैं किसी और वंश से नहीं पर उसी से। और अन्ततः) भी उन्हीं के हैं, और मसीह (ख्रिस्त) भी शरीर के भाव से उन्हीं में से हुआ, जो सब के ऊपर परम परमेश्वर युगानुयुग धन्य है। आमीन।

तब सारी विशिष्टताआें में से अलग विशिष्टता है कि यहूदियों द्वारा, इस्राएल के द्वारा संसार में उद्धारकर्ता यीशु मसीह को आना था किन्हीं अन्य लोगों के द्वारा नहीं।

और तब प्रकाशितवाक्य 5 अध्याय 5 पद में एक उल्लेखनीय शब्द है जो कि एक प्रकार से बहुत ही उत्तेजना देनेवाली है कि मैं ..............। यह लगभग मेरी साँस उखाड़ देती है, बशर्ते कि आप समझें कि मैं क्यों उत्साहित हूँ। यह स्वर्ग में का एक दृश्य है जब यूहन्ना वहाँ पर है और एक पुस्तक प्रस्तुत किया जाता है और वह सात मुहरों से बन्द की गई है और कोई भी पुस्तक को लेने और मुहर को खोलने के योग्य नहीं है और प्रकाशितवाक्य का लेखक यूहन्ना बहुत रोने लगता है। क्योंकि वह बहुत अधिक जानना चाहता था कि उस मुहरबन्द पुस्तक में क्या लिखा है।

तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहर तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है।

मैं पुस्तक के विवरण में नहीं जाना चाहता हूँ परन्तु मैं उस शीर्षक पर आपका ध्यान लाना चाहता हूँ। यहूदा के गोत्र का सिंह कौन था? यीशु। अब यह यीशु की मृत्यु और पुनरूत्थान के बहुत वर्षों बाद की बात है। और वह अब भी यहूदा के गोत्र का सिंह कहलाता है। यहूदा से ही यहूदी शब्द आता है।

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यहूदी लोगों के साथ यीशु की पहचान तात्कालिक नहीं था। वह पृथ्वी पर उसकी जीवन और सेवकाई के कुछ ही वर्षों के लिये नहीं था लेकिन यह शाश्वत था। उसके पुनरूत्थान और स्वर्गारोहण के बहुत वर्षों बाद स्वर्ग में वह अब भी यहूदा के गोत्र का सिंह कहलाता है! वह न केवल एक यहूदी रहे बल्कि वह अब भी यहूदी हैं। मेरे लिये यह अनोखा है। यह आश्चर्यजनक है। और आप देखें हमें यह स्मरण करने की जरूरत है कि वहाँ ऊँचे पर एक सिंह है और वह एक यहूदी है। और एक दिन वह सिंह गरजनेवाला है और जब यहूदा के गोत्र का सिंह गरजता है तब यहूदी लोगों के शत्रुआें पर हाय। मैं उस समय किसी भी बात के लिये उसके विरोध में नहीं होना चाहता।

और अन्त में, और मुझे लगता है कि यहूदी लोगों के विषय में सबसे महत्वपूर्ण कथन यूहन्ना 4 अध्याय 22 पद में पाया जाता है जहाँ यीशु सामरी स्त्री से बात कर रहा है और वह इस सामरी स्त्री से कहता है:

तुम (सामरी लोग) जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है।

ये छः शब्द हैं। है न? उद्धार यहूदियों में से है। छः चैकानेवाले शब्द। उद्धार कहाँ से आया? यहूदियों से। यहूदी नहीं तो उद्धार नहीं। अब मैं नम्र हूँ परन्तु मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मेरी सारी आत्मिक विरासत, हर एक आत्मिक आशीष जिसका मैंने आनन्द उठाया, उसका श्रेय एक जनता को जाता है - यहूदी जनता। उनके बिना कोई पितामह, कोई भविष्यद्वक्ता, कोई प्रेरित, कोई बाइबल और कोई उद्धारकर्ता नहीं होता। उन छः बातों के बगैर मुझे और आपको कितना उद्धार मिलता? उद्धार यहूदियों में से है। अच्छा होगा कि भाइयों और बहनों हम इस बात को याद रखें। भला होगा कि यदि हम अपने आपको उसके अनुसार ढालते। हममें से प्रत्येक जो यीशु मसीह में आशीषित है अपनी सभी आत्मिक आशीषों के लिये एक देश के कर्ज दार हैं - यहूदी लोगों के। और इतिहास का भयानक तथ्य यह है कि कई-कई सदियों तक - शायद सत्रह सदियों तक अपने आपको दिन करने और यहूदी लोगों के कर्ज को मानने के बजाय मूल रूप से मसीही कलीसिया ने - मैं नहीं कहता कि सच्चे मसीहियों ने - परन्तु मसीही कलीसिया ने यहूदी लोगों का विरोध किया है, सताया है, और उनका उपहास उड़ाया है जिनके द्वारा हमारा उद्धार आया। यह राक्षसी है। शायद ही कोई ऐसा शब्द है जिसके द्वारा मैं वर्णन कर सकता हूँ कि हमारी स्थिति कैसा महिमामय है। हम अपने संपूर्ण उद्धार के कर्ज दार हैं।

हम ब्रिटिश लोग और मुझे पूछने दीजिए कि क्या यहाँ कोई ब्रिटिश है, मैं ब्रिटिश हूँ और हम ब्रिटिश लोग ब्रिटिश होने पर घमण्ड करते हैं। क्या आपने कभी इस पर ध्यान दिया है? मुझे लगता है हममें से कुछ लोग भूल गए हैं कि हमारे पास अब साम्राज्य नहीं रहा। मैं एक साम्राज्य का विकास करनेवाला था। मेरा विश्वास कीजिए, मैं अपने परिवार के जितने पुरुष सदस्य को जानता था वे सभी साम्राज्य का विकास करनेवाले लोग थे। भारत में सेवा करनेवाला एक ब्रिटिश सेना का अफसर। और हम ब्रिटिश लोगों को, हमें अपने आपको दीन करने की जरूरत है। हमें यहूदी लोगों से कहने की जरूरत है, ‘‘माफ कीजिए, कि हमने आपकी प्रशंसा नहीं की।’’ हम सभी खुलकर यहूदी विरोधी नहीं रहें हैं परन्तु इस देश में एक यहूदी विरोधी भावना रही है। और इस देश के इतिहास में ऐसे समय रहे हैं जब यह खुलकर यहूदी विरोधी रहे हैं। और इस देश में योर्क ब्रिस्टल जैसे शहर हैं जहाँ पर यहूदी लोगों का खुलकर हिंसक सताव होता था और बहुतों ने अपना जीवन खो दिया। हमें अपने आपको बहुत ही नम्र करने की जरूरत है, हमें पश्चाताप् करने की जरूरत है, हमें इतिहास में एक ताजा नजर डालने और यह देखने की जरूरत है कि वास्तव में क्या हुआ।?

अब मैं आपको यहूदी लोगों के विषय में एक और अनोखी बात बताने जा रहा हूँ जो कि पूरी तरह अनोखी है। भविष्यद्वाणी में उनके संपूर्ण इतिहास को पहले से बता दिया गया था। किसी और देश के विषय में यह सच नहीं है परन्तु बाइबल की भविष्यद्वाणी में अब्राहम से लेकर आगे तक यहूदी लोगों का सारा इतिहास पहले से बता दिया गया था। और मैं भविष्यद्वाणी के पूरा होने में 16 चरण बताने जा रहा हूँ जिसकी भविष्यद्वाणी इस्राएल के संबन्ध में की गई है।

पहला, और मैं आपको इनमें से प्रत्येक के लिये धर्मशास्त्र में से एक संदर्भ दे सकता था परन्तु समय इसकी अनुमति नहीं देता। वास्तव में प्रथम तीनों अब्राहम को दिया गया। मिस्र में उनकी गुलामी के विषय में भविष्यद्वाणी, पहला। दूसरा, मिस्र से संपत्ति के साथ उनका छुटकारा। और याद कीजिए अब्राहम से कहा गया था कि वे मिस्र से बहुत संपत्ति लेकर बाहर आएँगे। वे गुलाम थे और एक रात्रि में, 24 घण्टों में वे मिस्रियों की संपत्ति के द्वारा धनवान बन गए। एक उल्लेखनीय तथ्य जिसकी भविष्यद्वाणी पहले की गई थी। तीसरा, कनान पर उनका अधिकार जिसकी भविष्यद्वाणी अब्राहम से की गई थी।

और तब हम व्यवस्थाविवरण और अन्य पुस्तकों में जाते हैं। चैथा, कि यह स्पष्ट भविष्यद्वाणी की गई थी और निश्चय पूरी हुई कि वे प्रतिज्ञात देश में मूर्तिपूजा की आेर फिरेंगे। पाँचवां, कि परमेश्वर यरूशलेम में आराधना के एक केन्द्र को स्थापित करेगा। छठवाँ, कि उत्तरीय राष्टं, इस्राएल अश्शूर में गुलामी में ले जाया जाएगा। सातवाँ, कि दक्षिणी राज्य यहूदा बाबूल में गुलामी में ले जाया जाएगा। आठवाँ, प्रथम मन्दिर का विनाश होगा जो कि सुलैमान के द्वारा बनाया गया था, इसकी भविष्यद्वाणी विस्तार से हुई। नौवाँ, बाबूल से बचे हुए थोड़े लोगों की वापसी की भविष्यद्वाणी की गई। दसवाँ, द्वितीय मन्दिर का विनाश, जो यीशु के दिनों में था। उसने स्वयं विस्तार से इसकी भविष्यद्वाणी की। यह रोचक है। आज आप यरूशलेम में जाएँ और यहूदी गाईड् आपको मन्दिर के क्षेत्र में ले जाएँगे और वे आपको पत्थर दिखाएँगे जो अपने आप खड़े हैं और अब वे कहेंगे, आप देखिए कि यह भविष्यद्वाणी की गई थी कि हर पत्थर गिराया जाएगा। कोई भी पत्थर दूसरे के ऊपर नहीं बचा रहेगा। मैं आपसे कहता हूँ कि हमारे यहूदी गाईड् कुछ मसीहियों प्रचारकों से अधिक बाइबल में विश्वास करते हैं।

ठीक है? ग्यारहवाँ, यह भविष्यद्वाणी की गई थी, लैव्यव्यवस्था 26 अध्याय में और कहीं और, बहुत से अन्य स्थानों में, कि अनाज्ञाकारिता के कारण वे जातियों, राष्टंों के मध्य बिखर जाएँगे। बारहवाँ, वे जातियों के मध्य सताव और विरोध सहेंगे जो कि पूरी तरह पूर्ण हुई। तेरहवाँ, कि वे सारे देशों से पुनः इकट्ठे किये जाएँगे। यह हमारी आँखों के सामने पूरा किया जा रहा है और यह महत्वपूर्ण है कि हम इसे देखते हैं।

तो, तेरह भविष्यद्वाणियाँ पूरी हो चुकी हैं। तीन और शेष रह गई हैं, जैसा कि मैं देखता हूँ, जो अब भी पूर्ण होना शेष है। चैदहवाँ, युद्ध में यरूशलेम के विरुद्ध सब राष्टंों का इकत्रित होना। पन्द्रहवाँ, अपने लोगों पर मसीह का अलौकिक प्रकाशन। सोलहवाँ, पृथ्वी पर अपना राज्य स्थापित करने के लिये महिमा और सामथ्र्य के साथ मसीह का आगमन।

तो सोलह भविष्यद्वाणियों में से तेरह पूरी हो चुकी हैं। मेरे गणित के अनुसार और मैं गणित में बहुत अच्छा नहीं हूँ परन्तु मुझे लगता है कि यह 81 प्रतिशत है। अब मुझे कहना है कि मुझे नहीं लगता कि यदि हम विश्वास करें कि शेष तीन भविष्यद्वाणियाँ पूरी होंगी तो हम पागल, सनकी हैं। लोग अजीब सी नजरों से हमें देखते हैं मानो हम अजीब सी बातों पर विश्वास करते हैं। परन्तु मेरे लिये और मैं प्रचारक बनने से पहले पेशेवर तर्कशास्त्री था, मेरे लिये यह विश्वास करना तार्कि क है कि यदि एक पुस्तक सही रीति से और शुद्धता और सटिकता से पहले से ही तेरह भविष्यद्वाणियाँ कर सकती है तो किसी भी अन्य भविष्यद्वाणी को गंभीरतापूर्वक लेना चाहिए जो यह पुस्तक बताती है।

अब मैं समकालिन राजनीति से सबसे विवादित विषय पर आना चाहता हूँ जो कि इस्राएल के लिये परमेश्वर की योजना है जो गलती से पलिश्तिन कहा जाता है। मुझे आपको बताने दीजिए कि इसे पलिश्तिन कहना पूरी तरह बाइबल के विरुद्ध है। पलिश्तिन का अर्थ है पलिश्तियों का देश। और तब तक कभी इसका प्रयोग नहीं किया गया था जब तक रोमियों ने प्रथम मन्दिर पर अधिकार करके उसका विनाश न कर दिया। तब उन्होंने यह बताने के लिये पलिश्तिन शब्द का उपयोग किया कि अब यहूदियों को उस पर कोई अधिकार नहीं। मेरा मतलब है यह जान-बूझकर चुना गया यहूदी विरोधी शब्द था। जब मैं पलिश्तिन के विषय में बात करना प्रारंभ करता हूँ तो रूत के बाल छोर पर मुड़ने लगते हैं। वह कहती है, ‘‘उसे कभी भी पलिश्तिन मत कहो।’’ खैर, मैं कहता हूँ कि कभी-कभी आपको पलिश्तिन कहना चाहिए क्योंकि लोग इतने अज्ञानी हैं कि वे नहीं जानते हैं कि यदि आप कुछ और न कहें तो वे नहीं जानते कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं।

परन्तु आईए, उस देश के विषय में परमेश्वर की योजना के विषय में बात करें। बाइबल के अनुसार यह कनान की भूमि कहलाती है और नया नियम में आप जानते हैं कि यह क्या कहलाती है? इस्राएल का देश। और मत्ती रचित सुसमाचार के प्रथम दो अध्यायों में इसे दो बार इस्राएल का देश कहा गया है। यह उस देश के लिये बाइबल का नाम है।

आईए, अब देखें कि परमेश्वर को इसके विषय में क्या कहना है। उत्पत्ति 17 अध्याय 7 और 8 पद में परमेश्वर अब्राहम के सामने प्रगट हुआ और उसने उससे एक वाचा बान्धी - पूरी रीति से सम्प्रभु है। मेरा मतलब है, अब्राहम का इससे कुछ लेना-देना नहीं था। परमेश्वर ने निर्णय लिया और उत्पत्ति 17ः7, 8 पद में परमेश्वर ने अब्राहम से यह कहा।

और मैं तेरे साथ, और तेरे पश्चात् पीढ़ी पीढ़ी तक तेरे वंश के साथ भी इस आशय की युग युग की वाचा बान्धता हूं, कि मैं तेरा और तेरे पश्चात् तेरे वंश का भी परमेश्वर रहूंगा। और मैं तुझ को, और तेरे पश्चात् तेरे वंश को भी, यह सारा कनान देश, जिस में तू परदेशी होकर रहता है, इस रीति दूंगा कि वह युग युग उनकी निज भूमि रहेगी, और मैं उनका परमेश्वर रहूंगा।

यदि आप बाइबल में विश्वास करते हैं तो इस बात में कोई विवाद नहीं है कि देश किसका है, चाहे इस्राएल भीतर हो या उसके बाहर हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। परमेश्वर ने चिरस्थाई संपत्ति के रूप में उन्हें यह दिया है।

और तब भजन 105 में एक उल्लेखनीय परिच्छेद है, मुझे लगता है कि यह बाइबल में के सबसे अधिक उल्लेखनीय भागों में से एक। भजन 105 - हम 7 पद से प्रारंभ करेंगे। मेरे बाइबल में यह रोचक है क्योंकि मैं पृष्ठ के अन्त में देखता हूँ और तब मैं यह देखने के लिये पलटता हूँ कि अगला पद क्या कहता है और यह उल्लेखनीय मोड़ होता है। यह एक देश के लिये परमेश्वर की योजना के विषय में कथन है और इसमें ऐसे शब्दों का उपयोग किया गया है जो बाइबल के किसी भी अन्य ज्ञात भाग की तुलना में परमेश्वर के संपूर्ण समर्पण का वर्णन करता है। भजन 105 पद 7:

वही हमारा परमेश्वर यहोवा है; पृथ्वी भर में उसके निर्णय होते हैं (दूसरे शब्दों में, जो कुछ परमेश्वर आज्ञा देता है वह पृथ्वी के हर भाग में लागू होता है)। वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है, यह वही वचन है जो उस ने हजार पीढ़ीयों के लिये ठहराया है; वही वाचा जो उस ने इब्राहीम के साथ बान्धी, और उसके विषय में उस ने इसहाक से शपथ खाई, और उसी को उस ने याकूब के लिये विधि करके, और इस्राएल के लिये यह कहकर सदा की वाचा करके दृढ़ किया।

उन चार पदों में परमेश्वर किसी बात के प्रति अपने पूर्ण समर्पण का वर्णन करने के लिये बाइबल के किसी भी अन्य भाग की तुलना में अधिक शब्दों का उपयोग करता है। आप बाइबल में कोई और भाग नहीं पा सकते हैं। मुझे उन वाचा, शब्द, आज्ञा, शपथ, विधि और अनन्त वाचा जैसे शब्दों की सूची बनाने दीजिए। अब रोचक बात यह है कि परमेश्वर किस बात के प्रति ऐसा संपूर्ण अधिकारिक वाचा बाँधता है और मुझे अपने बाइबल में उस भाग को निकालना है क्योंकि मैं पृष्ठ के अन्त में हूँ। और जब मैं इसे देख लेता हूँ तो मेरी साँस ठहर जाती है।

कि मैं कनान देश को तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा।

तो वे सभी शब्द, वाचा, आज्ञा, शपथ, विधि और अनन्त वाचा ये सभी परमेश्वर द्वारा कनान की निज भूमि को देने पर लागू होती है। अब मुझे लगता है कि कोई भी जो इसके विरुद्ध जाता है वह परमेश्वर के विरुद्ध जाता है।

तब यिर्मयाह 30 अध्याय में हम भविष्यद्वाणी पाते हैं। असंख्य भागों में से एक भाग में जो अन्तिम दिनों में यहूदी लोगों के द्वारा अपनी विरासत में वापस आने की भविष्यद्वाणी है। यिर्मयाह 30वाँ अध्याय 3 पद से प्रारंभ करते हुए।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं कि मैं अपनी इस्राएली और यहूदी प्रजा को बंधुआई से लौटा लाऊंगा; और जो देश मैं ने उनके पितरों को दिया था उस में उन्हें फेर ले आऊंगा, और वे फिर उसके अधिकारी होंगे, यहोवा का यही वचन है।

मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति जो बाइबल का थोड़ा बहुत ज्ञान रखता है, वह जानता है कि वह देश कौन सा है जिसे परमेश्वर ने अब्राहम और उसके वंश को दिया है। कनान देश, इस्राएल और वह देश जिसे हम आज पवित्र देश कहते हैं। परमेश्वर कहता है, जब समय आता है तब मैं इस्राएल और यहूदा के वंश को उनकी गुलामी से उस देश में वापस लाऊँगा जिसे मैंने उनके पितरों को दिया था।

और तब परमेश्वर एक चेतावनी देता है ....। आप देखें, मेरा एक मित्र है - कुछ समय से ही मैंने उसे नहीं जाना है परन्तु वह एक ब्रिटिश प्रचारक है और किसी ने उससे एक बार पूछा, ‘‘क्या आपको लगता है कि उस देश में यहूदियों का वापस आना परमेश्वर का कार्य है?’’ परमेश्वर उन्हें आशीष दे। उसने कहा, ‘‘यदि यह परमेश्वर का कार्य होता तो शान्ति होती।’’ वह अपना बाइबल नहीं जानता था। अब उस देश में यहूदियों की वापसी के बारे में परमेश्वर यह कहता है।

यहोवा यों कहता हैः थरथरा देनेवाला शब्द सुनाई दे रहा है, शान्ति नहीं, भय ही का है। पूछो तो भला, और देखो, क्या पुरुष को भी कहीं जनने की पीड़ा उठती है? फिर क्या कारण है कि सब पुरुष ज़च्चा की नाई अपनी अपनी कमर अपने हाथों से दबाए हुए देख पड़ते हैं? क्यों सब के मुख फीके रंग के हो गए हैं?

यह भयानक सताव, भय और विरोध का वर्णन है।

हाय, हाय, वह दिन क्या ही भारी होगा ! उसके समान और कोई दिन नहीं; वह याकूब के संकट का समय होगा; परन्तु वह उस से भी छुड़ाया जाएगा।

अतः यहूदी लोगों की अपने देश में वापसी जल्द शान्ति नहीं लानेवाली है। इसके विपरीत इसके अन्त में कठिनाई आनेवाली है जैसा उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं किया है। परन्तु प्रतिज्ञा यह है कि वे इससे बाहर बचाए जाएँगे। इससे नहीं, परन्तु इससे बाहर।

और तब यदि आप यिर्मयाह 30 अध्याय के अन्तिम शब्दों को देखें, यह एक प्रकार से छोटा सारांश है, यह कहता है:

‘‘अन्त के दिनों में तुम इस बात को समझ सकोगे।

तो, यह अपने स्वयं के देश में बाद के दिनों में यहूदियों के पुनःस्थापन के विषय में भविष्यद्वाणी है और भविष्यद्वाणी कहता है, ‘‘तुरन्त शान्ति नहीं होगी।’’ इसके विपरीत विरोध बढ़ेगा और यह बढ़ रहा है और यह और बढ़ेगा।

अब मैं चाहता हूँ कि आप बाइबल में सबसे अधिक उत्साहजनक अध्याय में से एक निकालें और यह यहेजकेल 36 अध्याय है। यहाँ पर अपने देश में यहूदी लोगों की वापसी का एक संक्षिप्त मंचन है। यहेजकेल 36 अध्याय 16 पद से शुरू करते हुए।

फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, हे मनुष्य के सन्तान, जब इस्राएल का घराना अपने देश में रहता था, तब अपनी चालचलन और कामों के द्वारा वे उसको अशुद्ध करते थे; उनकी चालचलन मुझे ऋतुमती की अशुद्धता सी जान पड़ती थी (ध्यान दें कि यह उनका अपना देश था, परन्तु उन्होंने अपने स्वयं के पाप के द्वारा अशुद्ध किया था। अतः परमेश्वर आगे कहता है)। सो जो हत्या उन्होंने देश में की, और देश को अपनी मूरतों के द्वारा अशुद्ध किया, इसके कारण मैं ने उन पर अपनी जलजलाहट भड़काई।

तो, परमेश्वर ने उनके पाप और उनकी मूर्तिपूजा के लिये लोगों पर दण्ड लाया जब कि वे अभी देश में ही थे। और परमेश्वर के व्यवहार का अगला चरण अगले पद में पाया जाता है।

और मैं ने उन्हें जाति-जाति में तितर-बितर किया, और वे देश देश में छितर गए; उनके चालचलन और कामों के अनुसार मैं ने उनको दण्ड दिया।

अतः अगला दण्ड देश से बाहर करना था। और तब परमेश्वर कहता है, ‘‘

परन्तु जब वे उन जातियों में पहुंचे जिन में वे पहुंचाए गए, तब उन्होंने मेरे पवित्र नाम को अपवित्र ठहराया,’’ ‘‘क्योंकि लोग उनके विषय में यह कहने लगे, ये यहोवा की प्रजा हैं, परन्तु उसके देश से निकाले गए हैं। परन्तु मैं ने अपने पवित्र नाम की सुधि ली, जिसे इस्राएल के घराने ने उन जातियों के बीच अपवित्र ठहराया था, जहां वे गए थे।’’

अतः प्रभु कहता है, ‘‘मैं उन लोगों के व्यवहार से व्यथित था जो देश से बाहर किए गए क्योंकि वे मेरे लोगों के समान बिल्कुल भी नहीं थे।’’ अब अगला पद बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जब तक आप परमेश्वर के प्राथमिक उद्देश्य को न समझें तब तक आप इस्राएल के साथ परमेश्वर के संबन्ध को नहीं समझेंगे।

‘‘परन्तु मैं ने अपने पवित्र नाम की सुधि ली, जिसे इस्राएल के घराने ने उन जातियों के बीच अपवित्र ठहराया था, जहां वे गए थे।’’

परमेश्वर यहूदी लोगों की खातिर यह नहीं कर रहा है वह अपने नाम की खातिर यह कर रहा है। यदि आप इस बात को नहीं समझते हैं तो आप इतिहास की उन घटनाआें को नहीं समझ पाएँगे जो इसके बाद बाती है। परमेश्वर ने अपने नाम की महिमा के लिये हस्तक्षेप किया है। अब परमेश्वर कहता है, मैं उनसे इस प्रकार व्यवहार करने जा रहा हूँ। और अब यह बहुत रोचक है, यह बहुत सरल है। यह अपने परमेश्वर और अपने देश में यहूदी लोगों के पुनःस्थापन का क्रमबद्ध वर्णन है। हो सकता है आप कहें, ‘‘अच्छा परमेश्वर, आपने ऐसा क्यों किया?’’ मुझे लगता है कि उन्होंने पहले पश्चाताप् किया होगा और तब देश में वापस आए होंगे। खैर, आपको इसके बारे में परमेश्वर से विवाद करना होगा क्योंकि परमेश्वर कहता है, यह ऐसा नहीं होनेवाला है। वे देश में वापस आनेवाले हैं और तब वे पश्चाताप् करनेवाले हैं। मैंने बहुत से मसीहियों को कहते सुना है, ‘‘काश, मैं यहूदी लोगों के पुनःस्थापन पर विश्वास कर पाता जबकि वे पश्चाताप् करते और यीशु को अपना मसीह स्वीकार करते।’’ हाँ, आपको परमेश्वर से तर्क करना है क्योंकि परमेश्वर ने इसके लिये एक भिन्न मार्ग ठहराया है। पद 22 में वह कहता है:

इस कारण तू इस्राएल के घराने से कह, यों कहता है, हे इस्राएल के घराने, मैं इस को तुम्हारे निमित्त नहीं, परन्तु अपने पवित्र नाम के निमित्त करता हूँ जिसे तुम ने उन जातियों में अपवित्र ठहराया जहां तुम गए थे। (तब अगला पद)। और मैं अपने बड़े नाम को पवित्र ठहराऊंगा, जो जातियों में अपवित्र ठहराया गया, जिसे तुम ने उनके बीच अपवित्र किया; और जब मैं उनकी दृष्टि में तुम्हारे बीच पवित्र ठहरूंगा, तब वे जातियां जान लेगी कि मैं यहोवा हूँ, की यही वाणी है।

‘‘मैं तुममें और तुम्हारे लिये जो कुछ करता हूँ उसके द्वारा पुनः मैं अपने नाम की महिमा की घोषणा करने जा रहा हूँ।’’ और तब वह आगे कुछ सामान्य कदम बताता है जो पूरी तरह हमारे दिनों में पूर्ण हुई। पद 24, अगला कदम।

‘‘मैं तुम को जातियों में से ले लूँगा, और देशों में से इकट्ठा करूँगा; और तुम को तुम्हारे निज देश में पहुँचा दूँगा।’’

किसका देश? आपका अपना देश। चाहे वे उसमें थे या न थे, यह हमेशा से उनका देश रहा है क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें वह देश एक अनन्त वाचा के साथ दिया है। परन्तु वे उससे बाहर रहे हैं। परन्तु वह कहता है, ‘‘अब, परमेश्वर कहता है, मैं तुम्हें राष्टंों के बीच से ले आऊँगा, तुम्हें सारे देश से इकट्ठा करूंगा और तुम्हारी निज भूमि में तुम्हें ले आऊँगा।’’

मैं यरूशलेम में इब्री विश्वविद्यालय में एक छात्र रहा हूँ। मैं तीस लोगों की एक कक्षा में बैठा करता था और वे दस भिन्न देशों से आते थे। और यह अनुमान लगाया जाता है कि कुल मिलाकर इस सदी में यहूदी पृथ्वी पर के सौ से अधिक देशों से इकट्ठें किये गए हैं। यह एक अद्भुत आश्चर्यकर्म है। मेरे विचार से यह मिस्र से छुटकारे के आश्चर्यकर्म से भी बड़ा आश्चर्यकर्म है।

जैसा कि आपमें से कुछ लोग जानते हैं, मेरी पहली पत्नी डैनिस थी और वह कहा करती थी, ‘‘यदि आप डैनिस लोगों को देखें और यदि वे सब राष्टंों में दो वर्षों के लिये तितर-बितर हो जाते तो जब आप वापस आते तो आप एक भी डैनिस व्यक्ति को नहीं पाते। वे देश के साथ मिल गए होते परन्तु यहूदी लोग मूल रूप से कितने वर्षों से बिखरे हुए हैं?’’ मुझे विश्वास नहीं होता। दो हजार वर्षों से। मेरा मतलब है निश्चय ही मुझे आश्चर्य होना चाहिए परन्तु मुझे नहीं है। और वे अब भी एक अलग पहचान रखनेवाला समूह है। यह एक आश्चर्यकर्म है। इससे आगे उन कई देशों से कई लोगों का आना अपने आप में परमेश्वर का आश्चर्यजनक कार्य है।

द्वितीय विश्चयुद्ध के अन्त में मैं इस्राएल में था। और वहाँ रहते हुए मैंने यहूदी लोगों की कुछ गवाहियों को सुना जिसे उन्होंने बताया कि वे कहाँ से इकट्ठे किये गए थे और क्या हुआ था। मुझे कहना है कि मेरी दृष्टि में पूरा परिदृश्य बहुत तरीके से एक ऐसा आश्चर्यकर्म प्रगट करता है जो कि मिस्र से हुए निर्गमन से भी बहुत बड़ा है और यह एक आश्चर्यकर्म है। यदि परमेश्वर इसे संभव नहीं बनाता तो यह नहीं हुआ होता। और परमेश्वर ने कहा, ‘‘मैं यह करूँगा।’’ मैं इसे पुनः पढ़ना चाहता हूँ।

‘‘मैं तुम को जातियों में से ले लूँगा, और देशों में से इकट्ठा करूँगा; और तुम को तुम्हारे निज देश में पहुँचा दूँगा। (अब अगला पद)। मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाआेगे; और मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा।’’

ध्यान दें कि वे अब भी अशुद्ध के रूप में इकट्ठे किये जा रहे हैं। यह कुछ लोगों के धर्मविज्ञान को निराश करता है। मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। यह ऐसा ही है। आपको परमेश्वर से इसे स्पष्ट करना चाहिए। परमेश्वर कहता है, ‘‘जब मैं इन्हें देश में वापस लाऊँगा, तब मैं उनसे व्यवहार करूँगा, मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कुँगा, और तुम अपनी सारी अशुद्धताआें से शुद्ध होगे।’’

यशायाह भविष्यद्वाणी के पुस्तक में वचन उनसे कहता है, ‘‘जिस स्थान में उनसे यह कहा जाता था कि तुम मेरी प्रजा नहीं हो, उसी स्थान में वे जीवते परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे।’’ अतः, परमेश्वर को उन्हें उस मूल स्थान में वापस लेकर आना था और उन्हें पुनःस्थापित करना था। मेरे विचार से यह बहुत ही तर्कसंगत है।

अतः पहला काम जो परमेश्वर करने जा रहा है वह शुद्ध जल का छिड़काव है। मुझे लगता है कि यहूदी लोगों पर केवल छिड़काव हुआ है, उन पर धारा का प्रवाह नहीं हुआ है परन्तु परमेश्वर के वचन से छिड़के गए हैं। आपको जानना है कि बहुत तरीकों से यहूदी लोगों का इतिहास कैथलिक कलीसिया के इतिहास के समान है। निश्चय ही, इसमें बहुत अन्तर है परन्तु मूल रूप से कैथलिक कलीसिया में पुरोहित ही ऐसा व्यक्ति होता था जो बाइबल जानता था। उसे बाइबल जानना होता था। लोग स्वयं इसे नहीं पढ़ते थे। पुरोहित जो कुछ उनसे कहता उन पर वे विश्वास करते। और कुछ हद तक यहूदी लोगों के विषय में भी यह सच था। रब्बी ही वह व्यक्ति होता था जो उत्तर जानता था। उन्हें स्वयं सोचने की जरूरत नहीं थी। जो कुछ रब्बी उनसे कहता उन्हें बस उतना ही करना होता, लेकिन अब उन पर शुद्ध जल का छिड़काव किया जा रहा है - उनके पास परमेश्वर का वचन आ रहा है। यह बढ़ता जा रहा है, मेरा मतलब है यहूदी लोगों में यीशु को मसीह माननेवालों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ती ही जा रही है।

मुझे स्मरण है जब मैं 1948 में यरूशलेम में था। यदि आप एक वर्ष में एक यहूदी विश्वासी से मुलाकात कर लिया तो यह उत्साहजनक होता था। अब हर समय आप कहीं भी मुड़ो आपको एक नया यहूदी विश्वासी मिल जाएगा। मुझे याद भी नहीं है कि यरूशलेम में इब्रानी भाषा बोलनेवाली कितनी कलीसिया हैं। मुझे लगता है कि 18 के करीब। यरूशलेम में इब्रानी भाषा बोलने वाले यह पिछले कुछ वर्षों में हुआ है। परमेश्वर उन पर शुद्ध जल का छिड़काव कर रहा है। परमेश्वर के वचन का शुद्ध जल।

तब वह अगले पद में कहता है:

‘‘मैं तुमको नया मन दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकाल कर तुमको मांस का हृदय दूँगा।’’

तो यहूदी लोगों के सदियों के निर्वासन, परमेश्वर के न्याय के दौरान् उनका हृदय पत्थर का था। एक पत्थर का हृदय पवित्र आत्मा को प्रतिक्रिया नहीं दे सकता है। वे प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हैं। वे हमेशा अपवाद रहे हैं। अब परमेश्वर उस पत्थर के हृदय को दूर कर रहा है और उन्हें मांस का हृदय दे रहा है। और उनकी एक उत्साहजनक परिवर्तन यीशु के प्रति है।

मुझे याद आता है 1947 या 1948 में मैं एक यहूदी व्यक्ति से बात कर रहा था और मैंने उससे कहा, ‘‘मैं मानता हूँ कि यीशु अभिषिक्त मसीह है।’’ और वह घूमा और जमीन पर थूक दिया। यीशु के नाम के प्रति यह उसकी प्रतिक्रिया थी। यरूशलेम में इब्रानी विश्वविद्यालय में धर्म के प्रोफेसर ने कुछ वर्षों पहले यह समर्पण किया। उसने कहा, ‘‘कुछ समय पूर्व मेरे सभी छात्र धर्मवैज्ञानिक विवाद के विषय में जानना चाहते थे। अब वे सब यीशु के बारे में जानना चाहते हैं। देखें, एक अन्तर आया है। एक महत्वपूर्ण अन्तर आ रहा है। परमेश्वर ने कहा कि ऐसा होगा, ‘‘मैं तुम्हें एक नया मन दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा और तुम्हारी देह में से पत्थर का हृदय निकालकर तुमको मांस का हृदय दूँगा।’’ अगला पद:

और मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर देकर ऐसा करूंगा कि तुम मेरी विधियों पर चलोगे और मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे।

तब परमेश्वर कहता है, ‘‘न केवल मैं तुमको एक नया आत्मा दूँगा‘‘ - यह नया जन्म है - ‘‘बल्कि मैं तुम्हारे भीतर अपना आत्मा रखूँगा।’’ मेरे लिये यह पवित्र आत्मा का बपतिस्मा है। तब परमेश्वर कहता है, ‘‘अब तुम मेरे नियमों को मानकर उनके अनुसार करोगे।’’ आपमें से कितने लोग जानते हैं कि पवित्र आत्मा के बिना आप परमेश्वर की आज्ञाआें का पालन नहीं कर सकते हैं।

मुझे याद आता है जब 1932 में एक लड़के रूप में ‘‘दृढ़ीकरण’’ हुआ। आप जानते हैं दृढ़ीकरण क्या होता है? एक सच्चाई यह है कि मैं दृढ़ीकरण नहीं चाहता था। अतः उन्होंने मेरे पिता से निवेदन किया कि मेरा दृढ़ीकरण होना चाहिए और उस दौरान् मेरे पिता भारत में सेवा कर रहे थे। उन्होंने जवाब में पत्र लिखा और कहा, ‘‘तुम्हारे उम्र के सारे बच्चों का दृढ़ीकरण हो रहा है, तुम्हारे दृढ़ीकरण होगा।’’ अतः मेरा दृढ़ीकरण हुआ। मेरे दृढ़ीकरण से ठीक पहले मैं एक पापी था और दृढ़ीकरण के मैं एक दृढ़ पापी बन गया। मैं किसी बात को महत्वहीन करने के लिये यह नहीं कहता हूँ, सच्चाई यही थी। लगभग दस वर्षों के पश्चात् परमेश्वर ने मुझे पवित्र आत्मा से भरा और पहली बार मैं आनन्दपूर्वक परमेश्वर की आज्ञापालन कर सका। यहूदी लोगों के साथ यह ऐसा ही होनेवाला है। परमेश्वर कहता है, ‘‘मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर दूँगा तब तुम मेरी विधिआें पर चलोगो और मेरे नियमों को मान कर उनके अनुसार करोगे।’’

हम इस विशिष्ट भाग के अन्तिम पद पर आते हैं। 28 पद:

‘‘तुम उस देश में बसोगे जो मैं ने तुम्हारे पितरों को दिया था; और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा।’’

आपको अन्त की आेर देखना है। ये सारे अलग अलग चरण हैं परन्तु पराकाष्ठा है, ‘‘तुम मेरी प्रजा ठहरोगे और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूँगा।’’ और परमेश्वर ने बहुत सरल भाषा में विभिन्न स्तरों का वर्णन किया है जिसमें से वह उन्हें उस स्थान की आेर ले जाएगा। तो आप यहूदी लोगों के प्रति आलोचनात्मक हैं तो यह कठिन नहीं है। वास्तव में एक तथ्य जो यहूदी लोगों के विषय में बहुत ही महत्वपूर्ण है वह यहूदी लोग स्वयं हैं। परन्तु इस बात को मन में ठान लें कि धीरजवन्त हों। परमेश्वर कार्य कर रहा है। वह कुछ कर रहा है। उसने पहले से कई सदियों पूर्व से रूपरेखा बना लिया है कि किस प्रकार वह उनसे व्यवहार करनेवाला है। वह कदम व कदम यह कर रहा है। हमारी आँखों के सामने यह पूरा हो रहा है, यह उत्साहजनक है, कम से कम मेरे लिये। और यदि मैं उत्साहित हो सकता हूँ तो प्रायः कोई भी उत्साहित हो सकता है। और अब यह केवल सत्य ही नहीं हैं परन्तु यह सत्य रहा है। परन्तु मैंने इसे बहुत बदला है।

अब मैं केवल यह बताना चाहता हूँ कि यदि आप इब्रानी भाषा में इस भाग को पढ़ें, यहेजकेल 36 अध्याय 23 से 30 पदों के बीच में, परमेश्वर ‘‘मैं करूँगा’’ 18 बार कहता है। आपने समझा? आप एक सर्वोच्च परमेश्वर की बात कर रहे हैं। हम एक ऐसे परमेश्वर से बात नहीं कर रहे हैं जिसे हमारी सहमति की आवश्यकता है। यह नहीं जानता कि वह क्या करने जा रहा है। उसने पहले से सारी योजना बना ली है और वह 18 बार कहता है। ‘‘मैं करूँगा, मैं करूँगा, मैं करूँगा, मैं करूँगा,....।’’ क्या आप परमेश्वर की सर्वोच्चता में विश्वास करते हैं? निश्चय ही मैं करता हूँ। यह मुझे कैल्विनिस्ट नहीं बनाता है लेकिन परमेश्वर की सर्वोच्चता की मेरी परिभाषा यह है: परमेश्वर जो चाहता है, जैसे चाहता है, और जब चाहता है उस प्रकार करता है और वह किसी की अनुमति नहीं मांगता है। मेरी भी नहीं। कुछ लोग सोचते हैं कि यह करने से पहले परमेश्वर को उनसे अनुमति लेना चाहिए। परन्तु यह ऐसा नहीं है।

अब, मेरे और आपके लिये इसका बहुत महत्वपूर्ण प्रयोग है। यदि आप यशायाह ग्यारह अध्याय में वापस जाएँ, परमेश्वर कहता है कि अन्य देशों के लिये इस्राएल की पुनःस्थापना का महत्व क्या है? यशायाह 11ः11,12 पद:

‘‘उस समय (और यशायाह और अन्य भविष्यद्वक्ताआें में वह दिन अन्तिम समय है हमेशा नहीं परन्तु प्रायः) प्रभु अपना हाथ दूसरी बार बढ़ाकर बचे हुआें को, जो उसकी प्रजा के रह गए हैं, अश्शूर से, मिस्र से, पत्रोस से, और कूश से, एलाम से, और शिनार से, हमात से, और समुद्र के द्वीपों से मोल लेकर छुड़ाएगा।

अतः यशायाह भविष्यद्वाणी करता है कि यह द्वितीय बार इकट्ठा करना होगा। यह बाइबल के विषय में एक उल्लेखनीय तथ्य है। क्योंकि पहला इकट्ठा किया जाना अब तक नहीं हुआ है परन्तु परमेश्वर इससे परे देख रहा है। पहला एकत्रीकरण बाबुल की बन्धुवाई के बाद एक संक्षिप्त आंशिक एकत्रीकरण था परन्तु परमेश्वर कहता है कि एक दूसरा एकत्रीकरण होगा और यह एकत्रीकरण संसार भर से होगा। ‘‘मैं अपने बचे हुआें लोगों को इकट्ठा करने के लिये दूसरी बार हाथ बढ़ाऊँगा।’’ अब यदि परमेश्वर कुछ करने के लिये अपना हाथ बढ़ाता है तो वह करनेवाला है। उस व्यक्ति पर हाय जो उसके मार्ग में आता है। अब यह मेरे लिये एक ज्वलन्त वर्णन है। इसका महत्व क्या है?

‘‘वह अन्यजातियों के लिये झण्ड़ा खड़ा करके इस्राएल के सब निकाले हुओं को, और यहूदा के सब बिखरे हुआें को पृथ्वी की चारों दिशाआें से इकट्ठा करेगा।’’

ध्यान दीजिए कि यह दुनिया भर से होनेवाला एकत्रीकरण है। बाबुल से एकत्रीकरण एक निश्चित स्थान के लिये सीमित था। परन्तु यह विश्वव्यापी होगा और यह पूरी रीति से पूर्ण होगा। सौ से अधिक देश हैं जिनमें से यहूदी लोग एकत्र किए गए हैं। आप पृथ्वी पर कोई ऐसा देश नहीं देख सकते हैं जिसमें से यहूदी लोगों को इकत्र नहीं किया गया हो। परन्तु यह सब पहली बिखेरने और पहले एकत्रीकरण से पहले से ही कहा गया था।

और तब परमेश्वर कहता है, ‘‘वह अन्यजातियों के लिये झण्डा खड़ा करके इस्राएल के सब निकाले हुआें को ... इकट्ठा करेगा।’’ अन्यजाति अलग अलग जातियाँ हैं। अतः अपने देश में इस्राएलियों का पुनः एकत्रित किया जाना परमेश्वर का झण्डा है। अच्छा होगा कि हम ध्यान दें।

अब झण्डा क्या हे? मेरी साधारण परिभाषा यह है। एक झण्डा कुछ ऐसा होता है जिसे हवा में लहराया जाता है और दूर से ही दिखाई देता है। और प्रायः इस पर कुछ साधारण से शब्द लिखे होते हैं। तो यहूदी लोगों के एकत्रीकरण को मैं इसी प्रकार समझता हूँ। यह परमेश्वर का ऊँचा उठाया हुआ झण्डा है ताकि हर राष्टं देखे। और आप देखते हैं कि सारे देश देख रहे हैं। क्योंकि आप सप्ताह भर में कोई भी ऐसा दिन नहीं देखेंगे जब समाचार पत्र में इस्राएल का जिक्र न हो। मेरा मतलब है, जब आप इस्राएल को मात्र छः मिलियन लोगों का एक छोटे से देश के रूप में देखते हैं और दुनिया के मानचित्र पर वेल्स से भी छोटे देश के रूप में देखते हैं, तो यह आश्चर्यजनक है। और अन्तिम यह सप्ताह द सप्ताह चलता रहता है। क्यों? क्योंकि यह परमेश्वर झण्डा है जिसे वह चाहता है कि हर देश वह देखे। यह ऊँचा उठाया गया है।

झण्डे के शब्द क्या हैं? अब यह मेरी व्यक्तिगत व्याख्या है। मेरे लिये इस झण्डे के द्वारा परमेश्वर यह कह रहा है, श् कितने वर्षों पूर्व? लगभग तीन हजार आठ् सौ वर्षों पूर्व परमेश्वर ने अब्राहम के साथ वाचा बान्धा। उसने कहा, ‘‘मैं तुझे और तेरे वंश को यह देश दूँगा।’’ अधिकांश लोग यह भूल गए लोगों ने सोचा कि यह उनके भूतकाल में दफन हो गया है। एक व्यक्ति है जो कभी नहीं भूलता है, परमेश्वर। उसने कहा, ‘‘मैं अपनी वाचा पूरी करता हूँ।’’ हम सबके लिये यह जानना कितना महत्वपूर्ण है। मसीहियों के रूप में यह हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि परमेश्वर के साथ हमारा संबन्ध उस नई वाचा पर आधारित है जो यीशु के लहू के द्वारा बान्धी गई है। यदि परमेश्वर इस्राएल के साथ अपनी वाचा तोड़ सकता है तो वह कलीसिया के साथ अपनी वाचा क्यों नहीं तोड़ सकता है? लेकिन वह नहीं करेगा। वह वाचा को तोड़नेवाला नहीं है। उसने एक वाचा बान्धा और वह वाचा में बना रहता है और यह शुभसमाचार है, यह उत्साहजनक है।

मुझे याद आता है कि 29 नवम्बर 1947 को मेरी पहली पत्नी और मैं और हमारा परिवार यरूशलेम में थे। जब संयुक्त राष्टं ने इस बात पर मत-विभाजन किया कि इस क्षेत्र की इस छोटी सी पट्टी को विभाजित किया जाए और इस्राएल को छोटा सा हिस्सा दिया जाए और यरूशलेम के केन्द्र में युवा यहूदी लोग, लड़के और लड़कियाँ एक दूसरे के हाथ थामे सियोन स्क्वायर के चारों आेर पूरी रात होरा नृत्य कर रहे थे। वे इतने उत्साहित क्यों थे? क्योंकि परमेश्वर अपनी वाचा पूरी कर रहा था। आेह्, वह कैसा अद्भुत है!

अब यह जातियों के लिये एक गंभीर सन्देश है। ब्रिटेन के लिये न्यूनतम नहीं, वास्तव में ब्रिटेन के लिये पहला और सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटेन ने इन सबमें एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। योएल 3 अध्याय 1 और 2 पद निकालें।

क्योंकि सुनो, जिन दिनों में और जिस समय मैं (यह कहनेवाला परमेश्वर है) यहूदा और यरूशलेम (तो यह यहूदी लोगों के पुनःस्थापन का समय है) वासियों को बंधुआई से लौटा ले आऊंगा, उस समय मैं सब जातियों (सारी अन्यजातियों को) को इकट्ठी करके यहोशपात (और यहोशापात जैसा कि नाम का अर्थ है प्रभु न्याय करता है) की तराई में ले जाऊंगा, और वहां उनके साथ अपनी प्रजा अर्थात् अपने निज भाग इस्राएल के विषय में जिसे उन्हों ने अन्यजातियों में तितर-बितर करके मेरे देश को बांट लिया है, उनसे (अर्थात् सारे देश) मुकद्दमा लडूंगा।

इससे पहले कि यह इस्राएल का देश हो यह परमेश्वर का देश था। परमेश्वर ने इसे इस्राएलियों को दिया था। देश को विभाजित करने के लिये आधुनिक राजनैतिक शब्द क्या है? विभाजन। सही है।

तो परमेश्वर देशों का न्याय करने जा रहा है जिसने इस देश को विभाजित किया है। सूची में सबसे ऊपर ब्रिटेन है। प्रथम विश्वयुद्ध के अन्त में देशों के लिये लीग ने पवित्र देश पर शासन करने के लिये ब्रिटेन को अधिकार दिया और उनका विशिष्ट आदेश यहूदियों के लिये एक राष्टंीय घर की सृष्टि करना था। यह लगभग 1919 में हुआ। 1922 में विन्स्टन चर्चिल ने जो कि गृह-सचिव थे ब्रिटिश कलम की एक ही झटके से एक अरब देश को सृजित किया जिसे टंान्स जोर्डन कहा गया। यह अब जोर्डन कहलाता है। जिसके द्वारा उसने इस्राएल को दिये गए कुल क्षेत्र में से 75 प्रतिशत अधिकृत कर लिया गया। और जोर्डन के उस भाग में किसी भी यहूदी को रहने का अनुमति नहीं है। जबकि इस्राएल को दी गई भूमि पर रहने के लिये प्रत्येक अरब पूरी तरह स्वतन्त्र है बशर्ते कि वह रहना चाहे। तो यहाँ पर यहूदी लोगों के पास जितना उन्हें मिलना चाहिए उसमें से लगभग 25 प्रतिशत है।

अत द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् संयुक्त राष्टंों ने विभाजन के लिये वोट डाला और उन्होंने लगभग 12 प्रतिशत अर्थात् और 12 प्रतिशत लेकर इस्राएल को दिया। 100 प्रतिशत के बजाय उन्हें 12 प्रतिशत मिला। किसका उत्तरदायित्व था? ब्रिटेन। अब इसके पश्चात् जैसा कि आप जानते हैं संयुक्त राष्टं ने इस्राएल को स्वायत का दर्जा देने के लिये वोड डाला। मैं एक गवाह था। उस समय मैं वहाँ रह रहा था। मैं ब्रिटिश था। मैं ब्रिटिश सेना से निवृत्त हो चुका था। कुछ निश्चित सूचनाओं तक मेरी पहुँच थी। अब ब्रिटिश ने खुलकर संयुक्त राष्टं की अवहेलना नहीं कि परन्तु उन्होंने अपने तरीके से एक खेल खेलने का निर्णय लिया। और उन्होंने इस्राएल देश की सृष्टि को निरूत्साहित करने के लिये हर प्रकार का संघर्ष छेड़ दिया।

अब मैं बात कर रहा हूँ - मैं वहाँ था। मैंने अपनी आँखों से उसे देखा और उन्होंने इस विचार का उपहास किया कि यहूदियों को कभी उनका अपना देश मिलेगा। ‘‘ये यहूदी खेती के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, वे केवल धन कमाने के बारे में जानते हैं।’’ यह उनकी टिप्पणी थी। तो यहूदियों के लिये भयानक खतरे का एक समय था और लीडिया और मैं उसके मध्य में थे। हम यहूदी यरूशलेम के मध्य रह रहे थे। और परिणाम क्या था? यह बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले इस्राएल राष्टं अस्तित्व में आया। दूसरा, ब्रिटिश साम्राज्य का पतन हो गया और उनके पतन का यही कारण रहा है। क्योंकि वे इस्राएल के लिये परमेश्वर की योजना के विरोध में गए। और किसी भी देश और किसी भी शासन के लिये हाय जो इस्राएल के लिये परमेश्वर की योजनाआें के विपरीत जाते हैं।

मैं आशा करता हूँ कि हमने अपना पाठ सीख लिया है। एक राष्टं के रूप में मेरा मानना है कि हमें परमेश्वर के सामने अपने आपको दीन करने और इसे एक पाप के रूप में मानने की आवश्यकता है। कहिए, ‘‘हमने तेरे उद्देश्यों का विरोध किया, हमने तेरे लोगों को कम जाना।’’हर प्रकार की यहूदी विरोधी मजाक थे जो उन दिनों में यहूदी लोगों के बारे में किया जाता था। परन्तु आप किसी भी ऐसे देश को नहीं देखते हैं, चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, धनवान हो, जो परमेश्वर के उद्देश्यों के विपरीत जाए और समृद्ध हो। और मैं बहुत कुछ ऐसी ही बात संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ होते हुए देखता हूँ। मैं इसी प्रकार की राजनीतिक भाषा देखता हूँ, अच्छी बातें कहना परन्तु उसी समय उसके विपरीत काम करना। मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि राष्टंपति क्लिन्टन का पतन हो जाएगा। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है क्योंकि वह इस्राएल के लिये परमेश्वर के उद्देश्यों के साथ गलत रूप से संबन्धित है। आप इस्राएल के एक मित्र के समान बात कर सकते हैं और भले हो सकते हैं और हर प्रकार से राजनैतिक रूप से सही बातें कह सकते हैं। परन्तु भीतरी रूप से एक छोटे से शब्द से कह सकते हैं कि वे किस बात के प्रति चिन्तित हैं? तेल। यही चिन्ता का कारण है। यही महाशक्तिआें को प्रेरित करता है। यही यूरोपीय संघ को प्रेरित करता है। तेल। प्रगट रूप से देने के लिये इस्राएल के पास कोई तेल नहीं है। अतः हम अच्छी बातें कहेंगे, हम राजनैतिक रूप से सही बोलेंगे, हम लोकतान्त्रिक भाषा बोलेंगे परन्तु उसी समय अपने पाॅकेट डायरी की भी परवाह करें।

अब इस स्थिति के बारे में एक अन्तिम तथ्य जो कि बहुत ही आवश्यक है वह यह है कि इन सबके पीछे वास्तविक मुद्दा क्या है? मेरा मतलब है यह बेतुका है - संयुक्त राज्य के लगभग आधे प्रस्ताव इस्राएल के बारे में कहे गए हैं। आप इससे कम उचित या अधिक हास्यास्पद किसी बात की कल्पना नहीं कर सकते हैं। अवश्य ही इसका एक कारण होना चाहिए। ऐसा क्यों है कि जब आप प्रत्येक बार समाचार पत्र खोलते हैं या अपना टीवी आॅन करते हैं तो इस छोटे से बारे में अवश्य ही कुछ न कुछ होता है जिसमें छः मिलियन लोग हैं। संसाररूपी बाल्टी में एक बूंद दवाब का, विरोध का, संघर्ष का क्या कारण है? मैं आपको बताने का प्रयास करूँगा।

मुझे मत्ती 23 अध्याय निकालने दीजिए, अध्याय के अन्तिम शब्द, बहुत ही दुःखद शब्द, 37, 38, और 39 पद। अब यह यरूशलेम जाने के लिये यीशु की विदाई है। यह एक बहुत ही दुःखद और पीड़ा दायक विदाई है।

हे यरूशलेम, हे यरूशलेम; तू जो भविष्यद्वक्ताआें को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्हें पत्थरवाह करता है, कितनी ही बार मैं ने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे कर लूं, परन्तु तुमने न चाहा (और यह बहुवचन है। यहूदी लोगों की एक सामुहिक इच्छा है, एक जनता के रूप में वे नहीं चाहते थे। तब वह कहता है)। देखो, तुम्हारा घर तुम्हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है।

जब वह तुम्हारा घर कहता है, तो उसका तात्पर्य मन्दिर है। क्योंकि उन्होंने उसे हाबीएट, घर कहा। और सच यह है; एक पीढ़ी के अन्तराल में यह पूरी रीति से निर्जन हो गया। तब वह अन्तिम पद पर जाता है।

क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि अब से जब तक तुम न कहोगे, कि धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है, तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।

अब यह बहुवचन है। तुम बहुवचन है। यह यरूशलेम नहीं है। यह तुम यहूदी लोग हो। ‘‘....तुम मुझे पुनः तब तक नहीं देखोगे, जब तक तुम यहूदी लोग नहीं कहोगे, ‘धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है।’’’ यह मानक इब्रानी अभिवादन है। -- (इब्रानी अभिवादन है)। ‘‘धन्य है जो प्रभु के नाम से आता है।’’

तब वह कहता है, ‘‘मैं तब तक नहीं आनेवाला हूँ जब तक तुम मेरा स्वागत करने के लिये तैयार न हो।’’ तो अपनी वापसी से पहले वह यहूदी लोगों के हृदय को तैयार करने जा रहा है। और यदि आप जकर्याह 12 निकालें तो आप इस चित्र का अन्तिम भराव देखते हैं। जकर्याह 12 अध्याय 10वां पद:

और मैं दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियों पर अपना अनुग्रह करनेवाली और प्रार्थना सिखानेवाली आत्मा उण्डेलूंगा (ध्यान दें कि जब तब परमेश्वर आपको अनुग्रह की आत्मा न दे आप विनती नहीं कर सकते हैं। जब वह आपको अनुग्रह का आत्मा देता है तब आप विनती के साथ प्रतिक्रिया दे सकते हैं), तब वे मुझे ताकेंगे अर्थात् जिसे उन्हों ने बेधा है, और उसके लिये ऐसे रोएंगे जैसे एकलौते पुत्र के लिये रोते-पीटते हैं, और ऐसा भारी शोक करेंगे, जैसा पहिलौठे के लिये करते हैं।

अब यह प्रभु है जो बात कर रहा है। और वह कहता है: ‘‘तब वे (यहूदी लोग) मुझे ताकेंगे अर्थात् जिसे उन्होंने बेधा है।’’ यह सबसे अधिक आश्चर्यजनक बात है कि बिना जाने कि इसका अर्थ क्या है वे उसे पढ़ सकते हैं। क्योंकि यह धर्मशास्त्र का सबसे स्पष्ट कथन है कि वे प्रभु को क्रूसित करेंगे। ‘‘वे मुझे ताकेंगे अर्थात् जिसे उन्होंने बेधा है।’’

तब वचन कहता है, ‘‘वे उसके लिये ऐसे रोएँगे जैसे एकलौते पुत्र के लिये रोते-पीटते हैं।’’ अतः पवित्र आत्मा के द्वारा उसके अपने लोगों, यहूदी लोगों पर यीशु का प्रकाशन आनेवाला है कि वह वास्तव में कौन है। और तब वहाँ पर एक ऐसा विलाप होगा जैसा इस्राएल के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। पहली बार वे इस बात को समझेंगे ‘‘हमने मसीह को क्रूस पर चढ़ाया है। हमने अपने परमेश्वर को अस्वीकृत किया है।’’ तब वचन आगे कहता है,

उस समय यरूशलेम में इतना रोना-पीटना होगा जैसा मगिद्दोन की तराई में हदद्रिम्मोन में हुआ था। सारे देश में विलाप होगा, हर एक परिवार में अलग अलग; अर्थात् दाऊद के घराने का परिवार अलग,...।

मैं चाहता हूँ कि आप देखें कि यदि आप मत्ती और जकर्याह को एक साथ रखें तो प्रभु के आने से पहले कुछ बातें होनी है। यहूदियों को यरूशलेम में और देश में पुनःस्थापित होना है क्योंकि जब तक वे स्थापित नहीं होगे तब तक प्रभु यीशु नहीं जाएगा। और तब यीशु का एक अलौकिक प्रकाशन होना है जो कि लोगों के हृदयों को उसकी आेर वापस लाएगा।

शैतान, इस युग के ईश्वर अब तुम क्या सोचते हो? किस बात से सबसे अधिक भय खाते हो? वह एक बात कौन सी है जिससे वह सबसे अधिक परेशान है? मैं कहता हूँ कि यीशु की वापसी। क्योंकि जब तक यीशु न आए वह बहुत सारी लड़ाइयाँ हार सकता है परन्तु वह कभी भी युद्ध नहीं हारेगा। हो सकता है वह बहुत सारे आत्माआें को खो दे परन्तु वह फिर भी युग का ईश्वर रहेगा। जब तक यीशु व्यक्ति के रूप में नहीं आता है तब वह यह नहीं बदलेगा। तो शैतान सबसे अधिक किस बात से भयभीत होता है? यीशु की वापसी। वह सबसे अधिक किस बात का विरोध करता है? स्थितियों का बदलना जो कि यीशु की वापसी के लिये मार्ग तैयार करेगा। यहूदी लोगों को अपने नगर के रूप में यरूशलेम में होना है और यीशु के आने से पहले उन्हें देश पर अधिकार करना है। देखिए। तो सारे हंगामे और उपद्रव के पीछे यही बात है। तो शैतान ऐसे परिदृश्य के उत्पन्न होने का विरोध करने के लिये हर संभव प्रयास कर रहा है जो प्रभु को वापस ले आएगा। और यहीं हैं सारे राष्टं इकट्ठे होते हैं क्यों वह सारे राष्टंों इकट्ठा करने के लिये आ रहा है। और वह इस आधार पर उनका न्याय करनेवाला है कि उन्होंने किस प्रकार इस्राएल की भूमि के लिये उसके दावे पर प्रतिक्रिया दिखाई है। क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है? यह डरावना भी है।

मैं इस राष्टं ब्रिटेन के लिये प्रार्थ ना करता हूँ कि ब्रिटेन गलत पक्ष के साथ न हो। मैं इस बात की ग्यारन्टी नहीं दे सकता हूँ परन्तु मैं यह प्रार्थ ना करता हूँ। आप देखते हैं यह दुःखद है। क्योंकि एक प्रकार से ब्रिटिश मसीही लोग, ब्रिटिश मसीहियों ने एक राष्टं के रूप में इस्राएल की पुनःस्थापना के लिये मार्ग प्रशस्त किया है। हो सकता है आप इस बात को नहीं जानते हों, परन्तु अन्तिम युग के अन्त में एक छोटा किन्तु बहुत ही प्रभावशाली ब्रिटिश मसीहियों का एक समूह था जिन्होंने प्रार्थ ना किया और अपने देश में यहूदी लोगों की पुनःस्थापना के लिये उत्साह के साथ कार्य किया। पहले सियोनवादी यहूदी नहीं थे, वे ब्रिटिश थे और उस दौर में परमेश्वर ने ब्रिटेन को आशीष दी थी। ब्रिटेन सच में महान था। आप ब्रिटेन के विषय में आज महानता की बहुत अधिक बात नहीं कर सकते हैं परन्तु जब ब्रिटेन में एक ऐसी रानी थी जो यहूदी लोगों से प्यार करती थी.... एक प्रधानमन्त्री था जो मसीहियों के प्रति समर्पित था और दूसरा जो पृष्ठभूमि के हिसाब से यहूदी था। वे जितनेवाले दल में थे। आप देखें कि परमेश्वर के साथ आपका संबन्ध ही है जो वास्तव में निर्धा रित करता है कि क्या आप सफल होंगे या नहीं।

रूत और मैं यरूशलेम में एक कलीसिया में आराधना करते हैं, जिसकी स्थापना मुझे लगता है कि 1840 में हुई थी जो कि मध्य पूर्व में पहली प्रोटेस्टेंट कलीसिया है। यह ब्रिटिश सियोनियों के प्रयासों और प्रार्थ ना का उत्पाद है। और इसका उद्देश्य यहूदी लोगों की वापसी पर उनके लिए गवाही का एक स्थान तैयार रखना है। इसलिए वे धर्मशास्त्र से जानते थे कि यहूदी लोग वापस आ रहे थे और वे यह कहने के लिए दूरदर्शिता रखते थे कि ‘‘हमें गवाह बनने की आवश्यकता है।’’ और यह विशेष कलीसिया एक साधारण कलीसिया की तरह नहीं बनाया गया है। अधिकाँश सामान्य कलीसियाआें में जैसे ही यहूदी लोग प्रवेश करते हैं, उन्हें ठोकर लगती है। लेकिन यह कलीसिया हालांकि यह वास्तव में मसीही कलीसिया है, इसे ऐसे बनाया गया है कि एक यहूदी व्यक्ति अपना महसूस कर सके। और पहली बार कलीसिया की स्थापना के बाद एक पूर्व रब्बी इसके प्रथम बिशप थे। और यहूदी लोगों के बीच एक जागृति आई। और फिर शैतान ने प्रवेश किया, में मिल गया और वे यहूदियों से अधिक अरबों में दिलचस्पी लेने लगे। परमेश्वर अरबों का भला करे। हर अरब की एक आत्मा है जिसे उद्धार की जरूरत है। लेकिन यहूदी लोग इतिहास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसलिए मेरा सुझाव है कि हम ब्रिटिश-मुझे बहुत खुशी है कि मैं ‘हम’ कह सकता हूँ मुझे आपसे आप नहीं कहना है क्यों कि आप कहने पर आप आपत्ति कर सकते हैं। लेकिन हम ब्रिटिश को वास्तव में परमेश्वर के साथ हमारे रिश्ते के बारे में सोचने की जरूरत है। मुझे लगता है कि यह उचित होगा कि हम सर्वशक्तिमान ईश्वर के सामने अपने पापों को मानकर आज रात इस बैठक को समाप्त करें। कि हम उसके उद्देश्यों के रास्ते में आ गए हैं। हमने उसके लोगों का अनादर किया है और उन्हें बदनाकया है। इस्राएल की भूमि के संबंध में हमारा पूरा आचरण बहुत अनैतिक रहा है। अब मुझे नहीं लगता कि मैं ही वह व्यक्ति हूँ जिसे यह अंगीकार करना चाहिए।

मैं बरनबास के नेतृत्व से ऊपर आने और मंच पर मेरे साथ शामिल होने का आग्रह करता हूँ। मैं, आप सब लोगों से कहता हूँ जो वास्तव में ब्रिटिश हैं, इसे एक महत्वपूर्ण क्षण बनाने के लिए प्रभु में विश्वास कीजिए, क्योंकि यह वास्तव में इसराइल की नियति बदलने के लिए ब्रिटेन की मदद कर सकते हैं।

तो मैं परमेश्वर के द्वारा प्रेरित किए जाने, और ब्रिटिश लोगों की आेर से एक ईमानदार स्वीकारोक्ति करने की माँग करता हूँ कि किस प्रकार हमने यहूदी लोगों के विरुद्ध पाप किया, और इस्राएल के राज्य के विरुद्ध पाप किया है और उसे बताना चाहता हूँ हम क्षमा चाहते हैं, और वह हमें माफ कर देंगे। आमीन।

[एक अन्य व्यक्ति बोल रहा है]

मुझे लगता है कि परमेश्वर की उपस्थिति में कृपया एक साथ खड़े होना अच्छा होगा। मुझे विश्वास है कि हमारे प्रार्थना करना प्रारंभ करने से पहले यहाँ लोग है। यह अपील या लोगों के आगे आने या उनके हाथों का रखने या कुछ अन्य बातों के बारे मे नहीं है। वह इसका हिस्सा नहीं है। लेकिन यहाँ इस कक्ष में कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने अपने दिलों में ठान लिया है जिसे प्रतिस्थापन धर्मविज्ञान कहते हैं। वह जो कहते हैं कि हम परमेश्वर के इस्राएल हैं और इस्राएल के पास र्कोइ सथान नहीं है। मेरा मानना है कि जब तक आप उस अधिकार का प्रयोग न करें और जब तक आप परमेश्वर के वचन की सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार न हों, जैसा कि हमने आज रात सुना, वास्तव में आपकी प्रार्थना में कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि आप मोहित हैं। मेरा मानना है कि यह शैतान की ओर से एक मजबूत भ्रम है। मैं सिर्फ उन लोगों से कहता हूँ कि हम सिर्फ कुछ पल के लिए रुकने जा रहे हैं। मैं आपसे जोर से प्रार्थना करने के लिए कहने नहीं जा रहा हूँ, मैं प्रार्थना करने नहीं जा रहा हूँ, लेकिन मैं आपसे परमेश्वर के सामने उस पाप को कबूल करने और पश्चाताप करने के लिए कहने जा रहा हूँ, आप पश्चाताप करें, लेकिन परमेश्वर से उसे आप से ले लेने के लिए कहें, ताकि आप प्रार्थना कर सके, और कार्य और परमेश्वर की बातों को सही समझने में सक्षम हो सकें।

पिता परमेश्वर, हमने आपके लोगों इस्राएल को रौंद डाला है जैसा हमने आपके वचन को रौंद डाला। हे प्रभु एक राष्टं के रूप में हमने हमारे अपने लाभ की खातिर, अपने हृदय के घमंड के कारण, अपने मन की व्यर्थ कल्पना के लिए आपके वचन के सत्य को नजरअंदाज कर दिया है,। हे परमेश्वर, हम यहूदी लोगों की पीड़ा के बारे में लापरवाह रहे हैं। हमने उन लोगों के साथ हाथ मिलाया है जो उनका विनाश चाहते है। जब हमें बोलना चाहिए था तब हम चुप थे। पिता परमेश्वर, हमने अन्याय किया है। हमने स्वधामिकता में काम किया है, हमने दया और कृपा की उपेक्षा की है, और पिता, हम एक राष्टं के रूप में खड़े हैं, मानों हम आपके न्यान की धार पर खड़े हों। पिता, इस देश में आपके लोगों के प्रतिनिधि के रूप में हम कबूल करते हैं कि हम, आपकी कलीसिया ने आपके लोगों की उपेक्षा की है, आपके प्रतिज्ञाआें की उपेक्षा की है कि हे प्रभु, देश में यहूदियों की वापसी और सामथ्र्य और महिमा में प्रभु यीशु की वापसी से बढ़कर हम हमारे अपने साम्राज्य के निर्मा ण के लिए बहुत अभिालाषी थे। पिता प्रभु, आज रात हम आपसे क्षमा माँगते हैं। हम इस बात का पश्चाताप करते हैं जो आपके उद्देश्यों के लिए अपमान है। पिता परमेश्वर, हम माँगते हैं कि आप हमारे दिलों को सशक्त करें, कि हम लोगों के फंदे से मुक्त हों, कि हम इस देश में आपके लोगों के बारे में बात कर सकें। हे प्रभु, आप हमें साहस दें। हे प्रभु, कि हम अपनी कलीसियाआें में आपके चुने हुए लोगों के लिए प्रार्थ ना करें। हे प्रभु, कि हम आपके हृदय को सुनें, और हम उसके प्रति आज्ञाकारी हों जिसे इस कक्ष में इस प्रक्रिया में करने के लिए आप प्रत्येक को बुलाते हैं। पिता परमेश्वर, कि आप महिमर पायें। आप ऊँचा किये जाएँ। यीशु के नाम में हम माँगते है, आमीन।

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