आज सुबह हमारी घोषणा 1 थिस्सलुनीकियों 5:23, 24 से ली गई है। हमेशा की तरह हम उसे व्यक्तिगत बनाएँगे जहाँ पौलुस 'तुम' कहता है, हम 'हम' कहते हैं। अब यह विशेष रूप से उचित है, क्योंकि हम प्रभु के आगमन के विषय में संबन्धित घटनाओं पर विचार करने जा रहे हैं और ये बाइबल संदर्भ विशिष्ट रूप से उसके आगमन के लिये हमारी तैयारी के बारे में बताते हैं।

शान्ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह, हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे-पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। तुम्हारे बुलानेवाला सच्चा है और वह ऐसा ही करेगा।

अब मैं सोचता हूं कि यह अच्छा होगा कि आप सब इसे दोहराएँ, इसे अपनी स्वयं की विशेष प्रार्थना और घोषणा बनाएँ।

शान्ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह, हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे-पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें। तुम्हारे बुलानेवाला सच्चा है और वह ऐसा ही करेगा।

आमीन।

अब, हम महान मूलभूत सिद्धान्तों में से अन्तिम दो पर आ गए हैं। मृतकों का पुनरुत्थान और अनन्त न्याय। इस वर्तमान सत्र में मैं मृतकों के पुनरुत्थान पर बात करूंगा और तब अगले सत्र में मैं अनन्त न्याय पर बात करूंगा।

हमें पुनरुत्थान शब्द के अर्थ को समझने की आवश्यकता है। यूनानी शब्द जिसका अनुवाद किया गया है, का अर्थ है 'बाहर निकल कर खड़ा होना'। अतः, पुनरुत्थान मृत्यु से बाहर और कब्र से बाहर निकलना है। अभी अभी हमने धर्मशास्त्र के पद में देखा, कि मनुष्य तीन तत्वों से बना है। आत्मा, प्राण और देह। यह समझना महत्वपूर्ण है कि मरनेवाला तो देह है और जी उठनेवाला भी देह ही है। आत्मा और प्राण को कभी भी जी उठने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे कभी भी मरते नहीं हैं। अतः, हम देह के पुनरुत्थान के बारे में बात कर रहे हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है।

अब मैं आज सुबह थोड़ा बहुत यह बताना चाहता हूं, कि बाइबल इस बारे में क्या बताती है कि मरने के बाद लोगों के साथ क्या होता है। मैं जानता हूं कि यह वैश्विक रुचि का विषय है। इस बात से सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आपकी राष्ट्रीयता या संस्कृति क्या है। हर कोई यह जानने के लिये इच्छुक है कि मृत्यु के बाद क्या होता है। बाइबल एक बहुत ही स्पष्ट चित्रण देती है, और मैं इस चित्र की रूपरेखा खींचने का प्रयास करता हूं और तब दर्शाता हूं कि ये पुनरुत्थान को कैसे प्रभावित करेगा।

लूका 16:22-26 में यीशु हमें बताता है कि क्या होता है। मैं यह बताना चाहता हूं कि यह कभी भी एक दृष्टान्त नहीं कहा गया है, क्योंकि इसके संबन्ध में दृष्टान्त शब्द का उपयोग नहीं किया गया है। हम लूका 16:19 पद से आगे पढ़ेंगे:

[अनुवाद में अनुपस्थित — लूका 16:19-31 का पूरा उद्धरण (धनवान मनुष्य और लाजर)। अंग्रेजी में यह एक लंबा अनुच्छेद है।]

और अनुभव में यह कितना सच्चा साबित हुआ है। जब यीशु मृतकों में से जी उठा, वे जो मूसा और भविष्यद्वक्ताओं पर विश्वास नहीं रखते थे उन्होंने नहीं पहिचाना कि क्या हुआ था। यह बहुत ही गंभीर विचार है। कभी कभी हम जबरदस्त अलौकिक दर्शन की अपेक्षा करते हैं और कहते हैं कि यदि ऐसा होता तो हम कायल होंगे। परन्तु परमेश्वर कहता है, "तेरे पास मेरे वचन है, तुम्हें केवल इसी की आवश्यकता है। यदि तुम उस पर विश्वास करो और उसे मानो, तो वह तुम्हें लिये चलेगा।"

अब मैं कुछ विशिष्टताओं पर बात करना चाहता हूं जो उस धनवान मनुष्य और लाजर की कहानी के द्वारा सूचित किया गया है। इसमें पांच बातें हैं।

सबसे पहले, मृत्यु के पश्चात् व्यक्तित्व की दृढ़ता थी। धनी व्यक्ति अब भी धनी व्यक्ति था और लाजर अब भी लाजर था। दोनों में से किसी ने भी अपनी पहचान नहीं खोया। अब कुछ लोग हमें सिखाते हैं कि मृत्यु के पश्चात् सब कुछ धुंधला पड़ जाता है और कुछ भी शेष नहीं रहता। यह धर्मशास्त्र सम्मत नहीं है। हम जैसे इस जीवन में थे, वही व्यक्तित्व मृत्यु के पश्चात् भी बना रहता है।

दूसरी बात, इसमें व्यक्तियों की पहचान थी। धनी व्यक्ति ने लाजर को पहचाना और उसने अब्राहम को पहचाना और लाजर ने धनी व्यक्ति को पहिचाना।

तीसरी बात, पृथ्वी पर के जीवन की यादें शेष थीं। धनी व्यक्ति और लाजर दोनों ही अपनी मृत्यु से पूर्व की परिस्थितियों को याद कर सकते थे।

चौथी बात, वे अपनी वर्तमान स्थिति के विषय में जानते थे। धनी व्यक्ति यातना में था, उसकी जीभ आग से जल रही थी, लाजर अब्राहम की गोद में शान्ति और सुकून से था।

और पांचवीं बात, धार्मिक और अधार्मिक के बीच में संपूर्ण अलगाव था। दोनों के लिये एक नियुक्त स्थान था और दोनों एक दूसरे के पास नहीं जा सकते थे।

अब आईए, मैं फिर से ये पांच बातें कहता हूं क्योंकि वे बहुत ही महत्वपूर्ण हैं और वे बहुत सारे सिद्धान्तों का विरोध करते हैं जो इन दिनों सिखाये जा रहे हैं।

नम्बर एक, मृत्यु के पश्चात् व्यक्तित्व की दृढ़ता थी।

नम्बर दो, इसमें व्यक्तियों की पहचान थी।

नम्बर तीन, पृथ्वी पर की जीवन की यादें शेष थीं।

नम्बर चार, वे अपनी वर्तमान स्थिति के विषय में जानते थे।

और नम्बर पांच, धार्मिक और अधार्मिक के बीच में संपूर्ण अलगाव था।

अब, उन लोगों का क्या हुआ जो यीशु की मृत्यु और मृतकों में से पुनरुत्थान से पहले मर गए थे? चूंकि उस घटना ने मानवीय इतिहास को दो भागों में विभाजित कर दिया था और यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान से पूर्व और बाद में प्राणों की नियति समान नहीं है। यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान से वास्तव में संपूर्ण संसार में एक परिवर्तन हुआ। यह संसार के इतिहास की सबसे निर्णायक घटना थी और इसने उन घटनाओं को भी प्रभावित किया जो मृतकों के साथ हुआ था।

अब आईए, देखें कि यीशु की मृत्यु से पहले क्या हुआ था। हमने इस धनी व्यक्ति और लाजर की कहानी में पहले ही देख लिया है कि सभी मृतकों की आत्माएं एक स्थान में जाते हैं जिसे इब्रानी भाषा में 'शिओल' कहा जाता है और यूनानी भाषा में 'हेड्स' कहा जाता है। यूनानी शब्द हेड्स का अर्थ है अनदेखा संसार। इसलिये सभी चाहे धार्मिक हों या अधार्मिक सभी इस अनदेखे क्षेत्र में पहुंचते हैं जिसे हेड्स या शिओल कहा जाता है। यह मरनेवालों की आत्माओं का स्थान था, परन्तु धर्मी और अधर्मी लोगों के लिये पूरी तरह अलग-अलग दो क्षेत्र थे। और ध्यान दें कि हर कोई या तो धर्मी था या अधर्मी, जैसा कि मैं कल कह रहा था इसके बीच का कोई स्तर नहीं था। आप आधा धार्मिक और आधा अधार्मिक नहीं हो सकते हैं। आपको दोनों में से एक स्थान में पहुंचना ही है।

धर्मी लोगों का स्थान अब्राहम की गोद कहलाता है, अर्थात मैं विश्वास करता हूं कि अब्राहम जो सभी विश्वासियों का पिता है, ने वहां उनका स्वागत किया और उन्हें शान्ति दी। मैं यही समझता हूं।

जब यीशु की मृत्यु हुई तब यीशु के साथ क्या हुआ? यीशु एक सिद्ध मनुष्य था, उसके पास भी आत्मा, प्राण और देह था और यीशु के व्यक्तित्व के इन तत्वों में से हर एक के बारे में भिन्न कथन कहा गया है। लूका 23:45 में हम पाते हैं कि जब यीशु मरा तब उसकी आत्मा के साथ क्या हुआ? लूका 23:45। वचन कहता है:

तब यीशु ने ऊंचे शब्द से पुकार कर कहा,...

और मैं विश्वास करता हूं, जो उसने पुकारा वह था, "मैं प्यासा हूं"।

उसने कहा, "हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं" और यह कह कर प्राण छोड़ (वह मर गया) दिया।

अतः, उसकी आत्मा पिता के पास गई। कुछ ऐसी बातें हैं जिनकी व्याख्या मैं नहीं कर सकता हूं। मैं यह वक्तव्य दे सकता हूं क्योंकि ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां मैं आपको और अधिक व्याख्या नहीं दे सकता हूं।

यीशु के प्राण का क्या हुआ? प्रेरितों 2 अध्याय में पिन्तेकुस्त के दिन बात करते हुए पतरस ने यीशु के अनुभव को बताते हुए भजनसंहिता 16 का उल्लेख किया, न कि भजनकार दाऊद के अनुभव का। तब वह कहता है, भजन 16 में दाऊद ने यीशु के बारे में ये बातें कहीं।

मैंने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है, इसलिये वह मेरे दाहीने हाथ रहता है, मैं कभी न डगमगाऊंगा। इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा।

अतः, यीशु का प्राण मरनेवालों की आत्माओं के रहनेवालों के स्थान पर गया। 1 पतरस 3:18-19 में भी यह बताया गया है।

इसलिये कि मसीह ने भी अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए। वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया। उसी में उसने जाकर कैदी आत्माओं को भी प्रचार किया। जिन्होंने उस बीते समय आज्ञा न मानी जब परमेश्वर नूह के दिनों में धीरज धर कर ठहरा रहा।

तो यीशु अधोलोक में उतर गया और इसका विवरण पाया जाता है जिसकी व्याख्या मैं नहीं करूंगा, परन्तु मैं आपको बता सकता हूं कि बाइबल क्या कहती है। उसने एक 'घोषणा' की। यह अनुवाद कहता है कि उसने प्रचार किया परन्तु यह शब्द 'घोषणा' है। इसका यह अर्थ आवश्यक नहीं है कि उसने सुसमाचार का प्रचार किया परन्तु उसने एक 'घोषणा' की। मेरा अनुमान यह है कि उसने कहा, कि "अब से लेकर मैं इस स्थान का शासक हूं। मेरे पास मृत्यु और अधोलोक की कुन्जियां हैं और अब से लेकर सारी बातों के लिये तुम मेरे प्रति उत्तरदायी होगे।" यह केवल मेरा विचार है, हो सकता है यह सही न हो।

अब इस बीच यीशु की देह कब्र में पड़ा रहा। यूहन्ना 19:40 और आगे के पदों में हम पढ़ते हैं कि क्रूस की मृत्यु के समय उसके साथ क्या हुआ। यूहन्ना 19:40 और 42:

तब उन्होंने यीशु की लोथ को लिया और यहूदियों की गाड़ने की रीति के अनुसार उसे सुगन्ध द्रव्य के साथ कफन में लपेटा।

वे कपड़े की पट्टियों में देह को लपेटते थे, लेकिन वे अत्यधिक मात्रा में सुगन्ध द्रव्य लगाते थे, क्योंकि यह अपेक्षा की जाती थी कि शरीर विघटित हो और दुर्गन्ध आने लगे।

अब उस स्थान पर जहां यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था एक बारी थी और उस बारी में एक नई कब्र थी जिसमें कभी कोई रखा न गया था उन्होंने यीशु को उसी में रखा।

हमें इस पर और आगे जाने की आवश्यकता नहीं है।

हम यह भी पढ़ते हैं कि किस प्रकार से यीशु के पुनरुत्थान के पश्चात् प्रेरितों और स्त्रियां कब्र पर गईं। वे सभी जानते थे कि उसकी देह को कहां दफनाया गया परन्तु उन्होंने उसे वहां नहीं पाया। परमेश्वर की स्तुति हो।

तो, यीशु के संपूर्ण व्यक्तित्व का क्या हुआ? उसने अपनी आत्मा को पिता के हाथों में सौंपा। उसका प्राण अधोलोक में गया और वहां उसने एक घोषणा की और संभवतः बहुत सी अन्य बातें भी कीं और उसकी देह कब्र में पड़ी रही। परन्तु जब वह जी उठा तो उसका संपूर्ण व्यक्तित्व पुनः एक हो गया। वह एक पूर्ण मनुष्य था: आत्मा, प्राण और देह।

अब, यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा संसार किस प्रकार प्रभावित हुआ? इसने मृत्यु पर प्राणों की मंजिल निर्धारित की। तब से लेकर यीशु के पुनरुत्थान से धर्मियों की मंजिल अधोलोक में जाना नहीं है - उसकी मंजिल भिन्न और इससे कहीं अधिक महिमावान है। मैं आपको दो उदाहरण बताता हूं। जब लोगों ने स्तिफनुस को पत्थरवाह किया और प्रेरितों 7:57 और आगे के भागों में जब वह मृत्यु के करीब था:

तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्द कर लिये और एक चित्त होकर उस पर झपटे और उसे नगर के बाहर निकाल कर पत्थरवाह करने लगे और गवाहों ने अपने कपड़े उतार रखे और वे स्तिफनुस को पत्थरवाह करते रहे और वह यह कह कर प्रार्थना करता रहा, कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।

वह जानता था कि उसकी आत्मा को सीधे यीशु के पास जाना है। यही वह परिवर्तन है जो यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण हुआ।

फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।

और चूंकि स्तिफनुस ने ऐसी प्रार्थना की थी इसलिये तरसुस का शाऊल बचाया गया। यदि स्तिफनुस उसे उसके दोष से मुक्त नहीं करता, तो वह कभी भी बचाया नहीं जा सकता था। यह एक अद्भुत विचार है।

परन्तु मैं इस बात को जारी देना चाहता हूं कि सच्चे विश्वासी के लिये जो यीशु के लहू में शुद्ध किया गया है और परमेश्वर के लिये विश्वासयोग्यता से जीता है मृत्यु पर मंजिल यह है कि आत्मा सीधे यीशु के पास चली जाती है। फिलिप्पियों 1 में पौलुस भी उस बारे में कहता है। वह कहता है, कि उसे नहीं मालूम कि किसका चुनाव करूं। क्या वह जीवित रहे और जाकर यीशु के साथ रहे? फिलिप्पियों 1:23 में पौलुस कहता है:

क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं। जी तो चाहता है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूं क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है, परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है।

तो पौलुस पूरी तरह दृढ़ था कि यदि वह उस समय मर जाता तो वह मसीह के साथ होता। यह यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान से प्रभावित होनेवाले महान परिवर्तनों में से एक है।

एक और बात जो हुई यह है कि कुछ और भी बातें हैं जिन्हें मैं आपको बता सकता हूं, लेकिन मैं सारा विवरण नहीं दे सकता हूं क्योंकि मैं उन्हें नहीं जानता, कि उसने अब्राहम की गोद से सभी धर्मियों के प्राणों को भेज दिया है। इफिसियों 4 अध्याय में आईए इसे देखें। यह भजन 68 से लिया गया पद है और यह यीशु के पुनरुत्थान के बारे में बात कर रहा है।

क्योंकि वह कहता है कि वह ऊंचे पर चढ़ा और बन्धुवाई को बांध ले गया और मनुष्यों को दान दिये।

अब मेरी समझ, और बाइबल के बहुत से टीकाकारों की समझ यह है कि "वह बन्धुवाई को बान्ध ले गया" का अर्थ यह है कि उसने मरे हुए धर्मियों के प्राणों को मुक्त किया और अपने साथ उन्हें स्वर्ग ले गया। देखें, वे तब तक मुक्त नहीं किये जा सकते थे जब तक वास्तव में पाप का दाम न चुका दिया जाए। परमेश्वर ने उन्हें धर्मी के रूप में ग्रहण किया क्योंकि उन्होंने एक ऐसे बलिदान पर अपना विश्वास रखा था जो अब तक हुआ नहीं था। वे उस प्रतिज्ञात बलिदान की ओर देख रहे थे, परन्तु जब तक वास्तव में बलिदान नहीं किया गया, यीशु क्रूस पर बलिदान नहीं हुआ, वे मुक्त नहीं किये जा सकते थे। परन्तु अपने बलिदान के पश्चात् वह अधोलोक में उतर गया और उन्हें अपने साथ ले गया। मैं ऐसा विश्वास करता हूं। वे मृत्यु के बन्धुए थे परन्तु वे बन्धुवाई को बान्ध ले गया। वे यीशु के और धार्मिकता के बन्धुए बने जो कि मेरे लिये उत्साहजनक है।

अब अगली बात जो बहुत ही महत्वपूर्ण है वह यह है कि यीशु का पुनरुत्थान हमारे पुनरुत्थान का बयाना है: अर्थात् यदि हम यीशु के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। कुलुस्सियों 1:18 में पुनः यीशु के पुनरुत्थान के बारे में बात करते हुए पौलुस कहता हैः

और वही (यीशु) कलीसिया का सिर है।

अतः यीशु सिर है, हम विश्वासी देह हैं। वह आदि भी है।

और मरे हुओं में से जी उठनेवालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान (प्रथम स्थान) ठहरे।

तो, वह मृतकों में पहिलौठा है, वह संपूर्ण नई सृष्टि का सिर है। वह नए वंश का सिर है, परमेश्वर/मनुष्य का वंश जिसमें परमेश्वर और मनुष्य का स्वभाव एक व्यक्ति में समाहित है।

वह देह का सिर है। वह मृतकों में से पहिलौठा है और पुनरुत्थान की तुलना मृत्यु से जन्म लेने से की गई है और यह एक बहुत ही सुन्दर चित्रण है। स्वाभाविक जन्म में प्रायः शरीर का कौन सा हिस्सा पहले बाहर आता है। सिर, हां सही है और जब सिर बाहर आता है तो आप क्या जानते हैं? आप जानते हैं कि शरीर का शेष हिस्सा आने वाला है और इस प्रकार यीशु का पुनरुत्थान इस बात का बयाना है कि उसकी देह पुनरुत्थान में उसके पीछे-पीछे आएगी।

अब अपनी देह में यीशु का पुनरुत्थान हमारे लिये एक रीति है। मैं आशा करता हूं कि आप इस विषय में उत्साहित हैं। यदि आप नहीं हैं, तो मैं सच में आपको समझा नहीं पा रहा हूं। आप देखें फिलिप्पियों 3:20-21 में पौलुस कहता है:

हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है....।

अर्थात् हममें से जिन्होंने नया जन्म पाया है, यीशु के लिये जीने हेतु समर्पित हैं। हम पृथ्वी पर जीते हैं, हम यहां पृथ्वी पर एक देश के नागरिक हैं, परन्तु हमारी वास्तविक नागरिकता स्वर्ग में है। यदि आप एक देश के नागरिक हैं, तो आपके पास एक पासपोर्ट होना है। क्या आप ये जानते थे? तो हमारे पास एक पासपोर्ट है, यह यीशु का लहू है।

पर हमारा स्वदेश स्वर्ग पर है और हम उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने की बाट जोह रहे हैं।

ध्यान दें कि एक सच्चे मसीही का चिन्ह यह है कि हम उत्सुकतापूर्वक उद्धारकर्ता की बाट जोह रहे हैं। और तब वह कहता है:

वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिसके द्वारा वह सब वस्तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन हीन देह का रूप बदल कर अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।

अब यही अनुवाद है, परन्तु यह अक्षरशः नहीं है। यदि मैं आपको एक शाब्दिक अनुवाद दूं तो यह बहुत विशिष्ट होता है।

वह हमारी दीन हीन देह को रूपान्तरित करेगा कि वह उसकी महिमा की देह के अनुरूप बन जाए।

देखिए, हो सकता है आप उसे न समझें, परन्तु मैं और आप एक दीन हीन देह में रहते हैं। पाप के कारण हम दीन हीन हो गए हैं और मैं यह बताता हूं कि हम चाहे कितने भी धनी या स्वस्थ हों, जिस देह में हम रहते हैं, उसमें कुछ ऐसी बातें हैं जो हमें लगातार स्मरण दिलाती हैं कि हम पापी हैं। हो सकता है आप सबसे लजीज़ भोजन करते हों और हर प्रकार का दाखरस पीते हों, परन्तु जल्द या बाद में, और सामान्यतः जल्द ही आपको शौचालय जाना पड़ेगा और अपनी अंतड़ियों और ब्लाडर को खाली करना पड़ेगा। आप चाहे कितने भी धनी हों, कितने भी सम्मानित हों, जीवन में आपका स्थान कितना भी ऊंचा हो, यह एक दीन-हीन देह है। हो सकता है आप सबसे बढ़िया कपड़ा पहनते हों, लेकिन जब आप थोड़ा बहुत सक्रिय हो जाते हैं और कुछ उत्साहजनक करते हैं तो आप जानते हैं क्या होता है? आप पसीना बहाते हैं। यह दीन-हीन देह है। आप देखें, परमेश्वर ने ठहराया है कि हममें से प्रत्येक लगातार अपनी देह के द्वारा याद दिलाया जाए कि हम पाप के कारण दीन-हीन दशा में हैं। परन्तु यीशु हमारी दीन-हीन देह को बदल कर अपनी महिमामय देह के स्वरूप में करनेवाला है। क्या यह उत्साहजनक नहीं है? यह देह बदलने वाला है। हम कुछ देर बाद परिवर्तन के कुछेक विवरणों को देखेंगे।

परन्तु मैं आपका ध्यान इससे संबन्धित एक तथ्य की ओर केंद्रित करना चाहता हूं। 1 यूहन्ना 3:2-3 में यूहन्ना कहता हैः

प्रियो, हम अब परमेश्वर की सन्तान हैं, परन्तु अभी तक यह प्रकट नहीं हुआ कि हम क्या होंगे।

दूसरे शब्दों में, हमने अभी तक यह नहीं जाना है कि हम किस प्रकार की देह को धारण करेंगे।

परन्तु हम यह जानते हैं कि जब वह प्रकट होगा तो हम उसके सदृश हो जाएंगे, क्योंकि जैसे वह है हम उसे वैसे ही देखेंगे।

जब वह प्रकट होगा और हम उसे देखेंगे हमारी देह उसकी देह के समान बदल जाएगी।

परन्तु मैं चाहता हूं कि आप अगले पद पर ध्यान दें क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण है।

और प्रत्येक जो उसमें यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसे ही पवित्र करता है, जैसे वह पवित्र है।

अब आप मुझे बताइए, क्या आप पुनरुत्थान पर आशा रख रहे हैं और मैं इस पर (आपसे) तर्क-वितर्क, बहस नहीं करना चाहता हूं। परन्तु यदि आप सचमुच आशा रख रहे हैं तो आप कुछ कर रहे हैं, आप अपने आपको पवित्र कर रहे हैं। पवित्रता का क्या स्तर है? यीशु। जैसे वह पवित्र है। यदि आप मुझसे कहें कि आप पुनरुत्थान की आशा रख रहे हैं परंतु मुझे इसका प्रमाण नहीं दिख रहा कि आप अपने आपको पवित्र कर रहे हैं, कि आप अपने आपको और अधिक शुद्ध और पवित्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप स्वयं को धोखा दे रहे हैं। आप सच में आशा नहीं रख रहे हैं, आप सिर्फ धार्मिक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। क्योंकि यही उन लोगों की पहचान है (चिन्ह) जो अपमानित देह से महिमा की देह में इस बदलाव के लिए सच में आशा रख रहे हैं। मैं फिर से उन शब्दों को दोहराऊंगा।

प्रत्येक जो उसमें (यीशु) यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसे ही पवित्र करता है, जैसे वह पवित्र है।

क्या आपके पास वह चिन्ह है? क्या आपके जीवन में यह प्रमाण है कि आप सच में यीशु के पुनः आगमन की आशा रख रहे हैं?

अब, हमारी देह उसके समान हो जाएगी और हम सुसमाचारों के अभिलेख में देखते हैं कि वह समय और स्थान में सीमित नहीं था। वह स्वर्ग में ऊपर और फिर से नीचे आ-जा सकता था, सब द्वार बंद होने पर भी, वह कमरे में प्रवेश कर सकता था, वह एक को इस रूप में और दूसरे व्यक्ति को दूसरे रूप में दिखाई दे सकता था। उसके पास देह थी, क्या हम उसे स्थिति के अनुरूप ढलने वाली देह कह सकते हैं। मैं विश्वास करता हूं कि हमें भी इसी प्रकार की देह प्राप्त होगी।

लोग कहते हैं, "वह किस प्रकार की देह होगी?" पौलुस इस प्रश्न का उल्लेख 1 कुरिन्थियों 15:35-38 में करता हैः

परन्तु कोई कहेगा, "मृतक कैसे जी उठेंगे और वे कैसी देह को धारण करेंगे?"

मुझे निश्चय है कि हम में से कई इस प्रकार से पूछना चाहते हैं।

निर्बुद्धि लोग......पौलुस कहता है। यह पौलुस कह रहा है, मैं नहीं, जो कुछ तू बोता है, जब तक वह न मरे जिलाया नहीं जाता।

और वह इस बीज के उदाहरण को लेकर आगे बताता है।

और जो तू बोता है, तू वह देह नहीं बोता जो उत्पन्न होने वाली है, परन्तु मात्र दाना है, या मात्र बीज, संभवतः गेहूं का या किसी और अनाज का, परंतु परमेश्वर उसे अपनी इच्छा के अनुसार देह देता है और हर एक बीज को उसकी अपनी देह।

अब, वहां पर दो बातों को एक साथ रखा गया है; उसमें निरंतरता है और वहां बदलाव भी है। यदि आप सेब का बीज भूमि पर बोएंगे तो आपको संतरा नहीं मिलेगा। बीज का स्वभाव बताता है कि बीज में से निकलनेवाला जीवन किस रूप/स्वभाव का होगा। इसलिए वहां पर निरंतरता होगी। आप वही होंगे लेकिन वहां पर अलौकिक परिवर्तन होगा। जो आप बोते हैं उससे ही पता लगता है कि क्या निकलेगा परन्तु जो निकलता है वह उससे जो बोया गया था, बिल्कुल ही अलग होता है। इसी प्रकार दफनाते समय हमारी देह भी भूमि में एक बीज के समान बोई जाती है - वही देह बाद में निकलेगी परन्तु वह अलग प्रकार की देह होगी। मैं सोचता हूं यह बहुत ही स्पष्ट है।

मैं हमेशा आश्चर्यचकित होता हूं जब मैं बीज के बारे में सोचता हूं। मैं उस छोटी सी चीज के बारे में सोचता हूं, चाहे उसका कोई भी रंग हो, मैं हमेशा तरबूज के बारे में सोचता हूं। वह काला बीज जो आप भूमि में बोते हैं और कौन विश्वास कर सकता है कि वह शानदार, गोल तरबूज के रूप में निकलेगा। यह लगातार होने वाला आश्चर्यकर्म है। जब भी हम बीज को बोते हैं हम आश्चर्यकर्म को रोपते हैं। और आश्चर्यकर्म ही है जो हमें पुनरुत्थान के विषय में स्मरण कराता है।

यीशु इस बात पर जोर देने में बहुत सजग था कि जब वह जी उठा तब वह देह वही थी जो क्रूस पर चढ़ाई गई थी। हम इसे लूका 24 में पाते हैं। सब चेले डरे हुए थे, बहुत डरे हुए थे, जब वह पहली बार प्रकट हुआ था। वे सचमुच विश्वास नहीं कर पाए थे कि क्या हुआ। परन्तु यीशु उनसे कहता है, लूका 24:38-39, जब वह पुनरुत्थान के बाद प्रकट होता है।

तुम क्यों घबराते हो? और तुम्हारे मन में संदेह क्यों उठ रहे हैं? मेरे हाथों और पैरों को देखो कि यह मैं ही हूं।

उसने अपने हाथों और पैरों को उन्हें दिखाकर, अपने क्रूसित होने का प्रमाण दिया। वह उन्हें बताना चाहता था कि वह वही देह थी परंतु परिवर्तित हो चुकी थी।

और इसके अतिरिक्त यूहन्ना 20 में भी यीशु के पुनरुत्थान का अभिलेख है। जहां यह लिखा हैः

वह उनके मध्य में खड़े होकर यह कहता है, "तुम्हें शांति मिले।"

यह मध्य पूर्व का परंपरागत अभिवादन है।

अब जब उसने यह कहा तब उसने उन्हें अपने हाथ और पंजर दिखाए।

उसने ऐसा क्यों किया? यह दिखाने के लिए कि वह वही देह थी जो क्रूस पर चढ़ते समय उन्होंने देखी थी। अच्छा, आपको स्मरण होगा कि थोमा वहां नहीं था और थोमा ने कहा, "जब तक मैं उसके हाथों को न देख लूं और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं तब तक मैं विश्वास नहीं करूंगा।" अतः एक सप्ताह के बाद यीशु फिर से प्रकट हुआ और 27वें पद में वह थोमा से कहता हैः

अपनी उंगली यहां ला और मेरे हाथों को देख, और अपना हाथ लाकर मेरी पसली में डाल।

दूसरे शब्दों में, घाव वहां थे ताकि थोमा उसमें अपना हाथ लगा सके। इसलिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि जब आप जी उठेंगे तब आपके पास नई देह नहीं होगी, आपके पास दूसरे प्रकार की देह होगी परंतु वह वही देह होगी और परिवर्तित हो जाएगी।

अब, पौलुस पांच विशेष प्रकार के बदलाव के बारे में बताता है जो हमारी पुनरुत्थान वाली देह में होंगे। और इसके बारे में वह 1 कुरिन्थियों 15:42-44 और 52, 53 पद में बताता है। अतः हम उन पदों को पढ़ेंगे। 42-44 और 52,53। वचन कहता हैः

[अनुवाद में अनुपस्थित — 1 कुरिन्थियों 15:42 का उद्धरण: "मृतकों का पुनरुत्थान भी ऐसा ही है। देह नाशमान दशा में बोई जाती है और अविनाशी दशा में जी उठती है।"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — "नाशमानता क्या है? वह सड़न है। जो कुछ सड़ता है वह नाशमान है।"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — 1 कुरिन्थियों 15:43-44 का उद्धरण: अनादर/महिमा, निर्बलता/सामर्थ्य, स्वाभाविक देह/आत्मिक देह।]

[अनुवाद में अनुपस्थित — 'स्वाभाविक देह' बनाम 'आत्मिक देह' पर लंबी व्याख्या; यूनानी शब्द psuchekos (psuche = प्राण) और उसका उचित अनुवाद 'प्राणिक/soulish'; स्वीडिश और डैनिश में इस शब्द का होना।]

[अनुवाद में अनुपस्थित — "उदाहरण के लिये, 1 कुरिन्थियों 2 अध्याय में पौलुस कहता हैः"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — 1 कुरिन्थियों 2:14 का उद्धरण: "प्राणिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता।"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — अनुवादों का 'स्वाभाविक मनुष्य'/'शारीरिक मनुष्य' कहना और इससे प्राणिक तथा आत्मिक का भेद छिप जाना; "वह प्राणिक देह के रूप में गाड़ी जाती है, आत्मिक देह के रूप में जी उठती है।"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — वर्तमान देह में प्राण निर्णय लेता है; दाऊद का अपने प्राण से कहना "हे मेरे प्राण, यहोवा को धन्य कह"; आत्मा तैयार है पर प्राण सुस्त है।]

[अनुवाद में अनुपस्थित — जी उठने पर आत्मा सीधे देह को नियंत्रित करेगी; डेनमार्क के नाई का स्वप्न — जिस दिशा में वह इशारा करता, उसकी देह वहीं चली जाती।]

[अनुवाद में अनुपस्थित — "अब, आप इसे स्वीकार करें या न करें, इससे बेहतर मैं आपको नहीं दे सकता।"]

[अनुवाद में अनुपस्थित — "अब आईए, 1 कुरिन्थियों 15 के 52 और 53 पदों को भी देखें। वचन कहता हैः"]

और यह क्षण भर में, पलक झपकते ही, पिछली तुरही के फूंकते ही होगाः क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जायेंगे, और हम बदल जाएंगे। क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।

नाशवान वह है जो सड़ जाता है, मरणहार वह है जो मर जाता है। यदि आप इन दो अनुच्छेदों को एक साथ देखें तो हमारी देह में पांच विशेष प्रकार के बदलाव होते हैं।

नाशवान से अविनाशी, सड़ सकता से जो नहीं सड़ सकता, मरणहार से अमरता, मृत्यु से जो अमरता, या अनादर से महिमा जहां कोई भी दफनाया जाता है, वह दयनीय बात है, इसी प्रकार हम नीचे जाते हैं। जब हम बाहर आते हैं हम महिमा के साथ बाहर आते हैं। निर्बलता में बोई जाती है परंतु सामर्थ में जी उठती है। जैसे कि हमने पहले कहा था, स्वाभाविक देह बोई जाती है परंतु आत्मिक देह जी उठती है। आइए, मैं आपको फिर से पांच प्रकार के बदलाव को बताता हूं

नाशवान से अविनाशी,

मरणहार से अमरता,

अनादर से महिमा,

निर्बलता से सामर्थ्य,

और स्वाभाविक से आत्मिक।

अतः यीशु का पुनरुत्थान ही मसीही सिद्धांत की मूल कुंजी है। हम इसे अलग रख कर अपने आपको मसीही नहीं कह सकते। 1 कुरिन्थियों 15:14 में पौलुस कहता हैः

यदि मसीह जी नहीं उठा, तो हमारा प्रचार करना व्यर्थ है और तुम्हारा विश्वास करना भी व्यर्थ ही है।

और 17वें पद मेंः

और यदि मसीह नहीं जी उठा, तो तुम्हारा विश्वास व्यर्थ है और तुम अब तक अपने पापों में फंसे हो।

दूसरे शब्दों में, हमारे पापों की क्षमा पूर्णतः यीशु के पुनरुत्थान से जुड़ी हुई है। यदि यीशु नहीं जी उठता तो सुसमाचार मिथ्या है, हमारा विश्वास करना व्यर्थ है और हम अभी भी अपने पापों में फंसे हुए हैं। अतः आप देखते हैं कि कई महान धर्मशास्त्री/विद्वान और उनके जैसे कई लोग जो यीशु की देह के पुनरुत्थान की वास्तविकता को नहीं मानते हैं। वे अभी तक अपने पापों में फंसे हुए हैं और बचाए नहीं गए हैं। आप तब तक बचाए नहीं जा सकते जब तक आप यीशु के वास्तविक पुनरुत्थान पर विश्वास नहीं कर लेते।

आइए, अब हम यीशु के पुनरुत्थान के प्रमाणों को देखें। बाइबल में यीशु के पुनरुत्थान के विषय में क्या प्रमाण दिया गया है? अतः यह रूचिकर तथ्य है, प्रत्यक्षदर्शी की साक्षी, प्रथम प्रमाण नहीं होता। प्रथम प्रमाण बाइबल का प्रमाण है, जिसकी प्राथमिकता मनुष्य की साक्षी से बढ़कर है।

आइए हम पुराने नियम से कुछ पदों को देखें जो यीशु के पुनरुत्थान के विषय में बताता है। यह बहुत और बहुत ही रूचिकर विषय है और मैं चाहता हूं कि काश, मेरे पास थोड़ा और समय होता। लेकिन आइए हम एक पद को देखें, 1 पतरस 1:10-12

जिस उद्धार के संबंध में भविष्यद्वक्ताओं ने परिश्रम से ढूंढा और सावधानी से जांच पड़ताल की, जिन्होंने तुम पर होने वाले अनुग्रह के विषय में भविष्यवाणी की थी, वे इस बात की खोज में थे कि मसीह का आत्मा जो उनमें है और जिसने मसीह के दुःखों व उसके बाद होने वाली महिमा की भविष्यवाणी की है वह किस व्यक्ति या किस समय की ओर संकेत कर रहा है। उन पर यह प्रगट किया गया, कि उनकी यह सेवा अपने लिए नहीं परन्तु तुम्हारे लिए थी, अब यही समाचार तुम्हें उनके द्वारा सुनाया गया, जिन्होंने तुम्हें स्वर्ग से भेजे गये पवित्र आत्मा के द्वारा सुसमाचार सुनाया था।

अतः पुराने नियम के भविष्यद्वक्ता बहुत दुविधा में थे। मुझे आश्चर्य है कि आप इसे समझ पाएंगे, क्योंकि यह आश्चर्यचकित करने वाली दुविधा है। पतरस कहता है मसीह की आत्मा उनमें थी, मसीह की आत्मा। इसलिए उस प्रेरणा में, वे उन बातों को प्रथम पुरुष में बोलते थे जो यीशु के साथ घटीं और जो उनके साथ कभी नहीं घटीं। यह बहुत ही कठिन होगा। मैं नहीं जानता कि आपने कभी अपने आपको उन पुराने नियम के भविष्यद्वक्ताओं के जगह पर रखा होगा। परन्तु उन्होंने अपने विषय में असामान्य बातों को कहा जो कभी हुई नहीं थीं। मैं आपको केवल दो उदाहरण देना चाहता हूं। भजनसंहिता 22:16 में, जिसे वे मसीही भजन बोलते हैं। दूसरे शब्दों में, यह मसीह के प्रकाशन को खोलता है। भजन 22:16 में दाऊद प्रथम पुरुष में बोलता है। वह कहता हैः

कुत्तों ने मुझे घेर लिया है, कुकर्मियों की भी मेरे चारों ओर मुझे घेरे हुए है, वे मेरे हाथ-पैर छेदते हैं।

यह दाऊद के साथ कभी नहीं हुआ। आप क्या सोचते हैं, उसने क्या महसूस किया होगा जब उसने इन शब्दों को कहा? इसका अनुमान मुझे भी नहीं है परंतु वह मसीह का आत्मा जो उसमें था उससे प्रेरित हुआ। इसलिए उसने प्रथम पुरुष में इन बातों को बोला जो कि मसीह के साथ घटा परंतु उसके साथ कभी नहीं।

और उसके बाद हम यशायाह 50 में देखते हैं। वहां पर अनेक उदाहरण हैं, मैं आपको केवल दो स्पष्ट उदाहरण दे रहा हूं। यशायाह 50:6ः

मैंने मारनेवालों को अपनी पीठ और गलमोंछ नोचनेवालों की ओर अपने गाल कर दिए, अपमानित होने और थूकने से मैंने अपना मुंह न छिपाया।

यह यशायाह के जीवन में कभी नहीं हुआ, यह यीशु की सेवकाई में हुआ। परन्तु यह प्रथम पुरुष में लिखा हुआ था। क्या आप समझ रहे हैं कि मैं क्या कहना चाहता हूं? वह मसीह का आत्मा था जो उनमें था, पवित्र आत्मा के द्वारा बताया गया कि मसीह के साथ क्या होगा, यीशु के साथ, परंतु उनके साथ कभी नहीं हुआ। इसलिए इसमें कोई चकित होने वाली बात नहीं थी कि किस समय पर उन्होंने कौन सी बात किस लिए बोली थी। मैं उन लोगों के विश्वास के लिए अचंभित होता हूं कि उनके पास उसे ग्रहण करने का विश्वास था। मैं उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद देता हूं क्योंकि यह सबसे पहला मसीह के पुनरुत्थान का प्रमाण है जो लेखों में पाया जाता है।

भजन 16 में, प्रेरित पतरस पेन्तुकुस के दिन प्रमाणित करता है, जो कि यीशु के मृत्यु और पुनरुत्थान की अद्भुत रूपरेखा है। भजन 16 का 8वां पद इस प्रकार से आरंभ होता हैः

मैं यहोवा को निरंतर अपने सम्मुख रखा है इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।

यह दाऊद के लिए सच हो सकता था परंतु यह मसीह के लिए भी सच था। इसलिए क्या होता है कि, वे कुछ बातों को बोलते हैं जो कि उनके साथ सचमुच होता है, तब वे उस अनुभव में और आगे बढ़ते हैं जो उनके साथ सचमुच में कभी नहीं हुआ था। वह आगे कहता हैः

इस कारण मेरा हृदय आनंदित और मेरी आत्मा मगन हुई।

यदि आप प्रेरितों के काम 2:26 को पढ़ें तो वहां पर आप पाएंगे कि आपकी महिमा कैसी होगी। पतरस कहता है "मेरी जीभ मगन हुई।" क्या आप समझे? मैंने आपको इसके विषय में पहले भी बताया था। आपकी जीभ ही आपकी महिमा है क्योंकि वह एक सदस्य है जो कि आपके मुंह में रखी गई ताकि आप उससे परमेश्वर की महिमा कर सकें। इसलिए वह कहता हैः

इस कारण मेरा मन आनंदित हुआ और मेरी जीभ मगन हुई, मेरा शरीर भी आशा में बना रहेगा।

दूसरे शब्दों में, यद्यपि मैं दफनाया जाऊंगा फिर भी मेरे पास पुनरुत्थान की आशा होगी।

"...क्योंकि तू मेरे प्राणों को अधोलोक में न छोड़ेगा..."

अतः यह दर्शाता है कि उसका आत्मा अधोलोक में गया।

...और न तू अपने पवित्र जन को सड़ने देगा।

उसकी देह कभी नहीं सड़ेगी यद्यपि वह थोड़े से समय के लिए कब्र में रहेगी। क्योंकि उसने कभी भी पाप नहीं किया और पाप ही डंक है जो देह को सड़ा देता है। तब वह अंतिम पद में कहता हैः

तूने मुझे जीवन का मार्ग बताया है। तेरी उपस्थिति में आनंद की भरपूरी है। और तेरे दाहिने हाथ में सदा के लिए आनंद है।

जब यीशु जी उठा तब वह पूरा हुआ। वह पिता की उपस्थिति में लौट गया और जहां पर आनन्द की भरपूरी है। अतः यह एक उदाहरण है।

दूसरा भजनसंहिता 71:20-21 में है। यह एक आश्चर्यजनक भजन है। यह भजनकार के विषय में नहीं बताता है। यदि आप चाहें तो इसकी पृष्ठभूमि को देख सकते हैं परंतु वह परमेश्वर को सम्बोधित कर रहा है और वह कहता हैः

तूने मुझे बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परंतु फिर से मुझे जिलाएगा (फिर से मुझे जीवन देगा) और फिर से पृथ्वी के गहिरे गड्ढे में से उभार लेगा।

यह किसी भी भजनकार के साथ कभी नहीं हुआ।

तू मेरे सम्मान को बढ़ाएगा और सब प्रकार से मुझे शांति देगा।

अतः यह केवल यीशु के लिए है। वह गाड़ा गया, वह फिर से जिलाया गया, वह ऊपर उठाया गया और उसका सम्मान बढ़ाया गया। वह उस नाम का स्वामी बना जो सब नामों में श्रेष्ठ है। देखिए, कैसे? यह भजनकार के साथ कभी नहीं हुआ, परन्तु यीशु के साथ हुआ। वह मसीह का आत्मा है जो उनमें था जो भविष्य में होने वाली बातों के विषय में पहले ही साक्षी दे रहा था। जब आप इस सच्चाई को ग्रहण करना आरम्भ करते हैं तब यह यीशु के पुनरुत्थान की सच्चाई का सबसे पक्का प्रमाण है।

तब वहां पर एक और रुचिकर अनुच्छेद है। पौलुस 1 कुरिन्थियों में कहता है कि सुसमाचार में हम तीन तथ्यों को पाते हैं। जो हमने उसे दूसरे दिन देखा था। बाइबल के अनुसार यीशु मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन जी उठा। कभी आपने अपने आप से पूछा है कि उसके तीसरे दिन में जी उठने के विषय में बाइबल क्या कहती है? मैं केवल एक ही ढूंढ पाया हूं और वह बहुत ही रुचिकर है क्योंकि वह संदर्भ से बहुत अलग है। होशे 6:1-2ः

"चलो, हम यहोवा की ओर फिरें क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बांधेगा। दो दिन के बाद वह हमें जिलाएगा और तीसरे दिन वह हमको उठाकर खड़ा करेगा और तब हम उसके सम्मुख जीवित रहेंगे।"

अतः यह तीसरे दिन भविष्य में होने वाले पुनरुत्थान का स्पष्ट कथन है। रोचक बात यह है कि वह उसके विषय में एकवचन में नहीं बोलता, बल्कि हमारे विषय में बहुवचन में बोलता है।

यह एक प्रकाशन है। यदि आप इफिसियों 2 अध्याय को खोलेंगे तो आपको मिलेगा कि पौलुस किस प्रकार से इस प्रकाशन को बताता है। आपने देखा, कि भविष्यवाणी केवल भविष्य में होने वाली घटना के विषय में नहीं बताती है परंतु वह उन्हें भविष्य में इस प्रकार से बताती है ताकि वह उसके असली महत्व को दिखा सके। वह व्याख्या के साथ-साथ भविष्य में कब घटेगी वह भी बताती है। यह एक सिद्ध उदाहरण है। इफिसियों 2 अध्याय के 4 पद से और सब सच्चे विश्वासियों के लिए यह लिखा हुआ है। इफिसियों 2 के 4 की आरंभ मेंः

परन्तु करुणा में धनी परमेश्वर ने अपने बड़े प्रेम के कारण, जो प्रेम उसने हमसे किया, उसने हमें मसीह के साथ जीवित किया यद्यपि हम अपराधों में मरे हुए थे...

यह क्या ही अद्भुत है। उसने हमसे तब भी प्रेम किया जब हम मरे हुए थे। कितने लोग हैं जो शव से प्रेम कर सकते हैं? अब उसने क्या किया? तीन बातेंः

उसने हमें मसीह के साथ जिलाया, अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, हमें एक साथ उठाया और हमें स्वर्गीय स्थानों में मसीह के साथ बैठाया।

यह सब भूतकाल में है। इसलिए यीशु के साथ हमारी पहचान होने के कारण हमें जिलाया गया है, हम पुनर्जीवित हुए हैं और यहां तक ही नहीं, हमें सिंहासन पर बैठाया है। यही हमारा भाग्य है। और पौलुस इसे भविष्य में नहीं बताता है। निष्कर्ष में वह कहता है कि यदि आप उसे समझ सकें, तो आप अभी यीशु के साथ उस सिंहासन में भागी हो सकते हैं। परन्तु यह होशे 6:1-2 का कठिन कार्य है। आइए देखें कि कैसे बाइबल अद्भुत रीति से अपने आप इसकी व्याख्या करती है।

तब पौलुस मनुष्य की साक्षियों की एक सूची देता है। जो कि असंगत नहीं परंतु सहायक है। आइए हम उसे संक्षिप्त में देखेंगे। 1 कुरिन्थियों 15:5-8। 4 पद में लिखा हैः

वह गाड़ा गया और पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।

पद 5ः

और कैफा को (पतरस), फिर उन बारहों को दिखाई दिया। फिर वह पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिसमें से अधिकतर अब तक जीवित हैं परंतु कुछ सो गए।

उनमें से कई अभी तक जीवित हैं जो संकेत करता है कि वे संभवतः काफी जवान होंगे जब उन्होंने उसे देखा होगा।

उसके बाद वह याकूब को दिखाई दिया, तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया और सब से अंत में वह मुझे दिखाई दिया, जो मानो असमय जन्मा हूं।

यह उन लोगों की सूची है जिन्होंने यीशु के पुनरुत्थान को अपनी आंखों से देखा था। अब यहूदी व्यवस्था के अनुसार किसी दो लोगों की साक्षी व्यवस्था बनाने के लिए पर्याप्त है। परन्तु परमेश्वर ने दो से कहीं अधिक यीशु के पुनरुत्थान की साक्षियां दी हैं।

अकस्मात से, और यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यह मुझे रुचिकर लगा। पौलुस कहता है कि उसने यीशु को देखा जो मानो असमय जन्मा - समय से पूर्व जन्म। मैं इस पर बहुत समय तक विचार करता रहा परन्तु मैं सच में विश्वास करता हूं कि पौलुस इस्राएल के उद्धार को पूर्वभासित कर रहा है जब वे मसीह को देखेंगे। परन्तु पौलुस दो हजार साल अग्रिम है, वह असमय पैदा हुआ था।

आप मुझसे इस पर असहमत हो सकते हैं और बच सकते हैं। अब मैं पुनरुत्थान के महत्व के विषय में बताना चाहता हूं। हम लोग यीशु के पुनरुत्थान को अनदेखा नहीं कर सकते हैं। यह संसार के इतिहास का निर्णायक तथ्य है। मानव जाति ही नहीं बल्कि संसार का पूरा इतिहास, यीशु के पुनरुत्थान के चारों ओर घूमता है। सबसे पहले यीशु के निर्दोष होने का परमेश्वर का प्रमाण है। स्मरण होगा, दो न्यायालयों ने उसे मृत्यु की सजा सुनाई थीः एक सांसारिक रोमी न्यायालय और दूसरा धार्मिक यहूदी न्यायालय। और जब वह गाड़ा गया तब तक वह दोषी था परंतु जब वह जी उठा तब परमेश्वर ने अपने पुत्र को निर्दोष ठहराया। यह रोमियों 1:3-4 पद में बताया गया हैः

अपने पुत्र, हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में की थी, जो शारीरिक रूप से दाऊद के वंश से उत्पन्न हुआ, और पवित्रता की आत्मा के अनुसार मृतकों में से पुनः जी उठने के द्वारा सामर्थ्य के साथ परमेश्वर का पुत्र नियुक्त किया गया।

और यह पवित्र आत्मा को यहूदी वाक्यांश में कहने का तरीका है क्योंकि यहूदी में पवित्र आत्मा को पवित्रता की आत्मा कहते हैं। कुछ अनुवादक इस बात को नहीं समझ पाते हैं कि पौलुस यूनानी भाषा में लिख रहा था परंतु यहूदी में सोच रहा था।

पवित्रता की आत्मा के अनुसार मृतकों में से पुनः जी उठने के द्वारा सामर्थ्य के साथ परमेश्वर का पुत्र नियुक्त किया गया।

इसलिए जब यीशु कब्र से बाहर आया तब परमेश्वर ने कहा, "मैंने उन अधर्मी निर्णयों को बदल दिया है। मैंने अपने पुत्र को निर्दोष ठहराया है। उसने कभी पाप नहीं किया, उसकी मृत्यु का कोई कारण नहीं है और मेरे पवित्र आत्मा के द्वारा मैंने उसे जिलाया है।"

आप जानते हैं यह बहुत ही रुचिकर है, मुझे इसे और आगे अधिक नहीं बढ़ाना चाहिए, परंतु उद्धार के सभी महत्वपूर्ण बिंदू परमेश्वरत्व के तीनों व्यक्तित्वों को सम्मलित करते हैं। यीशु का गर्भाधान पिता से, आत्मा के द्वारा हुआ ताकि पुत्र को सामने ला सकें। यीशु की सेवकाई के विषय में पतरस कहता है, "पिता परमेश्वर ने यीशु का अभिषेक पवित्र आत्मा के द्वारा सामर्थ्य के साथ किया। पिता ने पुत्र को आत्मा से अभिषेक किया। यीशु की मृत्यु के विषय में वह कहता है, "अनंत आत्मा के द्वारा उसने स्वयं को, पिता को अर्पित किया।" पुत्र ने आत्मा के द्वारा पिता को। यीशु के पुनरुत्थान के विषय में, "पिता ने आत्मा के द्वारा पुत्र को जिलाया।" और पेन्तिकुस्त के दिन अंतिम कथन, "यीशु ने पिता से पवित्र आत्मा का दान प्राप्त किया, और उसे अपने शिष्यों पर उंडेला।" आपने देखा, कैसे पूरी तौर से उद्धार के सभी मुख्य स्तर में परमेश्वर की त्रिएकता सम्मलित है। यदि मैं इसे आदरपूर्वक कहूं, तो यह ऐसा होगा परमेश्वर का कोई भी व्यक्तित्व, मानव जाति की इस महिमामय दर्शन से अलग होना नहीं चाहेगा। परमेश्वर हमारी समझ से बढ़कर हम में रुचि रखता है। मेरे लिए तो इसे कई पुस्तकों को लिखना होगा।

ठीक है। अब, यीशु का पुनरुत्थान धर्मी ठहराने का मूल आधार है। यदि वह नहीं जी उठता तो हम अपने पापों में पड़े होते। पौलुस रोमियों 4:25-26 में कहता हैः

यीशु हमारे अपराधों के कारण मरने के लिए सौंप दिया गया और हमें धर्मी बनाने के लिए जीवित भी किया गया।

यदि वह नहीं जी उठता तो हम धर्मी नहीं ठहर सकते थे, हम अपने पापों में पड़े हुए होते।

और तब वह उद्धार के विषय में बोलता है। रोमियों 10:9-10ः

कि यदि तू अपने मुख से अंगीकार करे कि यीशु प्रभु है और अपने मन में विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे मृतकों में से जीवित किया है, तो तू उद्धार पाएगा। क्योंकि धार्मिकता के लिए मन से विश्वास किया जाता है और उद्धार के लिए मुख से अंगीकार किया जाता है।

क्या आप समझे, यदि आप यह विश्वास नहीं करते हैं कि परमेश्वर ने यीशु को मृतकों में से जिलाया तो आप बचाए नहीं जा सकते। यह उद्धार के लिए बहुत आवश्यक है। दुर्भाग्य से कई हैं जो अपने आपको मसीही कहते हैं, वे शारीरिक पुनरुत्थान पर विश्वास नहीं करते हैं। उनमें से कोई भी पापों की क्षमा की शांति और आनंद नहीं जानते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कलीसिया में वे किस पद पर हैं।

तब पुनरुत्थान एक जमानत है, मसीह के सामर्थ्य की जो हमें छुटकारा देती है। इब्रानियों 7:25 में यह लिखा हैः

अतः अब जो उसके द्वारा परमेश्वर के निकट आते हैं, वह उनका पूर्ण रूप से उद्धार करने में सक्षम है क्योंकि वह उनके लिए विनती करने हेतु सदैव जीवित है।

यदि यीशु अभी भी कब्र में होता तो वह हमें कैसे छुटकारा देता? परंतु इसलिए कि वह परमेश्वर के दाहिनी ओर है, इसलिए कि उसने हमारे पापों के लिए प्रायश्चित किया, इसलिए कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार उसे दिया गया है, वह हमारा पूरा-पूरा उद्धार कर सकता है। मुझे यह वाक्यांश बहुत अच्छा लगता है। किसी ने कहा है नीचे से लेकर ऊपर तक। यीशु की सामर्थ्य जो छुटकारा देती है, उसकी कोई सीमा नहीं है। उसके पास सारी शक्ति है।

अब, यह फिर से महत्वपूर्ण बात है कि पुनरुत्थान हमारे छुटकारे की पूर्ति है। सुनिए, हमारा गंतव्य स्थान स्वर्ग नहीं है। यह बहुत खुशी की बात है कि हम स्वर्ग में जा सकेंगे परन्तु वह केवल एक रुकने का स्थान है क्योंकि जब हमारी आत्माएं स्वर्ग में होंगी तब भी हमारे शरीर कब्र में सड़ रहे होंगे। यह पूर्ण उद्धार नहीं है। यीशु समस्त मानव जाति के लिए मरा। उसका उद्धार प्राण, आत्मा और शरीर को सम्मलित करता है। और वह उद्धार तब तक पूरा नहीं है जब तक पुनरुत्थान पूरा नहीं होता। पौलुस इस बात में स्पष्ट था। वह फिलिप्पियों 3:10 और उसके आगे कहता है - वह कहता है उसके संपूर्ण जीवन का लक्ष्य और उद्देश्य यह है किः

जिससे कि मैं उसको और उसके पुनरुत्थान के सामर्थ्य और उसके दुःखों की सहभागिता को जान सकूं और उसकी मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं, कि मैं भी किसी तरह मृतकों में से पुनरुत्थान प्राप्त करूं।

वह स्वर्ग जाने के लिए चिंतित नहीं था, परन्तु उसकी उमंग मृत्यु से पुनरुत्थान को प्राप्त करने की थी। परमेश्वर का धन्यवाद हो जब हम मर जाएंगे हमारी आत्माएं स्वर्ग में जाएंगी परंतु यह पूर्ण छुटकारा नहीं है क्योंकि हमारे शरीर अभी तक छुड़ाए नहीं गए हैं। पौलुस अपनी दृष्टि पुनरुत्थान पर लगाए हुए है और वह कुछ बातें प्रभावशाली रूप से कहता है। वह कहता है, "यदि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से पुनरुत्थान को प्राप्त करूं।" पौलुस ऐसे ही नहीं मान लेता है कि वह पुनरुत्थान को प्राप्त करेगा। प्रिय भाई और बहन, आप बिना किसी अभिप्राय के पुनरुत्थान की ओर नहीं बढ़ सकते। यदि आप बिना किसी अभिप्राय के बढ़ रहे हैं तो आप कहीं और ही पहुंचेंगे। इसके लिए सचमुच गंभीर प्रतिज्ञा और दृढ़ संकल्प चाहिए।

मुझे बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि मैं कई ऐसे मसीही लोगों से मिला हूं जो सचमुच इस बात को इतनी गंभीरता से नहीं लेते हैं। यदि पौलुस इस प्रकार से कहता है, "यदि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से पुनरुत्थान को प्राप्त करूं," तो मैं और आप कौन हैं जो यह कहें कि हमें ऐसे ही मिल जाएगा? क्या हम पौलुस के समान उस आत्मिक स्तर पर हैं? संभवतः नहीं। लेकिन पौलुस ने भी इस बात को साधारण रूप से नहीं लिया।

अगले पद में वह फिर से कहता हैः

ऐसा नहीं है कि मैं प्राप्त कर चुका हूं या सिद्ध हो गया हूं परन्तु मैं उसे प्राप्त करने का प्रयास करता रहता हूं जिसके लिए मसीह ने मुझे पकड़ा था। हे भाइयो, मैं यह नहीं कहता कि मैंने उसे प्राप्त कर लिया है परन्तु एक कार्य मैं करता हूं कि जो पीछे छूट गया है उसे भूल जाता हूं और उन्हीं को पाने का प्रयत्न करता हूं जो आगे है। मैं उस लक्ष्य की ओर बढ़ता चला जाता हूं कि मसीह यीशु में परमेश्वर की स्वर्गीय बुलाहट का पुरस्कार प्राप्त करूं।

पौलुस एकचित्त था। उसने कहा, "मैं अभी नहीं पहुंचा हूं, मैंने अभी नहीं पाया है," जिस समय वह इस बात को कह रहा था। परन्तु उसने कहा, "मैं यह करता हूं, मैं निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं। मेरी एक महान अभिलाषा और दृढ़ संकल्प है कि जब मसीह में मृतक जी उठेंगे तब मैं भी वहां पर हो सकूं।"

जब आप सोचते हैं कि वह किस प्रकार का होगा, भाईयों और बहनों, इससे चूक जाना एक शर्म की बात होगी। सचमुच में। मेरा मतलब है कि हमारी सीमित बुद्धि से उसकी महिमा और सामर्थ्य को समझ पाना संभव नहीं है जब यह दुर्बल और नाशवान शरीर अचानक से महिमामय देह में बदल जाएंगे जैसे मसीह यीशु की। क्या यह अनोखी बात नहीं है? यह मेरे लिए है। असल में, मुझे यहां पर थोड़ी देर रुककर विचार करना होगा।

रोमियों 8:23 भी यह कहता है। दूसरे शब्दों में उद्धार तब तक पूरा नहीं होगा जब तक पुनरुत्थान न हो जाए। रोमियों 8:23, वह 22वें पद में कहता हैः

संपूर्ण सृष्टि अब तक एक साथ प्रसव की सी पीड़ा में कराह रही है...

और वचन कहता हैः

केवल यही नहीं, बल्कि स्वयं हम भी जिनके पास आत्मा का पहला फल है, अपने में कराहते हुए लेपालक पुत्र होने, अर्थात् हमारे शरीरों के छुटकारे की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा करते हैं।

अब, मैं आपसे पूछता हूं कि क्या यह आपके लिए सच है? क्या आपके पास आत्मा का पहला फल है? क्या आप अपने में कराह रहे हैं? क्या आप उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हैं? आपके और मेरे पास क्या अधिकार है कि हम यह मान लें कि परमेश्वर हमारे साथ इससे कम स्तर पर व्यवहार करेगा? पवित्र आत्मा में बपतिस्मा सिर्फ अच्छे समय के लिए नहीं दिया गया, यह इसलिए दिया गया कि हम भविष्य के लिए तैयार हो सकें। इस समय मैं गंभीर महसूस कर रहा हूं।

अगली बात जो मैं पुनरुत्थान के बारे में कहना चाहता हूं, कि यह यीशु के साथ हमारी एकता की समाप्ति है। 1 थिस्सलुनीकियों 4:17 यह कहता हैः

तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उनके साथ बादलों पर उठा लिये जायेंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें,........।

यह बहुत दिलचस्प है क्योंकि हवा के लिए दो यूनानी शब्द हैं। क्रमशः एक उच्च वायु का वर्णन करता है, जबकि दूसरा पृथ्वी की सतह के नजदीक हवा का वर्णन करता है। यहां जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है वह निचली हवा है। तो हम प्रभु से मिलने के लिए बहुत दूर पृथ्वी से ऊपर नहीं जाएंगे।

तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जायेंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।

उसके बाद कोई विभाजन नहीं। हम हमेशा के लिये प्रभु के साथ होंगे और हम हमेशा एक दूसरे के साथ होंगे।

अब, मेरी एक पत्नी है जिसे मैं बहुत अधिक प्यार करता हूं, जो मुझसे पहले चली गई है। परन्तु एक दिन हम एक साथ होंगे। प्रिय भाईयों और बहनों, इससे मत चूकिये। यदि आप इससे चूक जाते हैं तो यह आपके जीवन का बड़ा हादसा होगा। यह तत्पर है, यह गंभीर है।

अंततः, और मुझे यह शीघ्र कहना है, पुनरुत्थान तीन चरणों में होगी। 1 कुरिन्थियों 15:22ः

और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जायेंगे। परन्तु हर एक अपनी अपनी बारी से,

और यहां, इसका क्रम है, तीन भिन्न चरण। पहला, पहला फल, मसीह, तब वे जो मसीह के आने पर उसके हैं, और अंततः अंत, बचे हुए सभी मृतकों का पुनरुत्थान। यीशु किसके लिये वापस आ रहा है? वे जो मसीह के हैं। वह वापस नहीं आ रहा है...... वह चोर नहीं है। वह किसी ऐसे व्यक्ति या वस्तु को ले जाने नहीं जा रहा है जो उसका नहीं है। क्या आप सच में उसके हैं? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। वे ही जिनके लिये वह वापस आ रहा है।

वह पहिलौठा कहा जाता है। और बाइबल में एक अंतरिम भाग है जो सच में उत्साहजनक है। लैव्यव्यवस्था 23:10, हां यहीं। यह मूसा की व्यवस्था के अधीन एक संस्कार है।

इस्राएलियों से कह, कि जब तुम उस देश में प्रवेश करो जिसे यहोवा तुम्हें देता है और उस में के खेत काटो, तब अपने अपने पक्के खेत की पहिली उपज का पूला याजक के पास ले आया करना, और वह उस पूले को यहोवा के साम्हने हिलाये कि वह तुम्हारे निमित्त ग्रहण किया जायेगा, वह उसे विश्रामदिन के दूसरे दिन हिलाये।

सब्त कौन सा दिन होता है, सप्ताह का कौन सा दिन? शनिवार। सब्त के बाद का दिन कौन सा है? रविवार। यीशु किस दिन जी उठा? रविवार को, हां, बिल्कुल सही। वह हमारी खातिर चढ़ाया गया ताकि उसके कारण हम ग्रहण किये जायें।

परन्तु वह एक डंठल मात्र नहीं था वह एक गठ्ठर था। और यदि आप मत्ती 27 में पढ़ें तो जब यीशु की मृत्यु हुई तो भूकंप हुआ, कब्रें खुल गईं और बहुत से मरे हुए धर्मी शहर में निकल आये। मैं नहीं मानता कि वे वापस कब्रों में गये, मैं विश्वास करता हूं कि वे यीशु के साथ ऊपर चल गये। वे ऐसी पूलियां बन गये जो प्रभु के यह कहते हुए इकठ्ठे हुए कि बहुत से आने वाले हैं। यहां हम हैं, हम जो पहले फल हैं।

अब, मैं सच में, और आगे नहीं जा सकता हूं। अपने हृदय में मुझ पर बहुत दबाव है कि आपको चुनौती दूं कि क्या आप सच में निशाने की ओर बढ़ रहे हैं, कि आपने अपने जीवन में सही प्राथमिकतायें तय की हैं या नहीं। 1977 में जहां तक मुझे याद है, मैं यहीं कहीं नॉर्थ आयरलैंड में मध्यस्थता विषय पर किसी सभा में था। मैं इस तथ्य के बारे में सिखा रहा था कि हर राष्ट्र पर एक मजबूत व्यक्ति होता है। उन्होंने मुझसे कहा, न्यूजीलैंड पर मजबूत व्यक्ति कौन है? यह कहना मेरा काम नहीं, आप न्यूजीलैंड के मसीही हैं, आपको यह खोजना है। परन्तु तभी मैंने महसूस किया कि प्रभु ने कहा, "मैं तुम्हें बताऊंगा कि मजबूत व्यक्ति कौन है।" तो मैं वापस आया और उनसे कहा, हमारा एक घनिष्ठ मित्र बिल सुब्रित्स्की अपनी एक पुत्री के साथ वहीं बैठे हुए थे। उस समय उन्होंने मुझसे कहा कि जब मैंने यह कहा तो परमेश्वर ने उनसे भी यही कहा। जो मैंने कहा वह यह था और यह आपको चकित कर देगा, यह एक प्रकार की अवनति है। न्यूजीलैंड पर मजबूत व्यक्ति उदासीनता है। अब, मैं एक किवी के समान बात नहीं कर सकता हूं परन्तु किवियों ने मुझसे कहा है कि एक न्यूजीलैंड के व्यक्ति की सीधी सपाट बात "यार, वह सही होगी" है। दूसरे शब्दों में, वह स्वयं अपनी परवाह कर लेगा। यदि हम उसे छोड़ देंगे तो वह सही हो जायेगा। न्यूजीलैंड में यह आपकी सबसे पहली समस्या है और आपमें से कुछ की यह समस्या है। और यदि आप उस समस्या को नहीं सुलझाते हैं तो, आप तैयार नहीं होंगे। क्योंकि यीशु उदासीनों के लिये वापस नहीं आ रहा है। वह उन लोगों के लिये वापस आ रहा है जो उत्सुकतापूर्वक उसकी बाट जोह रहे हैं।

अब, मैं आपको एक सुअवसर देना चाहता हूं, यदि न दूं तो मैं आपके प्रति निष्पक्ष नहीं होऊंगा। यदि आप सच में जानते हैं तो जो कुछ मैं कह रहा हूं उसके प्रकाश में, कि यदि आप वैसा नहीं जी रहे हैं जैसा यीशु का इंतजार करते हुए जीना चाहिये, तो यह आपके लिये बदलने का समय है। स्मरण रखें कि मैंने पश्चाताप के बारे में क्या कहा है? यह एक निर्णय है जिसके बाद एक कार्य आता है। यदि आपको पश्चाताप करने की आवश्यकता है तो मैं आप सबसे एक एक कर बात कर रहा हूं। मैं आप में से अधिकांश को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं, परन्तु यदि आपको पश्चाताप करने की आवश्यकता है तो यह पश्चाताप करने का सही समय है। आपको याद है, मैंने क्या कहा? जब आप चाहें तो आप पश्चाताप नहीं कर सकते हैं। आप केवल तभी पश्चाताप कर सकते हैं जब पवित्रात्मा आपको उभारे।

यदि यहां आज सुबह ऐसे लोग हैं तो पवित्रात्मा आपसे कह रहा है कि तुम सही जीवन नहीं बिता रहे हो, यदि तुम मेरी वापसी का इंतजार कर रहे हो तो, तुम उस मनोवृत्ति में नहीं हो, जिसमें तुम्हें होना चाहिये। परन्तु यदि आप सही होना चाहते हैं तो मैं आपको ऐसा करने की चुनौती देना चाहता हूं, मैं आपको एक अवसर देना चाहता हूं। मैं आपको निमंत्रण देना चाहता हूं कि अपनी कुर्सी से उठें, और यहां सामने आयें और प्रार्थना करें। ऐसा करने के लिये आपको स्वयं को दीन करना है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो यह मेरी जिम्मेदारी नहीं है। परन्तु यदि आप जानते हैं कि आप प्रभु से मिलने के लिये तैयार नहीं हैं तो आप ऐसा जीवन नहीं जी रहे हैं जो सूचित करता है कि आप उत्सुकतापूर्वक उसके आगमन का इंतजार कर रहे हैं और आप प्रभु के साथ मेल करना चाहते हैं, ऐसा करने का सबसे सही समय यहीं और अभी है। मैं आपको एक अवसर देना चाहता हूं, मैं इस विनती को और खींचना नहीं चाहता हूं। यदि आप आज यहां परमेश्वर के साथ संबंध सही करना चाहते हैं तो, मैं आपको आगे आकर घुटनों पर झुकने के लिये कहता हूं।

रूथ, क्या तुम आओगी? क्या यहां कोई पास्टर है? मैं जब भी इस प्रकार प्रार्थना करता हूं तो चाहता हूं कि परमेश्वर के लोगों के पास्टर मेरे साथ हों। यदि आप एक पास्टर हैं और आप यहां हैं तो कृपया ऊपर आयें और इस मंच पर हमारे साथ हो लें। परमेश्वर आपको आशीष दे। आप लोगों के साथ अच्छा लगा।

अब आप जहाँ हैं केवल वहीं आपको घुटने टेकना है। जब तक आप सही विचार से घुटने टके रहें हैं तब तक इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ हैं। घुटनों पर आना स्वयं को दीन करना है, यह प्रभु सामने घुटने मोड़ना है। यही तो हमें करना चाहिये।

मैं आप सब के लिये प्रार्थना करना चाहता हूँ, और न्यूजीलैंड के लिये भी प्रार्थना करना चाहता हूँ। जब मैं यह प्रार्थना कर लूँ और आमीन कहूँ तो आप में से हरके को अपने हृदय से पुकार उठने की आवश्यकता है। मैं आपको शब्द देने नहीं जा रहा हूँ, आप अपने हृदय से परमेश्वर से बात कीजिये। मैं इस समय उन लोगों के लिये प्रार्थना करने का अभिषेक प्राप्त कर रहा हूँ जो दीनता से परमेश्वर के सामने झुके हुए हैं और न्यूजीलैंड देश के लिये जिससे मैं प्यार करता हूँ, जो इस समय बहुत ही लापरवाह, आत्म केंद्रित जीवन बिता रहे हैं। है न? निश्चय ही ऐसा ही है। जिन लोगों ने घुटने मोड़ा है, मैं उन लोगों के लिये प्रार्थना करने जा रहा हूँ। मुझे एक अभिषेक का अहसास हो रहा है, मुझे लगता है कि जब मैं प्रार्थना करूँ तो कुछ होना प्रारम्भ होगा। और तब मैं न्यूजीलैंड के लिये प्रार्थना करने जा रहा हूँ।

प्रभु यीशु आप हमारे उद्धार के कर्ता हैं। आप जी उठने वालों में पहिलौठे हैं। हमारे मध्यस्थ के रूप में आप स्वर्ग में हैं। इस समय आप हमारे लिये मध्यस्थता करते हुए पिता की दाहिने ओर है। चूँकि आप जीवित हैं इसलिये हम भी जीवित होंगे। प्रभु, आप इन प्रियों को देख रहे हैं जिन्होंने जाना है कि वे उस प्रकार नहीं जी रहे थे जैसा उन्हें आपके वचन के प्रकाश में जीना चाहिये था। हे परमेश्वर क्या आप अभी उन लोगों पर यीशु के नाम में अपनी आत्मा उंडेलेंगे? क्या आप अपनी अनुग्रह और विनती की आत्मा उंडेलेंगे कि वे अपने हृदय से आपको पुकारें, प्रभु, कि वे आपको गंभीर, नम्र और परमेश्वर का भय मानने वाली प्रार्थना अर्पित कर सके। यीशु के नाम में उन पर उस आत्मा को उंडेल। मध्यस्थता की आत्मा उंडेल। प्रभु उन पर अनुग्रह कर।

और प्रभु, हम न्यूजीलैंड के लिये, इस मिशन के लिये प्रार्थना करते हैं जिससे हम प्यार करते हैं। प्रभु क्या आप इस देश पर करुणा करेंगे? क्या आप अपनी ओर लोगों का मन फेरने के लिये कुछ करेंगे कि वे अपनी ईश्वररहित, लापरवाह, और पापमय जीवन से बाहर निकल कर अपने परमेश्वर की फिर सके जो उनसे प्यार करता हैं जिसने इस देश को सब देशों से अधिक आशीष दिया है? प्रभु, क्या आप न्यूजीलैंड पर करुणा करेंगे। यीशु के नाम में हम विनती करते हैं।

आमीन, आमीन। अब आप प्रभु से प्रार्थना करें और क्या आप तब तक घुटनों पर नहीं रहेंगे जब तक आपको पता नहीं चले कि आपको प्रभु ने छुआ है।

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