रोमियों 15:13

सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए। आमीन।

आज रात मैं उसी श्रृंखला के साथ आगे जाना चाहता हूं जिस पर मैं बात करता रहा हूं। आज सुबह मैंने डुबकी का बपतिस्मा या पानी में बपतिस्मा के बारे में बात की थी। इस शाम मैं पवित्र आत्मा के बपतिस्मा पर आगे जाने जा रहा हूं। मैंने बताया कि शब्द बपतिस्मा जिसका उपयोग हिंदी बाइबल या अंग्रेजी बाइबल में करते हैं वह यूनानी शब्द का एक लिप्यंतरण है। और यूनानी शब्द का अर्थ पूरी तरह संदेह के परे है, इसका अर्थ होता है डूबना। और इसलिये, मैं डूब शब्द का उपयोग कर रहा हूं।

आज सुबह मैं पानी में डूब के बारे में बात किया, आज शाम मैं पवित्र आत्मा में डूब के बारे में बात करने जा रहा हूं। आप देखें, डूबने के दो तरीके हैं। स्विमिंग पूल का तरीका है जहां आप नीचे पानी में, पानी के नीचे जाते हैं और पानी से बाहर आ जाते हैं। यह जल का बपतिस्मा है। लेकिन फिर नियाग्रा जल प्रपात तरीका भी है। मुझे याद है जब मैं पहली बार खड़ा था और नियाग्रा जल प्रपात देख रहा था। मैंने अपने आप से कहा कि तुम बिना पूरी तरह से भीगे क्षणभर भी उसके नीचे खड़े नहीं हो सकते हो। यही पवित्र आत्मा में बपतिस्मा है। हर जगह जहां इसका वर्णन किया गया है यह इंगित करता है एक या किसी अन्य रीति से पवित्र आत्मा उन पर ऊपर से नीचे आया था।

तो, हम दो डूब के बारे में बात कर रहे हैंः आप उसमें नीचे जाते हैं, आप उसमें नीचे जाते हैं, आप उससे बाहर आते हैं। पवित्र आत्मा में डूबनाः आप उसके नीचे जाते हैं और वह आप पर आ जाता है। लेकिन दोनों ही मामलों में आप पूरी तरह डूब जाते हैं, न कि आंशिक रूप से डूबते हैं, परन्तु पूरी तरह डूबते हैं।

अब यह बहुत रोचक है कि दोनों सुसमाचारों की प्रस्तावना विशेष रूप से बताती है कि प्रभु यीशु पवित्रात्मा में बपतिस्मा देगा। मैं सोचता हूं कि इस पर बहुत कम ध्यान दिया गया है। मैं प्रत्येक सुसमाचार में से चार भाग पढ़ना चाहता हूं। मत्ती 3:11, यूहन्ना बपतिस्मादाता कहता हैः

मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आनेवाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है, मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।

और तब मरकुस 1:8 में हम प्रस्तावना पाते हैं। यूहन्ना बपतिस्मादाता कह रहा हैः

मैंने तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा दिया है पर वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा।

और तब लूका का सुसमाचार 3:16 में यूहन्ना इस प्रकार कहता हैः

तो यूहन्ना ने उन सब के उत्तर में कहाः कि मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूं, परन्तु वह आनेवाला है, जो मुझ से शक्तिमान है, मैं तो इस योग्य भी नहीं, कि उसके जूतों का बन्ध खोल सकूं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।

और तब यूहन्ना का सुसमाचार 1 अध्याय 33वां पद। यह यीशु के अग्रगामी यूहन्ना बपतिस्मादाता द्वारा उसके आधिकारिक परिचय का हिस्सा है। चार सुसमाचारों में से हर एक में, हर एक प्रस्तावना में यह विशेष रूप से बताया गया है कि यीशु अपने लोगों को पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देगा। यूहन्ना के सुसमाचार में प्रस्तावना कुछ अधिक है। अध्याय 1 पद 29 से शुरुआत होती हैः

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।

तब वह आगे पद 33 में कहता हैः

और मैं तो उसे पहिचानता न था, परन्तु जिसने मुझे जल से बपतिस्मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है।

तो यूहन्ना तीन बातें कहते हैं। यह परमेश्वर का मेम्ना है, यह परमेश्वर का पुत्र है और यह वह है जो पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देता है। जबकि हम सब तो इस शानदार कथन से परिचित है कि यीशु परमेश्वर का मेम्ना है लेकिन इसे केवल एक सुसमाचार में कहा गया है जबकि सभी चार सुसमाचारों में विशेष रीति से बताया गया है कि यीशु पवित्रात्मा से बपतिस्मा देनेवाला है।

दूसरे शब्दों में, यह उन महत्वपूर्ण बातों में से एक है, जिसे हमें उसके बारे में जानना चाहिये। उसे उद्धारकर्ता, परमेश्वर के मेम्ना के रूप में जानना अद्भुत है। यह, लेकिन यह अंत नहीं है। यह बहुत बहुत महत्वपूर्ण है कि हम उसे व्यक्तिगत रूप से पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देने वाले के रूप में जानें।

अब जब उसकी पृथ्वी पर की सेवा समाप्त हो गई, तो अपने पुनरुत्थान के बाद प्रेरितों 1:4-5 में यीशु यह प्रतिज्ञा दुहराता है। यह बताना वास्तव में कठिन है कि सुसमाचारों में यह प्रतिज्ञा कितनी बार दी गई है। प्रेरितों 1:4-5 में यीशु के बारे में बताया गया हैः

और उनसे मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिसकी चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो। क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे।

अतः यीशु उस प्रतिज्ञा के साथ प्रारंभ करने के लिये सावधान था जिससे यूहन्ना ने उसका परिचय दिया था कि वह उन्हें पवित्रात्मा से बपतिस्मा देगा।

अब, बाइबल के लगभग सभी टिप्पणीकार इस बात पर सहमत हैं कि यीशु की इस प्रतिज्ञा की पूर्ति पिन्तेकुस्त के दिन हुई जो प्रेरितों 2:1-4 में दर्ज है। तो मैं पढ़ना चाहता हूं कि वहां बाइबल क्या कहती है, और तब संक्षेप में विचार करना चाहते हैं कि उसका निहितार्थ क्या है। प्रेरितों 2, पद 1 से प्रारंभ करते हुएः

जब पिन्तेकुस्त का दिन आया, तो वे सब एक जगह इकट्ठे थे। और एकाएक आकाश से बड़ी आंधी की सी सनसनाहट का शब्द हुआ, और उससे सारा घर जहां वे बैठे थे, गूंज गया। और उन्हें आग की सी जीभें फटती हुई दिखाई दीं और उनमें से हर एक पर आ ठहरीं। और वे सब पवित्र आत्मा से भर गये, और जिस प्रकार आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ दी, वे अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।

तो उस अनुभव के तीन क्रमिक चरण हैं। सबसे पहले, यह एक बपतिस्मा था। पवित्र आत्मा ऊपर से आया और उन्हें डुबा दिया। वह सारी जगह, जहां वे बैठे थे, भर गई, वे ऊपर से डुबाये गये।

दूसरी बात, उनमें से हर एक व्यक्तिगत रूप से पवित्र आत्मा से भरा गया था। यह सिर्फ एक सामूहिक अनुभव नहीं था, लेकिन यह एक ऐसा अनुभव था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत हिस्सा था।

और तीसरा, वहां इस भर जाने से एक अतिप्रवाह, एक अलौकिक बहिर्वाह हुआ था। यह मत्ती 12:34 में कहे गये सिद्धांत के अनुरूप था, उस पद का उत्तरार्द्धः

क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है।

इस बात के द्वारा मैं यह आपको समझा रहा हूं कि जब आपका हृदय से भरा है यह मुंह से बात के माध्यम से बाहर निकलता है। नये नियम में ऐसे कई भाग हैं जहां यह लोगों के विषय में कहता है कि वे पवित्र आत्मा से भरे गये। मैंने प्रत्येक भाग को देखा है और हर मामले में अगली बात जो हुई वह यह थी कि लोगों ने बात किया, भविष्यवाणी की, अन्य भाषाओं में बात की, जैसे कई अनुभव हुए। यह एक सार्वभौमिक सिद्धांत है। हृदय भर जाने पर बात मुंह से निकलती है। जब दिल भर जाता है तो वह बातचीत के रूप में मुंह से निकलता है। और पिन्तेकुस्त के दिन भी यही हुआ। जब वे सब भर गये तो अन्य भाषाओं में बात करने लगे, जैसी आत्मा ने उन्हें बोलने की सामर्थ्य दी थी। यह समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि यह ऐसा विषय है जिसमें परमेश्वर और मनुष्य को सहयोग करना है। परमेश्वर ने उन्हें भर दिया परन्तु वे बात करने लगे। पवित्रात्मा ने बात करने का काम नहीं किया; उन्होंने बात करने का काम किया, पवित्रात्मा ने उन्हें भाषा दिया।

मैं बहुत से लोगों से मिला हूं - और काफी समय तक मेरी पृष्ठभूमि पिंतेकुस्त आंदोलन की रही है - जिन्होंने कहा, "भाई प्रिंस, मैं इंतजार कर रहा हूं कि परमेश्वर यह सब करे।" मैं एक व्यक्ति से मिला जिसने कहा, "मैं पच्चीस वर्षों से विलंब करता रहा हूं।" उसने कहा, "मैं इंतजार कर रहा हूं कि परमेश्वर यह सब करे।" मैंने कहा, "तुम अपने शेष जीवन भर के लिये देर कर दोगे क्योंकि यह धर्मशास्त्रीय नहीं है।" परमेश्वर अपना भाग करेगा, आपको अपना हिस्सा करना है। आप बोलने का काम कीजिये, भाषा परमेश्वर देता है। लेकिन, बोलने का काम परमेश्वर नहीं करेगा। जैसा पवित्र आत्मा ने सामर्थ्य दिया था वे सब बोलने लगे।

और मुझे कहना है कि यह सच है, उन्होंने तब तक इंतजार किया जब तक पिन्तेकुस्त के दिन पवित्रात्मा नहीं आया। उसके बाद इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि किसी ने कभी पवित्र आत्मा के लिए इंतजार किया। वह दिया गया था और उसके बाद से जब उन्होंने प्रार्थना की और शर्तों का पालन किया उन्होंने तुरंत पवित्र आत्मा प्राप्त किया।

मैं आज रात यहां उपस्थित आप में से कहता हूं कि यदि आप शर्तों को पूरा करते हैं, और आप प्यासे हैं परन्तु मैं बाद में उसमें जाऊंगा, तो आप आज रात यहां पवित्र आत्मा से भरे जा सकते हैं। यदि कभी इसे पाया है तो यह आपकी रात हो सकती है। हम आगे उस पर आयेंगे।

अब मैं थोड़ा बहुत बताना चाहता हूं कि प्रेरित पौलुस इसका वर्णन कैसे करता है। 2 कुरिन्थियों 1:22 वह कहता है, अच्छा, अच्छा, हम पद 21 भी पढ़ेंगेः

और जो हमें तुम्हारे साथ मसीह में दृढ़ करता है, और जिसने हमें अभिषेक किया वही परमेश्वर है। जिसने हम पर छाप भी कर दी है और बयाने में आत्मा को हमारे मनों में दिया।

अतः पौलुस दो बातें कहता हैः पवित्रात्मा छाप है और यह एक बयाना है। इफिसियों 1:14 में वह ऐसी ही भाषा का उपयोग करता है। इफिसियों 1:14। पद 13 में वह कहता हैः

और उसी में तुम पर भी जब तुमने सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है, और जिस पर तुमने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किये हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी। वह उसके मोल लिये हुओं के छुटकारे के लिये हमारी मीरास का बयाना है, कि उसकी महिमा की स्तुति हो।

और अंत में यह बयाने की बात करता है, "पहला भुगतान।"

तो, पवित्र आत्मा, बपतिस्मा, जो दिख रहा है, जो श्रव्य है, जो कुछ ऐसा नहीं है जो भीतर होता है और दूसरों के द्वारा नहीं देखा जा सकता है, यह कुछ ऐसा है जो देखा जा सकता है और सुना जा सकता है। पौलुस दो बातें कहता है। यह एक छाप और एक अग्रिम भुगतान है।

सबसे पहले, यह एक छाप है। आप पहले से ही यीशु के हैं परन्तु यह आपको सार्वजनिक रूप से उसके जन के रूप में बताता है। वह अपना सार्वजनिक छाप आप पर लगाता है।

मैं नहीं जानता कि क्या आप में से कोई उन दिनों को याद करते हैं जब हम रजिस्टर्ड डाक भेजते थे और आपको उस पर गरम लाख से मुहर लगानी पड़ती थी। क्या आप उन दिनों को याद कर सकते हैं? और फिर आपको उस पर एक छाप लगानी पड़ती थी। वास्तव में पवित्र आत्मा ठीक ऐसा ही है। यह एक छाप है, यह गर्म मोम है। और फिर यीशु उस पर अपनी छाप डालता है और यह आपको अलग करता है। और आप जानते हैं कि पंजीकृत डाक के साथ अलग व्यवहार किया जाता है, आप स्वर्ग के पोस्ट ऑफिस से अलग व्यवहार पाते हैं।

अब दूसरा शब्द अग्रिम भुगतान या जमा है। और यह - यह होता है कि मैं भाषाओं में बहुत दिलचस्पी लेता रहा हूं यह बहुत दिलचस्प होना होता था। इब्रानी में शब्द अर्बन है। अरबी में यह अर्बने (फोनेटिक) है। स्वाहिली में यह अर्बोनी (फोनेटिक) है। दूसरे शब्दों में, एक ही शब्द सभी जगह है। मैं जब सालों पहले अपनी पत्नी के साथ यरूशलेम में रहता था तो अरबी भाषा बोला करता था, और मैं हमेशा 1947 का एक दृश्य याद करता हूं, हमने यरूशलेम में एक नये घर में पहुंचे ही थे और हमें पर्दे के लिये कपड़े खरीदने की जरूरत थी। इसलिए हम पुराने शहर गये और हमें एक व्यक्ति मिला जो पर्दा सामग्री बेच रहा था, और हम जो चाहते थे वह हमने देखा और ये आंकड़े वास्तविक नहीं हैं, वे बस आपको एक विचार देने के लिए हैं। हमें बीस यार्ड की आवश्यकता थी और कीमत प्रति यार्ड 5 डॉलर थी। कुल कीमत सौ डॉलर थी। हमने उस व्यक्ति से कहा, "देखिये, हमारे पास पूरा धन नहीं है लेकिन हम अग्रिम भुगतान के रूप में पांचवां हिस्सा अर्थात बीस डॉलर देंगे।" क्या आप जानते हैं कि वह उसे अरबी भाषा में क्या कहते थे? अर्बोन। और हमने कहा, "अब जब हमने आपको अग्रिम भुगतान कर दिया है तो आपको दो बातें याद रखनी हैं। यह हमारा है, आपको उसे हमारे लिये अलग रखना है, आप उसे किसी और को बेच नहीं सकते क्योंकि वह हमारे लिये है। दूसरा, हमारा अग्रिम भुगतान हमारा आश्वासन है कि हम शेष धन लेकर वापस आयेंगे और सामान ले जायेंगे।"

और पवित्रात्मा में बपतिस्मा यही है। यीशु आप पर बयाना देता है और आपको अपने लिये अलग करता है। उसके बाद आप किसी और ग्राहक के लिये बिकाऊ नहीं हैं।

दूसरा, यह हमारा बयाना है, "तुम्हें लेने के लिये मैं वापस आ रहा हूं।" और जब मैं वापस आता हूं तो बाकी भुगतान लेकर आऊंगा और तब तुम हमेशा के लिये मेरे होगे। यह इस बात का एक श्रेष्ठ और उत्तम चित्र है कि पवित्रात्मा का बपतिस्मा क्या है।

अब छाप क्या है? यह ऐसा प्रश्न है जिस पर लोगों में मतभेद हो सकता है। मैं कहना चाहता हूं कि जहां तक मेरा सवाल है, नया नियम केवल एक ही छाप के बारे में बात करता है और यह अन्य भाषाओं में बात करना है जैसा आत्मा, पवित्रात्मा आपको बोलने के लिये देता है। मैं जानता हूं, और शायद आप में से कुछ भी, कि ऐसे आंदोलन हैं - जमैका का रास्ताफरियन्स एक है - जहां अन्य शिक्षाओं के मानने वालों ने अन्य भाषाओं में बात की। इससे कुछ लोग डर गये, वे कहते हैं, हम कैसे जानें कि हमें सही चीज मिलने वाली है? ठीक है, यीशु ने कहा, "यदि आप परमेश्वर की संतान हैं, कृपया इसे नोट कर लें, और यदि आप अपने स्वर्गीय पिता से एक टुकड़ा रोटी मांगेंगे तो वह तुम्हें सांप नहीं देगा।" ठीक है? दूसरे शब्दों में यदि आप सही चीज मांगेंगे तो आपके पास परमेश्वर की ओर से एक लिखित आश्वासन है कि आपको सही चीज मिलेगी। आपको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। अब, यदि आप परमेश्वर की संतान नहीं हैं तो यह प्रतिज्ञा लागू नहीं होती है। आपको परमेश्वर की संतान होना ही होगा। यीशु ने कहा, यदि तुम अपने स्वर्गीय पिता से पवित्रात्मा मांगोगे तो वह इसे तुम्हें देगा। अतः छाप दृश्य है, कुछ सुनाई देने वाला, कुछ सार्वजनिक होता है। छाप छिपा हुआ नहीं हो सकता है, अन्यथा उसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा। प्रेरितों 2 के अनुसार छाप है - जैसा पवित्रात्मा ने उन्हें दिया था वे सब अन्य अन्य भाषा बोलने लगे।

मैं उसके बारे में चार बातें बताना चाहता हूं। सबसे पहले, वह छाप था जिसे प्रेरितों ने स्वयं अपने स्वयं के अनुभव में पाया था। यीशु ने कहा कि जब तक पिता की प्रतिज्ञा पूरी न हो यरूशलेम में ठहरे रहो। अतः उन्होंने दस दिन तक इंतजार किया। जब पवित्रात्मा आया और उन्होंने अन्य भाषा में बात किया तो फिर उन्होंने इंतजार नहीं किया। यह छाप थी जो उन्होंने अपने स्वयं के अनुभव में प्राप्त की थी।

दूसरा, यह छाप थी जिसे वे दूसरों में स्वीकार करते थे। और कुछ ही क्षणों में हम एक उल्लेखनीय मामले को देखेंगे।

तीसरा, उन्होंने कभी किसी और छाप की मांग नहीं की। मुझे यह दुहराने दीजिये, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण है। देखिये, मैं इतने वर्षों में बहुत से लोगों से मिला हूं, जो कहते हैं, "भाई प्रिंस, मैं कैसे जानूं कि क्या मैंने पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया है? मैंने यह या वह अनुभव पाया है, मैं सच में प्रार्थना करता और खोजता रहा हूं लेकिन मैं कैसे पता कर सकता हूं?" मेरा जवाब है कि आप पता कर सकते हैं कि कब आपको मुहर प्राप्त होता है। जब आप पहली बार अन्य भाषा में बात करने लगते हैं जैसा कि आत्मा आपको देता है तो आपको मिल गया है। मैं आगे यह कहूंगा कि आप में वह (व्यक्ति) है क्योंकि वह एक वस्तु नहीं है।

तो, मुझे फिर से वे तीन बातें कहने दें।

यह मुहर थी जिसे प्रेरितों ने प्राप्त किया था।

यह मुहर थी जिसे वे दूसरों में स्वीकार करते थे।

और वे कभी किसी भी अन्य मुहर की मांग नहीं करते थे।

इसके अलावा, नया नियम हमें कोई भी अन्य मुहर प्रदान नहीं करता है। नये नियम में और कोई विकल्प की पेशकश नहीं की गई है।

आईये अब देखें कि यीशु ने लूका 24:52-53, उसके जी उठने के बाद जब वह अपने चेलों से विदा ले रहा था, तो उसने कहा, (लूका 24:52-53)। इस एक और सोच है जिसे मैं बताना चाहता हूं। बहुत से लोगों ने कहा है, "ठीक है, मैं बहुत खुश हो गया, मैं आनन्द से भर गया हूं, मैं हर समय परमेश्वर की प्रशंसा करता हूं। क्या यह वह मुहर नहीं है?" नये नियम के अनुसार नहीं। यह खुशी से भरा होना अद्भुत है, परमेश्वर की स्तुति करना अद्भुत है, लेकिन यह नये नियम का मुहर नहीं है। मैं आपको बताऊंगा कि मैं कैसे जानता हूं क्योंकि यीशु के पुनरुत्थान के बाद.....लूका के सुसमाचार के अंतिम भाग मेंः

और वे उसको दंडवत् करके बड़े आनन्द से यरूशलेम को लौट गये। और लगातार मन्दिर में उपस्थित होकर परमेश्वर की स्तुति किया करते थे।

तो उनमें बड़ा आनंद था, वे लगातार परमेश्वर से प्रार्थना और उसकी स्तुति कर रहे थे, परन्तु उन्होंने छाप प्राप्त नहीं किया था। उन्होंने पिन्तेकुस्त के दिन तक यह प्राप्त नहीं किया। यीशु ने तब तक इंतजार करने को कहा था। उन्होंने कभी भी लंबे समय तक इंतजार नहीं किया। उसके बाद पवित्रात्मा आया और उन्होंने अन्य भाषाओं में बात की, वह इंतजार का अंत था।

अब मुझे लगता है कि प्रेरितों की पुस्तक में एक विशेष मामला है, जो इसका बहुत उज्ज्वलता के साथ वर्णन करता है, मैं वह भाग खोलना चाहता हूं। यह प्रेरितों 10 में, अध्याय के अंत में है। आप कहानी जानते हैं। अलौकिक रूप से पतरस को कुरनेलियुस के घर के लिए निर्देशित किया गया था। वह सच में वहां जाना नहीं चाहता था क्योंकि एक यहूदी के रूप में उसके लिए यह अन्यजातियों के घर में प्रवेश करना सही नहीं था और उनके साथ भोजन करना तो दूर की बात है। लेकिन परमेश्वर के दबाव में वह गया और अपने साथ उसने सात यहूदी विश्वासियों को भी लिया था। वह साथ में गवाह चाहता था। और जब पतरस उनसे यीशु के बारे में बात कर रहा था तो...प्रेरितों 10:44 कहता हैः

पतरस ये बातें कह ही रहा था, कि पवित्रात्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया।

यह रोचक है कि वह अपने संदेश में कितना आगे आ गया था। पिछले पद में वह कहता हैः

उसकी सब भविष्यद्वक्ता गवाही देते हैं, कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी।

और कुरनेलियुस के घर में उन साधारण मन के लोगों ने विश्वास किया और पापों की क्षमा प्राप्त की। एक बार जब उन्होंने पापों की क्षमा प्राप्त कर ली, पवित्र आत्मा उन पर आने के लिए तैयार हुआ। देखिये? यह कहता हैः

पतरस ये बातें कह ही रहा था, कि पवित्रात्मा वचन के सब सुननेवालों पर उतर आया। और जितने खतना किये हुए विश्वासी पतरस के साथ आये थे, वे सब चकित हुए कि अन्यजातियों पर भी पवित्र आत्मा का दान उंडेला गया है।

याद रखिये, वहां वे इस विश्वास के साथ आये कि सुसमाचार सबके लिये नहीं है परन्तु यहूदी विश्वासियों के लिये है। वे विश्वास नहीं करते थे कि अन्यजाति मसीही बन सकते हैं। परन्तु जब उन्होंने उन्हें अन्य भाषाओं में बात करते सुना तो उन्होंने कहा, "यह सही है। हम तर्क नहीं कर सकते।" उन्होंने क्यों विश्वास किया? वचन कहता हैः

क्योंकि उन्होंने उन्हें भांति भांति की भाषा बोलते और परमेश्वर की बड़ाई करते सुना।

उनके पास कोई अन्य सबूत नहीं था और उन्होंने किसी भी अन्य सबूत की मांग भी नहीं की।

अब, आज, कुछ लोग कह सकते हैं कि "ठीक है, छः सप्ताहों तक रुकना और यह देखने के लिये इंतजार करना था कि क्या उन्होंने सच में फल लाया है।" लेकिन उन्होंने नहीं किया। आप देखो, हम फलों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, हम वरदान के बारे में बात कर रहे हैं। वे दोनों दो अलग बातें हैं, दोनों बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक उपहार एक ही लेन-देन में प्राप्त होता है। फल विकास की एक धीमी प्रक्रिया से प्राप्त होते हैं।

आप में से कुछ ने अभी क्रिसमस मनाया होगा, और निसंदेह आप में से कुछ के घर में अभी भी क्रिसमस ट्री होंगे। क्रिसमस ट्री पर और उसके नीचे आपने अपने उपहार रखे होंगे और जिन लोगों के लिये उपहार रखे गये होंगे वे आये होंगे और उन्होंने अपने अपने उपहार ले लिये होंगे। है न? एकल हस्तांतरण द्वारा उपहार प्राप्त किया जाता है।

दूसरी तरफ, फल, यह क्रिसमस के पेड़ पर नहीं उगते, सेब के पेड़ पर लगते हैं। इसमें समय लगता है, यह एक प्रक्रिया है।

अब कृपया समझें, फल अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन वरदान और फल में भ्रमित मत हों। हम जिसके बारे में बात कर रहे हैं, वह पवित्र आत्मा का वरदान है, कुछ ऐसा जो एक साधारण लेन-देन में प्राप्त किया जा सकता है।

और हां, तब पतरस ने कुरनेलियुस के घर में उपस्थित लोगों के बारे में जवाब दियाः

क्या कोई जल की रोक कर सकता है, कि ये बपतिस्मा न पायें, जिन्होंने हमारी नाईं पवित्र आत्मा पाया है?

दूसरे शब्दों में, उसने उन लोगों में और पिन्तेकुस्त के दिन जो कुछ हुआ था उसमें कुछ भेद नहीं किया।

बाद में, अपने साथी यहूदियों को जो उसकी आलोचना और शिकायत कर रहे थे, बताते हुए पतरस कहता है कि उसे अन्यजातियों के पास जाना और सुसमाचार सुनाना नहीं चाहिये था, प्रेरितों 11:15 में पतरस कहता हैः

जब मैं बातें करने लगा, तो पवित्र आत्मा उन पर उसी रीति से उतरा, जिस रीति से आरम्भ में हम पर उतरा था।

कुरनेलियुस के घर में शक्तिशाली हवा या आग की जीभ दिखाई देने का कोई जिक्र नहीं है लेकिन एक बात जिसने इस अनुभव की पहचान की वह था कि वे सभी अन्य भाषा में लगे। तो मैं कहता हूं, और मैं विश्वास करता हूं कि इस पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है, यह वह छाप थी जिसे प्रेरितों ने पाया था, यह वह छाप थी जिसे उन्होंने दूसरों में स्वीकार किया था, उन्होंने कभी किसी और छाप की मांग नहीं की और नये नियम में नहीं पाता हूं कि कोई और छाप कभी उन्हें दी गई।

अब मुझे पता है - मैं शायद आप में अधिकांश की तुलना में अधिक जानता हूं - कि (मैं नहीं जानता) अन्य भाषा में बात करना कई बार अजीब बात, अपरंपरागत, यहां तक कि कुछ लोग इसे शैतानी भी मानते हैं। मुझे एक समय याद आता है जब एक प्रिय सुसमाचारीय सेवक थे जो मार्ग पर मेरे साथ नहीं चलते थे क्योंकि वह जानते थे कि मैं अन्य भाषा में बात करता हूं। देखो? मैंने उसे माफ कर दिया, लेकिन मैं उनकी राय का समर्थन नहीं करता।

आप देखें, परमेश्वर कभी कभी एक अनुभव की शुरुआत में कुछ ऐसा रखता है जिसे हम ठोकर कहते हैं। यदि आप वास्तव में तत्पर नहीं हैं, तो आप बुझ जायेंगे। कुछ लोगों के लिये लोगों का ऐसी भाषा में बात करना जिसे उन्होंने कभी नहीं सीखा, और शायद बहुत उत्साहित होना घृणास्पद होता है। मैं आपको सलाह देना चाहता हूं कि हम जो मूल रूप से एंग्लो-सैक्सन-यूरोपीय-अमेरिकी पृष्ठभूमि से हैं, एक सुंदर झूठी तस्वीर पाई है कि मसीहियत वास्तव में कैसी है। सबसे पहले, हम इसे बहुत सम्मानजनक मानते हैं। जब आप चर्च में प्रवेश करते हैं तो जोर की आवाज में बात नहीं करते हैं, आप खड़े होते या बैठते हैं और भजन गाते हैं लेकिन आप किसी बात पर उत्तेजित नहीं होते हैं। यह उस मसीहियत की तस्वीर है जिसके साथ मैं बड़ा हुआ। मैं दस साल से प्रति सप्ताह आठ बार कलीसिया में जा रहा था अतः मैं अनुभवहीन नहीं था। लेकिन यह बाइबिल की तस्वीर नहीं है। आप देखिये, हम बहुत कष्ट भोगते हैं, हम में से कई...क्योंकि हम यह अभिव्यक्त करने के लिये स्वतंत्र नहीं हैं कि हम में परमेश्वर क्या कर रहा है। लोगों के बारे में आप बाइबल में पढ़ते हैंः वे रोये, वे चिल्लाये, उन्होंने विलाप किया। उन्होंने ताली बजाया, वे नाचे, वे गाये, वे उत्तेजित हुए। वे उत्साही थे।

मैं थोड़े समय के लिए पूर्वी अफ्रीका में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने वाले एक कॉलेज का प्रमुख था और मुझे बाहर से शिक्षक लेने पड़ते थे। मैंने जाना कि एक शिक्षक में सभी शैक्षणिक योग्यता है, लेकिन आवश्यक नहीं कि एक शिक्षक के रूप में ज्यादा अच्छा हो। लेकिन एक बात के कारण कि वह उत्साहित है कम शैक्षिक योग्यता वाला शिक्षक एक बहुत अधिक सफल शिक्षक हो सकता है। देखो, मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उत्साह का कोई विकल्प नहीं होता है।

जब रूथ और मैं एक साल पहले या सिर्फ एक से अधिक साल पहले, मुख्य रूप से 1000 नए विश्वासियों के साथ मास्को में थे, तो मैं उनके उत्साह से अभिभूत था। मैंने स्वयं से कहा, "परमेश्वर, मैं चाहता हूं कि मुझे अन्य स्थानों में यह मिलता।" जब उन्होंने गाना किया, उन्होंने यह गीत गाया, "यीशु मसीह सब का प्रभु है," वे दस मिनट तक गाते रहते। कोई भी उन्हें रोक नहीं पाता था। रूथ और मेरे पास उस गीत की रिकार्डिंग भी है और जब भी हमें आत्मा में उठने की जरूरत होती हम उसे चालू कर देते। यह एक पेशेवर रिकॉर्डिंग नहीं है, लेकिन उसमें से क्या निकलता है? उत्तेजना, उत्साह।

आप जानते हैं, यदि आप चाहते हैं कि दूसरे भी उस बात पर विश्वास करें जिस पर आप विश्वास करते हैं तो उन्हें कायल करने का एक तरीका उत्साही होना होता है। यदि आपको कॉर्न्स की बिमारी हो गई है और आप कॉर्न्स के लिए एक उपाय पा जाते हैं, और मुझे मालूम है कि कोई उपचार नहीं है, तो मैं कभी भी कॉर्न्स से पीड़ित नहीं होता। इस बारे में आप इतना उत्साहित होंगे, कि आप हर किसी को बताना चाहेंगे कि यदि किसी को कॉर्न्स है तो इसका उपचार उपलब्ध है।

खैर, आपको उससे भी बहुत अधिक मूल्यवान उपाय मिल गया है, आपको पाप के लिए एक उपाय मिल गया है। और अगर आप उत्तेजित नहीं होते हैं और लोगों को इसके बारे में नहीं बताते हैं तो यह अस्वाभाविक है। लेकिन जो उत्तेजना प्रदान करता है वह पवित्र आत्मा है। याद कीजिये, शुरुआत में रूथ और मैंने क्या उद्धृत किया है?

सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

कौन सी बात हमें आशा में बनाये रखती है? पवित्र आत्मा की शक्ति। आप आज में से कितने - खुले तौर पर जवाब न दें - आप में से कितने सच में आशा में बने हुए हैं? आप में से कितने यीशु के बारे में उत्साहित हैं? आप में से कितने छलक रहे हैं, आप शांत नहीं रह सकते? हमें इसी प्रकार होना चाहिए। और यह सब शांत, गरिमामय गंभीरता को वास्तव में नये नियम के साथ बहुत कुछ लेना देना नहीं है। मैं कुछ ही समय में कुछ उदाहरण प्रस्तुत करूंगा।

आगे चलते हैं। अब, नये नियम में दो तरीकों से पवित्र आत्मा में बपतिस्मा दिया गया है। एक सीधे स्वर्ग से, यह सीधे लोगों पर गिरता है। जैसा कि पिन्तेकुस्त के दिन हुआ, जैसा कुरनेलियुस के घर में हुआ था। दूसरा हाथ रखने के द्वारा है। तीन स्थानों में यह वर्णित है। प्रेरितों 8:14-19 में, प्रेरितों 8:14-19, इस शोमरोन में हैः

जब प्रेरितों ने जो यरूशलेम में थे सुना कि सामरियों ने परमेश्वर का वचन मान लिया है तो पतरस और यूहन्ना को उनके पास भेजा। और उन्होंने जाकर उनके लिये प्रार्थना की कि पवित्र आत्मा पायें।

अब उन लोगों ने फिलिप्पुस के द्वारा प्रचार सुसमाचार सुना था। उन्होंने विश्वास किया और उन्हें बपतिस्मा दिया गया था। यह उस अध्याय में पहले ही स्पष्ट रूप से कहा गया है। वे बचाये गए, लेकिन उन्होंने अभी तक पवित्र आत्मा प्राप्त नहीं किया था। और प्रेरित लोग संतुष्ट नहीं थे, वे इस बात से संतुष्ट नहीं हुए कि वे अद्भुत रीति से बचाये गये थे, उन्हें और अधिक चाहिये था। पद 16 में कहता हैः

क्योंकि वह अब तक उनमें से किसी पर न उतरा था...

ध्यान दें कि वचन उन पर उसके उतरने का वर्णन करता है।

...उन्होंने तो केवल प्रभु यीशु में नाम में बपतिस्मा लिया था। तब उन्होंने उन पर हाथ रखे और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया।

तो उस उदाहरण में पवित्र आत्मा अन्य विश्वासियों द्वारा हाथ रखने के द्वारा आया।

और अगले अध्याय में आप पढ़ेंगे कि कैसे तरसुस का शाऊल, जो पौलुस बना, कैसे दमिश्क के शहर में गया, एक शिष्य हनन्याह उसके पास भेजा गया, उस पर हाथ रखे, उसके लिये प्रार्थना की कि वह चंगा हो और पवित्रात्मा प्राप्त करे। तो पौलुस ने हनन्याह द्वारा हाथ रखने से प्राप्त किया।

और प्रेरितों 19 में, एक परिच्छेद है जिसे हमने ऐसी ही एक स्थिति में देखा था, इफिसुस में पौलुस ने कुछ चेलों को पाया। जब उसने उनसे पूछा कि जब उन्होंने विश्वास किया तब क्या उन्होंने पवित्र आत्मा प्राप्त किया था। उन्होंने तो पवित्र आत्मा के बारे में सुना भी नहीं था। तो वह जान गया कि वे यीशु के चेले नहीं थे। उसने पाया कि वे यूहन्ना बपतिस्मादाता के चेले थे। तो उसने कहा कि उन दिनों यह सही था परन्तु अब तुम्हें यीशु में विश्वास के लिये बपतिस्मा लेने की जरूरत है। इसलिए उन्होंने पानी में बपतिस्मा लिया और फिर वचन कहता हैः

और जब पौलुस ने उन पर हाथ रखे, तो उन पर पवित्र आत्मा उतरा, और वे भिन्न भाषा बोलने और भविष्यवाणी करने लगे।

मुझे आपको यह सुझाव देना है कि अन्य भाषा में बात करना बंद न करें। यह अद्भुत है, लेकिन क्यों भविष्यद्वाणी पर न जायें? परमेश्वर ईष्यालु नहीं है, वह आपको अनुभव करायेगा।

पवित्र आत्मा में बपतिस्मा के क्या क्या प्रयोजन हैं? असली प्राथमिक उद्देश्य परमेश्वर से अलौकिक शक्ति प्राप्त करना है। यीशु ने इसी प्रकार प्रेरितों 1:8 में व्यक्त किया था। यीशु उनसे दूर जाने पर था और यह लगभग आखिरी बात थी जो वह उनसे कर रहा था। वास्तव में, यह है। ये पृथ्वी पर यीशु के दर्ज किये अंतिम शब्द हैं। उसने कहाः

परन्तु जब पवित्रात्मा तुम पर आयेगा तो तुम सामर्थ्य पाओगे।

यूनानी भाषा में सामर्थ्य के लिए शब्द डुनामिस है जिससे हमें अंग्रेजी शब्द डायनामाईट (बारूद) मिलता है। और डायनामाइट वह है जो विस्फोटों का कारण बनता है। आप निरीक्षण करेंगे कि जब पवित्र आत्मा उतरा तो यह एक विस्फोट का कारण बना।

बहुत सारे लोग कहते हैं कि उन्हें इस बात से सामर्थ्य मिली कि यीशु मरे हुओं में से जी उठा है। लेकिन यह सटीक नहीं है क्योंकि यीशु पचास दिनों पहले मरे हुओं में से जी उठा था, परन्तु यरूशलेम में किसी ने उस बारे में नहीं सुना था। परन्तु जब पवित्रात्मा आया तो कुछ ही समय में सारा यरूशलेम यह जान गया। यही तो डायनामाईट था, है न? वह एक विस्फोट था। कुछ लोगों को विस्फोट अच्छा नहीं लगता है, वे भयभीत हो जाते हैं। ठीक है, मैं तो कहता हूं कि यदि यह पवित्रात्मा है तो उसे विस्फोट करने दीजिये। जो कुछ उसे करना है, उसे करने दीजिये। मैं कभी भी झाड़ से लटका नहीं रहा हूं, जैसा कि कुछ लोग कहते हैं, परन्तु यदि परमेश्वर मुझसे यही करवाना चाहता है तो मैं यह करने के लिये प्रसन्न हूं। मैंने देखा है कि वह मुझे वास्तव में उस दिशा में नहीं ले गया है!

उन्होंने क्या प्राप्त किया? गवाही देने के लिये सामर्थ्य।

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आयेगा तब तुम सामर्थ पाओगे और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।

आप देखें, सुसमाचार का संदेश अलौकिक है। यह प्राकृतिक घटनाओं का विवरण नहीं है, यह कुछ ऐसा है जो पूरी तरह से अलौकिक है। यीशु की मृत्यु हो गई, वह दफनाया गया था और फिर जी उठा और स्वर्ग में चढ़ गया। यह अलौकिक है। यदि आपको एक अलौकिक घटना की गवाही देनी है, तो आपको अलौकिक शक्ति की जरूरत है। आपको बस धर्मशास्त्र का थोड़ा ज्ञान होना ही पर्याप्त नहीं है। आपको सशक्त होने की आवश्यकता है। और लोग समझदार होते हैं। पापी लोग कभी कभी मसीहियों की तुलना में अधिक परखने वाले होते हैं और वे जानते हैं कि कब यह असली अलौकिक शक्ति के साथ आता है और वे सुनेंगे। मैंने कई अलग अलग संस्कृतियों में इसे पाया है। पापी लोग अलौकिक शक्ति की उपस्थिति को परख सकते हैं। यह उनके लिए कुछ कर सकता है। यह उनके ध्यान को आकर्षित करता है और यीशु ने यही कहा, "तब तुम सामर्थ पाओगे और मेरे गवाह होगे।"

और तब रोमियों 15:18-19 पौलुस अपनी स्वयं की सेवा के बारे में बात करता है और वह कहता हैः

क्योंकि उन बातों को छोड़ मुझे और किसी बात के विषय में कहने का हियाव नहीं, जो मसीह ने अन्यजातियों की अधीनता के लिये वचन, और कर्म। और चिन्हों और अद्भुत कामों की सामर्थ से, और पवित्र आत्मा की सामर्थ से मेरे ही द्वारा किये।

तो पौलुस ने कहा, मेरी में वे ही बातें कहने लायक हैं जो पवित्रात्मा ने किया है। मैं और कुछ भी उल्लेख नहीं करूंगा। उसने कहा, उस अलौकिक शक्ति से पवित्र आत्मा ने चिन्हों और चमत्कारों से, अन्यजातियों, गैर यहूदियों, सुसमाचार प्राप्त न करने वालों को आज्ञाकारी बनाया है।

मैंने कई देशों में अन्यजातियों के साथ व्यवहार किया है। मैं हमेशा पूर्वी अफ्रीका में मेरे पांच सालों को याद करता हूं। मैं अफ्रीकी शिक्षकों को प्रशिक्षण देने वाले एक कॉलेज का प्रिंसिपल था। उस समय हर अफ्रीकी की महत्वाकांक्षा शिक्षा प्राप्त करने की थी। इसलिए मैं कुछ ऐसा सर्वेक्षण कर रहा था जिसकी उन्हें बहुत जरूरत थी। वे छात्रों के रूप में कॉलेज आते और वे बहुत आज्ञाकारी, बहुत सहयोगी होते, क्योंकि उन्हें अपनी शिक्षा चाहिये थी। जो कुछ हम मिशनरियों ने कहा, मूल रूप से वे उसे करते। मुझे याद है, एक दिन मैंने एक साथ छात्रों को बुलवाया और कहा, "मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं। मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आप बहुत आज्ञाकारी हैं, आप लोग बहुत सहायक हैं।" हम जो भी आपसे कराना चाहते हैं उसे आप करते हैं क्योंकि आप अपनी शिक्षा चाहते हैं। लेकिन मैंने कहा, "आप में से अधिकांश के मनों में एक सवाल है जिसका उत्तर नहीं दिया गया है।" और फिर मैंने उनका ध्यान आकर्षित किया। मैंने कहा, "क्या मैं आपको प्रश्न का उत्तर दे सकता हूं?" तब मैंने सच में उन्हें अपनी ओर आकर्षित किया। मैंने कहा, "आपका प्रश्न यह है, क्या बाईबल वास्तव में अफ्रीकियों के लिए एक पुस्तक है, जिस पर हमें विश्वास करना चाहिये या यह सिर्फ गोरों की है जो अफ्रीकियों को दी गई है।" और वास्तव में उनके बुजुर्ग उनसे यही कह रहे थे। तब मैंने उनसे कहा, "आपको कभी भी उस सवाल का उत्तर नहीं मिलेगा जब तक कि आप अपने जीवन में परमेश्वर की अलौकिक शक्ति का अनुभव नहीं करेंगे।" जब आप अपने खुद के जीवन में परमेश्वर की अलौकिक शक्ति का अनुभव करेंगे तब ही आप जानेंगे कि यह स्वर्ग से आया है, न कि ब्रिटेन से या अमेरिका से।" मैंने उन्हें छोड़ दिया, उनके सामने परमेश्वर का वचन बताना जारी रखा, परन्तु मैंने मुख्य रूप से प्रार्थना की। कुछ ही महीनों में उन छात्रों पर पवित्रात्मा का अभिषेक हुआ। कॉलेज के प्रत्येक छात्र ने पवित्रात्मा का बपतिस्मा पाया। उस समय तक आपको उनसे प्रार्थना करने के लिये निवेदन करना पड़ता था। तब से उन्हें प्रार्थना करने से रोकना मुश्किल हो गया, वे आधी रात तक अपने डोरमेटरी में प्रार्थना करते रहते क्योंकि उन्होंने अलौकिक छाप, ऊपर से सामर्थ्य के साथ अलौकिक प्रेरणा पाई थी। मेरे साथी गोरे मिशनरी इस प्रकार की मनोवृत्ति रखते थे - मुझे यह कहने में खेद है परन्तु मैं सही था - "आप अफ्रीकियों को केवल ऊपर उठा सकते हैं। वे बहुत ऊंचा नहीं जाते हैं।" मैंने उनसे बहस नहीं किया। मैंने केवल अपना समय अफ्रीकियों के साथ बिताया। परन्तु आप जानते हैं, जब पवित्रात्मा उतरा तब क्या हुआ? मिशनरी लोग यह देखने नीचे उतर आये कि क्या हो रहा है। तभी उन्होंने अचानक जाना कि अफ्रीकी ऊंचा जा सकते हैं।

तो, यह सिर्फ एक उदाहरण है। उन युवा लोगों, पुरुषों और महिलाओं, को अपने दम पर एक अलौकिक अनुभव की जरूरत थी। एक अन्य जाति और संस्कृति के एक व्यक्ति से एक संदेश प्राप्त करना उनके लिए पर्याप्त नहीं था।

और फिर उन छात्रों के बीच अगले कुछ महीनों में, उनमें से अधिकांश पच्चीस साल की उम्र से नीचे, हमने पवित्र आत्मा के सभी नौ वरदानों को काम करते देखा। वास्तव में, हमने दो लोगों को मृतकों में से जिलाये जाते देखा था। लोग कहते हैं, "क्या तुमने कभी ऐसा देखा?" मेरा जवाब है, मैंने निश्चित रूप से इसे देखा है। मैं गहराई में नहीं जाना चाहता क्योंकि हमारे पास समय नहीं है। लेकिन मुझ पर विश्वास करें, जब लोग मृतकों में से जी उठते हैं तो वे बैठकर सुनते हैं। यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, "तुम जाओ, स्वर्ग के राज्य का प्रचार करो, बीमारों को चंगा करो, मृतकों को जिलाओ, दुष्टात्माओं को निकालो, कोढ़ियों को शुद्ध करो।" वह निर्देश कब वापस लेता है? कभी नहीं। जिन यहूदी लोगों के बीच में हम रहते हैं उनसे मैंने कहा है, "मेरे जैसे गैर यहूदी, हम सच में आप यहूदी लोगों से माफी चाहते हैं कि हमने कभी आप से उस सुसमाचार पर विश्वास करने को कहा जिसे कभी अलौकिक रूप से सत्यापित नहीं किया गया था। क्योंकि धर्मशास्त्र में आपकी संपूर्ण पृष्ठभूमि आपको बताती है कि जब कभी परमेश्वर किसी विशेष दूत के द्वारा एक संदेश भेजता है तो किसी न किसी प्रकार वह हमेशा अलौकिक सत्यापन देता है।" वास्तव में पवित्र आत्मा में बपतिस्मा का उद्देश्य यही है, यह हमें अलौकिक के दायरे में लाने के लिये है। जो एकमात्र दायरा है जिसमें सुसमाचार वास्तव में प्रभावी रूप से घोषित किया जा सकता है।

आईये कुछ समय के लिये इब्रानियों 2 देखें। इब्रानियों 2 पद 3-4ः

तो हम लोग ऐसे बड़े उद्धार से निश्चिन्त रहकर क्योंकर बच सकते हैं? जिसकी चर्चा पहिले पहिल प्रभु के द्वारा हुई, और सुननेवालों के द्वारा हमें निश्चय हुआ। और साथ ही परमेश्वर भी अपनी इच्छा के अनुसार चिन्हों, और अद्भुत कामों, और नाना प्रकार के सामर्थ के कामों, और पवित्र आत्मा के वरदानों के बांटने के द्वारा इसकी गवाही देता रहा।

इब्रानियों का लेखक तीन कारण बताता है कि क्यों हमें सुसमाचार का संदेश सुनना चाहिये। नंबर एक, पहला व्यक्ति जिसने घोषणा की, वह यीशु था। दूसरा, उन लोगों के द्वारा इसकी पुष्टि की गई जो यीशु के व्यक्तिगत चश्मदीद गवाह थे। लेकिन तीसरा कारण पवित्र आत्मा है जो चिन्हों, चमत्कारों और पवित्र आत्मा के वरदानों के द्वारा अलौकिक गवाही देता है। अविश्वासी दुनिया को कलीसिया से उम्मीद करने का अधिकार है और हम यही करेंगे। यदि हम केवल एक बौद्धिक संदेश प्रस्तुत करते हैं और कुछेक पद बताते हैं तो हम परमेश्वर की इच्छा के स्तर से नीचे जी रहे हैं। कुछ लोग बचाये जायेंगे, यह अद्भुत है, लेकिन यह परमेश्वर का सर्वश्रेष्ठ नहीं है।

अब, मैं आपको पवित्र आत्मा के वरदान, बपतिस्मा, के लिए, आगे एक और कारण देना चाहता हूं। यह 1 कुरिन्थियों में कहा गया है। पहला कुरिन्थियों 12:13 यह पूरे नये नियम में सबसे गलत समझा जाने वाला पद है। दरअसल, यह गलत अनुवाद किया गया है और इसका गलत अनुवाद इसलिये किया गया है क्योंकि अनुवादकों को इस बात की एक पूर्व धारणा थी पौलुस क्या कहना चाह रहा था। मुझे कहना है कि जब मैं दस वर्ष का था तो मैंने यूनानी सीखा, जो कुछ मैं कह रहा हूं मैं उसके प्रति पूरी तरह दृढ़ हूं। यदि मैं नहीं होता तो, मैं नहीं कहता। मेरे पास जो अनुवाद है और अन्य अनुवादों में यही है। 1 कुरिन्थियों 12:13।

क्योंकि हम सबने क्या यहूदी हों, क्या यूनानी, क्या दास, क्या स्वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम एक ही आत्मा पिलाये गये।

अब यहां गलत शब्द 'द्वारा' है क्योंकि यूनानी कहता है कि एक ही आत्मा में हम सबने एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया। और नये नियम में और कहीं यह नहीं बताया गया है कि पवित्र आत्मा कभी लोगों को बपतिस्मा देता है। लोग पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाते हैं, लेकिन पवित्र आत्मा बपतिस्मा नहीं करता है। हमने पवित्र आत्मा में पुनः जन्म लिया है, यही हमें देह में शामिल करता है।

अब, जिस शब्द पर बल दिया गया है वह 'एक' है। पौलुस यह कह रहा है बपतिस्मा का उद्देश्य शरीर में एकता का उत्पन्न करना है। एक आत्मा में हम सबने एक शरीर में बपतिस्मा लिया, हम सबको एक ही आत्मा पीने के लिए दिया जाता है। तीन बार वह शब्द 'एक' का उपयोग करता है। आप देखो, मैंने आपको 'में बपतिस्मा' शब्द का प्रयोग करने के संबंध में बताया कि जब आप बपतिस्मा लेते हैं तो आप किसी 'में' बपतिस्मा लेते हैं और किसी 'के लिये' बपतिस्मा लेते हैं लेकिन इन दोनों ही मामलों में, यूहन्ना का बपतिस्मा और मसीही बपतिस्मा, वास्तविक तथ्य है, लोग पहले से उसमें थे जिसमें उन्हें बपतिस्मा दिया गया। उदाहरण के लिये, यूहन्ना का बपतिस्मा पश्चाताप का बपतिस्मा था परन्तु वह उन लोगों को बपतिस्मा नहीं देता जो पश्चाताप नहीं करते। अतः यूहन्ना का बपतिस्मा पश्चाताप उत्पन्न नहीं करता था। यह उसकी स्वीकृति होती थी कि उन्होंने पश्चाताप किया था।

और फिर मसीही बपतिस्मा, पानी में बपतिस्मा, हम मसीह में बपतिस्मा लेते हैं। लेकिन जब हमारा बपतिस्मा होता है तो पहले से ही मसीह में होते हैं अन्यथा हमें बपतिस्मा लेने का कोई अधिकार नहीं है। इसलिए, बपतिस्मा लेना हमें मसीह में नहीं लाता है यह हम पर मसीह में होने की छाप लगाता है।

यह इसके साथ भी ऐसा ही है। एक आत्मा में हम सबने एक शरीर में बपतिस्मा लिया, लेकिन यह नहीं कि हम देह में नहीं थे बल्कि यह छाप ही है कि हम देह में हैं। अतः हर मामले में, में बपतिस्मा, के लिये बपतिस्मा होता है। में माध्यम है। यूहन्ना के बपतिस्मा में यह जल है, मसीही बपतिस्मा में यह जल है, पवित्रात्मा के बपतिस्मा में यह आत्मा था। जिसमें हम बपतिस्मा लेते हैं वह कुछ ऐसा है जिसमें हम पहले से हैं लेकिन यह हमें उसमें होने के रूप में चिन्हित करता है। पश्चाताप में, मसीह में, एक शरीर में। लेकिन जो बात हमें मन में रखने की आवश्यकता है, और यह हाल ही के कलीसियाई इतिहास की त्रासदियों में से एक है, पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देह में एकता उत्पन्न करने के लिये बनाया गया है। लेकिन दुर्भाग्य से हम इतने कामुक हैं कि एकता लाने के बजाय हमने अक्सर विभाजन उत्पन्न करने के लिये इसका प्रयोग किया है। एकता को स्वीकार करने के लिए किया गया है। और उसके लिए, हम सभी को पश्चाताप करने की जरूरत है। अतः मन में ठान लें कि पवित्र आत्मा का बपतिस्मा आपको यह बताने के लिये है कि आप एक ही शरीर के भाग हैं और अन्य हरेक सच्चा विश्वासी चाहे वह किसी भी मजहब या जाति या संस्कृति का हो, वह उसी देह का भाग है।

यही परमेश्वर का उद्देश्य था और दुर्भाग्य से और कई अन्य चीजों की तरह हमने परमेश्वर के उद्देश्य के साथ दुर्व्यवहार किया है। उदाहरण के लिए, एकता का उत्सव इसी उद्देश्य, देह की एकता पर जोर देने के लिये बनाया गया था। हमारी कामुकता के माध्यम से इसने क्या किया है? इसने हमें विभाजित किया है। लेकिन यह परमेश्वर की गलती नहीं है, यह हमारी गलती है। हम सब को कुछ जिम्मेदारी वहन करने की जरूरत है। बहुत अधिक आलोचक होने के लिये और इतना अभिमानी होने के लिए पेंटाकोस्टलवादी। मेरा मतलब है, मैं काफी समय से एक पेंटेकोस्टल रहा हूं, हमारा प्रसिद्ध नारा था, "हमें यह सब मिल गया है।" जब मैंने उनमें से कुछेक बातों को देखा जिन्हें मैंने सोचा, "जो कुछ तुम्हारे पास है वह काफी नहीं है!" मुझे याद आता है जब मैं एक पेंटेकोस्टल कलीसिया में था और वहां यह प्रिय बूढ़ी विधवा थी। वह बीमार थी, गरीब थी। उसने डैनिश भाषा में कहा, "हमें यह सब मिल गया है।" मैंने उसे देखा और सोचा, यदि ऐसा ही है तो यह काफी नहीं है। लेकिन जैसा कि आप देखें, उस मनोवृत्ति ने बहुत से लोगों को नाराज कर दिया है। हम में पेंटेकोस्टलवादियों में यह होता है। हमें पूरा सुसमाचार मिल है। जो कुछ हमारे पास है उससे अधिक नहीं है। हम बपतिस्मा ले सकते हैं, अन्यभाषाओं में बात कर सकते हैं और फिर भी परमेश्वर के मानक के बहुत ही नीचे हो सकते हैं। यह कोई गारंटी नहीं है कि आप बिल्कुल सही कर रहे हैं। यह पूर्णता की मुहर नहीं है, यह सिद्ध बनने के लिए एक मदद है।

बहुत से पेंटेकोस्टलवादियों में यह रवैया होता है - मेरा मतलब है, मैं इसे बहुत अच्छी तरह से जानता हूं, आपने उद्धार पाया है, नया जन्म पाया है, पानी में बपतिस्मा लिया है, अन्यभाषाओं में बात करते हैं, और आप आ चुके हैं। नहीं, नहीं, नहीं, आपने बस शुरू नहीं किया है! यह एक लक्ष्य नहीं है, एक प्रवेश द्वार है। परन्तु यदि आप प्रवेश द्वार को लक्ष्य समझेंगे तो आप कभी भी आगे नहीं बढ़ेंगे। आप में से कुछ पेंटाकोस्टलवादियों को इस पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। यदि आप पेंटेकोस्टल हैं और आप यहां हैं, मैं पेंटाकोस्टलवादियों को प्यार करता हूं, मैं अपना उद्धार उन्हें उधार देता हूं। भले के लिये मैंने कई वर्षों तक सोचा कि वे सब कुछ के बारे में सही थे। और तब मैंने पाया कि उनमें भी उनकी अपनी कमजोरियां थीं। लेकिन इस बात को जान लें कि पवित्र आत्मा में बपतिस्मा मसीहियों को एकता में लाने के लिये है।

एक और बात है जिससे हमें निपटने की जरूरत है, वह शारीरिक अभिव्यक्ति है। मेरी राय है कि ज्यादातर मसीही ऐसा जीवन जी रहे हैं जिसे मैं "बोतल बंद जीवन" कहता हूं। वे उन बातों को व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं जो परमेश्वर ने उनमें डाला है, क्योंकि हममें गरिमा का यह मानक हैः आप एक शांत आवाज में बात करते हैं, आप बहुत अधिक उत्साहित नहीं होते हैं, आप अपने स्थान पर सीधे बैठते हैं, आप उठते हैं, आप खड़े होते हैं, बैठ जाते हैं, आप घुटनों पर आते हैं और आप चर्च के बाहर चले जाते हैं। मेरा मतलब है, मैं काफी समय तक इसमें रहा हूं इसलिये मुझे मत बताओ कि ऐसा नहीं है। नये नियम की मसीहियत में यह बहुत कम देखने को मिलता है। बाइबल में लोगों के अनुभव के साथ ऐसा बहुत कम है। वे उत्तेजित हो गये। आप दाऊद के भजन पढ़ें। वह गरजा, वह रोया, उसने आंसुओं के साथ अपना बिस्तर गीला किया। वह मजबूत भावना वाला व्यक्ति था। यहां तक कि यीशु भी, वह कराहा, वह रोया, उसने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।

देखिये, मेरा मतलब है कि मुझसे अधिक किसी की ऐसी पृष्ठभूमि नहीं है। मेरा पालन पोषण प्राचीन स्कूल टाई परंपराओं में हुआ है। यदि आप ब्रिटेन के बारे में कुछ जानते हैं, मैं ईटन और कैम्ब्रिज में शिक्षित किया गया। वह साम्राज्य का एक गढ़ था। लेकिन, एक रात परमेश्वर ने मुझे पवित्र आत्मा में बपतिस्मा दिया। मुझे मालूम नहीं था कि वह क्या है मैं चर्च में नहीं जाता था, यह सेना के बैरक कक्ष में हुआ था। मैं इतना अनभिज्ञ था कि मुझे पता नहीं था कि उद्धार पाने के लिये मुझे या आत्मा में बपतिस्मा पाने के लिये मुझे चर्च जाना चाहिये। मैंने दोनों ही अनुभव सेना के एक बैरक के कमरे में रात के बीच में पाये। लेकिन जब मैं चर्च जाने लगा तो मुझे पता चला कि लोग परमेश्वर को काम करने नहीं देते हैं। अब, मैं एक सुपर भावुक व्यक्ति नहीं हूं। मैं सोचता हूं कि आप में से अधिकांश जो मेरे बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं, वे -

लेकिन मुसीबत यह है कि हमने अपनी भावनाओं को बुझा दिया है। जो कुछ परमेश्वर ने हम में किया है उसे हमने स्वतंत्र अभिव्यक्ति नहीं दिया है। मैं रविवार की रात को आराधना के बारे में बात करने जा रहा हूं। अगर आप वहां होंगे, तो मैं थोड़ा सा उससे आगे जाऊंगा। लेकिन आराधना केवल शब्द कहना ही नहीं है, आराधना शरीर का रवैया है। यह नीचे झुकना है, यह नीचे गिरना है, यह ताली बजाना है। धर्मशास्त्र में आराधना की यही तस्वीर है। हम बाइबिल के मानकों से कोसों दूर हैं और हम एंग्लो सैक्सन्स के बीच एक मुख्य कारण है, और हम चाहे जो कुछ भी हों क्या हमने व्यक्त नहीं किया है पवित्रात्मा ने हममें डाला है। हमने आत्मा को बुझा दिया है, हमने आत्मा को दबा दिया है। हमने सम्मानजनक होने की कोशिश की है, हम बहुत अधिक भावनात्मक या बहुत उत्साहित होने से भयभीत हो गये हैं।

मैं एक सुपर भावुक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन मैं पवित्र आत्मा की मानने में विश्वास करता हूं। जो कुछ पवित्र आत्मा ने मुझमें डाल दिया उसे व्यक्त करने में मैं विश्वास करता हूं।

मुझे आप लोगों की बस एक छोटी सी सूची देने दें, हमें आगे बढ़ते जाना है। यहां परमेश्वर से मुलाकात करने वाले लोगों में से कुछ हैंः

अब्राहम। प्रभु ने उसे दर्शन दिया और इब्राहीम ने क्या किया? वह अपने मुंह के बल गिर गया। आप में से कितने ऐसा करेंगे? आप में से कुछ करेंगे। जब कभी मैं मसीहियों को वह भजन गाते सुनता हूं तो मैं हमेशा मुस्कुराता, "शाही मुकुट आगे लाओ और सभों के प्रभु को मुकुट पहनाओ। पराजित स्वर्गदूत गिराये जायें।" मैं सोचता हूं कि प्रिय चर्च के सदस्यों, उन स्वर्गदूतों का गिरना सही है हमारा नहीं। नहीं, नहीं, नहीं। हम उसके लिए बहुत ही सम्मानजनक हैं।

और फिर इसराइल आया। वचन कहता है, कि जब प्रभु ने अलौकिक आग के द्वारा उनके बलिदान को स्वीकार कर लिया तो वे सभी अपने चेहरे के बल गिर गये और चिल्लाये। हमने नहीं किया। बाइबल कहती है कि हम आनन्द से चिल्लायें। मैं आपको बताना चाहता हूं, चिल्लाना जोर से गाना नहीं है। मुझे नहीं लगता है कि आज की रात मैं आप लोगों को इस ओर ले जाऊंगा, हम रविवार की रात को उस पर जायेंगे। लेकिन, चिल्लाना, चिल्लाना है। मुझे यकीन है कि आप में से कुछ लोग फुटबॉल मैच देखने के लिए जाते हैं। अपने हाथ खड़े मत करो, आप शर्मिंदा हो सकते हैं, लेकिन आप जानते हैं। और जब टीम गोल करती है तो आप क्या करते हैं? आप खड़े होते और चिल्लाते हैं! क्यों? क्योंकि आप उत्साहित हैं। यदि आप फुटबॉल से उत्साहित हो सकते हैं, तो क्यों न यीशु और पवित्र आत्मा के बारे में उत्साहित हों?

और तब यहोशू। यरीहो के बाहर वह प्रभु की सेना के प्रधान से मिला और वह भूमि पर मुंह के बल गिर गया। वास्तव में, मैं आपको यह बताने का जोखिम उठाता हूं कि बाइबल के अधिकांश व्यक्तियों ने कम से कम एक बार प्रभु के सामने मुंह के बल दंडवत् किया है। और फिर परमेश्वर उससे कहा, "प्रभु ने उससे कहा, अपने पांव से जूतियां उतार डाल, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र है।" हमने किया है। क्या आप कभी ऐसे स्थान पर गये हैं जहां आपको अपने जूते उतारने पड़े हैं। दो साल पहले यरूशलेम में हम एक सम्मेलन में थे जहां लोगों ने बिना किसी के निर्देश के अपने पांवों से जूतियां उतारना शुरू किया क्योंकि वे जानते थे कि वे पवित्र स्थान में हैं।

वचन कहता है कि जब मंदिर में परमेश्वर की आग, उपस्थिति और परमेश्वर की महिमा आयी तो वे अपने चेहरे के बल गिर पड़े। वे बर्दाश्त नहीं कर सके।

मैं यिर्मयाह पढ़ना चाहता हूं क्योंकि वह एक सम्मानजनक नबी था। उन्होंने बाइबल का काफी भाग लिखा, मेरा मतलब है अन्य किसी से अधिक। यिर्मयाह 23:9 यह कहता हैः

भविष्यद्वक्ताओं के विषय मेरा हृदय भीतर ही भीतर फटा जाता है, मेरी सब हड्डियां थरथराती हैं, यहोवा ने जो पवित्र वचन कहे हैं, उन्हें सुनकर, मैं ऐसे मनुष्य के समान हो गया हूं जो दाखमधु के नशे में चूर हो गया हो,

प्रभु की पवित्रता के प्रति यिर्मयाह की प्रतिक्रिया यही थी। उसने कहा, "मेरी सभी हड्डियां हिल गई हैं।" आप अपनी हड्डियों को अपने शरीर को हिलाये बिना हिला नहीं सकते हैं, यह असंभव है। उसने कहा, "प्रभु की पवित्रता के कारण मैं एक शराबी आदमी की तरह हूं।" क्या आपने कभी भी प्रभु की पवित्रता को इस तरह देखा है कि यह आपके भौतिक शरीर को प्रभावित करे? हम में से अधिकांश, हम बहुत कम राशन पर जी रहे हैं।

पिन्तेकुस्त के दिन, प्रेरितों पर पवित्र आत्मा आया था और वे सब बहुत सम्मानित हुए थे। नहीं। इसके ठीक विपरीत, उन्होंने बहुत ही अजीब, अशोभनीय तरीके से व्यवहार किया। वे सब ऐसी भाषाओं में एक साथ बात कर रहे थे जिन्हें उन्होंने नहीं सुना था और आप जानते हैं, अविश्वासियों ने क्या कहा? वे नशे में हैं। जब कभी भी आप चर्च के बाहर चले गये तो क्या उन्होंने आपके बारे में ऐसा कहा है?

प्रेरित यूहन्ना ने एक दर्शन में यीशु को देखा और वह मृतक की तरह उसके पैरों पर गिर गया। एक शक्ति थी जिसने उसे अभिभूत किया था।

मैं दूसरी बातों पर नहीं आगे जाऊंगा क्योंकि मैं अब इसके एक महत्वपूर्ण हिस्से पर आना चाहता हूं जैसा हमेशा होता है समय समाप्त हो रहा है। प्राप्त करने के लिये सात शर्तें हैं और मैं बहुत संक्षेप में उन्हें बताने जा रहा हूं।

एक, पश्चाताप करो। प्रेरितों 2:38 "मन फिराओ, और बपतिस्मा लो"

दो, बपतिस्मा लो। बपतिस्मा लो और आप पवित्र आत्मा प्राप्त करेंगे।

तीन, प्यासा हो। यीशु ने कहा, "यदि कोई प्यासा है, तो वह मेरे पास आये और पिये।"

चार, आप यीशु के पास आ गये हैं। पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देने वाला केवल एक ही है। यदि आप बपतिस्मा चाहते हैं तो आपको बपतिस्मा देने वाले के पास आना चाहिये।

पांच, आपको मांगना है। यीशु ने कहा, "जब तुम बुरे होकर, अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता मांगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा?" बहुत से मसीही कहते हैं, "ठीक है, मुझे लगता है कि यदि परमेश्वर मुझे पवित्रात्मा देना चाहता है तो वह देगा। मुझे पूछने की जरूरत नहीं है।" ठीक है, यीशु ने कहा, आपको पूछने की जरूरत है।" उसने कहा कि तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा देगा।

और फिर आपको प्राप्त करना है। प्राप्त करने की तुलना पीने से की गई है।

और अंत में, और यह कुछ लोगों के लिए मुश्किल काम है, आपको अपने शरीर के अनियंत्रित सदस्य को मानना है, अंग जिस पर आप नियंत्रण नहीं कर सकते हैं। पवित्रात्मा के द्वारा जीभ का नियंत्रण परमेश्वर को प्रमाण है कि वह नियंत्रण लेने के लिए आ गया है। आप जानते हैं, बाइबल में जीभ को "मेरी महिमा" कहा गया है। यह सब अनुवाद में नहीं है लेकिन भजन 16 में भजनकार ने कहा, "मैं यहोवा को धन्य कहता हूं।" प्रेरितों 2:26 में पतरस ने इसे उद्धृत किया और कहा, "इसी कारण मेरा मन आनन्द हुआ, और मेरी जीभ मगन हुई।"

आपकी जीभ आपकी महिमा है? क्या आप यह जानते थे? क्या आप जानते हैं क्यों? क्या आप जानते हैं कि आपको जीभ क्यों दी गई है? एक सर्वोच्च प्रयोजन के लिएः परमेश्वर की महिमा के लिये। जीभ का कोई भी उपयोग जो परमेश्वर की महिमा नहीं करता है वह उसका दुरुपयोग है। लेकिन जब पवित्र आत्मा आता है और आपकी जीभ का नियंत्रण लेता है तो जो कुछ आप कहते और करते हैं वह परमेश्वर की महिमा करेगा। यह पहला अवसर होगा कि आप अपनी जीभ का उस काम के लिये करेंगे जिसके लिये वह बनाया गया है। यही पहली बार होगा जबकि आप उस उद्देश्य के लिये अपनी जीभ को प्रयोग कर रहे होंगे जिसके लिये परमेश्वर ने उसे आपके मुंह में दिया है।

ठीक है। अब, हम मेरे छोटे विवरण के अंत पर आ गये हैं, लेकिन आप में से कुछ हैं जो निस्संदेह, प्यासे हैं। कम से कम, मैं ऐसे लोग हैं जानता हूं। यदि नहीं हैं तो यह अफसोस की बात है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज रात यहां आप इस अनुभव को कैसे प्राप्त कर सकते हैं। मैं यूहन्ना 7 में यीशु के शब्दों को पढ़ना चाहता हूंः

यदि कोई पियासा हो तो मेरे पास आकर पीये। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करनेवाले पाने पर थे क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।

यह तब तक नहीं दिया जा सकता था जब तक यीशु की महिमा न हो। परन्तु जब वह पिता के दाहिने हाथ पर था तो उसने पवित्र आत्मा उंडेल दिया।

अब, ये सरल शर्तें हैं। कुछ शर्तें हैं, जिन्हें आपको पूरा करना चाहिये था लेकिन आप नहीं कर सकते हैं। हो सकता है आपका बपतिस्मा न हुआ हो, हो सकता है आपने पूछा नहीं हो। मेरा बपतिस्मा नहीं हुआ था, मैं तो बपतिस्मा के बारे में जानता भी नहीं था। मैंने नहीं मांगा लेकिन परमेश्वर ने मुझे पवित्रात्मा से भर दिया। मैंने अपने पेट में यह अजीब अनुभूति पाई और मैं जानता था कि यह मेरा पेट है। मैंने कहा, "यह क्या है?" यह वाक्यांश मेरे दिमाग में आया "अन्य भाषा में बोलना।" मैंने कहा, "इस बात का अन्य भाषा में बात करने से क्या लेना है?" तब मैंने एक खाली कमरे में परमेश्वर से जोर से कहा, "परमेश्वर, यदि तू चाहता है कि मैं अन्य भाषा में बात करूं तो मैं यह करने के लिए तैयार हूं।" और यह बात मेरे सीने से होकर मेरे गले में चली गयी और मेरी जीभ चलने लगी। मैं इसे नियंत्रित नहीं कर रहा था और अगली बात जो मुझे पता चली वह थी कि मैं चीनी जैसी कोई भाषा बोल रहा था। मैंने मांगा नहीं था और मैंने बपतिस्मा नहीं लिया था। विश्वास कीजिये, बाद में, मुझे पानी में बपतिस्मा दिया गया था।

लेकिन कुछ बुनियादी शर्तें हैं। "किसी को प्यास हो," यीशु ने कहा, "वह मेरे पास आये और पीये।" "उसमें से नदियां बह निकलेंगी।" एक अद्भुत परिवर्तन! आप एक प्यासे व्यक्ति के रूप में आते हैं और आप पानी की नदियों का एक सोता बन जाते हैं। क्या करता है यह? पवित्र आत्मा में बपतिस्मा। आपको क्या करना है? यह बहुत आसान है। आपको यीशु के पास आना है। केवल एक ही बपतिस्मादाता है, बपतिस्मा पाने के लिये बपतिस्मादाता के पास आईये। आपको पीना है।

यहीं पर धार्मिक लोगों को समस्या होती है, यह बहुत आसान है। किसी ने कभी अपना मुंह बंद करके नहीं पिया है। किसी ने कभी अपना मुंह बंद करके पवित्रात्मा में बपतिस्मा नहीं पाया है। आप अपना मुंह खोलने और उसमें कुछ ग्रहण करने से पीते हैं। आप पानी नहीं ले रहे हैं, आप परमेश्वर की अलौकिक शक्ति ले रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी किसी को ऐसा करते और न पाते देखा है। मुझे याद नहीं आता है। मैंने तीन हजार लोगों को एक अनुभव में प्राप्त होते देखा लेकिन उन्होंने पिया। और पीने के बाद अतिप्रवाह होता है। आपको याद है, "हृदय की बहुतायत से मुंह बात करता है।" यही वह स्थान है जहां आपको विश्वास होना है क्योंकि पवित्र आत्मा आपके लिए बोलने नहीं जा रहा है। जबकि पवित्रात्मा आपको शब्द देता है, आपको बोलना है। यह विश्वास का एक कदम है लेकिन विश्वास के बिना परमेश्वर को खुश करना असंभव है।

यदि आप इस अद्भुत, अलौकिक अनुभव को प्राप्त करना चाहते हैं तो मैं आज रात यहां एक साधारण प्रार्थना में यहां किसी को भी या किन्हीं भी लोगों का नेतृत्व करने के लिए तैयार हूं। याद रखें, हम आपसे किसी कलीसिया को छोड़ने या शामिल होने के लिए नहीं कह रहे हैं, हम यहां इस काम के लिये नहीं हैं। हम तो बस आपको यह सुझाव दे रहे हैं कि जो प्रेरितों को चाहिये था, जो प्रारंभिक कलीसिया को चाहिये था, वह आपको भी चाहिये। तो यदि आप चाहेंगे कि आगे आयें, और मैं प्रार्थना में आपका नेतृत्व करूं मैं यह करूंगा। अविलम्ब अगर आप कहते हैं, "भाई प्रिंस, आज रात मुझे यहां वास्तव में प्यास लगी है और मैं इस अनुभव को पाना चाहता हूं।" तो जहां आप हैं वहां खड़े हो जायें और आगे की ओर आयें और मैं प्रार्थना में आपका नेतृत्व करूंगा।

यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मुझे नहीं मालूम कि क्या कोई उन कुर्सियों में से कुछ को हटा सकता है, क्या आप कर सकते हैं? यह वास्तव में अद्भुत है। आगे बढ़िये, क्योंकि आपके पीछे बहुत से लोग आ रहे हैं। यह अद्भुत है, है न? आप में से जिन्होंने पहले से ही बपतिस्मा ले लिया है, कृपया इन लोगों के लिये प्रार्थना करें। मेरे लिए भी प्रार्थना में रहो। थोड़ा और आगे आओ, मुझसे मत डरो, मैं काटूंगा नहीं। यदि आप आगे नहीं बढ़ सकते हैं, तो मुझे नहीं लगता है कि हमें इतने सारे प्यासे लोग मिलेंगे। यह अद्भुत है! यह न्यूजीलैंड में एक असली फर्क ला सकता है। यदि आप सभी लोग पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जायें, तो किसे पता कि न्यूजीलैंड में क्या होगा? आमीन। मैं तो बस इंतजार कर रहा हूं, क्योंकि और भी लोग आ रहे हैं। खैर, मुझे कभी नहीं लगा कि हमें इतने सारे लोग मिलेंगे। यह रोमांचक है, मैं इसका आनंद ले रहा हूं।

आप जानते हैं, प्रेस्बिटेरियनों को बहुत कड़े लोग माना जाता है। यह उन सब के बारे में वास्तव में सच नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं प्रेस्बिटेरियनों का विश्वास वचन क्या है? "मनुष्य का सर्वोच्च कर्तव्य परमेश्वर की महिमा करना और हमेशा के लिए उसका आनंद लेना है।" आप में से कितने परमेश्वर का आनंद ले रहे हैं? परमेश्वर चाहता है कि आनंद लिया जाये। उसका आनंद लेने के लिए वह हमारी मदद करता है। यह आपको परमेश्वर का आनंद लेने के लिए एक नई समझ दे देगा।

अब, सुनिये, आप भाई प्रिंस के लिए नहीं आये हैं। मैं बपतिस्मादाता नहीं हूं। आप यीशु के पास आये हैं। लेकिन मैं आपको एक बहुत ही साधारण प्रार्थना दूंगा कि आप प्रार्थना कर सकें, जिसके द्वारा आप बपतिस्मा के लिए एक उम्मीदवार के रूप में अपने आपको यीशु के सामने पेश कर सकें। आप उसके पास आते हैं, आप मांगते हैं, तब आप पीते हैं। इसी बिंदु पर धर्म इसे कठिन बना देता है, क्योंकि आपको कुछ सरल और व्यावहारिक करने के लिए मिल गया है, जो मूर्खतापूर्ण लग रहा है। आपको अपना मुंह खोलना और पवित्र आत्मा में पीना शुरू करना है। यह पानी नहीं है, लेकिन यह परमेश्वर की आत्मा है जिसे आप पी रहे हैं। कुछ समय बाद, और कुछ लोगों के लिए यह जल्द है, कि आप जो थोड़ा लेते हैं वह नदी बन जाता है और आप में से, आपके मुंह से बह निकलने लगता है। यह कैसे बाहर आता है? हृदय की बहुतायत से मुंह बात करता है। जब आपका हृदय मुंह में से बात करता है तो क्या होता है? आपका हृदय छलक रहा होता है। आप भीतर नहीं देख सकते हैं, आप नहीं जानते हैं कि यह कब भर गया है लेकिन जब अतिप्रवाह सुनते हैं तो आपको जानना चाहिये कि यह अवश्य ही भर गया है वरना छलकता नहीं।

तो अब मुझे यह कहने दें और मैं इस प्रार्थना में आपका नेतृत्व करूंगा। अपने आप को परमेश्वर के साथ अकेला कर लीजिये, अपने आसपास के लोगों के बारे में चिंता न कीजिये। यदि कोई थोड़ा उत्साहित होता है तो आप चिंता मत कीजिये। हमने निर्णय लिया है कि जरूरी नहीं है कि उत्साह पाप हो। इस महत्वपूर्ण कदम को याद रखेः आप पीते हैं और एक निश्चित बिंदु पर विश्वास में, बात करना शुरू करते हैं। परन्तु याद रखिये, यदि आप परमेश्वर की संतान हैं, और मैं जोर देना चाहता हूं कि यदि आप रोटी मांगेंगे तो वह कभी भी पत्थर नहीं देगा। यदि आप पवित्रात्मा मांगेंगे तो आपको पवित्रात्मा ही मिलेगा।

मैं एक प्रार्थना में आपका नेतृत्व करने जा रहा हूं जिसके द्वारा आप यीशु में आते हैं। मैं आपको अपने उद्धारकर्ता के रूप में यीशु में अपने विश्वास को स्वीकार करने में आपका नेतृत्व करने जा रहा हूं यदि आपने कभी भी उद्धार नहीं पाया है तो ऐसा करने से आप इसी समय उद्धार पा सकते हैं। और फिर जब आप पवित्र आत्मा प्राप्त करने के लिए योग्य होते हैं। जब आप इस प्रार्थना के अंत में आमीन कहते हैं, तो फिर और प्रार्थना मत कीजिये। आप प्रार्थना द्वारा पवित्र आत्मा प्राप्त नहीं करते हैं, आप पीने से पवित्र आत्मा प्राप्त करते हैं। बहुत सारे लोगों ने ठीक इसी तरह खुद प्रार्थना की है, क्योंकि जब आप अपनी खुद की भाषा में बात करते हैं तो आप एक नई भाषा बोलना प्रारंभ नहीं कर सकते हैं।

तो, मैं इस बहुत ही साधारण प्रार्थना में आपका नेतृत्व करूंगा। कृपया याद रखें कि आप मुझसे प्रार्थना नहीं कर रहे हैं। मैं तो बस आपको शब्दों को दे रहा हूं जिससे आप यीशु के पास आ सकते हैं। जब आप आमीन कहा है, तो आपको आगे क्या करना है? आप पीना शुरू करते हैं। ठीक है? माफ करना, आप मुझसे बाद में बात करना प्रारंभ कर सकते हैं लेकिन यदि आप अभी सवाल करना शुरू करते हैं तो हम आगे नहीं बढ़ेंगे। अपने सवाल का जवाब पाने के लिए बस परमेश्वर पर भरोसा रखिये। ठीक है? तो, अभी के लिये यही है, मैं चाहता हूं कि आप मेरे पीछे इन शब्दों को कहेंः

प्रभु यीशु मसीह, मैं विश्वास करता हूं कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं और परमेश्वर के लिए एक ही रास्ता हैं, कि आपने मेरे पापों के लिए क्रूस पर मृत्यु सही, और पुनः मरे हुओं में जी उठे। जो पाप मैंने किये हैं, उन्हें मैं स्वीकार करता हूं, और मुझे आपकी क्षमा का, और आपके कीमती खून में मुझे शुद्ध होने का भरोसा है। मैं यह करने के लिए आपको धन्यवाद देता हूं। अब, प्रभु यीशु, मैं पवित्र आत्मा में मेरे बपतिस्मादाता के रूप में आपके पास आता हूं। मैं अपने आपको आपके प्रति खोलता हूं, और मैं आपकी आत्मा पीने के लिए शुरू करता हूं जिसे आप पहले से ही मुझ पर उंडेल रहे हैं।

मैं पुनः यह कहता हूं।

मैं आपकी आत्मा पीना शुरू करता हूं जिसे आप पहले से ही मुझ पर उंडेल रहे हैं। प्रभु मैं एक प्रवाह के लिये तुझ पर भरोसा रखता हूं। इसके लिये मैं विश्वास में आपका धन्यवाद करता हूं। यीशु के नाम में, आमीन।

अब पीना शुरू करते हैं। मुझे मत देखो, मैं बपतिस्मादाता नहीं हूं। बस, अपनी जीभ से प्रयास करो, बात करना शुरू कीजिये। आपको चिल्लाने की जरूरत नहीं है, लेकिन इतना स्पष्ट कहना है कि पता चले कि आपने यह कहा है। यह ठीक है, आप में से कई पहले से ही बात कर रहे हैं। थोड़ा सा आवाज बढ़ाईये। (डेरेक अन्य भाषा में बोल रहा है।) मुझे लगता है कि मेरे आसपास के अधिकांश लोग पहले से ही बात कर रहे हैं। सवाल पूछने वाला व्यक्ति धाराप्रवाह बोल रहा है। बस, प्रभु का आनंद लेने के लिए समय निकालिये। अपनी समस्याओं को भूल जाओ, अपने सवालों को भूल जाओ, और सिर्फ अपने आप को जाने दो। इस अनुभव के माध्यम से प्रभु के लिए अपने आप को मुक्त कर दीजिये।

प्रभु यीशु, धन्यवाद। प्रभु यीशु, धन्यवाद। यह सही है। यदि आप जरा सा उत्साहित होते हैं तो हम समझ जायेंगे। धन्यवाद प्रभु। धन्यवाद यीशु। अब आप सीधे परमेश्वर से संवाद कर रहे हैं। आपकी पवित्र आत्मा प्रभु से प्रत्यक्ष तौर पर प्रार्थना कर रही है। उसे अब और आपके मन की संकरी गलियों से नहीं गुजरना है। आपकी आत्मा परमेश्वर के साथ संवाद करने के लिए स्वतंत्र है। परमेश्वर को धन्यवाद। धन्यवाद यीशु। धन्यवाद। सब ठीक है। प्रभु यीशु धन्यवाद। (डेरेक बोल रहे हैं।) ठीक है। धन्यवाद परमेश्वर। परमेश्वर को धन्यवाद। आमीन।

(एक स्त्री पवित्र हंसी हंसती है)

बाइबल कहती है कि देख, ईश्वर न तो खरे मनुष्य को निकम्मा जानकर छोड़ देता है, और न बुराई करनेवालों को संभालता है। वह तो तुझे हंसमुख करेगा और तुझ से जयजयकार करायेगा।

ठीक है बहन, मैंने यह अनुभव किया है। यह अद्भुत है। आमीन।

अब, अन्य सभी लोगों के बारे में क्या कहते हैं जो अन्य भाषा में बात करते हैं? जहां आप हैं, वहीं अपने पैरों पर खड़े हो जाईये और आईये सभी एक साथ अन्य भाषा में परमेश्वर की आराधना करें। अंग्रेजी नहीं, केवल अन्य भाषा। आईये, इस स्थान को परमेश्वर की आराधना से भर दें।

(अन्य भाषा में बोलना)

प्रभु यीशु, प्रभु यीशु, हम आपकी आराधना करते हैं। हम आपकी आराधना करते हैं, यीशु। आप हमारे प्रभु हैं। (स्त्री लगातार हंसती जाती है)। मुझे जलन होती है। मुझे जलन हो रही है। मुझे यह अनुभव हुआ था। इसके जैसे और कुछ नहीं है। यदि आपको हंसने की इच्छा हो रही है तो हंसिये। यह पूरी तरह वचनानुसार है। परमेश्वर तब तक किसी सिद्ध व्यक्ति को स्वयं से दूर नहीं करेगा जब तक कि वह उसके होठों में हंसी और होंठों में आनंद के जयजयकार न भर दे। धन्यवाद प्रभु यीशु। धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद।

थोड़े समय के लिये अपना सम्मान भूल जाईये। उत्तेजित हो जाईये। धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद, हालेलुयाह। धन्यवाद, प्रभु यीशु।

यीशु ने नहीं कहा कि यह एक पोखर होगा, उसने कहा, कि यह नदियां होंगी। अतः आगे बढ़िये, उसे बहने दें, उसे मत काटें। आज रात सचमुच स्वतंत्र हो जायें, यह निश्चय जान लें कि आप अन्य भाषा में प्रभु की तारीफ कर रहे हैं। अपने मन में कोई शक के साथ इस जगह से बाहर मत जायें। आज रात इस स्थान को यीशु के भजन से भर दें। अपनी आवाज ऊंची कीजिये और उसे स्तुति और धन्यवाद दें। तू योग्य है। धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद। वध किया हुआ मेम्ना धन्य है, स्तुति और आदर के योग्य है। हालेलुयाह। हमें तुमसे प्यार है।

अब सुनिश्चित हो जायें, आपको वह मिल गया है, मैं चाहता हूं कि आप में से जिन जिनको अन्य भाषा मिला है वे कहें। शांति से पर सुनने लायक आवाज में। और याद रखें। आप प्रभु से बात कर रहे हैं। आप मुझसे बात नहीं कर रहे हैं। आप यह जानते हुए यहां से जायें कि आपने एक अनजानी भाषा बोली है। याद रखें, यदि आपने रोटी मांगी है तो आपको पत्थर नहीं मिलेगा। आमीन। परमेश्वर ने जो कुछ आपको दिया है, उसका आनंद उठाईये। धन्यवाद, धन्यवाद यीशु।

अब मैं इस सभा का समापन करता हूं। यदि आप रुकना चाहते हैं तो जाने की जरूरत नहीं है। कल हम अगले सिद्धांत हाथ रखने पर बात करेंगे। परमेश्वर आपको आशीष दे। सुरक्षित घर जाईये और अन्य भाषा में बात करते हुए सो जाईये।

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