क्रूस पर हुई अदला-बदली

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1989
Last Updated: अगस्त 2026
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क्रूस के द्वारा आपके जीवन में आने वाली पूर्णता का अनुभव करें। डेरेक प्रिंस की 'द एक्सचेंज एट द क्रॉस' में, यीशु द्वारा किए गए बलिदान की गहराई और इसके द्वारा दी गई पूर्ण मुक्ति का अन्वेषण करें। यह सरल, फिर भी प्रभावशाली उपदेश, पवित्रीकरण और मसीह के साथ हमारी निरंतर यात्रा की गहरी समझ प्रदान करता है।
Transcript
इब्रानियों 10ः14, जो इस बारे में बताता है कि यीशु ने क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा क्या पूरा कियाः
‘‘क्योंकि उस ने एक ही चढ़ावे के द्वारा उन्हें जो पवित्र किए जाते हैं, सर्वदा के लिये सिद्ध कर दिया है।’’
एक भेंट या एक बलिदान वह बलिदान है जो क्रूस पर उसने स्वयं का कर दिया है। और एक भेंट के द्वारा उसने उन्हें हमेशा के लिए उन सिद्ध किया है जो पवित्र किए गए हैं। इसका अर्थ है कि उसने हर व्यक्ति के जीवन के हर क्षेत्र में समय और अनंत काल के लिए हर जरूरत को प्रदान किया है जो उस में भरोसा करता है। उसके करने के लिए और कुछ भी नहीं है। उसने यह सब कर दिया है। यह एक पूर्ण सभी के लिए पर्याप्त बलिदान है। यही उस कथन का पहला हिस्सा है।
फिर यह उन लोगों के बारे में बात करती है जो पवित्र किए जा रहे हैं या परमेश्वर के लिए अलग किये गये हैं या परमेश्वर के करीब आ गए हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है। यीशु ने जो किया वह एक बार और सभी के लिए है, यह पूर्ण है, यह पूरा हो गया है। लेकिन उसके प्रति हमारी प्रशंसा, हमारी समायोजन प्रगतिशील है। लेकिन हमें इस तथ्य से प्रारंभ करना है कि वास्तविक बलिदान पूर्ण हो गया है।
जब मैं तीसरी दुनिया में सेवा करता हूँ तो मैं अकसर कहता हूँ, मैं बहुत ही सरल चित्रों का उपयोग करने का प्रयास करता हूँ कि लोगों को समझने में मदद मिले। वास्तव में, ऐसे ही सरल चित्र से न्यूजीलैंड में भी लोगों की मदद मिलेगी, लेकिन न्यूजीलैंड में लोगों को यह एहसास नहीं हो सकता है। तो मैं बस आप के सामने दो चित्र रखना चाहता हूँ, जिनका मैं उपयोग करता हूँ। सबसे पहले, पाकिस्तान में डेढ़ साल पहले। पाकिस्तान एक 98% मुस्लिम आबादी वाला देश के 84 करोड़ लोगों का देश है। और मसीही, और वे वास्तव में नामधारी मसीही हैं, दबे, कुचले अल्पसंख्यक हैं। लेकिन प्रभु ने मेरे और रूत के लिए पाँच अन्य लोगों के एक दल के साथ वहाँ जाने और नौ दिनों तक तीन प्रमुख शहरों में परमेश्वर के वचन का प्रचार करने के लिए मार्ग खोला।
यह अग्रिम घोषणा की गई थी कि हम बीमारों के लिए प्रार्थना करेंगे। खैर, हमारी पहली सभा करांची में थी जो मुख्य बंदरगाह, और 8 लाख लोगों की आबादी वाला एक शहर था। और इससे पहले कि हम सभा में जाएँ, दल के एक अगुवा जिसने हमें आमंत्रित किया था, स्वदेशी स्थानीय पाकिस्तानी मसीहियों के साथ हमें कराची के मसीही घर को देखने ले गए। और मैं अपने जीवन में बहुत गरीबी देखी है लेकिन ऐसी गरीबी या तंगहाली नहीं देखी थी। इसने मुझे लगभग सच में शारीरिक रूप से बीमार बना दिया। और मैं ने एक झलक देखा कि एक मुस्लिम राष्ट्र में मसीही होने का अर्थ क्या है। खैर, उन्होंने घोषणा की कि वे कराची में सिर्फ एक सभा करेंगे क्योंकि वहाँ पहले से कई अन्य प्रचारक थे और तब वे हमें देश के दूसरे हिस्से में ले जाना चाह रहे थे जहाँ और प्रचारक नहीं थे। तो मैंने अगुवे से कहा, मैं ने कहा, ‘‘हम इस प्रथम सभा को कहाँ आयोजित करने जा रहे हैं?’’ उसने कहा, ‘‘हमारे चर्च में।’’ खैर, लोगों की कुल आर्थिक दशा को देखकर मैं ने कहा कि यह किस तरह की सभा होगी। मैंने कहा, ‘‘आप कितने लोगों की उम्मीद कर रहे हैं?’’ उन्होंने लगभग 600 कहा। मैंने कहा, ‘‘आपकी कलीसिया में कितने हैं? उसने कहा 300। फिर अधिक जानने के लिए मैं परेशान नहीं किया।
इसलिए वे एक छोटे से वैन में हमारी टीम को बिठाया कराची के उस क्षेत्र के लिए चले जहाँ सभा का आयोजन किया जा रहा था। पाकिस्तानी समय के अनुसार हम ठीक एक घंटे के देर से पहुँचे। जब हम उस स्थान के पास पहुँचे जहाँ चर्च था, हमने चर्च कभी नहीं देखा। क्योंकि मुख्य चौराहे पर - यह मुख्य सड़कें नहीं थीं परन्तु केवल धूल भरी सड़के - लगभग 3000 लोग जमा थे। यह एक मण्डली थी। उनके आने का कारण बहुत सरल था, उन्होंने सुना था कि हम बीमारों के लिए प्रार्थना करते हैं।
तो उन लोगों ने मुझे भीड़ में दबा दिया और मुझे एक पर्याप्त ऊँचे मंच पर चढ़ा दिया और मेरी बाइबल, मेरा पुलपिट और मैं हर कहीं पाकिस्तानियों से भरा हुआ था। मेरा मतलब है कि कोई स्थान खाली नहीं छूटा हुआ था, कोई रास्ता नहीं छूटा था। और वे सब जमीन पर बैठे हुए थे। तो मैं अपने आप में सोचा, ‘‘मैं इन लोगों से क्या कहूँ?’’ और परमेश्वर ने मुझे यह विचार दिया जो मैं आज आप लोगों के साथ बाँट रहा हूँ। मैं ने उनसे कहा, ‘‘अब, आप सब लोग भूखे होते और मैं संतरों के बाग का मालिक होता तो मैं आपके लिए दो बातें कर सकता था। अपने बगीचे से एक संतरा तोड़कर मैं आपको देता। जो तात्कालिक रूप से आपकी भूख को शांत कर देता। दूसरी बात जो मैं आपके लिए कर सकता वह यह है, मैं आपको अपने बगीचे में ले जाता और फलों से लदे पेड़ों को दिखाता और कहता, जितना चाहिए तोड़ लो। मैं ने कहा, ‘‘आज मैं आपको संतरे के बाग में लेकर जाने वाला हूँ आपको स्वयं अपनी मदद करनी होगी।’’
मैं यहाँ आज रात वही करने जा रहा हूँ, मैं आपको संतरे के बाग में ले जा रहा हूँ। संतरे का बाग क्रूस के बारे में सत्य है। और इसलिए, मैं ने संक्षिप्त में रूपरेखा बताया कि आज रात मैं उनसे क्या प्रचार करने जा रहा हूँ और तब मैं ने कहा, ‘‘आप में से कितने लोग यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में प्राप्त करना चाहेंगे?’’ और मेरे विचार से आधे लोग खड़े हो गए जो लगभग 1500 लोग थे। अब उन में से कम से कम 500 या अधिक मुसलमान थे। मैं आप को इस्लाम और मसीहियत के बीच भेद की व्याख्या करने के लिए समय नहीं ले सकता, लेकिन एक बात है, कि वे विश्वास नहीं करते कि क्रूस पर यीशु की मृत्यु हुई। और वे नहीं मानते हैं कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है। इसलिए जब ये लोग खड़े हुए - हाँ, यह सब एक दुभाषिया के माध्यम से हुआ था - मैंने उन्हें एक प्रार्थना में नेतृत्व किया और हरेक से कहा कि मेरे पीछे कहे। और मैं ने इस तरह प्रार्थना शुरू कियाः ‘‘प्रभु यीशु मसीह, मैं विश्वास करता हूँ कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं और परमेश्वर के पास पहुँचने का एकमात्र मार्ग हैं, क्योंकि आप ने मेरे पापों के लिए क्रूस पर मृत्यु सही और मरे हुओं में से फिर जी उठे। सभी ने उन शब्दों को जोर से मेरे बाद दोहराया। अब मैं यह नहीं कह रहा हूँ वे सब बच गए लेकिन किसी मुस्लिम देश में 500 या अधिक मुसलमानों को उनके अपने लोगों के सामने उस शब्दों को कहने के लिए पाना केवल पवित्र आत्मा की शक्ति से ही हासिल किया जा सकता था।
फिर मैं ने अपने आप से कहा कि हम बीमारों के लिए प्रार्थना करने का अपना वादा पूरा करने जा रहे हैं। उन तक पहुँचने का कोई मार्ग नहीं था। किसी भी तरह इसमें कई घंटे लगने थे अतः मैं ने कहा, ‘‘आप में से कितने लोग चंगाई के लिए प्रार्थना करवाना चाहते हैं?’’ और मुझे लगता है कि 90 प्रतिशत लोगों ने अपने हाथ उठाए। और मेरा मतलब है, वे बीमार थे। पाकिस्तान में लोग बीमार हैं। कई लोग वास्तव में स्वस्थ नहीं हैं। वास्तव में यह तीसरी दुनिया की एक बहुत विशिष्ट बात है। मैंने कहा, ‘‘मैं आप लोगों के लिए एक प्रार्थना करने जा रहा हूँ और मैं चाहता हूँ अगर आपके शरीर को जो कोई हिस्सा बीमार है तो आप उस भाग पर अपने हाथ रखें। और जब मैं प्रार्थना करता हूँ, तो विश्वास करें परमेश्वर आपको छुएगा।’’ मैं ने एक प्रार्थना की - इन सबका उर्दू में अनुवाद होना था - और मैं ने प्रार्थना करना समाप्त किया। मैंने सोचा था कि हमें इस बारे में कुछ करना है अतः मैं ने कहा, ‘‘आप में से कितने विश्वास करते हैं कि परमेश्वर ने आपको चंगा किया है?’’ खैर, कुछ लोग डरते-डरते अपने अपने हाथ ऊपर करने शुरू किये। तब दस फीट दूर मेरे सामने कुछ हलचल हुई। एक पाकिस्तानी मसीही नीचे गया और खोज की कि क्या हुआ था। 12 का एक मुस्लिम लड़का बहरा और गूंगा पैदा हुआ था। उसने कभी नहीं सुना था और कभी नहीं बोला था। और जब मैंने प्रार्थना की तो उसने सुनने की शक्ति पाई और बात करने की कोशिश करने लगा। उन्होंने उसे मंच पर खड़ा किया और उस स्थान पर हलचल मच गई। मण्डली में हर पाकिस्तानी महिला को निश्चय था कि हमें उस पर हाथ रखना चाहिए। और उन्होंने हमारी सहमति नहीं पूछी था, उन्होंने तो बस हमारी बाहों से पकड़ा और हमारे हाथों को अपने ऊपर रखा।
खैर, खबर फैलता है और अगली जगह जहाँ हम गए, भीड़ लगभग 16000 थी। और स्थानीय पाकिस्तानियों का अनुमान है कि नौ दिनों में उद्धार के लिए 8 और 9000 लोगों ने प्रार्थना की। समूह के अगुवे ने एक साल बाद मुझसे कहा कि जब वह गए तो वह वहाँ पाँच कलीसियाओं के लिए जिम्मेदार थे। एक साल बाद वह अठारह कलीसियाओं के लिए जिम्मेदार थे। खैर, यही उन्हें संतरे के बगीचे में ले जाना था, देखिए, मैं क्या कह रहा हूँ?
और तब यदि मेरी याददाश्त सही है तो मैं जाम्बिया में थोड़ा पहले पहुँच गया था। और मेरे आसपास 7000 अफ्रीकियों की भीड़ थी, जिनमें अधिकतर अगुवे थे। मैं ने उन्हें क्रमानुसार क्रूस के बारे में सिखाने की योजना बनाई। और मैं ने एक के बाद एक छः सभाएँ की। मैं ने उनसे कहा - वे सब मूल रूप से खुले आम स्वीकार करने वाले ईसाई थे - ‘‘अब, परमेश्वर का अद्भुत भंडार था और यह बिल्कुल ऐसी बातों से भरा था जिनकी कभी भी आवश्यकता पड़ती, चाहे वह आध्यात्मिक, भौतिक, शारीरिक, समय में या अनंत काल में है। लेकिन भंडार में एक रखवाला है और कुछ भी भंडार से बाहर लाने के लिए आपको रखवाले के साथ मित्रता करनी होगी।’’ मैंने कहा, ‘‘क्या आप रखवाले का नाम जानते हैं?’’ उनमें से कुछ ने यीशु कहा। मैंने कहा, ‘‘यह एक अच्छा जवाब है, लेकिन यह सही नहीं है। भंडार का रखवाला पवित्र आत्मा है।’’ परमेश्वरत्व का सारा धन पिता और पुत्र, पवित्र आत्मा के हाथ में है। यह समझना कितना महत्वपूर्ण है। आप देखें, आप के पास सब सही सिद्धांत हो सकते हैं, आप के पास सब सही मत हो सकते हैं, आप सब सही बातें कह सकते हैं, लेकिन आप को उतना ही प्राप्त होता है जितना आपको पवित्र आत्मा से मिलता है। भंडार उसके पास है।
तब मैं ने उनसे कहा, ‘‘पवित्र आत्मा के पास एक चाबी है जो कि भंडार को खोलता है, केवल एक ही है। और उसका आकार बहुत ही खास है। क्या आप जानते हैं कि कुंजी का आकार क्या है?’’ वे अनुमान नहीं लगा सके तो मैंने कहा कि यह क्रूस है। और जब पवित्र आत्मा भंडार को खोलने के लिए क्रूस का उपयोग करता है तो परमेश्वर का खजाना आपके लिए उपलब्ध हो जाता है। तो इस बात का एक छोटा सा परिचय है जो मैं आज रात आपको सिखाने जा रहा हूँ।
मुझे यह भी लगता है कि मुझे व्यक्तिगत अनुभव से इसका समर्थन करना चाहिए। मैं ने आज ही शाम इस बात का उल्लेख किया है कि मैं ने ब्रिटिश सेना बैरक कक्ष में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आधी रात को प्रभु को जाना था। मैं इतना अज्ञानी अन्यजाति था कि मैं यह भी नहीं जानता था बचाए जाने के लिए मुझे कलीसिया में जाना चाहिए। तो इससे पहले कि कुछ भी हो मैं सेना के बैरक कक्ष में बचाया गया। दस दिनों के बाद मैं उसी सेना के बैरक कक्ष में पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया। किसी ने मुझसे नहीं कहा कि बपतिस्मा पाने के लिए मुझे चर्च जाना चाहिए। 24 घंटे के भीतर परमेश्वर ने मुझे अन्यभाषाओं का अर्थ बताने का वरदान दिया। मुझे नहीं पता था आत्मिक वरदान पाने के लिए आपको छह महीने इंतजार करना पड़ा।
कुछ ही समय बाद ब्रिटिश सेना ने मुझे समुद्रपार उत्तरी अफ्रीका भेजा और मैं ने अगले तीन साल उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तान में बिताए। उस समय के दौरान मैं त्वचा संबंधी एक बीमारी का शिकार हो गया कि डॉक्टर लोग भी ठीक नहीं कर सके। यदि आप को वह छोटी पुस्तक परमेश्वर की दवा की बोतल मिले, तो यह मेरी व्यक्तिगत गवाही है कि कैसे मैं ने अंततः चंगाई पाई। मुझे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया गया और अंत में स्वेज नहर पर स्थित एक ब्रिटिश सैनिक अस्पताल में पहुँचा जिसे अबाल्लाह कहते हैं। खैर, वहाँ उस समय काहिरा शहर में एक बहुत ही असामान्य स्त्री थी। वह एक साल्वेशन आर्मी में ब्रिगेडियर थी। वह एक ब्रिगेडियर थी क्योंकि उसका पति जो मर गया था वह एक ब्रिगेडियर था। और साल्वेशन आर्मी में विधवा पति का रैंक ग्रहण करती है। उस समय वह 76 वर्ष की थी और उस समय बहुत ही असामान्य साल्वेशन आर्मी विश्वासी हुआ करते थे क्योंकि उन दिनों में वह अन्यभाषा बोलती थी। और वह अन्यभाषा बोलने के बारे में उग्रवादी थी जबकि साल्वेशनवादी सामान्य रूप से उद्धार के बारे में बात करते हैं। उन्होंने 25 साल पहले परमेश्वर से भारत में मलेरिया से चंगाई प्राप्त किया था और तब से कभी दवा नहीं ली थी। मैं उनसे एक बार मिला था इस बहुमूल्य महिला ने जिनके लिए मैं हमेशा परमेश्वर का धन्यवादी हूँ, सुना कि एक ब्रिटिश सैनिक जो एक मसीही है अस्पताल में पड़ा हुआ है और उसने एक छोटी सी पार्टी इकट्ठी कीः एक ब्रिटिश सैनिक, कार चलाने के लिए एक मसीही, एक छोटी सी कार, और ओकलाहोमा राज्य से उनकी अमेरिकन सहयोगिनी, 25 या 30 वर्ष की एक युवा स्त्री। और उन्होंने अबाल्लाह की यात्रा प्रारंभ की। अस्पताल के आँगन में कार खड़ी की, ब्रिगेडियर अपने बैज, रिबन, यूनीफॉर्म आदि के साथ अस्पताल के वार्ड की ओर चल पड़ी, नर्स से मिली। और मेरे लिए बाहर जाने की अनुमति प्राप्त की और गाड़ी में जा बैठी।
तो मैं ने अपने आप को - मुझसे सच में सलाह नहीं लिया था कि क्या मैं यह करना चाहता हूँ या नहीं - मैं ने अपने आप को एक बहुत ही छोटे चार सीटर कार की पीछे की सीट में कार में बैठे पाया। सामने में चालक की सीट पर चालक था, उसके साथ साल्वेशन आर्मी के ब्रिगेडियर और पीछे मेरे बगल में यह अमेरिकी महिला मिशनरी। ब्रिगेडियर ने कहा कि चलो प्रार्थना करते हैं तो आपने प्रार्थना की। और हमने प्रार्थना करना शुरू किया और मेरे पास बैठी अमेरिकन महिला हिलने लगी। मैंने उसके पूरे शरीर को हिलते हुए महसूस किया। और फिर उसने अन्यभाषा में बोलना प्रारंभ किया। और, जाहिर है, मुझे पता था कि वह क्या था। और फिर मैं काँपने लगा और फिर कार में सभी लोग हिलना शुरू कर दिया। और फिर गाड़ी हिलना शुरू हुआ। और मेरा मतलब है, कार ऐसे हिल रही थी मानो किसी खराब सड़क पर लगभग 50 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हो। लेकिन यह चल नहीं रही थी और इंजन नहीं चल रहा था। खैर, मैं जानता था कि परमेश्वर ही था जो कि उस कार में आया था। और इसके अलावा, इस बात ने मुझे यह जानने के लिए दीन किया वह मेरे लिए ही आया था।
संदेश या अन्यभाषा बोलने के बाद, यह महिला कुछ ऐसी बात के साथ बाहर आई जिसे मैं व्याख्या के रूप में जानता था। अब, न्यूजीलैंडवासी शायद यह नहीं समझते, लेकिन मैं बहुत ही ब्रिटिश था। मेरा मतलब है, मैं बीबीसी के रेडियो उद्घोषक के समान बात किया करता था और मैं बहुत से अमेरिकियों के सामने उजागर नहीं किया गया था। और इस बहुमूल्य स्त्री ओकलाहोमा राज्य से थी। खैर, कोई भी जो जानता है कि अमेरिका में कैम्ब्रिज डॉन की तुलना में वे एक बहुत अलग भाषा बोलते हैं। लेकिन जब वह यह व्याख्या करने लगी तो यह सबसे सुंदर अंग्रेजी थी। मैं शेक्सपियर का एक छात्र रहा था, मैं शेक्सपियर की अंग्रेजी का बड़ा प्रशंसक था। मैं तो बस इस भाषा के लालित्य पर चकित रह गया। इस व्याख्या के दौरान उसने ये शब्द कहे जो मैं कभी नहीं भूल सकता। वे अब भी मेरे लिए उतना ही स्पष्ट है जितना 1942 में था। ये शब्द थे और मैं चाहता हूँ कि आप लोग उन्हें सुनें क्योंकि मुझ पर उनका जीवन बदलने वाला प्रभाव रहा। ‘‘कलवारी के काम पर विचार करेंः एक परिपूर्ण काम, हर तरह से परिपूर्ण, हर पहलू में एकदम सही।’’ अब आप सहमत होंगे कि यह बहुत ही सुरुचिपूर्ण अंग्रेजी है। ज्यादातर लोग ऐसा एक वाक्य नहीं बना सके। इसके अलावा, इसने मुझसे विशेष रूप से बात किया क्योंकि विशेष रूप से कई वर्षों तक यूनानी भाषा का अध्ययन किया था और मैं नया नियम के यूनानी से परिचित था। और अगर आप अपने अंग्रेजी में अपना नया नियम पढ़ें तो आप पायेंगे कि क्रूस पर से यीशु के अंतिम वचनों में से एक ‘‘पूरा हुआ’’ था। लेकिन यूनानी में यह एक एकल शब्द, टेटेलेस्टाई है। और एक क्रिया का पूर्ण काल है जिसका अर्थ है कुछ बिल्कुल सही करना। तो आप इसे इस प्रकार कह सकते हैं, सिद्ध रीति से सिद्ध काम किया गया या पूर्ण काम को पूरा किया गया। और तो, मैंने जाना कि पवित्र आत्मा मुझे दिखा रहा था कि क्या मैं समझता हूँ कि क्रूस बलिदान की मृत्यु के द्वारा यीशु ने क्या पूरा किया है, मेरी सारी जरूरतें पूरी हुई। मेरी कोई ऐसी जरूरत नहीं थी जो मैं नहीं पा सका। यह एक प्रकाशन था।
जब मैं कार में से बाहर निकला तो उतना ही बीमार था जितना कि उसमें प्रवेश करते समय था। लेकिन परमेश्वर ने मुझे दिखा दिया था कि मेरी समस्या का जवाब कहाँ था। और आज रात मैं आप के साथ यही साझा करना चाहता हूँ। हम कल रात एक चंगाई सभा करने जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि कई लोग चंगाई पायेंगे। लेकिन मैं प्रश्न करता हूँ कि क्या सभी चंगे हो जाएँगे। एक सभा में परमेश्वर सबको चमत्कारिक ढंग से ठीक नहीं करता है। उचित चंगाई के कई तरीके होते हैं। उस प्रकाशन के बाद मैं ने अपनी चंगाई पाई। नीतिवचन 4ः20-22 के द्वारा मैं ने चंगाई पाई।
‘‘हे मेरे पुत्र मेरे वचन ध्यान धरके सुन, और अपना कान मेरी बातों पर लगा। इनको अपनी आँखों की ओट न होने दे, वरन अपने मन में धारण कर। क्योंकि जिनकों वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं।’’
और चंगाई के लिए हाशिए में वैकल्पिक पठन दवा थी। और मैं ने स्वयं से कहा, कि इससे मामला हल हो जाता है। यदि परमेश्वर ने अपने वचन के माध्यम से मेरे सारे शरीर के लिए स्वास्थ्य या दवा दी है, तो बीमारी के लिए कोई जगह नहीं है। और हाँ, मैं बहुत साधारण था। मैं ने अपनी दवा के रूप में परमेश्वर के वचन को लेने का फैसला किया। मैं शाही सेना चिकित्सा कोर में एक अर्दली था इसलिए मैं जानता था कि लोग कैसे अपनी दवा लेते हैं। भोजन के बाद तीन बार दैनिक। खाने के बाद दिन में तीन बार। और इसी प्रकार मैं ने परमेश्वर का वचन भी लिया, रोज खाने के बाद तीन बार। और यह काम किया। इसने मुझे संसार के सबसे अहितकर मौसमों में से एक में पूरी तरह से और स्थायी रूप से चंगा किया।
तो क्या मैं आप से जो कह रहा हूँ वह यह है आपको चंगा करने के लिए परमेश्वर के अपनी तरीके हैं। लेकिन चंगाई चाहे कहीं से भी आए उसका आधार वह काम है जो क्रूस पर यीशु ने किया। और मैं आपको सिर्फ एक संतरा की पेशकश करने नहीं जा रहा हूँ; मैं आपको बाग में आमंत्रित करने जा रहा हूँ। जब एक बार आप उसमें प्रवेश करते हैं तो आप चारों ओर घूम सकते हैं अपनी इच्छानुसार संतरे तोड़ सकते हैं। और आप कभी भी परमेश्वर के वृक्ष को खाली नहीं करेंगे।
अब, मैं आपके साथ कुछ पदों को साझा करना चाहता हूँ जिसे मैं ने अपने उस अनुभव के परिणामस्वरूप सीखा है। मैं ने यह खोजने में अपना मन लगाया कि क्रूस पर यीशु की मृत्यु के द्वारा क्या पूरा किया गया था। और मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं अभी भी खोज रहा हूँ। यह एक बेशुमार अध्ययन है। लेकिन जो मैं आपके साथ बाँटना चाहता हूँ वह यह है जो मैं मानता हूँ कि क्रूस को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण यह है कि क्रूस पर एक ईश्वरीय आदान प्रदान हुआ। हम में से प्रत्येक के लिए मानव जाति के न्याय के द्वारा जो कुछ बुराई आई उसे यीशु के द्वारा हल किया गया कि यीशु की निष्पाप आज्ञाकारिता के कारण हमारे लिए सभी अच्छी बातें उपलब्ध कराया जाये जो विश्वास करते हैं। यह बहुत सरल है, यह बहुत ही बुनियादी है। परन्तु जैसा कि वह सत्य प्रगट होता है तो इसमें वह सब है जिसकी आपको जरूरत होगी। मैं अधिक सरल रीति से कहने जा रहा हूँ। हमारे कारण आई सभी बुराईयाँ यीशु पर आई कि हमें सब अच्छाई उपलब्ध की जाये जो यीशु के कारण है।
यह परमेश्वर का अनुग्रह था। हमें परमेश्वर पर कोई दावा नहीं था, हम यह दावा नहीं कर सकते थे कि परमेश्वर एक करे, हम तो यह भी नहीं जानते थे कि वह यह करने जा रहा है, हम नहीं समझ सके कि वह क्या कर रहा है; लेकिन अपने निर्बाध सर्वोच्च अपार अनुग्रह से उसने उस आदान प्रदान को संभव बनाया। और इसके अतिरिक्त, अपने भविष्यवक्ताओं के माध्यम से इसके होने से सैकड़ों वर्ष पूर्व भविष्यवाणी की थी। शायद मुख्य भविष्यवाणी यशायाह 53 है। यहाँ मैं अभी यशायाह 53 के कुछ पदों को देखना चाहता हूँ कि उसमें क्या कहा गया है। यह परमेश्वर के एक अनाम सेवक के बारे में बताता है। उसका नाम नहीं दिया गया है। लेकिन सभी प्रेरित और नया नियम के लेखक इस बात में एक मत थे कि यशायाह 53 का परमेश्वर का यह अनाम सेवक नासरत का यीशु था। और हम कुछ समय के लिये सिर्फ एक पद को देखने जा रहे हैं, यशा. 53ः6। यह यशायाह के अंतिम 27 अध्यायों का केन्द्रीय पद है और यह वास्तव में प्रायश्चित्त का केंद्रीय पद है।
‘‘हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे, हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया, और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।’’
मानव जाति का सार्वभौमिक अपराध क्या है? हम सब ने बैंक डकैती या व्यभिचार, लूट या चोरी हो, या नशा नहीं किया है। कई चीजें हैं जिनके बारे में हम कह सकते हैं कि हमने नहीं किया है। लेकिन एक बात है जिसे हम सबने किया है। हम सबने अपना अपना मार्ग लिया है। और इसके लिए एक सरल शब्द विद्रोह है। विद्रोह मानव जाति का सार्वभौमिक अपराध है। हम चाहे किसी भी देश, रंग जाति के हों, हम सब विद्रोह के अपराधी हैं। परमेश्वर की करुणा यह है कि जब यीशु क्रूस पर चढ़ा तो परमेश्वर ने हम सबके अपराधों या पापों या विद्रोह का भार उसी पर लाद दिया।
इब्रानी में वह शब्द, और मैं पुराने नियम से अंश उद्धृत करने के लिए आज रात समय नहीं लूँगा, लेकिन वह इब्रानी शब्द - और इब्रानी शब्द अर्बन है - जिसका अर्थ न केवल अपराध या विद्रोह है लेकिन इसका अर्थ अपराध के सभी दुष्परिणाम हैं। एक ही शब्द के दोनों अर्थ हैं। तो परमेश्वर ने क्रूस पर यीशु को सारी मानव जाति के अपराध या विद्रोह के सारे बुरे परिणामों के रूप में देखा ताकि हम उन बुरे परिणामों से मुक्त हों और यीशु की धार्मिकता का लाभ प्राप्त कर सकें।
अब हम इस विनिमय के लगभग आठ या नौ पहलुओं के बारे में देखने जा रहे हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे पास कितना समय बचा है। मैं चाहता हूँ कि आप यह बहुत स्पष्ट रूप से समझ लें। मैं बुराई के लिए मेरे अपने बाँयें हाथ से और दाँये हाथ से अच्छे के लिए यह करने जा रहा हूँ। यीशु पर बुराई इसलिए आई कि हमें अच्छाई मिल सके। आइये, अब आदान प्रदान के कुछ विशिष्ट पहलुओं पर नजर डालें और हम सबसे पहले हम यशायाह 53 के प्रथम कुछ पदों को देखेंगे। 4-5 पदः
‘‘निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुःखों को उठा लिया तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया, हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएँ।’’
उन पदों के दो पहलू हैं। वे आत्मिक और भौतिक हैं। पहले आत्मिक। हमारे अपराधों और हमारे अधर्म के लिए यीशु को दंडित किया गया। और चूँकि उसे दंडित किया गया इसलिए हमें माफ किया जा सका। और माफी के कारण हमारा परमेश्वर के साथ मेल हैं। जब तक हमें क्षमा नहीं मिली होती है हमारा परमेश्वर के साथ मेल नहीं है। केवल क्षमा के द्वारा ही परमेश्वर के साथ मेल होता है। लेकिन हमारी क्षमा इसलिए संभव हुई क्योंकि यीशु ने हमारे अधर्म के लिए सजा उठाई।
तो, मैं यह बहुत सरल करना चाहता हूँ। यीशु को सजा दी गई थी ताकि हम माफ किए जायें। बिलकुल ठीक? अब, मैं चाहता हूँ कि आप इस पर मेरे साथ साझा करें। मैं चाहता हूँ कि आप अपने हाथों का उपयोग करें। मैं अस्तित्व के साथ इस सत्य में शामिल हों। मुझे एक बार देखिए और तब मैं आपसे यह करने के लिए कहने जा रहा हूँ। ‘‘यीशु दंडित किया गया, ताकि हम क्षमा किए जायें।’’ ठीक? अब हम इसे एक साथ अपने बाएँ हाथ, बुराई; दायें, भलाई के साथ कहने जा रहे हैं। और याद रखिए, आपका दहिने हाथ मेरे बाएँ के विपरीत है, उस के बारे में उलझन में नहीं पड़ें। आप में से जो मेरे पीछे हैं उन्हें छोड़कर! बिलकुल ठीक। क्या आप तैयार हैं? ‘‘यीशु दंडित किया गया, ताकि हम क्षमा किए जायें।’’ यह आदान प्रदान का प्रथम पहलू है।
अब उसी पद में वचन कहता हैः
‘‘निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुःखों को उठा लिया।’’
लेकिन वे शाब्दिक अनुवाद नहीं हैं। शाब्दिक अनुवाद यह है कि वह हमारे दर्द को सह लिया और हमारे रोगों को उठा लिया, और परिणाम क्या है? उसके घावों के कारण हम चंगे हुए। आप देखें।
मुझे लगता है कि आप को इस की पुष्टि करने की जरूरत है। यशायाह 53 में अपनी उँगली रखें और नया नियम के दो भाग देखें। सबसे पहले, मत्ती 8। यह तो अनुवाद की बस एक दुर्घटना है, कि लगभग सभी अंग्रेजी अनुवाद उन शब्दों का बहुत स्पष्ट शाब्दिक अनुवाद नहीं करते हैं। कुछ अन्य भाषायें करती हैं। स्कैंडिनेवियाई भाषाएँ रोग और दर्द के लिए सामान्य शब्दों का उपयोग करते हैं। लूथर का जर्मन अनुवाद ने क्रोंकाइट और स्क्मेर्ज का उपयोग किया जो बीमारी और दर्द के लिए प्रयुक्त दो शब्द हैं। यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना है। मुझे लगता है कि लाखों अंग्रेजी बोलने वाले मसीही किसी प्रकार से यीशु की चंगाई के शारीरिक पहलू के प्रकाशन से वंचित हैं।
यदि आप अभी मत्ती 8ः16-17 में देखें, तो यह यीशु की सार्वजनिक सेवा का प्रारंभ है।
‘‘जब संध्या हुई तब वे उसके पास बहुत से लोगों को लाए, जिन में दुष्टात्माएँ थीं और उस ने उन आत्माओं को अपने वचन से निकाल दिया, और सब बीमारों को चंगा किया। ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो, कि उस ने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।’’
वह क्या कह रहा है? यशायाह 53ः4-5। मत्ती यहूदी था, वह इब्रानी समझता था और साथ ही साथ वह पवित्र आत्मा के द्वारा प्रेरित था।
अब 1 पतरस 2ः24 निकालें। पुनः पतरस यशायाह 53 का हवाला दे रहा है। 1 पतरस 2ः24, यह वाक्य का मध्य भाग है परन्तु हम इसे हमें परेशान करने नहीं देंगे।
‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर करके धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ, उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।’’
वहाँ चंगाई के लिए यूनानी क्रिया वही है जो शारीरिक चंगाई के लिए मानक यूनानी शब्द है। और आज भी आधुनिक यूनानी में इसका वही अर्थ है। इसलिए यह बहुत स्पष्ट है। क्रूस पर यीशु ने हमारी निर्बलताओं को उठा लिया और हमारे रोगों को सह लिया और उसके घावों से हम चंगे हुए। वह स्थानापन्न था। तो, हम इसे अब करेंगे, बायाँ और दायाँ हाथ। मैं इसे एक बार करूँगा और फिर मेरे साथ इसे करने के लिए आपको आमंत्रित करूँगा। ‘‘यीशु घायल हुआ, ताकि हम चंगे किए जायें।’’ इसे समझने के लिए एक धर्मवैज्ञानिक होना आवश्यक नहीं। बिलकुल ठीक। वास्तव में, धर्मशास्त्रियों ने शायद इसे कठिन पाया। ठीक। क्या आप तैयार हैं? ‘‘यीशु घायल हुआ, ताकि हम चंगे किए जायें।’’ ठीक। यह आदान प्रदान प्रथम दो पहलू हैं। प्रथम, यीशु दंडित किया गया कि हमें क्षमा मिले। दो, यीशु घायल हुआ, ताकि हम चंगे हों।
अब यदि आप यशायाह 53 के 10वें पद पर जाएँ तो आपको इस बात का और अधिक प्रकाशन मिलेगा कि क्या पूरा किया गया था। ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई
तौभी यहोवा को यही भया कि उसे कुचले उसी ने उसको रोगी कर दिया जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा। उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
मध्य के वाक्य पर ध्यान दें, ‘‘जब तू उसका प्राण दोषबलि करे।’’ वैकल्पिक रूप से इसका अनुवाद किया जा सकता था और अर्थ में कोई फर्क नहीं पड़ता, ‘‘जब तू उसका प्राण दोषबलि करे।’’ आप चाहे जिस तरह भी इसका अनुवाद करें, सच्चाई यह है कि सारी मानव जाति के लिए यीशु का प्राण दोषबलि किया गया।
अब, एक ही शब्द जिसका अनुवाद पाप बलि, भेंट, या दोष या दोषबलि किया गया है उसका अनुवाद दोष भी किया गया है। कारण यह है कि लेवी याजकत्व में पाप की व्यवस्था के अनुसार, जब एक व्यक्ति पाप करता था तो उसे अपनी बलि भेंट लाना होता था। यह एक भेड़ हो सकता है, यह एक बकरी हो सकती है, यह एक मेढ़ा हो सकता है, यह एक बैल हो सकता है। वह उसे याजक के पास लाता, याजक से अपने पापों का अंगीकार करता। याजक अपना हाथ उस पशु के सिर पर रखता जो बलि के लिए होता और प्रतीकात्मक रूप से पाप उस व्यक्ति से भेंट पर, पशु पर हस्तांतरित करता। और तब याजक व्यक्ति को नहीं परन्तु पशु को मारता। दूसरे शब्दों में, पशु मनुष्य के पाप का दंड भरता, क्योंकि पशु की पहचान उस व्यक्ति के पाप के साथ हो गई है।
अब, नया नियम यह स्पष्ट करता है कि अंतिम पड़ाव में बैल, और भेड़ और बकरियाँ मनुष्य के पाप के लिए प्रायश्चित नहीं कर सकते; वे तो बस यीशु के प्रारंभिक भविष्यवाणी के चित्र थे। लेकिन यीशु का प्राण वास्तव में पाप बलि बन गया। और पाप बलि बनने में वह पाप बन गया।
यदि आप यशायाह 53 में अपनी उँगली रखें और 2 कुरिन्थियों 5ः21 निकालें, तो आप पौलुस के द्वारा इस तथ्य का प्रतिपादन पायेंगे। 2 कुरिन्थियों 5ः21। और मैं इसे और स्पष्ट करने के लिए सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा लिखने जा रहा हूँ।
जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जायें।
अब जब तक आप पुराना नियम के बलिदानों की आज्ञा को नहीं समझते हैं, आप पूरी तरह यह नहीं समझेंगे कि 2 कुरि. 5ः21 में पौलुस यशायाह 53 का संदर्भ दे रहा है। ‘‘जब तू उसका प्राण दोषबलि करे।’’ क्योंकि जब उसका प्राण पाप के लिए बलिदान हुआ तो मनुष्यजाति के पाप के कारण उसका प्राण पाप बना।
आदान प्रदान को समझने के लिए आप को एक धर्मविज्ञानी नहीं होना है। मैं इसे कहूँगा और मैं इसे एक बार कहता हूँ और मुझे उम्मीद है आप इसे पहली बार ही पकड़ लेंगे जब मैं इसे आप के साथ कहता हूँ। ‘‘यीशु हमारे पाप के लिए पाप बना कि हम उसके धर्म से धर्मी बनाये जायें।’’ आइए पुनः 2 कुरिन्थियों पर 5ः21 देखें ताकि आप निश्चित हों कि आप यह समझ गये हैं।
जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जायें।
फिर से आदान प्रदान को देखिए। यीशु हमारे पाप के लिए पाप बना कि हम उसके धर्म से धर्मी बनाये जायें। उसकी धार्मिकता। हमारा नहीं, उसकी।
बिलकुल ठीक। मैं इसे एक बार कहता हूँ और मुझे उम्मीद है आप मेरे पीछे बोलेंगे। ‘‘यीशु हमारे पाप के लिए पाप बना कि हम उसके धर्म से धर्मी बनाये जायें।’’ ठीक? आपने समझ लिया? बिलकुल ठीक। यीशु हमारे पाप के लिए पाप बना कि हम उसके धर्म से धर्मी बनाये जायें। क्या आप राहत देख सकते हैं? धर्मी बनने हेतु आप को अपना सर्वश्रेष्ठ करने के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं है। आप विश्वास के द्वारा यीशु मसीह की धार्मिकता प्राप्त करते हैं। धर्म का निचले स्तर पर कभी भी आपको स्वर्ग नहीं ले जाएगा। लेकिन अपनी धार्मिकता से धर्मी बनाने के लिए परमेश्वर ने आपके और मेरे लिए प्रबंध किया है।
अगले आदान प्रदान के लिए हम इब्रानियों 2ः9 निकालेंगे। हम कई अलग-अलग पद देख सकते थे लेकिन मुझे लगता है कि यह सबसे सरल और छोटा है। इब्रानियों 2ः9ः
पर हम को यीशु जो स्वर्गदूतों से कुछ ही कम किया गया था, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए, देखते हैं, ताकि परमेश्वर के अनुग्रह से हर एक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखे।
तो पाप की मजदूरी या पाप का दंड मृत्यु है। हमारे पाप के लिए जब यीशु पाप बनाया गया, यह अपरिहार्य था कि वह दंड भोगे। तो, यीशु ने हमारे लिए मौत चखा। अब आपको इसके विपरीत जानने के लिए एक धर्मविज्ञानी होने की आवश्यकता नहीं है, कि हम क्या हो सकते हैं? उसके जीवन के भागीदार। यूहन्ना 10ः10ः
चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएँ और बहुतायत से पाएँ।
तो विनिमय बहुत सरल है। ‘‘यीशु ने हमारे लिए मौत चखा लिया, ताकि हम, मैं कहना चाहता हूँ, उसके जीवन में सहभागी बनें।’’ ठीक है, क्या आप तैयार हैं? ‘‘यीशु ने हमारे लिए मौत चखा लिया, ताकि हम उसके जीवन में सहभागी बनें।’’ क्या आप देख सकते हैं यह कैसे बहुत स्पष्ट है, कैसे बहुत तार्किक, कैसे बहुत व्यावहारिक है? यकीन करो, मुझे कहना है कि परमेश्वर के वचन के इन सत्यों पर मन लगाने में कई वर्ष लगे। मैं आप के साथ एक या दो घंटे ऐसी बातें साझा कर रहा हूँ जिसके लिए मुझे घंटों, दिनों और हफ्तों और महीनों लगे हैं। मैं ऐसा कह तो रहा हूँ परन्तु यह मेरे लिए अवसर और वरदान है।
अगला आदान प्रदान गलातियों 3ः13-14 में बताया गया है।
मसीह ने जो हमारे लिये श्रापित बना, हमें मोल लेकर व्यवस्था के श्राप से छुड़ाया क्योंकि लिखा है, जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह श्रापित है।
स्मरण रखें कि क्रूस को कुछ भाषाओं में काठ कहा गया है, इब्रानी एक है और पूर्वी अफ्रीका की स्वाहिली दूसरा है। पेड़ तो पेड़ होता है चाहे वह बढ़ रहा हो या काट डाला जाये। समझे आप, इसलिये क्रूस कटा हुआ पेड़ है।
जो कोई काठ पर लटकाया जाता है वह श्रापित है। (पद 14) यह इसलिये हुआ, कि इब्राहीम की आशीष मसीह यीशु में अन्यजातियों तक पहुँचे, और हम विश्वास के द्वारा उस आत्मा को प्राप्त करें, जिस की प्रतिज्ञा हुई है।
यहाँ हमारे पास कितने धर्मशास्त्री हैं जो दो विपरीत विचार में भेद कर सकते हैं? बुराई क्या है? अभिशाप। अच्छा क्या है? आशीष। तो यीशु क्रूस पर एक अभिशाप बना दिया गया था। व्यव. 21ः22-23 में वचन बताता है जो कोई काठ पर लटकाया जाता है, वह श्रापित होता है। तो जब यीशु क्रूस के काठ पर लटका दिया गया था, तो हर यहूदी जो अपने तोरह, अपने पुराने नियम को जानता था, वह जानता था कि यीशु एक अभिशाप बना दिया गया था। वह दृश्य रूप से एक अभिशाप बना दिया गया। वह एक अभिशाप बना दिया था कि हम आशीष प्राप्त करें।
यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें परमेश्वर ने मुझे पिछले चार या पाँच वर्षों में नेतृत्व किया है। और क्योंकि इसे विस्तृत रूप से देखने के लिए मेरे पास समय नहीं होगा, तो उसी पुस्तक श्राप से आशीष की ओर कैसे जाएँ की सिफारिश करना चाहता हूँ जिसका मैं ने पहले उल्लेख किया। सिर्फ यह जानते हुए आपको छोड़ देना उचित नहीं है कि आप श्राप से छुड़ाये गए है ताकि आशीष प्राप्त करें, यह तो दुविधा में डालने वाली बात है।
मुझे बस श्राप के सात आम संकेतों का उल्लेख करने दें। अब, अधिकांश शाप महज व्यक्तियों की चिंता का विषय नहीं है, वे परिवारों या बड़े समुदायों की चिंता का विषय है। और बाइबल में आशीष और श्राप दोनों की आवश्यक विशेषता यह है कि वे पीढ़ी से पीढ़ी से पीढ़ी तक चलती रहती है जब तक कि कुछ ऐसा न हो उसे समाप्त करने के लिए आवश्यक हो। तो, हमने ऐसे लोगों से बात की है जिनकी समस्यायें सैकड़ों साल पुरानी है। मैं नहीं जानता कि क्या आज रात यहाँ कोई स्कोटिश व्यक्ति है, यदि हैं तो हाथ मत उठाइएगा। लेकिन मैंने जाना है कि स्कॉट्स एक श्रापित राष्ट्र थे। शपथ के अर्थ से नहीं लेकिन एक दूसरे को कोसने में। और रूत और मैं पिछले कुछ वर्षों में दो परिवारों के संपर्क में रहे हैं जिन्हें 1600 के दशक में श्राप दिया जो अब भी उन परिवारों पर था। एक स्कॉटलैंड में था, और दूसरा ऑस्ट्रेलिया में था।
किसी भी तरह, बस मुझे बहुत संक्षिप्त रूप में आपको अपने निजी अवलोकन के आधार पर सात आम संकेत बताने दीजिए कि क्या आपके जीवन पर श्राप है। अगर इन में केवल एक है तो मैं नहीं कह रहा हूँ कि मुझे यकीन है कि अभिशाप है। लेकिन अगर उनमें से कई हैं, और यदि वे आपके परिवार में अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग पीढ़ियों में पाए जाते हैं, तो आप लगभग पूरा यकीन कर सकते हैं कि एक अभिशाप है। यहाँ वे हैं।
सबसे पहले, मानसिक और भावनात्मक गिरावट।
दूसरा, बार-बार या जीर्ण रोग, विशेष रूप से यदि वे वंशानुगत हों, क्योंकि वंशानुगत श्राप के संकेत होता है।
तीसरा, बार-बार गर्भपात या संबंधित महिला संबंधी समस्यायें। और बीमारों के बीच हमारी सेवा में, रूत और मैं ऐसे स्थान पर आए हैं जब कि हम अनायास ही उन्हें श्राप समझकर हल करते हैं।
चार, शादी टूटना और परिवार का अलगाव। अगर आपके परिवार में गिरने और विभाजन का इतिहास है, और यह चलता ही रहता है, चलता ही रहता है, तो आप यकीन कर सकते हैं कि आपके परिवार पर श्राप है।
पाँच, वित्तीय कमी अगर यह जारी रहता है। हम सब कुछ समय में कमी का पता कर सकते हैं, लेकिन अगर यह लगातार होता रहता है और हम कभी इससे बाहर निकल नहीं पाते तो, आप लगभग सुनिश्चित करें कि यह एक अभिशाप हो सकता है।
छह, जिसे दुर्घटना होने का खतरा कहते हैं। ‘‘मैं स्वाभाविक रूप से दुर्घटनाओं का आदी हूँ।’’ और यह एक उद्देश्यपूर्ण सांख्यिकीय तथ्य है जो आपके बीमा प्रीमियम का आकलन करते समय बीमा कंपनियाँ ध्यान में रखती हैं।
और सात, परिवार में आत्महत्याएँ या अप्राकृतिक मौतों का इतिहास।
हम आज रात उस पर ध्यान केन्द्रित करने नहीं जा रहे हैं, लेकिन हम समाधान करने जा रहे हैं। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमें मसीहियों के रूप में कभी समस्या पर ध्यान केंद्रित करना नहीं पड़ता। हम समाधान करने के लिए समस्याओं को देखते हैं। तो हम अभी इस एक पर विचार करने जा रहे हैं। ‘‘यीशु श्राप बना ताकि हम आशीष प्राप्त करें।’’ आज रात आप सभी धर्मशास्त्री हैं। ठीक है, क्या आप तैयार हैं? यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है कि आप यह कह रहे हैं। हर बार जब आप यह कहते हैं तो परमेश्वर और पवित्र स्वर्गदूत और पवित्र आत्मा इसे दर्ज करते हैं कि आप क्या कह रहे हैं। याद रखें, यीशु किस बात के महायाजक हैं? आपके अंगीकार के, सही है। आप एक अंगीकार कर रहे हैं। बिलकुल ठीक। हम इसे एक साथ कहेंगे। ‘‘यीशु श्राप बना ताकि हम आशीष प्राप्त करें।’’ आमीन।
अगला सचमुच उसका हिस्सा है, लेकिन यह ऐसा एक महत्वपूर्ण भाग है मैं अलग से इस पर बात करूँगा। ‘‘यीशु ने क्रूस पर हमारी गरीबी सही ताकि हम उसके धन के भागीदार हों।’’ यह मेरे लिए यहाँ न्यूजीलैंड में वर्षों पूर्व एक प्रकाशन के रूप में आया था। मैं अपनी पहली पत्नी के साथ एक वर्ष के बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था और जब हम यहाँ पहुँचे तो उन्होंने यू एस से हमारे आने जाने का किराया भुगतान करने की प्रतिज्ञा की थी। उनके पास पैसे नहीं थे। लेकिन कोई बात नहीं। उन्होंने कहा कि हम भेंट लेने जा रहे हैं। तो मैं प्रेरित हुआ! अगर मुझे सही याद है तो मैं ऑकलैंड में था। खैर, मैं कई बार पैसे पर सिखाया है और वहाँ मेरी यह पुस्तक है जिसका नाम है, आपके धन के लिए परमेश्वर की योजना। तो मैं मेरे पास मेरी रूपरेखा थी और मैं इस पर उपदेश दे रहा था, लेकिन एक अजीब सी बात हुई। जब मैं अपनी रूपरेखा पर आगे बढ़ रहा था तो मैं मानसिक रूप से क्रूस पर यीशु को देख रहा था। और मैं ने उसे उतना ही वास्तविक रूप में देखा जितना वह है, पूरी रीति से नग्न। और जब मैं ने गरीबी के पहलुओं का परिभाषित किया तो मैंने देखा कि उनमें से हरेक क्रूस पर यीशु पर पूरी तरह लागू होता था। खैर, वे अंत में उन्होंने भेंट ले लिया और उन के पास मंच पर चार डिब्बे थे जिनका उपयोग सेब के लिए किए गए थे। और लोग अपने पैसे डालने के लिए या अपनी प्रतिज्ञाओं को डालने के लिए आगे की ओर बढ़े। और उस एक भेंट से कुल व्यय पूरा हो गया।
अगले दिन लुदिया और मैं पादरी के साथ ऑकलैंड में थे और हम उन लोगों से मिले जो अपनी बचत खातों से पैसा निकालने जा रहे थे जिसका पिछले रात उन्होंने वादा किया था। मैं ने एक और अधिक प्रचुर मात्रा में भेंट कभी नहीं देखा है। और वे ऐसे लोग थे जिन्हें बाइबल हर्ष से देने वाला कहती है। वे लगभग देने के उत्साह के नशे में धुत थे।
लेकिन अब मैं आपके एक प्रकाशन बाँटूँगा जो मैंने पाया। सबसे पहले, धर्मशास्त्र निकालें, नया नियम। 2 कुरिन्थियों 8ः9।
‘‘तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो, कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ।’’
अब आप को विपरीत देखने के लिए एक धर्मशास्त्री होने की जरूरत नहीं है, है न? बुरी बात क्या है? गरीबी। अच्छी बात क्या है? धन। ठीक है।
अब, आदान प्रदान की विपरीत स्थिति 2 कुरिन्थियों 9ः8 में है, जिसे मैं ने और रूत ने एक बार बताया है। जब भी हम यह करते हैं, मैं बेहतर महसूस करता हूँ। ठीक है। ‘‘परमेश्वर हम पर सब अनुग्रह करने योग्य है, कि हम हमेशा सब बातों में सब प्रचुरता के साथ हर अच्छे काम के लिए सक्षम हों।’’ आप देखें कि क्या कोई क्षेत्र ऐसा है जो उस प्रतिज्ञा के अधीन नहीं है। परमेश्वर हमारे प्रति सभी अनुग्रह को लाजिमी बनाने के लिए सक्षम है। कुछ अनुग्रह नहीं लेकिन सभी अनुग्रह। ताकि हम हमेशा सब बातों में सब प्रचुरता के साथ हर अच्छे काम के लिए सक्षम हों। यह अपने लोगों के लिए परमेश्वर के प्रबंध का स्तर है जो कि क्रूस पर यीशु के स्थानापन्न मृत्यु के द्वारा संभव बनाया गया। वह गरीब बनाया गया ताकि हम, मैं बहुतायत कहना चाहूँगा, क्योंकि मैं नहीं सोचता हूँ कि यह अनिवार्य रूप से धर्मशास्त्र सम्मत है, कि हर मसीही के पास एक बड़ा बैंक खाता हो या वह एक रोल्स रॉयस की सवारी करेंगे। लेकिन मैं विश्वास करता हूँ कि हर मसीह के लिए यह परमेश्वर की इच्छा है कि उसकी जरूरतों की आपूर्ति हो और दूसरों को देने के लिए पर्याप्त बचत हो। लेने से देना अधिक धन्य है। और परमेश्वर नहीं चाहता कि उसकी कोई भी संतान आशीष के निम्न स्तर में जिए इसलिए प्रचुरता देता है कि हम दूसरों को देने के उच्च स्तर पर हों।
अब, कुछ लोग पृथ्वी पर यीशु की सेवा में उसे एक गरीब उपदेशक के रूप में चित्रित करते हैं, जो फटे कपड़ों में के लिए घूमता था। मुझे नहीं लगता कि सच था। मुझे नहीं लगता कि वह गरीब था। वह अपने दिनों के एक सामान्य व्यक्ति की तरह कपड़े पहनता था और वह ऊपर से बहुत ही सुरुचिपूर्ण बागा पहनता था तो बहुत ही मूल्यवान था कि क्रूस पर सैनिकों ने इसे विभाजित करना नहीं चाहा क्योंकि उनके लिए वह बहुत मूल्यवान था। मुझे बस यह कहना है कि यीशु का नकदी लेकर नहीं आया था, उसने सिर्फ अपने पिता के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया था! और हमेशा इस बात को सम्मानित किया गया। मेरा मतलब है, कोई भी व्यक्ति जो जंगल में 5000 पुरुषों सहित महिलाओं और बच्चों को खिला सकता है वह गरीब नहीं हो सकता। एक समय था जब कर के लिए पैसे के बारे में सवाल पैदा हुआ। उसने पतरस को बैंक नहीं भेजा, उसने उसे गलील की झील में भेजा। लेकिन मेरा मतलब है, पैसा आया, यह क्या फर्क लाता है?
अंतिम भोज पर यीशु ने अपने चेलों से कहा, ‘‘जब मैं ने आप लोगों को कर्मचारियों या पर्स या अन्य प्रावधान के बिना बाहर भेजा तो क्या आप लोगों को कुछ भी कमी हुई?’’ और उन्होंने क्या जवाब दिया? ‘‘कुछ भी नहीं।’’ बहुत से ऐसे मिशनरियाँ हैं जिन्हें प्रचुर भत्ते मिले और वे कारों और घरों से सुसज्जित हैं और उनके पास कमी है। लेकिन प्रथम प्रेरितों को कोई कमी नहीं थी क्योंकि परमेश्वर बहुतायत से उनके लिए आपूर्ति करता था।
बिलकुल ठीक। चलो अब कुछ समय के लिए अपने श्राप के अध्याय को देखें। वह क्या है? आप में से कितनों को पता है कि जो शाप का अध्याय कौन सा है? व्यवस्थाविवरण 28, सही है। इसमें आशीर्वाद और शाप पाया जाता है। इसमें 68 पद हैं। यह एक लंबा अध्याय है। पहले 14 पद आशीर्वाद हैं और शेष 54 पद शाप हैं। और यदि आप को कभी भी संदेह हैं कि श्राप क्या है, तो बस उन 54 पदों को पढ़ डालिए। आप देख सकते हैं कि एक मसीही के रूप में आप श्राप भोगते रहे हैं जबकि आपको आशीष भोगना चाहिए था। इस शाप की सूची में दो पदों, 47 और 48 पदों के बीच। और कृपया ध्यान दें, यह एक श्राप है। व्यवस्थाविवरण 28ः47-48ः
‘‘तू जो सब पदार्थ की बहुतायत होने पर भी आनन्द और प्रसन्नता के साथ अपने परमेश्वर यहोवा की सेवा नहीं करेगा,.....।’’
यह परमेश्वर की इच्छा है। परन्तु दूसरा अविश्वासियों और अनाज्ञाकारियों के लिए दूसरा विकल्प हैः
‘‘.......इस कारण तुझ को भूखा, प्यासा, नंगा, और सब पदार्थों से रहित होकर अपने उन शत्रुओं की सेवा करनी पड़ेगी जिन्हें यहोवा तेरे विरुद्ध भेजेगा, और जब तक तू नष्ट न हो जाए तब तक वह तेरी गर्दन पर लोहे का जूआ डाल रखेगा।’’
उन चार कथनों को देखिएः भूख, प्यास, नग्नता, सभी चीजों की जरूरत। एक शब्द में वह क्या है? गरीबी, सही है। निरपेक्ष गरीबी। आप को उस से भी अधिक गरीबी नहीं हो सकती हैं। भूखा, प्यासा, नग्न और सब कुछ का जरूरतमंद देखा।
अब, एक पल के लिए क्रूस पर यीशु की कल्पना करें। वह भूखा था, वह 24 घंटों से कुछ नहीं खाया था। वह प्यासा था, उसके अंतिम वचन में से एक ‘‘मैं प्यासा हूँ’’ था। वह नग्न था, उन्होंने उसके सभी कपड़े छीन लिये थे। और उसे सब कुछ की जरूरत थी, उसके पास कुछ भी नहीं था। तब उसे दफन करने का समय आया। वह एक उधार के बागे और एक उधार कब्र में दफनाया गया। क्यों? क्योंकि उसने गरीबी के अभिशाप को सहा ताकि हमें क्या मिले? बहुतायत, सही है। प्रतिस्थापन देखिए?
ठीक है, आइए कहें। मैं इसे एक बार कहता हूँ और फिर आप इसे मेरे साथ कहें। ‘‘यीशु ने हमारी गरीबी सह लिया कि हम उसके बहुतायत का हिस्सा बनें।’’ ठीक? ‘‘यीशु ने हमारी गरीबी सह लिया कि हम उसके बहुतायत का हिस्सा बनें।’’ खुश दिखिए, यह अच्छी खबर है! मैं मसीहियों से कहता हूँ कि एक मसीही के लिए खुश होना कोई पाप नहीं है।
हम जल्दी से दो और पहलुओं को देखेंगे। हमारा समय समाप्त होना शुरू हो गया है। और मैं सिर्फ यह एक मिनट में समेटना चाहता हूँ। लेकिन यीशु - और मैं यह कहने जा रहा हूँ - ने हमारे शर्म को सहा ताकि हम उसकी महिमा का हिस्सा बनें। यदि आप मत्ती 27 निकालें तो आप क्रूसीकरण को वर्णन पाएँगे। मत्ती 27ः35-36ः
तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया और चिट्ठियाँ डालकर उसके कपड़े बाँट लिए....।
उन्होने उससे उसके सारे कपड़े ले लिए। उन दिनों एक व्यक्ति चार कपड़े पहनता था। वहाँ चार सिपाही थे। प्रत्येक सिपाही ने एक एक लिया। तब उन्होंने बागे के लिए चिट्ठी डाली। तब 36 पद कहता हैः
और वहाँ बैठकर उसका पहरा देने लगे।
मैं यह एक ऐसे तरीके से कहना चाहता हूँ जो कि विचारशील है, लेकिन वहाँ से गुजरने वाले सभों की आँखों के सामने यीशु को नग्न रखा गया। और यह एक बहुत ही दिलचस्प बात यह है कि आप सुसमाचार में देखेंगे कि उसके साथ आयी महिलाएँ एक दूरी पर खड़ी रहीं। एकमात्र स्त्री जो उसके पास आई वह उसकी माँ थी। बाइबल इतना विचारशील है। उसने हमारी लज्जा को सह लिया।
अब इसके विपरीत क्या है? पुनः हम इब्रानियों 2 अध्याय 10 पद निकालें। जो पद हमने देख लिया उसके ठीक बाद का पदः
‘‘क्योंकि जिस के लिये सब कुछ है, और जिस के द्वारा सब कुछ है, उसे यही अच्छा लगा कि जब वह बहुत से पुत्रों को महिमा में पहुँचाए, तो उन के उद्धार के कर्ता को दुख उठाने के द्वारा सिद्ध करे।’’
परमेश्वर का उद्देश्य क्या था? बहुत से पुत्रों को कहाँ पहुँचाने के लिए? महिमा में। यह कैसे संभव होता? क्योंकि यीशु ने हमारे शर्म को सह लिया कि हम उसकी महिमा के भागीदार हों।
लोगों को परामर्श देते हुए मुझे पता चला है कि मानव हृदय का सबसे गहरा घाव शर्म होता है। और कई अलग अलग कारण होते हैं, लेकिन हमारे समकालीन संस्कृति में बच्चों में एक बहुत ही आम कारण है जिन्होंने बचपन में यौन दुर्व्यवहार सहा है। और अमेरिका में वे अनुमान लगाते हैं कि आज संयुक्त राज्य अमेरिका में हर चार बच्चों में से एक के बारे में यह सच है। और यह एक निशान, एक शर्म की बात छोड़ देता है। लेकिन परमेश्वर का शुक्र है हमें इस समस्या पर रुकना नहीं है। हमें समाधान मिल गया है। और मैं ने बहुत से लोगों की मदद की है। यीशु ने हमारी लज्जा को सह लिया कि हम उसकी महिमा का हिस्सा बनें।
आप कुछ लोगों को पायेंगे - मैं किसी को नहीं देख रहा हूँ तो मैं बहुत सावधान रहना चाहता हूँ - लेकिन आप कुछ लोगों को देखेंगे कि जब वे प्रार्थना करते हैं तो कभी भी अपना चेहरा परमेश्वर की ओर ऊपर नहीं उठाते हैं। वे हमेशा इस प्रकार नीचे देखते रहते हैं। आमतौर पर समस्या शर्म की होती है। जब एक व्यक्ति छुड़ाया जाता है - अय्यूब ने कहा, ‘‘मैं बिना दाग के अपना मुख परमेश्वर की ओर उठाऊँगा।’’ कई बार हम गुप्त बंधन के प्रति सचेत नहीं होते हैं जो हमारा शिकार करते हैं। लेकिन क्रूस के द्वारा हर बंधन से रिहाई प्रदान की जाती है।
तो चलिए आदान प्रदान करते हैं। मुझे लगता है कि आप इस समय बिना किसी प्रशिक्षण के यह कर सकते हैं। आप अद्भुत लोगों का एक समूह हैं। बिलकुल ठीक। ‘‘यीशु ने हमारी लज्जा को सह लिया कि हम उसकी महिमा का हिस्सा बनें।’’ बिलकुल ठीक।
अब बस एक और फिर हम बंद करने जा रहे हैं। यह सूची का अंत नहीं है, लेकिन यह आज रात के लिए अंत है। अंतिम आदान प्रदान अस्वीकृति और स्वीकृति के बीच है। और यहाँ फिर से लोगों से बात करते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि अस्वीकृति सबसे गहरा घाव है जिसे मानव हृदय सह सकता है। अस्वीकृति का एक निशान यह है कि ऐसे व्यक्ति हमेशा बाहर से भीतर देखते हुए महसूस करते हैं। दूसरे भीतर आ सकते हैं, मैं नहीं।
अस्वीकृति की एक और निशान प्रेम व्यक्त करने में असमर्थता है। यूहन्ना कहते हैं, क्योंकि उसने पहले हमसे प्यार किया इसलिए हम परमेश्वर से प्यार करते हैं। मेरा मानना है कि यदि हम पर प्रेम व्यक्त नहीं किया जाए तो हम कभी प्रेम व्यक्त नहीं कर सकते थे। प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए प्रेम की अभिव्यक्ति प्रेम की आवश्यकता है। और आम एकल कारण कि क्यों हमारी समकालीन सभ्यता में कई अस्वीकृति के घाव लिए फिरते हैं तो यह माता-पिताओं का रवैया और आचरण है। सबसे पहले अगर एक महिला गर्भवती है और उस नए जीवन के आने पर दुःखी होती जो उसके गर्भ में पल रहा है और ऐसी बातें कहती जैसे, ‘‘काश, मैं एक और बच्चे की माँ नहीं बनती।’’ वह नन्हा जीवन गर्भ में उस अस्वीकृति को महसूस करता और बच्चा बार-बार की अस्वीकृति की एक भावना के साथ पैदा होता है। मैं ने कई मामलों में इसे सुलझाया है।
तो फिर, जब एक बच्चे का जन्म होता है तो हर बच्चे की पहली लालसा जो परमेश्वर ने उसमें रखा है वह माता पिता से प्रेम की गर्माहट की अपेक्षा करना है। और पिता से मुख्य रूप से। मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि गर्माहट के साथ अभिव्यक्त एक पिता का प्यार ही है जो एक बच्चे का सुरक्षा देता है। ओह, पिताजी की बाहों की वह जकड़ और सीने से लगाना! लेकिन आप देखते हैं, हमारे समकालीन संस्कृति में-मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 50 प्रतिशत बच्चे कभी यह प्राप्त नहीं करते हैं। और वे अस्वीकृति के इस भीतरी घाव के साथ जीवन बिताते हैं। ओह, कैसे मैं परमेश्वर को धन्यवाद दूँ कि इसका एक समाधान है।
मुझे इस छोटी सी कहानी को संबंधित करने दें, मैं लंबा समय नहीं लूँगा। लेकिन मैं संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ साल पहले एक शिविर की बैठक में था और मुझे उपदेश देना था और मैं शिविर स्थल की ओर चला जा रहा था। मैं तो बहुत जल्दी से चल रहा था क्योंकि मुझे देर होने का खतरा था। और वहाँ एक औरत थी जो सामने की ओर से उतनी ही तेजी से चली आ रही थी, और हम एक दूसरे से भिड़ गए। किसी तरह खुद को संभालने के बाद उसने कहा, ‘‘श्री प्रिंस, मैं प्रार्थना कर रही थी कि अगर परमेश्वर चाहता है कि मैं आपसे बातें करूँ तो हम मिलें।’’ खैर, मैं ने कहा, ‘‘हम मिले हैं। लेकिन मैं आपको केवल दो मिनट दे सकता हूँ क्योंकि मुझे प्रचार के लिए सभागार में होना है।’’ तो मुझे बताइए कि आपकी समस्या क्या है?’’ और उसने एक मिनट के लिए बात की और वह बीस मिनट और बात करती। मैंने कहा, ‘‘सुनिए, मेरे पास और अधिक समय नहीं है, मुझे लगता है कि मैं आपकी समस्या समझ गया हूँ। मैं चाहता हूँ आप मेरे पीछे यह प्रार्थना कहें।’’ और मेरे मन में निश्चित नहीं था कि मैं क्या प्रार्थना करने जा रहा हूँ मैं ने उसे नहीं बताया कि मैं क्या प्रार्थना करने के लिए जा रहा था, लेकिन मैं ने इस कुछ इस तरह प्रार्थना की। ‘‘परमेश्वर, मैं आप का धन्यवाद करता हूँ कि आप मेरे पिता हैं, और मैं आपका बच्चा हूँ। आप सच में मुझे प्यार करते हैं। मैं तिरस्कृत नहीं हूँ, मैं अवांछित नहीं हूँ। मैं परमेश्वर के परिवार के, ब्रह्मांड में सबसे अच्छा परिवार का सदस्य हूँ। आपको धन्यवाद, परमेश्वर, आप मेरे पिता हैं, मैं आपका बच्चा हूँ। आप मुझे प्यार करते हैं और मैं आपसे प्यार करता हूँ। परमेश्वर धन्यवाद, आपको धन्यवाद, आपको धन्यवाद परमेश्वर।’’ और मैं ने कहा, आप वहाँ हैं, अलविदा। लगभग एक महीने के बाद मैंने उस महिला से एक पत्र पाया। उसने स्थिति का वर्णन किया, कि हम कैसे मिले थे ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि मैं जानता था कि वह कौन है। और उसने कहा, ‘‘मैं आपसे सिर्फ यह कहना चाहती हूँ, श्री प्रिंस, आपके पीछे वह साधारण प्रार्थना करने के बाद पूरी तरह से मेरा जीवन बदल गया था।’’ उसे क्या हुआ? वह अस्वीकृति से स्वीकृति की ओर आ गई। उसे एहसास हुआ कि परमेश्वर की संतान बनना क्या होता है।
सुनिए, अगर आपके माता-पिताओं ने आपको विफल कर दिया है, अतीत की बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें हम परिवर्तित नहीं कर सकते हैं। लेकिन हम परमेश्वर के साथ आपके संबंध की गारंटी दे सकते हैं।
यीशु की इस तस्वीर को देखिए, और यह अंतिम है जिसे हम देखेंगे। मत्ती 27ः45-51।
‘‘दोपहर से लेकर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्धेरा छाया रहा। (46 पद) तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी? अर्थात् हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? जो वहाँ खड़े थे, उन में से कितनों ने यह सुनकर कहा, वह तो एलिय्याह को पुकारता है। उन में से एक तुरन्त दौड़ा, और स्पंज लेकर सिरके में डुबोया, और सरकण्डे पर रखकर उसे चुसाया। औरों ने कहा, रह जाओ, देखें, एलिय्याह उसे बचाने आता है कि नहीं। तब यीशु ने फिर बड़े शब्द से चिल्लाकर प्राण छोड़ दिए। और देखो मन्दिर का परदा ऊपर से नीचे तक फट कर दो टुकड़े हो गया।’’
आप देखें, यीशु क्रूसीकरण के भौतिक प्रभावों से नहीं मरा। जब पीलातुस ने सुना कि वह मर गया है तो वह आश्चर्यचकित था क्योंकि आम तौर पर वह शायद दो घंटे और जीवित रहता। वह किससे मरा? वह एक टूटे हुए दिल से मरा। किस बात ने उसका दिल तोड़ दिया? अस्वीकृति। किसके द्वारा? पिता द्वारा, यह सही है। संसार के इतिहास में पहली बार परमेश्वर के पुत्र ने पिता की दोहाई दी और पिता ने जवाब नहीं दिया। अपने कान बंद कर दिये, अपनी आँखें फेर ली। क्यों? क्योंकि यीशु हमारे पापों के द्वारा पाप बनाया गया था और परमेश्वर पाप के पक्ष में खड़ा नहीं हो सकता।
यीशु ने हमारे लिए तिरस्कार सहा। और उसके तुरंत बाद उसने अपनी आत्मा दे दिया और पहली बात जो हुई वह यह है कि मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक दो भागों में फट गया। यह बहुत मोटा था क्योंकि यह इस का दृढ़ीकरण था कि परमेश्वर ने यह किया है। पर्दा ही था जो अपवित्र मनुष्य को पवित्र परमेश्वर से अलग करता था। और जब यीशु ने हमारा तिरस्कार सहा तो परमेश्वर ने अपने बच्चों के रूप में हमें अपनी स्वीकृति दी।
चलिए, एक पल के लिए इफिसियों 1 देखते हैं। इफिसियों 1ः3-6
हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उस ने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है। जैसा उस ने हमें जगत की उत्पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो, जिसे उस ने हमें उस प्यारे में सेंत मेंत दिया।
आदान प्रदान क्या है? आप देखें, कि क्या आप बिना सिखाये यह कह सकते हैं। ‘‘यीशु ने हमारे तिरस्कार को सह लिया ताकि हम उसकी अंगीकार को पा सके।’’ कमाल है, हम पुनः इसे करेंगे। फिर से कोशिश करूँगा। ‘‘यीशु ने हमारे तिरस्कार को सह लिया ताकि हम उसकी अंगीकार को पा सके।’’
मुझे बहुत जल्दी आदान प्रदान के आठ पहलुओं को बताने दीजिए जिसे हम ने देखा है। और मैं अपने हाथों से उन्हें करूँगा। मैं बताता हूँ कि क्या, मैं उन्हें एक बार करूँगा, और दूसरी बार आप मेरे पीछे उसे दूसरी बार करें। हम देरी करने नहीं जा रहे हैं, समय बीतता जा रहा है। ठीक है?
‘‘यीशु दंडित किया गया कि हम माफ किये जाएँ।’’ ध्यान दें, इस बार मैं चाहता हूँ कि आप इसे व्यक्तिगत बनाएँ। हम न कहें, मैं कहें। ‘‘यीशु दंडित किया गया कि मैं माफ किया जाऊँ।’’
‘‘यीशु घायल किया गया कि मैं चंगा किया जाऊँ।’’
मेरे पाप के कारण यीशु पाप बनाया गया ताकि मैं उसकी धार्मिकता से धर्मी बनाया जाऊँ।
‘‘यीशु ने मेरी मृत्यु सही, ताकि मैं उसके जीवन का भागीदार बनूँ।’’
‘‘मेरी खातिर यीशु श्राप बनाया गया ताकि मैं आशीष प्राप्त करूँ।’’
‘‘यीशु ने मेरी गरीबी सही कि मैं उसकी बहुतायत का हिस्सा हो सकूँ।’’
‘‘यीशु मेरी शर्म को सहा कि मैं उसकी महिमा का हिस्सा हो सकूँ।’’
‘‘यीशु ने मेरा तिरस्कार सहा ताकि मैं उसकी स्वीकृति पा सकूँ।’’
अब हम वास्तव में विश्वास करते हैं कि आप को मालूम है कि आप को क्या करना है? हमें परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए, हम और कुछ भी नहीं कर सकते है। कुछ समय उस का शुक्रिया अदा करें। यही कारण है कि विश्वास की सबसे अच्छी अभिव्यक्ति उसको धन्यवाद देना है। उसका आभार प्रकट करें। आमीन। धन्यवाद परमेश्वर। धन्यवाद यीशु। प्रभु यीशु धन्यवाद। आपके अद्भुत नाम की स्तुति हो। प्रभु, हम आप पर विश्वास करते हैं। हम आप पर विश्वास करते हैं। हम आपको धन्यवाद देते हैं। प्रभु यीशु आपके पवित्र नाम की स्तुति हो। हम आपको, अपने पवित्र नाम प्रभु यीशु होना धन्य भला करे। आप ने हमारे लिए यह सब किया था और हम आज रात आप को धन्यवाद कहना चाहते हैं।
अब क्या यहाँ आज रात आप में से कोई ऐसे है जिन्होंने कभी व्यक्तिगत रूप से यीशु को जो कुछ उसने आपके लिए किया है उसके लिए धन्यवाद नहीं दिया है। कि वह आपके स्थान पर मृत्यु सहा। कि वह हमारे पाप की खातिर पाप बना कि उसकी धार्मिकता से आप धर्मी बनाए जाएँ। समापन से पूर्व हम यहाँ कुछ समय देना चाहते हैं कि आप निर्णय कर सकें और उसे दृढ़ कर सकें। अभी हम उन लोगों से बात कर रहे हैं जिन्होंने वास्तव में कभी नहीं स्वीकार किए कि यीशु का प्रायश्चित उनके पाप के बदले में, उनके प्राणों के लिए किया गया था, कि उन्हें अनंत जीवन मिले। आज रात परमेश्वर के वचन के द्वारा आप पर यह प्रगट किया गया है। परमेश्वर का आत्मा आपके हृदय पर खिंचवा डाल रहा है और आप कहते हैं, ‘‘मैं आज की रात यह करना चाहता हूँ। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि मेरे पास यह है। मैं इस जगह से बाहर अनिश्चित या उलझन में नहीं जाना चाहता।’’ यह बहुत सरल है। यदि आज रात आप परमेश्वर से मेल करना चाहते हैं तो मैं आपसे यह करने के लिए कहने जा रहा हूँ, बस एक साधारण बात है। जहाँ आप हैं वहीं खड़े हो जाइए, मैं आप को एक बहुत ही सरल प्रार्थना करवाना चाहता हूँ, जो उसे आपका बना देगा। मत हिचकिए और इंतजार मत कीजिए, क्योंकि यह सेवा और लंबा नहीं खिंचेगा। आप अपने बदले में यीशु की मृत्यु को महसूस करें। यीशु ने कहा कि यदि तुम उसे मनुष्यों के सामने उसका अंगीकार करोगे तो वह पिता के सामने मुझे मान लेगा। तो अगर आप आज रात यहाँ उस स्वीकारोक्ति को करना चाहते हैं तो इधर उधर मत ताकिए कि परमेश्वर आपके साथ क्या कर रहा है। आप जहाँ हैं वहीं आप अपने पैरों पर खड़े हो जाइए। शर्मिंदा मत हो। खड़े हो जायें और कहें, ‘‘परमेश्वर, आज रात मुझे वह चाहिए।’’ आप जहाँ भी रहें हम आप के लिए प्रार्थना करेंगे। परमेश्वर की स्तुति कीजिए। परमेश्वर आपको आशीष दे, परमेश्वर आपको आशीष दे, परमेश्वर आपको आशीष दे। हो सकता है मैं आप सभी को न देखूँ। मंच पर के भाइयों, यदि आप हैं। परमेश्वर आपको आशीष दे। चार पुरुष बालकनी में खड़े हैं। परमेश्वर आपको आशीष दे। बहन, परमेश्वर आपको आशीष दे। खड़े हो जाओ, मत बैठो। मैं एक प्रार्थना में आपकी अगुवाई करने जा रहा हूँ। खड़े रहो। धन्यवाद, बस मेरे साथ रहो और मेरी मदद करो। परमेश्वर आपको आशीष दे। मुझे लगता है कि और अधिक संख्या में लोग हैं। कायर नहीं बनो। परमेश्वर की स्तुति करो। यदि मैं आप को न पहचानूँ, तो आप शर्मिंदा मत हों। बस खड़े रहो। आज रात मेरे लिए आश्चर्य की बात है और खुशी की बात है कि खड़े हुए लोगों की संख्या है। आमीन। आपको धन्यवाद, परमेश्वर। प्रभु, आपका धन्यवाद, हे प्रभु धन्यवाद। आपको धन्यवाद, परमेश्वर। आपको धन्यवाद, प्रभु यीशु। आपको धन्यवाद, परमेश्वर। आपको धन्यवाद, परमेश्वर। हाँ, मैंने उस औरत को देखा है। यदि मैं आप को न देख पाऊँ तो एक बड़ी समस्या नहीं है। परमेश्वर आपको देखता है। यही मायने रखता है। अब कुछ और हैं जिन्हें खड़े होने की जरूरत है। आप में से जो आजीवन चर्च जाते रहे हैं परन्तु कभी भी यह अंगीकार नहीं किया है। परमेश्वर आपको आशीष दे। मैं एक और को वहाँ खड़ा देख रहा हूँ। परमेश्वर आशीष दे। मुझे बस अभी इस सभा को बंद करने की स्वतंत्रता नहीं है। हम आप पर दबाव डालने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ आपकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। वहाँ कहीं कोई है जिसे खड़े होने की जरूरत है।
परमेश्वर, हम बस यीशु के नाम में प्रार्थना करते हैं, और स्तुति करते हैं जो भय से ग्रसित हैं उन्हें मुक्त करते हैं। हे प्रभु, हम उन्हें अब यीशु के नाम पर, मुक्त करते हैं ताकि वे ....। परमेश्वर आपको आशीष दे। खड़े रहिए, फिर से नीचे मत बैठिए। भाइयों और बहनों मैं आपको बताना चाहता हूँ... श्रीमान, परमेश्वर आपको आशीष दे। यदि अभी आप यीशु के लिए खड़े होने में संकोच करेंगे तो एक दिन जब हम उसके सामने खड़े होंगे तो बहुत शर्मिंदा होना पड़ेगा। बालकनी में दो और लोग। मसीही लोग प्रार्थना करते रहें। मुझे आशा है कि आप बस थोड़ी देर और धैर्य रख सकते हैं। यह इतना महत्वपूर्ण है। आमीन। आमीन। आमीन। आमीन। परमेश्वर की स्तुति करो। ठीक है। मुझे लगता है कि वहाँ एक या दो युवा व्यक्ति, लड़के लड़कियाँ हैं जिन्हें खड़े होने की आवश्यकता है। अब मुझे लगता है कि इन बड़ों के सामने खड़े होना बहुत बड़ी बात है लेकिन यदि परमेश्वर आपको उभार रहा है तो करें। जेम्स हे सभागार में ऐसे लोग हैं, मुझे उम्मीद है आप खड़े रहे हैं क्योंकि यह प्रस्ताव आप के लिए भी उतना ही है जितना यहाँ उपस्थित किसी के लिए है। आमीन। आमीन। ठीक है। आप में से जिनके पास है, जो खड़े हैं, चाहता हूँ कि आप मेरे पीछे यह प्रार्थना करें। आप प्रभु यीशु मसीह से प्रार्थना करने जा रहे हैं, आप भाई प्रिंस से प्रार्थना नहीं कर रहे हैं। और मैं चाहता हूँ कि आप इसे इतना जोर से कहें कि कम से कम आपको सुनाई दे। ठीक है? ताकि जब आप यहाँ से बाहर जायें तो आपको पता रहे कि आपने यह प्रार्थना की है। क्या आप ये शब्द कहने और उन्हें करने के लिए प्रभु यीशु कह सकते हैं। ‘‘प्रभु यीशु मसीह, मुझे विश्वास है कि आप परमेश्वर का पुत्र हैं और परमेश्वर के पास जाने का एक ही रास्ता हैं। कि आप मेरे पापों के लिए क्रूस पर मरे और फिर से मरे हुओं में से जी उठे। जो कुछ आपने मेरे लिए किया उसके लिए आपको धन्यवाद और विश्वास से मैं इसे अब प्राप्त करता हूँ। प्रभु यीशु, मैं आपको अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करता हूँ। मुझे अब स्वीकार करें और मुझे परमेश्वर की एक संतान बनायें। यीशु के नाम में प्रार्थना करता हूँ। आमीन। क्या हम सब उन लोगों के लिए परमेश्वर का शुक्रिया अदा करें। धन्यवाद।
कोड: MV-4256-100-HIN









