अपने पिछले सत्र में हमने आत्मा के तीन शाब्दिक वरदानों को देखा: भाषाएँ, व्याख्या और भविष्यद्वाणी। मैं ने आपको उन वरदानों के अभ्यास में ले जाना चाहा। मुझे लगता है कि मैं 80 प्रतिशत सफल रहा हूँ जिसके लिये मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ।

अब इस क्रम में एक सत्र बचा है और हम बचे हुए छः वरदानों को सामर्थ्य और प्रकाशन नामक दो शीर्षकों के अन्तर्गत संक्षिप्त रूप में देखने जा रहे हैं। रूपरेखा के द्वारा मूर्ख मत बनिए। यह पूरी रूपरेखा नहीं है, आगे कुछ और है। परन्तु हम उससे प्रारंभ करेंगे। वह स्त्री जो वह उन्हें बना रही थी - और वह सच में एक भद्र महिला है - उसकी कलम अटकने लगी। तो इसलिये हम वहाँ रुक गए थे परन्तु शेष भाग आना बाकी है। हम सच में उस स्त्री के प्रति आभारी हैं। मैं सोचता हूँ हमें उसके लिये ताली बजानी चाहिए। मैं नहीं जानता कि वह कहाँ है। हमें उसके लिये प्रार्थना करने की आवश्यकता है कि वह अपनी अन्य परीक्षाओं में असफल न हों, क्योंकि उसने अपना पूरा समय यहाँ पर दिया है।

अब सामर्थ्य के तीन वरदान। सामर्थ्य का पहला वरदान विश्वास है। नया नियम में विश्वास का उपयोग बहुत तरीकों से किया गया है। ‘‘धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।’’ मेरे पास एक पुस्तक है जिसका शीर्षक है, ‘‘जीने के लिये विश्वास’’। यही वह विश्वास है जिसके द्वारा हर मसीही, मसीही होता है।

तो गलातियों 5 अध्याय में विश्वास को आत्मा के फलों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। फल और वरदान अलग-अलग हैं। यदि आप उनमें अन्तर जानना चाहते हैं तो एक क्रिसमस ट्री और सेब के पेड़ पर विचार करें। सेब के पेड़ में फल होता है। इस पेड़ में फल लगने में काफी लम्बी प्रक्रिया होती है, वह तुरन्त नहीं आता है, उसकी खेती करनी पड़ती है। दूसरी तरफ जहाँ तक क्रिसमस ट्री के बात है - यदि आप किसी ऐसी बात में शामिल रहे हैं - उसमें उपहार होते हैं। उन उपहारों को वहाँ पर तुरन्त रखा जा सकता है और तुरन्त उठा लिया जा सकता है। इसमें समय नहीं लगता है। वरदान के साथ यह बात सही है। वरदान प्राप्त करने में 30 सेकेण्ड भी नहीं लगता है। यही अन्तर है।

अब, फल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं परन्तु हम उस पर विचार नहीं कर रहे हैं, हम वरदानों पर विचार कर रहे हैं। विश्वास का फल को अक्सर विश्वासयोग्यता के रूप में अनुवादित किया जाता है। वास्तव में, विश्वास के लिये प्रयुक्त यूनानी शब्द और विश्वास के लिये प्रयुक्त इब्रानी शब्द दोनों ही मुख्य रूप से स्वभाव को दर्शाती हैं, न कि बुद्धि को। यह रोचक बात है। विश्वास सच में विश्वासयोग्यता है। यह परमेश्वर के प्रति समर्पण है। यह कुछ निश्चित सिद्धान्त को मानना नहीं है - वह दूसरी बात होती है।

हालाँकि, हम विश्वासयोग्यता के फल के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, हम विश्वास के वरदान के बारे में बात कर रहे हैं। कुछ ऐसा जो क्षणभर में प्राप्त किया जाता है। विश्वास का वरदान क्या है? मेरा उत्तर यह है कि यह परमेश्वर के स्वयं के विश्वास का राई का दाना है जो सर्वोच्च और अलौकिक रूप से दिया जाता है। हम उस पर दावा नहीं करते हैं, वह परमेश्वर देता है। दो संदर्भ हैं जिसे आप देख सकते हैं। मरकुस 11ः21-23। आपको याद है, यीशु एक अंजीर के पेड़ के पास और उससे वह अप्रसन्न हुआ। उसने कहा, ‘‘अब से तुझ में कभी फल न लगे।’’

‘‘फिर भोर को जब वे उधर से जाते थे तो उन्होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ तक सूखा हुआ देखा। पतरस को वह बात स्मरण आई, और उसने उससे कहा, ‘‘हे रब्बी, देख! यह अंजीर का पेड़ जिसे तू ने श्राप दिया था, सूख गया है।’’ यीशु ने उस को उत्तर दिया, ‘‘परमेश्वर पर विश्वास रखो।’’

यह यही सामान्य अंग्रेजी है परन्तु यूनानी भाषा वास्तव में कहता है, ‘‘परमेश्वर का विश्वास रखो’’ जो कि उतना ही अलग है जितना दिन और रात। यीशु ने कहा, ‘‘यदि तुम में परमेश्वर का विश्वास हो तो जो शब्द तुम बोलते हो और जो काम तुम करते हो, वह उतना ही प्रभावशाली होगा मानो परमेश्वर ने स्वयं यह किया हो। यह आपका विश्वास नहीं है, यह परमेश्वर का विश्वास है। दूसरे शब्दों में उसने कहा, ‘‘मुझ में परमेश्वर के विश्वास ने मुझे उस वृक्ष के मंजिल को तय करने योग्य बनाया। जो वचन मैं ने बोले वह उतने ही प्रभावशाली हैं मानो परमेश्वर पिता ने स्वयं उन्हें बोला हो।’’ और स्मरण रखिए, परमेश्वर ने सृष्टि की रचना बोलने के द्वारा की है। उसने कहा और जगत उत्पन्न हुआ।

तब वह 23 पद में यह प्रतिज्ञा देता है।

‘‘मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, कि उखड़ जा और समुद्र में जा पड़ और अपने मन में सन्देह न करे वरन् प्रतीति करे कि जो कहता हूँ वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही होगा।’’

यह अद्भुत रूप से विशिष्ट है। ‘‘जो कोई’’ जो कुछ कहता है वह ‘‘सब कुछ’’ उसे मिल जाएगा। परन्तु अपने स्वयं के निर्णय से यह आप नहीं कर सकते हैं। ऐसा तब होता है जब परमेश्वर स्वयं अपना विश्वास उस स्थिति में एक वरदान के रूप में आप में रोपित करता है।

अब इसके साथ साथ मत्ती 17ः20 भी देखें जो इसी घटना का वर्णन करता है। यीशु कहता है:

‘‘यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, ‘यहाँ से सरक कर वहाँ चला जा’, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये असंभव न होगी।’’

तो यीशु ने कहा कि यदि यह परमेश्वर की विश्वास है तो बहुत ज्यादा की आवश्यकता नहीं है, एक राई का दाना (जो कि सारे दानों में सबसे छोटा होता है) पहाड़ को हटाएगा। दूसरे शब्दों में, विश्वास की बहुत अधिक मात्रा नहीं, परन्तु यह आपके विश्वास की गुणवत्ता है जो देखी जाती है। विश्वास का वरदान परमेश्वर के विश्वास का एक छोटा सा राई का दाना है जो एक विशेष कार्य के लिये निश्चित समय पर आप में बोया जाता है। जब आप उसका अभ्यास करते हैं, तो आप परमेश्वर के जैसा ही प्रभावशाली बनते हैं। जब एक बार यह हो जाता है, तो आप अपने विश्वास के स्तर पर आ जाते हैं। ऐसा विश्वास जिसमें हम रोज व रोज जीते हैं।

तो, यह विश्वास का वरदान है। यह प्रायः एक उत्प्रेरक होता है। यह अगले दो वरदान उत्पन्न करता है। और इस बिन्दु पर हम भाई फेन्यू की सहायता से अगले पृष्ठ पर जाएँगे, जो अब इस समय हमेशा के लिये इस वीडियो में अमर हो गए हैं! अब हम सामर्थ्य के अगले वरदानों पर जाते हैं जो कि चंगाई का वरदान है और मूल भाषा में देखें कि यह बहुवचन है। चंगाई के वरदान। मैं व्यक्तिगत रूप से यह विश्वास करता हूँ कि प्रत्येक चंगाई एक वरदान होता है और सामान्यतः ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ सेवक कुछ निश्चित प्रकारों की चंगाई में विश्वास करते हैं। जैसे, मुझे पीठ की समस्याओं के लिये विश्वास है, मुझे बड़ी आंत में जलन के लिये विश्वास है, मुझे दमा के लिये विश्वास है, मुझे जोड़ों के दर्द के लिये विश्वास है। परन्तु हाल ही तक जहाँ तक लोगों के आँखों का सवाल था मुझे अधिक विश्वास नहीं था। मैं हाल ही तक ऐसा कहता रहा क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान में हम ने लगभग दस अन्धे लोगों को दृष्टि पाते देखा, परन्तु यह एक नई बात थी जिसके विषय में मुझे नहीं मालूम था कि इसका अगला चरण क्या होगा। परन्तु मैं वर्षों से कमर की समस्या वालों के लिये प्रार्थनायें करता रहा हूँ और उनमें से अधिकांश चंगे भी हुए हैं।

तो, चंगाई के वरदानों को समझने के दो तरीके हैं। प्रत्येक वरदान भिन्न होता है और यह भी कि कुछ लोगों को चंगाई का वरदान मिलता है, जैसे, गठिया या मिर्गी। अन्य लोगों को बहरेपन या अन्धेपन या पेट की शिकायतों से चंगाई का वरदान मिलता है। बहुत से भिन्न भिन्न तरीके होते हैं जिसमें यह हो सकता है। हमें पवित्र आत्मा के प्रति संवेदनशील रहना है।

अब सारांश में, अब चंगाई का वरदान बीमारी के विरुद्ध परमेश्वर की अलौकिक शक्ति होती है। ठीक है? चंगाई बीमारी से जुड़ा हुआ है। केवल वही लोग चंगे हो सकते हैं जो बीमार हैं। ठीक है? यीशु की सेवा की समय के बारे में बताते हुए लूका 5ः17 में एक कथन दिया गया है।

‘‘और एक दिया हुआ कि वह उपदेश रहा था और फरीसी और व्यवस्थापक वहाँ बैठे हुए थे जो गलील और यहूदिया के हर गांवों से और यरूशलेम से आए थे और चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ्य उसके साथ थी (वैकल्पिक अनुवाद: उन्हें चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ्य उसके साथ थी)।’’

ध्यान दें, कि चंगा करने के लिये प्रभु की सामर्थ्य उपस्थित थी। तो, प्रभु की चंगा करने की सामर्थ्य बीमारी को दूर करती है और उसके स्थान पर स्वास्थ्य लाती है। यह एक अलौकिक सामर्थ्य होती है जो प्रायः हाथ रखने के द्वारा पवित्र आत्मा से प्राप्त होती है, कभी कभी तेल के अभिषेक के द्वारा, और भिन्न तरीकों से, परन्तु चंगाई बीमारी से जुड़ी हुई होती है।

अगला वरदान, आश्चर्यकर्म और आगे तक जा सकता है। आश्चर्यकर्म चंगाई से परे जाता है। उदाहरण के लिये, यह एक उदाहरण से है जो कि मेरी सेवा में एक से अधिक बार हुआ है। यदि एक व्यक्ति के पास वह है जिसे मध्यकर्णशोथ है, जो कि कान के बीच में सूजन होता है, आप उसके लिये प्रार्थना कर सकते हैं और वह ठीक हो सकता है। परन्तु यदि किसी व्यक्ति का कर्णपटल शल्यक्रिया द्वारा हटा दिया गया है तो आप ऐसे कर्णपटल को ठीक नहीं कर सकते हैं जो है ही नहीं। परन्तु एक आश्चर्यकर्म मध्यकर्ण को पूर्ववत ला सकता है। मुझे दो विभिन्न अवसर याद आते हैं जब यह हुआ। एक बार एक व्यक्ति मेरे पास आया और कहा, ‘‘मेरे कान के लिये प्रार्थना कीजिए।’’ परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि मैंने उससे नहीं पूछा कि उसके कान में क्या समस्या है। तो, मैंने प्रार्थना किया और वह वापस आया और कहा, ‘‘मैं चंगा हो गया।’’ मैंने कहा, ‘‘तुम्हें किस बात से चंगाई मिली?’’ उसने कहा, ‘‘मेरा मध्यकर्ण नहीं था और अब मुझे मिल गया है। मैं डॉक्टर के पास गया, उसने मुझे देखा और मेरे पास अब एक स्वाभाविक कान है।’’ यह आश्चर्यकर्म है। आप समझे? यह चंगाई से परे है।

अन्तर यह भी है कि आश्चर्यकर्म अक्सर तात्कालिक होते हैं - अनिवार्य रूप से नहीं - और अक्सर दृश्य होते हैं, जब कि चंगाई अक्सर अदृश्य होता है। यदि किसी का जिगर चंगा हो गया है तो ऐसा कुछ जल्द नहीं होता है जिस आप देख सकते हैं और बहुत बार वे धीरे-धीरे भी होते हैं। यह समझना है महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ लोग चंगाई पाने के लिये आते हैं, यदि उनके साथ आश्चर्यकर्म नहीं होता है तो वे सोचते हैं कि कुछ नहीं हुआ है। यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि आपको चंगाई मिलती है तो यह बहुत कुछ इस बात पर निर्भर होता है कि आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। मैं लोगों से कहता हूँ, ‘‘अब आप परमेश्वर की अलौकिक सामर्थ्य से जुड़ गए हैं। जुड़े रहिए।’’ आप यह कैसे करते हैं? असल में, परमेश्वर को धन्यवाद देने के द्वारा। आप कहते हैं, ‘‘प्रभु, आपका धन्यवाद, आप ने मुझे स्पर्श किया। मेरी देह में आपकी सामर्थ्य काम कर रही है।’’ प्रत्येक बार जब आपको दर्द की टीस महसूस होती है या आप एक लक्षण देखते हैं, आप कहते हैं, ‘‘धन्यवाद प्रभु, आपकी अलौकिक सामर्थ्य मेरी देह में काम कर रही है।’’ और जब आप इस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं तो चंगाई पूर्ण हो जाती है।

यदि आप प्रार्थना के लिये आते हैं, तो परमेश्वर आपको स्पर्श करता है, लेकिन आप पूर्ण चंगाई नहीं पाते हैं और तब आप बाहर निकलते हैं और आप कहते हैं, ‘‘कुछ नहीं हुआ।’’ जो आपने किया उसे प्लग निकालना कहते हैं। देखें? उसके बाद अधिक कुछ नहीं होता है। तो, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोगों को इन बातों का निर्देश दें।

मैं कहता हूँ कि आमतौर पर एक आश्चर्यकर्म विश्वास के एक सामान्य कार्य के द्वारा होता है। आप एक ऐसे व्यक्ति के विषय में अध्ययन करना चाहते हैं जिसने बहुत से आश्चर्यकर्म किए जिसका नाम एलिय्याह नबी था। उसके लगभग हर आश्चर्यकर्म उसके विश्वास का हास्यास्पद कार्य था। उदाहरण के लिये, यरीहो के बाहर पानी का एक सोता था जिसका पानी कड़वा था। उसने एक पात्र में नमक लिया और उसे पानी में फेंका और कहा, ‘‘प्रभु यों कहता है, ये जल अच्छा हो गया है।’’ हाँ, हर कोई जानता है कि नमक पानी को अच्छा नहीं करता है। आप समझे? परन्तु आज आप दो हजार से अधिक वर्ष बाद उस पानी पर जा सकते हैं और यह अब भी अच्छा है। नमक ने सोते को अच्छा नहीं किया परन्तु विश्वास का वह छोटा सा कार्य जिसने सोते में परमेश्वर की अद्भुत सामर्थ्य को प्रवाहित किया।

एक और समय पर भविष्यद्वक्ताओं के पुत्र सामान्य पात्र से भोजन कर रहे थे और उन्होंने पाया कि उसमें जहर था। एलिय्याह ने अपने हाथ में कुछ आटा लिया और उसे पात्र में फेंका और कहा, ‘‘प्रभु यों कहता है, पात्र ठीक हो गया है।’’ वह ठीक हो गया था। आटे ने पात्र को ठीक नहीं किया परन्तु सामान्य कार्य ने पात्र में चंगाई का आश्चर्यकर्म किया।

एक और घटना में उनका एक शिष्य यरदन के किनारे कुछ बनाने गया, कुछ वृक्षों को काटने के लिये एक कुल्हाड़ी उधार पर लिया और जब वह पेड़ काट रहा था, तो कुल्हाड़ी का लोहा यरदन के पानी में गिर गया। यदि आप कभी भी यरदन नहीं गए हैं तो कभी नहीं समझेंगे कि यरदन में गिरने का अर्थ क्या होता है। परन्तु यरदन एक कीचड़युक्त नदी है। तल पर दो इंच मोटाई में कीचड़ का परत बिछा हुआ है। तो कुल्हाड़ी का सिरा पानी के नीचे यूँ ही पड़ा हुआ नहीं था, वह कीचड़ में गिर गया और अदृश्य हो गया। एलिय्याह ने कहा, ‘‘ठीक है।’’ उसने लकड़ी का एक छोटा टुकड़ा लिया, उसे यरदन नदी में फेंका और वह वहाँ तैरने लगा। लोहे का सिरा लकड़ी से जुड़ने के लिये ऊपर आ गया। अब लकड़ी ने कुल्हाड़ी के सिरे को अपनी ओर नहीं खींचा, परन्तु आश्चर्यकर्म करनेवाली उस सामर्थ्य के द्वारा हुआ जो यरदन में प्रवाहित हुआ। आप समझे? सिद्धान्त देखिए। प्रायः आश्चर्यकर्म के लिये आपको कुछ मूर्खतापूर्ण करना होता है।

जब एक जन्म का अन्धा यीशु के पास आया, तो यीशु ने जमीन पर थूका और हर कोई जानता है कि प्रचारक लोग सार्वजनिक रूप से नहीं थूकते हैं। उसने कुछ मिट्टी लेकर थूक से कीचड़ बनाया और व्यक्ति के आँखों पर लगाया और कहा, ‘‘जा और शीलोह के कुण्ड में धो ले।’’ हाँ, यह हास्यास्पद है! परन्तु उस व्यक्ति ने वही किया जो उससे कहा गया और वह देखता हुआ वापस लौटा। मिट्टी ने उसे चंगा नहीं किया। कुण्ड ने उसे चंगा नहीं किया परन्तु यीशु का वह आश्चर्यकर्म करनेवाली सामर्थ्य ने काम किया जब व्यक्ति ने विश्वास के साथ प्रतिक्रिया दी।

तो, ये सामर्थ्य के तीन वरदान हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन किया गया है। जोर ‘संक्षिप्त रूप से’ शब्द पर है।

अब हम प्रकाशन के वरदान पर आते हैं। सबसे पहले, अधिकांश अनुवाद ‘‘बुद्धि के वचन’’ कहते हैं, परन्तु यूनानी कहता है, ‘‘बुद्धि का एक वचन’’। मैं समझता हूँ कि यह बहुत कुछ विश्वास के वरदान जैसा है परन्तु यह बुद्धि है। परमेश्वर के पास सारी बुद्धि है परन्तु यदि उसे सारी बुद्धि हमारी ऊपर उण्डेलनी होती तो हम बड़ी बोझ के नीचे दब जाते। परन्तु एक ऐसी स्थिति में जहाँ हमें बुद्धि की आवश्यकता है, हमारे लिये यह स्वाभाविक साधनों से उपलब्ध न हो, परमेश्वर हमें बुद्धि का एक अलौकिक वचन देता है - उसकी बुद्धि का एक छोटा सा राई का दाना।

बुद्धि की विशेषता यह होती है कि यह आदेशात्मक है। यह आपको दिखाती है कि कैसे आगे बढ़ना है। यह आपको दिखाती है कि क्या करना है। ज्ञान का वचन समान होता है परन्तु वह ज्ञान है, बुद्धि नहीं। यह परमेश्वर के ज्ञान का छोटा सा राई का दाना है जो एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिये आपको एक विशेष परिस्थिति में दी जाती है। 20 या 30 वर्ष पहले ज्ञान का वचन परमेश्वर के लोगों के मध्य अधिकांशतः अस्तित्व में नहीं था। अब यह आम होता जा रहा है। उसके लिये परमेश्वर का धन्यवाद हो। एक तरीका जिसमें यह काम करता है यह है कि प्रभु आपको किसी उपस्थित बीमार व्यक्ति को दिखाएगा। और जब वह व्यक्ति इस आधार पर बुलाया जाता है, तो उस व्यक्ति की समस्या का प्रकाशन चंगाई पाने के लिये व्यक्ति में विश्वास उत्पन्न करता है। आप समझे? परमेश्वर हमेशा हममें विश्वास उत्पन्न करने के लिये काम करता है। एक प्रकार से वरदानों का वास्तविक उद्देश्य विश्वास उत्पन्न करना है।

कई बार जब हम इकट्ठे होते हैं, रूत को ज्ञान के वचन का यह वरदान प्राप्त होता है। हम पिछले अप्रैल में ब्रिटेन में थे और मैं रविवार की सुबह की आराधना में बोल रहा था जो कि एक चंगाई सभा नहीं थी। इससे पहले कि मैं बोलने के लिये उठूँ रूत ने कन्धा थपथपाया और कहा, ‘‘मुझे लगता है कि परमेश्वर ने मुझे एक ज्ञान का वचन दिया है।’’ मैंने कहा, ‘‘अच्छी बात है, तुम बताओ।’’ परन्तु इससे पहले कि मैं यह करूं अपने ब्रिटिश लोगों को जानते हुए मैंने प्रतिक्रिया पर उन्हें कुछ प्रवचन दिया। मैंने कहा, ‘‘वहाँ बैठे रहकर यह मत कहिए: ‘मैं सोचता हूँ कि यह मैं होऊँगा’, या ‘इन सब लोगों के सामने जाने में मैं हैरान हो जाऊँगा’ क्योंकि आप परमेश्वर से चूक जाएँगे। यदि यह आप हैं तो आपको उठकर बाहर आना होगा। हम आपके लिये प्रार्थना करेंगे।’’ तो रूत उठ खड़ी हुई और एक व्यक्ति का वर्णन किया जो सोचता था कि उसका दाहिने आँख की रोशनी कम हो रही है। हाँ, दूसरी पंक्ति में एक भारतीय महिला बैठी हुई थी जो अपनी साड़ी में सजी थी। रूत ने अभी आधा भी नहीं बोला था कि वह प्लाटफॉर्म पर पहुँच गई। आप देखें? भारतीयों और अंग्रेजों में यह अन्तर होता है। तो उसने कहा, ‘‘इस सभा में मेरे आने का एक मात्र कारण यह है कि मुझे लगता है कि मेरी दाहिने आँख में रोशनी कम हो रही है।’’ मैंने कहा, ‘‘क्या आप एक मसीही हैं?’’ उसने कहा, ‘‘मैं एक शुद्ध हिन्दू हूँ।’’ परमेश्वर ने उसमें अपनी पकड़ रखी। यही एक मात्र तरीका था जिसके द्वारा वह सुसमाचार से उसका सामना कर सकता था। क्या आप चाहती हैं कि मैं यीशु के नाम से प्रार्थना करूं? उसने हाँ कहा। ‘‘क्या आप अंगीकार करना चाहती हैं कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है?’’ उसने कुछ क्षण सोचा और हाँ कहा। उसने किया और हम ने उसके लिये प्रार्थना किया। शाम को वह वापस लौट गई और उसने और भी आश्चर्यकर्म देखे। अन्त में वह हमारे पास आई और कहा, ‘‘सच में मुझे नहीं मालूम कि मेरे हिन्दू धर्म को क्या हो गया है।’’ रूत ने उस से कहा, ‘‘जो कुछ परमेश्वर ने आपको दिखाया है, उसके लिये आप उसके प्रति उत्तरदायी हैं।’’

एक और अनुभव जो पिछले गरमियों में यूथ विथ अ मिशन के साथ एम्स्टर्डम में हुआ था। हम लोग एक चंगाई सभा में थे और परमेश्वर ने रूत को ज्ञान का एक वचन दिया। किसी के विषय में एक अनोखी बात जिसकी देह पर चोट था। यह बताने में वह थोड़ा हिचक रही थी क्योंकि यह बहुत अजीब सा लग रहा था। परन्तु जब उसने यह दिया तो वह युवक खड़ा हुआ और बाहर आया और कहा, ‘‘यह मैं हूँ। मेरे पीठ में ऑपरेशन हुआ था परन्तु उन्हें इस तरफ से पूरा काटना पड़ा था।’’ हम ने उसे कुर्सी पर बिठाया और कहा, ‘‘क्या आप एक मसीही हैं?’’ उसने कहा, ‘‘हाँ।’’ हम ने कहा, ‘‘आप ने कब उद्धार पाया?’’ ‘‘पिछली रात सड़क पर।’’ तो यह सुन्दर था, था न? परमेश्वर ने उसे दिखाया कि वह एक व्यक्ति के रूप में कितना रुचि लेता था। उस आधार पर उसने उसे बाहर निकलने और चंगा होने के लिये कहा।

हो सकता है, हमें आज सुबह यहाँ समाप्त करने से पहले ज्ञान का वचन मिले। परन्तु हम अगले पर जाएँगे जो कि आत्माओं को परखना है। वास्तव में, दोनों भाग बहुवचन है। यह आत्माओं को परखने की बात है। चंगाइयों के वरदानों, आश्चर्यकर्मों के कामों, भाषाओं के प्रकारों के समान; बहुत से वरदान हैं जो मूल रूप में दोनों भागों में बहुवचन है। ‘‘परखना, पहचानना और भेद करना होता है।’’ तो आत्माओं को परखना, आत्माओं को पहचानना और उनके मध्य भेद करना है। यह एक आत्मिक भाव है। हम इसे देख सकते हैं, स्वाभाविक से नहीं जैसे बहुत सी आत्माएँ हैं जिनसे अक्सर मेरा और रूत का सामना होता है तो हम प्रायः तुरन्त ही उन्हें पहचान लेते हैं। एक मृत्यु की आत्मा है। एक व्यक्ति के विषय में कुछ ऐसा है जिसके अन्दर मृत्यु की आत्मा है जो उनमें, उनकी आत्मा में सारे गुण दिखाता है। एक और झाड़ फूंक करनेवाला है। हम वर्षों पूर्व, पाँच वर्ष पूर्व हॉलैण्ड में थे। हम एक चंगाई सभा में थे और बहुत से लोग सामने आ रहे थे। वहाँ यह युवा स्त्री थी। मुझे लगता है वह इन्डोनेसिआ से थी, वह कई महीनों की गर्भवती थी। मेरा मतलब है वह कम से कम आठ माह की गर्भवती थी। वह आगे आई। जब हमने अपने हाथ उस पर रखे, तो वह पकड़ी गई बिल्ली के समान हो गई। मेरा मतलब है, वह हिंसक हो गई और अपने नाखूनों से हम आक्रमण करना चाहा। कुछ पुरुषों ने उसे पकड़ रखा था। हम ने झाड़-फूंक की आत्मा को पहचान लिया। हम ने उसे बाहर निकलने की आज्ञा दी। वह मुक्त हुई और पुनः एक स्त्री बन गई। तब उसने हम से यह कहा जो रोचक है। मैं इसे पूरी तरह नहीं समझता, परन्तु कहा कि उसने सभा में नहीं आने के लिये शैतान से वाचा बांधी थी। तो आप जानते हैं, वह एक अनोखी पृष्ठभूमि में थी। उसके पश्चात् अगले पन्द्रह लोगों के लिये हमने प्रार्थना की, उनमें से प्रत्येक के पास हम गए और, उनमें से प्रत्येक जिनके पास हम गए, उनमें झाड़-फूंक की आत्मा थी।

मैं यह कहना चाहता हूँ कि परखना दुष्टात्माओं तक सीमित नहीं है। पवित्र आत्मा को परखना महत्वपूर्ण होता है, वह कहाँ है, वह क्या कर रहा है। मैं मानता हूँ कि जैसा यीशु ने नतनीएल से कहा, वैसे ही आप भी आत्मा को परख सकते हैं। ‘‘वह एक इस्राएली था जिसमें कोई कपट नहीं था।’’ यह एक अनोखी बात है। मैं चाहता हूँ कि आप जानें परन्तु यीशु ने नतनीएल में वह निष्कपट आत्मा देखा।

ठीक है? अब यह वरदानों का एक संक्षिप्त सारांश है। अब मैं सोचता हूँ कि हमें गतिविधि की ओर बढ़ जाना चाहिए। यही वह बिन्दु है जिसमें मैं पूरी तरीके से पवित्र आत्मा पर आश्रित होता हूँ। यदि वह कार्य न करे तो या न मुड़े तो यह असफलता होगी। लेकिन मुझे कहना है कि वह उल्लेखनीय रूप से विश्वासयोग्य है। वरदानों का उपयोग करना एक पैर पर चलने के समान है। आपको जोखिम उठाना है, ऐसे लोग जो कभी जोखिम नहीं लेते हैं वे इस क्षेत्र में कुछ नहीं करते हैं। तो जो बात मैं रूत की सहायता से करना चाहता हूँ वह ऐसी बात है जो हम बहुत से स्थानों पर स्वाभाविक रूप से करते हैं। और आपमें से कुछ एक ने हमें यह करते हुए पहले भी देखा है, हम बीमार के लिये प्रार्थना करने जा रहे हैं। मैं एक विशेष वरदान का प्रयोग करने जा रहा हूँ जो परमेश्वर ने मुझे सन् 1970 में दिया था। इसलिये अब मुझे आत्मविश्वास के साथ इस वरदान के विषय में कहना है। मैं ने 15 वर्षों से इसका प्रयोग किया है और मैं ने देखा है। मैं कह सकता हूँ कि हजारों लोगों ने इसके द्वारा चंगाई पाई है। अब हम सबके लिये नहीं परन्तु चंगाई पानेवालों के लिये प्रार्थना करते हैं। परमेश्वर की एक निश्चित संप्रभुता होती है जिस पर हम हावी नहीं हो सकते हैं। यह वरदान कुछ विशेष प्रकार की शारीरिक समस्याओं के लिये विश्वास, अलौकिक विश्वास का वरदान है। सबसे पहले उन लोगों के लिये जो लंगड़े हैं, जिनके पैर असमान हैं और उससे चल रहे हैं, उन लोगों के लिये जिनकी पीठ में समस्याएँ हैं। यह एक तथ्य है। अधिकांश लोग जिनकी पीठ में समस्याएँ होती हैं उनके पैर असमान होते हैं। ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ना बहुत ही दुर्लभ होता है जिसकी पीठ में समस्या है और उसके पैर पूरी तरह समान हैं।

मुझे कहने दें कि मैं ने इस क्षेत्र में हाड़ों के साथ काम किया है और उन्होंने स्वीकार किया है कि यह काम करता है। इसलिये मैं आपको कुछ जंगली सिद्धान्त नहीं बता रहा हूँ - भले ही यह बहुत अजीब सा है। जब मैं ने पहली बार सार्वजनिक रूप से लोगों के पैर देखना शुरु किया तो मेरे कुछ एक प्रिय भाइयों ने सलाह दिया कि यह करना एक खतरनाक बात है। मैं ने एक विद्वान बाइबल शिक्षक के रूप में सम्मान प्राप्त किया था। लोगों के पास घूमना और उनके पाँवों की जाँच करना मेरे सम्मान को खत्म करनेवाली बात थी। खैर मैं बच गया। मैं सोचता हूँ कि परिणामों की वजह से, शायद? मैं चंगाई सभा में लोगों से कहता हूँ कि हमारी प्रेरणा उतनी ही व्यवहारिक है जितनी एक चिकित्सक या दँत चिकित्सक की होती है। हमारा उद्देश्य बीमार हो चंगा करना होता है। हमारे तरीके भिन्न होते हैं परन्तु हमारा उद्देश्य समान होते है। मैं हमेशा चिकित्सकों, दँत चिकित्सकों, परिचारकों और अन्य लोगों के लिये परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ। मैं आप से कहता हूँ कि इस संसार में इतने सारे बीमार लोग हैं कि यदि हम सब लोग एक सेना बन जाएँ तो हम सारी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते हैं। कभी कभी विशेष कर तीसरी दुनिया के देशों में और अन्य स्थानों में जहाँ मैं सभी बीमारों को देखता हूँ, शायद ही मैं यह देखना सहन कर सकता हूँ। मनुष्य की जरूरत और दुःख का विचार मुझे लगभग विह्वल कर देती है।

परन्तु जो हम कर सकते हैं वह हम करते हैं, हम केवल इतना ही कर सकते हैं। तो मैं इस वरदान का प्रयोग करना प्रारंभ करने जा रहा हूँ। मैं पीठ की समस्याग्रस्त लोगों की सेवा करने के द्वारा प्रारंभ करने जा रहा हूँ। अब जब से मैंने इसे प्रारंभ किया है मेरे पास ग्राहकों की कभी कमी नहीं रही है। मैं सोचता हूँ कि 50 प्रतिशत से अधिक अमेरीकियों को पीठ की समस्या है। इसके विषय में लाभ यह है कि सबसे पहले एक प्रारंभ के रूप में मेरे पास बहुत सारे ग्राहक हैं। दूसरा, परिणाम दृश्य होते हैं। आप समझे? लोग देखते हैं कि क्या हो रहा है। बीस वर्षों पूर्व अधिकांश मसीहियों ने कभी अपने जीवन में चमत्कार होते हुए नहीं देखा था। सौभाग्यवश बहुत बड़े परिवर्तन हो रहे हैं। परन्तु एक दृश्य आश्चर्यकर्म एक व्यक्ति के नजरिए को या एक सभा की सोच को पूरी तरीके से बदल सकता है। मैं आपको कहानी बताता हूँ। यह इतनी सच्ची और मजेदार है कि मुझे प्रतिज्ञा करना पड़ रहा है कि यह सच्ची है। कुछ वर्षों पूर्व अमेरिका के एक शहर में एक करिस्माई नहीं परन्तु इवांजलिकल मेथोडिस्ट कलीसिया में बोलने के लिये कहा गया। उन्होंने कहा कि 9-10 और 11-12 तक दो सभाएँ होंगी, हम चाहते हैं कि आप दोनों में बोलें। यह बहुत सुरक्षित था। इवांजलिकल की सीमा में बंधे हुए और हमें ऐसा ही रहना था। तब मैंने अपने आपको 10-11 के बीच में इन्तजार करते हुए पाया तो कुछ दयनीय लोग मेरे पास आए और मुझ से कहा, ‘‘क्या आप वयस्कों की बाइबल कक्षा में जाना चाहेंगे?’’ वास्तव में, मुझे लेश मात्र भी रुचि नहीं थी परन्तु मैं ने सोचा कि इधर-उधर घूमने से यह अच्छा है। मैं ने कहा, ‘‘ठीक है।’’ हाँ, तब मेरे बिना जानें उन्होंने दो या तीन कक्षाओं को एक साथ कर दिया और उन्होंने कहा, ‘‘क्या आप बोलना चाहेंगे?’’ ठीक है? उन्होंने मुझे चेतावनी नहीं दिया था। मैंने सोचा, मैं इन लोगों से क्या कहूँ...। मैंने अपने आप से कहा, मुझे कम से कम एक बार उन्हें बताना चाहिए कि कलीसिया में क्या हो रहा है। तो, मैंने उनसे करिस्माई आन्दोलन के बारे में वर्णन करने का प्रयास किया। ठीक है? उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दिया, यह उनके संदर्भ से बाहर की बात थी। मैंने सोचा, मैं कहीं नहीं पहुँच पा रहा हूँ।

तो, मैंने उन्हें पवित्र आत्मा के वरदानों के बारे में सिखाना प्रारंभ किया। खैर, यह उन लोगों के सामने चान्द के पिछले हिस्से का वर्णन करने के समान था जो हमेशा से ही पृथ्वी पर ही रहते आए हैं। मेरा मतलब है, इससे कुछ काम नहीं बना तो मैं रुक गया और सोचा, ‘‘यह समय की बरबादी है।’’ मैंने कहा, ‘‘क्या यहाँ कोई असमान पैरों वाला है?’’ और पीछे किसी ने अपना हाथ उठाया। मैंने कहा, ‘‘क्या आप चाहते हैं कि आपके लिये प्रार्थना की जाए?’’ उसने हाँ कहा। मैंने कहा, ‘‘सामने एक कुर्सी डालिए और आइए और कुर्सी पर बैठिए।’’ मैंने उसे बैठा दिया, उसके पाँव को नापा। जितने लोग पास में थे वे अन्तर देख सकते थे। उसका छोटा पैर बढ़ गए और मैंने कहा, ‘‘अब यह देखो।’’

खैर, जिस क्षण यह हुआ तुरन्त ही लोगों का रवैया पूरी तरह बदल गया। तो, हर कोई चाहता था कि उनके लिये प्रार्थना की जाएँ मैं लोगों के हाथ और घुटनों को नापते और उनके लिये प्रार्थना करते हुए घूम रहा था। एक स्त्री जो अपने पैरों पर कम्बल डाले वहीं कहीं खड़ी थी, कहा, ‘‘मेरे लिये प्रार्थना करो।’’ तो मैं आगे बढ़ गया और उसके पैरों को थाम लिया। एक पाँव दूसरे से छोटा था। वह बढ़ गया। मैंने कहा, ‘‘यह देखो।’’ और अगले की ओर बढ़ गया। खैर, कुछ समय बाद मैंने देखा कि यह महिला बहुत उत्साहित हो रही है। उसने मुझ से कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि आपको पता है कि आप ने क्या किया है।’’ मैंने कहा, ‘‘यदि मुझे नहीं मालूम तो मुझे बताओ।’’ उसने कहा, ‘‘जब मैं यहाँ आई तो मुझे एम.एस. था अर्थात् मल्टीपुल स्क्लेरोसिस।’’ उसने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि मुझे अब यह है।’’ ‘‘ठीक है।’’ मैंने कहा, ‘‘यदि आपको नहीं लगता कि आपको नहीं है तो चलो देखते हैं।’’ अतः मैं सबके सामने उसे कुर्सी से बाहर कर दिया और सब के सामने घुटनों को मोड़ने के लिये कहा। वह पूरी रीति से मजबूत थी।

अब, मुझे नहीं लगता है कि उसे एम.एस. था। मैं सोचता हूँ कि यदि मुझे होता तो मैं शायद ही परमेश्वर का मार्ग अपनाता। आप समझे? क्योंकि मैं अपने विचार अपनाना का प्रयास करता। जो मेरे पास था उसे मैंने अभी अभी मुक्त किया था और उसने उसे ले लिया था।

खैर, कहानी का अन्त यह है। कक्षा के अन्त में उसने तब तक इन्तजार किया जब तक सब चले नहीं गए। तब उसने संकोचपूर्वक कहा, ‘‘आपको मालूम है मिस्टर प्रिन्स, मैं एक रोमन कैथलिक हूँ। मैं पहली बार किसी प्रोटेस्टेन्ट कलीसिया में आई हूँ। मुझे नहीं मालूम था कि वे ऐसे होते हैं।’’

(टेप का दूसरा पक्ष — ऐसा लगता है कि कुछ छूट गया है।) ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई

फुला हुआ है। मेरा मतलब है, वे आसानी से उत्साहित नहीं होते हैं और मैं सचमुच कठिन परिश्रम कर रहा था। मेरा मतलब है, मेरा पसीना बह रहा था और बहुत कुछ नहीं हो रहा था। तब मैंने एक पंक्ति में तीन लोगों के लिये प्रार्थना की और वे सभी चंगे हो गए। तो, मजाक में मैंने कहा, ‘‘अवश्य ही वे कैथलिक होंगे।’’ रोचक बात यह है कि वे सभी कैथलिक थे! खैर, यदि आप पेन्टीकोस्टल लोगों को जानते हैं तो मेरा मतलब है, आप विश्वास नहीं कर सकते कि कैथलिक लोगों को वह मिलता है जो पेन्टीकोस्टल लोगों को नहीं मिलता है।

अब, हम इस प्रकार से उसे करने जा रहे हैं। फेन्यू? मुझे लगता है कि तुम मेरी सहायता करने जा रहे हो। क्या तुम आओगे और इन कुर्सियों को थोड़ा आगे बढ़ाओगे? और रूत क्या तुम मेरी बाइबल, मेरी रूपरेखा लोगी? और क्या आप उसे वहाँ खसका दोगे? धन्यवाद। जितना आप उन्हें अलग कर सकते हैं, कीजिए। ठीक है? रूत, क्या आप आएँगी और यहाँ खड़ी होंगी? हाँ, यह ठीक है।

क्या आप पहले कभी मेरी किसी सभा में आए हैं? एक बार होनोलूलू में। मुझे मालूम है कि आपने कैसे कुर्सियों को बिछाया है! अब हम सब के लिये प्रार्थना नहीं कर पायेंगे, यह केवल प्रदर्शन मात्र है, यह केवल प्रारंभ करने के लिये है। यह इतिहास और धर्मविज्ञान के क्षेत्र से व्यक्तिगत अनुभव के क्षेत्र में वरदानों को लेकर आने के लिये है। यह हमारा उद्देश्य है। मुझे लगता है कि रूत को एक शब्द मिला है। तो, पहले हम उसे लेंगे।

(रूत:) ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई

मेरी धारणा यह है कि यहाँ कोई है जिसे सीने में दर्द होता रहा है। आप चिकित्सक के पास नहीं गए क्योंकि आपको भय था कि यह हृदय की दशा है। और यदि आप अपनी पहचान बताएँगे तो प्रभु अभी इस समय आपको छुएगा।

(डेरेक:) ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई

ऊपर आइए फेन्यू हमें एक पकड़नेवाले की आवश्यकता हो सकती है। परमेश्वर आपको आशीष दे कि आप सच में एक डॉक्टर हैं? पीएच.डी.... किस विषय में? व्यवस्थित धर्मविज्ञानी। आपका यहाँ होना अद्भुत।

(वक्ता:) ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई

मैं भयानक उन धर्मविज्ञानियों में से एक हूँ।

(डेरेक:) ← अनुवाद में अनुपस्थित; जोड़ी गई

यह ठीक है! खैर, यदि मैंने कुछ ऐसा कह दिया है जो मुझे कहना नहीं चाहिए था तो मुझे क्षमा कीजिए। मैं सच में यह करता हूँ क्योंकि बहुत से धर्मविज्ञानी परमेश्वर के लोगों के मार्ग में खड़े होते हैं और उन्हें जो मिलना चाहिए उसे प्राप्त करते रहते हैं। आपको यहाँ पाना अद्भुत है।

आप देखें? यदि परमेश्वर ने आपको बुलाया है तो इसका अर्थ यह है कि वह आप में रुचि लेता है। वह चाहता है कि आप चंगे हों। ठीक? तो हम यह करने जा रहे हैं कि आप पर अपने हाथ रखकर और आपके लिये प्रार्थना करेंगे, चाहे कुछ भी हो आप बस प्राप्त करें। यदि परमेश्वर आपको अपनी सामर्थ्य भर देता है तो अच्छी बात है। यदि कुछ भी दृश्य नहीं होता है, तब भी आपने पा लिया है। ठीक है?

‘‘पिता, यीशु के नाम में हम आपका धन्यवाद करते हैं कि आप हमारे भाई को स्पर्श करने जा रहे हैं। यीशु के नाम में धन्यवाद। आमीन।’’

भीतर की साँस लेना शुरु कीजिए। परमेश्वर की चंगा करनेवाली उपस्थिति को ग्रहण कीजिए। ये ठीक है। धन्यवाद प्रभु, पिता धन्यवाद। यीशु के नाम में। आमीन। अब उसका धन्यवाद करना प्रारंभ कीजिए। यह विश्वास की शुद्धत्तम अभिव्यक्ति है। कुछ गहरी साँस लीजिए। यह परमेश्वर की चंगा करनेवाली उपस्थिति है। ठीक। यीशु के नाम में सारी चिन्तायें दूर हों। आमीन।

मैं विश्वास करता हूँ कि प्रभु आपको बताना चाहता है कि उसने आपके लिये एक उज्वल भविष्य रखा है। वह आपके लिये एक नया द्वारा खोलने जा रहा है। यहाँ प्राप्त अनुभव से आप बहुतों के लिये एक मार्गदर्शक और शिक्षक बनने जा रहे हैं जो अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठे हैं। अतः, हिम्मती हों, साहस रखें, पीछे मत रहिए। जो कुछ परमेश्वर ने आपको दिखाया है उसे अनुग्रह पूर्वक और बुद्धिमानी पूर्वक बताईए और परमेश्वर उसका आदर करेगा और उसे चिन्हों के द्वारा दृढ़ करेगा। आमीन। प्रभु, आपका धन्यवाद।

आइए, परमेश्वर को स्तुति के बलिदान चढ़ाएँ।

अब मैं पीठ की समस्या से ग्रस्त लोगों को बुलाना चाहता हूँ। हमारे पास केवल चार बैठक हैं। ऊपर आने से पहले मैं चाहता हूँ कि आप अपने स्थानों पर खड़े हो जाएँ। यदि आप चाहते हैं कि पीठ की समस्या के लिये प्रार्थना की जाए तो मैं आपसे बात करना चाहता हूँ। मैं समस्या की प्रकृति जाँचना चाहता हूँ। यहाँ चमकीली गुलाबी ब्लाउज में यह स्त्री। आपकी समस्या की प्रकृति क्या है? चिकित्सकों ने इलाज़ किया? वैद्य नहीं। उन्होंने क्या पाया? तो आपको अपनी वास्तविक समस्या मालूम है, है न? यह तनाव है, अन्य बहुत से लोगों के समान। कृपया यहाँ आकर बैठिए।

यहाँ यह स्त्री। आपको रीड़ की हड्डी के जोड़ में दर्द है। ठीक है? ऊपर आईए। मैं जाँचना चाहता हूँ कि चिकित्सकीय रूप से लोगों की बीमारी पता की गई है, आप समझें? ताकि लोग यह न सोचें कि मैं इन समस्याओं का आविष्कार कर रहा हूँ।

आपकी समस्या क्या है? मैं वह समस्या जानता हूँ। ऊपर आइए और यहाँ बैठिए। संयोग से मैं रीढ़ की हड्डी में समस्याग्रस्त लोगों की सराहना करता हूँ, मैं यह कहना चाहता हूँ। क्योंकि मैंने पीठ के दर्द को इतना देखा है कि ऐसे लोगों की प्रशंसा करता हूँ जो इसके बारे में कुछ करते हैं।

दाढ़ीवाला वह सज्जन जिसने अपना हाथ मोड़ रखा है, आपकी समस्या क्या है? ठीक है? ऊपर आईए। आप समझे? आपकी समस्या का भाग यह है कि आप जुड़े हुए नहीं रहते हैं। देखें? स्पर्श करना एक बात है, जुड़े रहना और बात है। उस कुर्सी पर बैठ जाईए।

अब, कुछ क्षण के लिये बाकी लोग बैठ जाएँ। मैं चाहता हूँ कि आप प्रार्थना और आराधना के भाव में रहें। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी आँखें बन्द करें परन्तु केवल दर्शक बन कर न बैठें। जिन लोगों के लिये आप प्रार्थना कर रहे हैं उन लोगों के साथ शामिल होईए। ठीक है? इस स्त्री से प्रारंभ करें।

क्या मैं आपके पैर देख सकता हूँ? ठीक है। आपका दायाँ पैर थोड़ा सा छोटा है। क्या आप इसे देख सकते हैं? क्या आप उसे बढ़ते हुए महसूस कर सकते हैं? जो कुछ परमेश्वर ने आपके लिये रखा है उसे ले ले, पवित्र आत्मा के वश में हो। हाँ, ऐसे, तुम यहाँ हो, यह दर्द का दुष्टात्मा है। उसे बाहर जाने दो। यीशु के नाम से बाहर जाओ। ठीक है। यीशु के नाम से उसे बाहर जाने दें। उसे खाँसकर निकाल दें। तुम्हें जाना होगा, निकल जाओ। आमीन। प्रभु यीशु, धन्यवाद। प्रभु, हम इस जीवन पर से तनाव की शक्ति को तोड़ देते हैं, यीशु के नाम में। आमीन। हाँ, ठीक है, साँस छोड़िए, उसे जाने दो। आप सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं, आधा प्राप्त मत कीजिए। अपने शत्रु से घृणा कीजिए। उसने आपको काफी यातना दे दिया है। कहें, ‘‘शैतान, यीशु के नाम में मुझे छोड़।’’ क्या आप इन शैतानी बातों के साथ हर एक संपर्क छोड़ देंगे?

मैं सोचता हूँ कि यह अच्छा होता, यदि हमारे पास परामर्श देनेवाला एक स्टाफ होता - क्या यहाँ कोई ऐसा है जिसे छुटकारे का अनुभव है। ठीक है। ऊपर आइए। उस स्त्री के पास खड़े हो जाइए। बहुत सक्रिय मत होईए, उसके विश्वास को प्रोत्साहित कीजिए। पूर्ण मुक्ति पाने के लिये उसे प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इस स्थिति में हम पूरा समय एक व्यक्ति पर खर्च नहीं कर सकते हैं।

अब मुझे पुनः बताइ ए कि आपकी समस्या क्या थी। ठीक है। अब ध्यान से सुनिए। मैं ने आपके लिये एक विकल्प रखा है। क्या आप लम्बी होना चाहती हैं या छोटी? (लम्बी।) यह आसान है, दूसरा अधिक कठिन है। अपने पैर दिखाईए, अपने अंगूठे बाहर कीजिए। तुम एक सुन्दर व्यक्ति हो, तुम्हारा बायाँ पैर थोड़ा छोटा है। क्या आप उसे बढ़ते हुए देख सकते हैं? यह आप में परमेश्वर की सामर्थ्य का प्रमाण है। उसे हर उस क्षेत्र में प्राप्त कीजिए जहाँ आपको इसकी आवश्यकता है। प्रभु, आपका धन्यवाद।

मैंने आपको दो बातें नहीं बताई है जो मेरी रूपरेखा में थी। सबसे पहले, बहुत सामान्यतः जब हम चंगाई की सेवा करते हैं तो यह दुष्टात्माओं को प्रगट कर देता है। यीशु की सेवा में यह प्रायः होता था। यह आज होता है। हम ने ऐसा एक उदाहरण देखा है।

एक और बात जो मैं कहना चाहता हूँ यह है कि जब मैं पहली बार रूत से मिला तो उसकी डिस्क टूटी हुई थी और रीढ़ की हड्डी मुड़ी हुई थी। अब उसका डिस्क सही है और रीढ़ की हड्डी सीधी है। लोगों के साथ खड़े होने के लिये उसमें सच्चा विश्वास है।

अब आपकी समस्या क्या है? ठीक? आप एक बर्मा पहन रहे हैं? खैर, इस बात में आश्चर्य नहीं कि आप में समस्या है। क्या आप अपने पैरों में अन्तर देखते हैं? देखें, आपका बायाँ पैर एक इंच छोटा है। जब मैं आप से बात कर रहा हूँ तो क्या आप इसे बढ़ते हुए महसूस कर रहे हैं? सब कुछ ग्रहण कीजिए, हमारी चिन्ता मत कीजिए। आराम से सब ले लीजिए। प्रभु, आमीन। यीशु के नाम में हम उसे सारे दर्द से मुक्त करते हैं। आप ने बहुत कष्ट उठाया है, आपको अक्सर आश्चर्य हुआ है कि क्या परमेश्वर से आप से प्यार करता है। आप बहुत निराश रहे हैं। आज वह दिखा रहा है कि वह विश्वासयोग्य है, वह आप से प्यार करता है, वह आपकी चिन्ता करता है कि उसका प्रेम व्यक्तिगत है। यह सामान्य और सामूहिक नहीं है। प्रभु, धन्यवाद। आमीन। प्रभु यीशु, धन्यवाद। अपने आँखों को ऊपर उठाईए और उसकी प्रशंसा कीजिए। ठीक है? धन्यवाद के साथ सब कुछ प्राप्त कीजिए। प्रभु यीशु, धन्यवाद।

आईए, शान्ति से प्रभु की आराधना करें। प्रभु, धन्यवाद।

ठीक है। अब आप ऐसे व्यक्ति हैं जिसकी बनावट है, परन्तु आपके जूते में भी बनावट है, है न? ठीक है? क्या आपको सुनाई दे रहा है? रूत कहती है, ‘‘आप में दुर्बलता की आत्मा है।’’

मैं आप से कहूँगा, एक और आत्मा जिसका हम प्रायः सामना करते हैं वह है जिसे हम अपंगता की आत्मा कहते हैं, जो लोगों के शरीरों को मरोड़ देता है, उनकी रीढ़ को मोड़ देता है, उनके अंगों को असमान कर देता है। तो यदि हम इन बातों के विरुद्ध आते हैं तो यह मत सोचिए कि आप एक विशेष मामला हैं। यह बहुत सामान्य बात है।

ठीक है? मैं आपको संबन्धित करूँगा और देखूँगा कि क्या हो रहा है। मैं केवल इतना कर सकता हूँ। क्या आप जानते थे कि अब आपका पैर पूरी तरह बराबर हो गया है? क्या आप यह जानते हैं? परमेश्वर ने उसे चंगा किया है, देखें, इससे पहले कि मैं उसके पास जाऊँ प्रभु, धन्यवाद। आमीन। अब जो कुछ प्रभु ने आपके लिये रखा है उसे प्राप्त कीजिए। प्रभु, हर प्रकार की निराशा को हम यीशु के नाम में इन्कार करते हैं। मैं विश्वास करता हूँ कि इस समय परमेश्वर आप से बात कर रहा है, है न? मैं सोचता हूँ यदि आप अपने हाथ उठाएँ और उसकी आराधना करें, मैं आपके हाथों से पाने में बहुत विश्वास करता हूँ। आमीन। प्रभु, इन हाथों से परमेश्वर की चंगा करनेवाली अद्भुत सामर्थ्य को बहने दें और इन हाथों से होकर उसकी देह में, उसकी रीढ़ में, हर क्षेत्र में जहाँ उसे इसकी जरूरत है। यीशु के नाम में। प्रभु, आपका धन्यवाद। ठीक है? जो कुछ आ रहा है उसे ले लो। ठीक है? अब उसे ग्रहण कीजिए। वह अपंगता की आत्मा है, उसे बाहर निकालिए, उसे पकड़े मत रहिए, उसे जाने दो। यीशु के नाम से बाहर जा। आपको प्रार्थना करने की आवश्यकता नहीं है, उसे जाने दो। यह सही है, इसे बाहर जाने दो। यीशु के नाम से पूरी तरह बाहर। ठीक है? बाहर। उस से घृणा कीजिए। उसे बाहर की ओर खाँसिए। अपनी गले से उसे बाहर फेंकिए। ठीक है? शैतान तुम्हें जाना पड़ेगा, तू प्रगट कर दिया गया है। यीशु के नाम में।

अब परमेश्वर चाहता है कि इस सुबह आज प्रभु को अपना जीवन सौंप दें। इससे दूर मत जाईए और परमेश्वर की ओर पीठ मत फेरिए। अपना जीवन उसे सौंप दीजिए। वहाँ बैठ जाइए और गुप्त में उस से बात कीजिए।

अब समय और स्थान की कमी के कारण हम इन लोगों से पूछने जा रहे हैं कि क्या वे नीचे जाने के लिये यहाँ हैं? परन्तु अपना संबन्ध बनाकर रखिए, आप सब। परमेश्वर का धन्यवाद करते रहिए, कहिए, ‘‘परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आपकी अलौकिक सामर्थ्य मुझ में कार्य कर रही है। ठीक है? परमेश्वर आपको आशीष दे।

और यह स्त्री। मुझे लगता है कि आपको शायद और परामर्श की आवश्यकता है। परन्तु उन बातों के लिये परमेश्वर को धन्यवाद देना मत छोड़िए जो परमेश्वर ने आपके लिये किया है।

हमारे पास पाँच मिनट बाकी है। हम क्या करने जा रहे हैं? हम चार और लोगों के लिये प्रार्थना करेंगे और तब हम समाप्त करेंगे। पीठ की समस्या वाले लोगों के लिये प्रार्थना नहीं की गई है। जो चाहते हैं कि प्रार्थना की जाए, वे जल्दी से खड़े हो जाएँ।

फूलों वाले ब्लाउज़ में यह स्त्री, आपकी समस्या क्या है? जोर से बात कीजिए। ठीक है, ऊपर आईए।

वह एक अच्छे बालों वाला युवक है। वह निश्चय ही एक पुरुष है। ठीक है? आपकी समस्या क्या है? आइए। आपकी समस्या क्या है? हम आपका इन्तजार कर रहे हैं। ठीक है? एक और।

सफेद पट्टी वाले लाल कमीज़ में वह सज्जन। आइए, ठीक है? अब हम परमेश्वर की स्तुति करते रहेंगे। हमें अपनी आँखें बन्द करने की आवश्यकता नहीं है। हमें शामिल होने की आवश्यकता है, परन्तु आराधना करते रहिए।

आमीन। ठीक है? अब हम प्रयास करेंगे और समय समाप्त होने पर भी कुछ और करेंगे। हम कुछ जल्दी से करेंगे और देखेंगे कि क्या होता है।

हमें एक वाक्य में समस्या फिर से बताओ। (गठिया) सही है। अब, मैं गठिया को सामान्य रूप से एक दुष्ट आत्मा के रूप में मानता हूँ। इससे आपका अपमान नहीं होगा? इसका मतलब यह नहीं कि आप एक दुष्ट व्यक्ति हैं। इसका मतलब है कि शैतान आपको यातना दे रहा है। ठीक? तो अगर मैं उसे जाने के लिए कहूँ तो, आपको पता है आपका काम क्या है? उसे जाने दें। बिल्कुल! आपने यह कहा। वापस कुर्सी पर बैठें। अब हम आपको जोड़ने और देखने जा रहे हैं कि क्या हो रहा है। खैर, आपकी समस्याओं का एक कारण है कि आपका बायाँ पैर डेढ़ इंच छोटा है, क्या आप देख सकते हैं? इसे देखिये। इसे मत नीचे धक्का दो क्योंकि हमें यह एक प्राकृतिक स्थिति में मिला है। क्या आपको अब यह बढ़ता हुआ महसूस हो रहा है? क्या आप महसूस करते हैं? ठीक है, यह परमेश्वर की चिकित्सा गर्मी है। आमीन। ‘‘अब, हे प्रभु, हम उसे यीशु के नाम में गठिया की पीड़ा से मुक्त करते हैं। उसे जाने दें। तुम जाओ। यह सही है, इसे बाहर निकालो। तुम यीशु के नाम से बाहर जाओ। यह सही है। आप को इससे नफरत करना है, हम तेरे लिए ऐसा नहीं कर सकते। तुमको जाना है। अब आप उसे शुक्रिया अदा करना शुरू कर सकते हैं। सही है। आपको धन्यवाद, प्रभु। उसे बाहर निकालो। तुम हमारे साथ काम करना है क्योंकि अगर आप सहयोग नहीं करेंगे तो हम यह नहीं कर सकते। सही है। कभी अपनी गरिमा को मत देखिये, वह महत्वपूर्ण नहीं है। परमेश्वर से आपको माफ करने को कहें और इस बात को त्याग दें। कहें, ‘‘हे प्रभु, मुझे जन्मकुण्डली के साथ हर संपर्क माफ कर दीजिए। मैं यह सब यीशु के नाम में त्याग देता हूँ।’’ आप देखें आपने अपने आप को शैतान के दावा के लिए उजागर कर दिया है।

हर कोई जो अदृश्य में चला जाता है शैतान को उनके खिलाफ कानूनी दावा देता है। नहीं, ध्यान न दें। वह ठीक है। हम आपको दोष नहीं दे रहे हैं, हम बस समझा रहे हैं। बस उसे शुक्रिया अदा करना जारी रखें। सब दुख बाहर आने दें। सही है। उससे छुटकारा पायें। यह सही है, इसे जाने दें। आप दवा लेते रहे हैं? खैर, यह आंशिक रूप से दवा का परिणाम है। हे प्रभु, हम यीशु के नाम से इस जीवन पर से हर शैतानी पकड़ को तोड़ते हैं। यीशु के नाम में।

भाई, बेहतर है कि हम आपसे उसके साथ रहने के लिए कहें और बाहर आने के लिए और अधिक है। देखें? लेकिन समय सीमा के कारण हमें बस दुष्टात्माओं के प्रति दयालु नहीं होना चाहिए।

अब, यह बहुत महत्वपूर्ण है। लगता है, हम कभी कभी बहुत गुस्सा हो जाते हैं। हम उस व्यक्ति से नाराज नहीं हैं हम दुष्टात्मा से नाराज हैं। शैतान से नफरत करना कोई पाप नहीं है। वास्तव में, शैतान से नफरत नहीं करना पाप है।

अब, आपको है? कितना समय पहले आपके साथ एक दुर्घटना हुई थी? क्या आपने कभी परमेश्वर आप से अपने जीवन पर श्राप हटाने के लिये कहा है? अपने जीवन से। खैर, एक कारण जिसके लिये यीशु ने मृत्यु सही, यह थी कि वह श्राप बना ताकि हम श्राप से छुड़ाये जायें। मुझे लगता है कि आप की परिवार की पृष्ठभूमि से एक श्राप है जो आपका पीछा कर रहा है। क्या आप यह स्वीकार कर सकते है? अब, कहिये, ‘‘प्रभु यीशु, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आप क्रूस पर एक अभिशाप बने, ताकि मैं शाप से मुक्त हो सकूँ और आशीर्वाद प्राप्त करें। मैं श्राप त्यागता हूँ और मैं अब यीशु के नाम में आशीर्वाद के वारिस बनता हूँ।’’ देखो, मुझे नहीं लगता कि इसे सुलझाये बिना आप चंगा किये जा सकते हैं। अब हम आपको प्रवेश देंगे।

आपको बायाँ पैर डेढ़ इंच कम है। जबकि मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो क्या आप उसे बढ़ते हुए महसूस कर सकते हैं? बिलकुल ठीक। अब आप उसे शुक्रिया अदा करना प्रारंभ करें। आप को ढीला छोड़ना है, ठीक है। आपने कुछ पकड़ रखा है। यह ठीक है, धन्यवाद प्रभु। मुझे अपने हाथ दीजिये। यह ठीक है। अब कुछ हो रहा है। प्रभु, आपको धन्यवाद।

मैं एक ही समय में सेवा करने और सिखाने की कोशिश कर रहा हूँ। आपको मालूम है? कि ज्यादातर लोग जो चंगा नहीं हुए, उनके और उनके उपचार के बीच एक बाधा है। यह एक दुष्टात्मा हो सकती है, यह एक अभिशाप हो सकता है, यह असंतोष हो सकता है। और लोगों की सेवा करने के आपको बाधा देर करना है। यही वह स्थान है जहाँ ज्ञान या परख का वचन होना उपयोगी होता है, आपने समझा? मैं वहाँ बाहर खड़े लोगों के बारे में ज्ञान का शब्द नहीं पाता लेकिन जब मैं लोगों से बात करना शुरू करता हूँ तो परमेश्वर मुझे दिखाता है कि मुझे उनसे क्या कहना है।

ठीक। आपकी एक घुमावदार रीढ़ है? आप कहाँ से हैं? आपके पैर बराबर हैं। क्या आपको लगता है कि जब से आप यहाँ हैं, प्रभु ने आपको चंगा किया है? घुमावदार रीढ़ वाले लोगों में समान पैर होना दुर्लभ है। हे प्रभु, हम उसे किसी भी लंगड़ाने वाली आत्मा से यीशु के नाम से मुक्त करते हैं। आमीन। हम आगे बढ़ने जा रहे है। सिर्फ वहाँ बैठें और प्रभु का धन्यवाद करें। ठीक है?

आपकी समस्या, मैं भूल गया, अब? ठीक। अपने पैर दिखायें। आपका बायाँ पैर लगभग एक इंच छोटा है? आप अंतर देख सकते हैं? आपको यह बढ़ता महसूस हो रहा है? अब आप जुड़ गये हैं, उसे शुक्रिया अदा करना प्रारंभ करें। आमीन। आपको धन्यवाद, प्रभु।

अब, समय खत्म हो गया है, लेकिन मैं एक बात सिर्फ आपकी मदद करने के लिए करने जा रहा हूँ। आप समझते हैं, कि इस का पूरा उद्देश्य सिर्फ यह है कि लोग विश्वास करें और परमेश्वर को प्रतिक्रिया दें। बस। दर्जनों अलग अलग तरीके है जिनसे आप यह कर सकते हैं। यदि आप इस तरह की सेवा करने जा रहे हैं तो आपको जरूरत है कि परमेश्वर आपको दिखाये कि आपको किस रीति से काम करना है।

परन्तु, चूँकि आप लोग यहाँ बहुत हैं जो परमेश्वर से एक स्पर्श पाना चाहते हैं। मैं आपको सलाह देना चाहता हूँ कि हम कुछ करेंगे। आप में से कुछ इसे कुछ अजीब सा पाएँगे। कोई बात नहीं, यहाँ मुझे विश्वास है कि जिन लोगों के पास असमान पैर हैं उनके पैर बराबर होंगे। मैं यह करना चाहता हूँ और यह कठिन होने जा रहा है क्योंकि यह एक अन्तराल का प्रश्न है। यह कुछ ऐसा है जो आपको करना है। मैं चाहता हूँ कि आप अपने कुर्सी पर बैठ जाएँ। अपना पैर सीधा करें। टेप समाप्त होता है।

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