दो फसलें

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1991
Last Updated: अगस्त 2026
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डेरेक प्रिंस की 'दो फसलें' के माध्यम से यात्रा करें, जो प्रभु की फसल की प्रतिज्ञा का एक गहन चित्र प्रस्तुत करती है, जो नूह से लेकर मूसा तक जाती है। व्यवस्थाविवरण में डूबें, यह समझते हुए कि भगवान की आज्ञाकारिता बारिश और भरपूर फसल की गारंटी देती है। जानें कि कैसे भगवान की प्रतिज्ञा और जलवायु ने इस्राएल के फसल मौसमों को आकार दिया है।
Transcript
अब हम उस विषय के साथ आगे बढ़ेंगे जिसे मैं आखरी दिनों में पिछले सत्र में बता रहा था। इस बार मैं क्टनी विषय पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ जो कि आखरी दिनों में के विषय में बाइबल की शिक्षा का एक मुख्य भाग है। क्टनी धर्मशास्त्र का एक बड़ा विषय है जो कि प्रथम पुस्तक से अन्तिम पुस्तक तक चलता रहता है। मुझे लगता है पहली बार इसका परिचय नूह के समय में उसके साथ परमेश्वर की प्रतिज्ञा में दी गई कि जब तक पृथ्वी बनी रहेगी तब तक बीज बोने का और क्टनी काटने का समय रहेगा।
परन्तु मैं सबसे पहले व्यवस्थाविवरण की पुस्तक निकालना चाहता हूँ जो कि ऐसी पुस्तक जिसमें हमें कनान में उनके प्रवेश करने से पहले इस्राएल के लिये मूसा के निर्देश मिलते हैं। और उसने उन्हें संपूर्ण निर्देश दिए कि उन्हें कैसे व्यवहार करना है और किस प्रकार वे परमेश्वर की विरासत की आशीषों का आनन्द उठा पाएँगे जिसमें परमेश्वर उन्हें लेकर जा रहा था। हम व्यवस्थाविवरण 11 अध्याय 13 से 14 पढ़ने जा रहे हैं। आपको स्मरण रखना है कि इस्राएल मिस्र से बाहर आया था जो कि मूलतः एक समतल देश था और वहाँ पर तुलनात्मक रूप से कम वर्षा होती थी। पानी का मुख्य श्रोत वर्षा नहीं था परन्तु नील नदी था। मिस्र में उनके पास एक उपकरण होता है जिसे शड्डोफ कहा जाता है, जिसे वे नील नदी के पानी से भरे हुए एक बाल्टी में डूबोते हैं, उसे खींचते हैं और उन नालियों में डाल देते हैं जो उन क्षेत्रों तक बहता है जहाँ पर कटनी के लिये उनकी जरूरत है। तो एक प्रकार से पानी उनके नियन्त्रण में होता था। मूसा ने इस्राएल से कहा, जब तुम उस देश में जाओ जो परमेश्वर तुम्हें दे रहा है तो यह ऐसा नहीं होगा। यह पहाड़ियों और घाटियों का देश है और यह आकाश से वर्षा प्राप्त करती है। और उसने कहा, यह तुम्हारे नियन्त्रण में नहीं है, तुम्हें किसी भी समय पानी नहीं मिलेगा। परन्तु यदि तुम परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य रहोगे तो वह तुम्हें वर्षा देगा जिसकी तुम्हें जरूरत होगी। और प्रतिज्ञा यह है। परन्तु बाइबल में वर्षा के साथ-साथ कटनी की भी प्रतिज्ञा है। और हमें समझना है कि कटनी वर्षा पर निर्भर होती थी। निश्चय ही, हर देश में अन्ततः यह सच है। परन्तु इस्राएल के देश में यह और अधिक सच है। क्योंकि वहाँ केवल दो मुख्य मौसम होते हैं। गर्म शुष्क मौसम और ठण्डा आद्र्र मौसम। वहाँ पर बहुत कम वर्षा होती है और वसन्त ऋतु होती ही नहीं है जिस पर आप ध्यान दे सकें।
अप्रैल से प्रायः सितम्बर के अन्त तक गर्म शुष्क मौसम के दौरान् कोई वर्षा नहीं होती है, बिल्कुल भी नहीं। तब उन्हें वह वर्षा मिलती है जिसे पूर्व की वर्षा कहते हैं जो कि सर्दी के मौसम के प्रारंभ में आता है। और कृषि के संबन्ध में इसका उद्देश्य मिट्टी को नरम बनाना होता है जो तब तक कठोर हो चुका होता है, ताकि किसान वह प्रक्रिया प्रारंभ कर सके जो कटनी तक पहुँचाएगा। और यह प्रायः एक बड़ी आशीष होती है।
तब पूरी सर्दी के दौरान् रूक-रूक कर यहाँ-वहाँ बारिश होती है। परन्तु कोई बड़ी बारिश नहीं होती है जिसे बाद की यह अन्तिम बारिश कहा जाता है जो कि प्रायः फसह के समय गिरता है जो कि बाइबल के वर्ष का पहला महीना होता है जिसमें हमारा ईस्टर आता है, अर्थात् मार्च और अप्रैल के दौरान्। और बाद की वर्षा का कृषि संबन्धी उद्देश्य बीज को अंकुरित करना होता है।
यदि पहले की या बाद की बारिश न हो तो फसल शायद पराजित होगी। अतः बारिश हमेशा कटनी से संबन्धित होती है। और यहाँ मूसा द्वारा इस्राएल को दी गई प्रतिज्ञा में वह विशिष्ट रूप से दोनों को जोड़ता है। वह तीन मुख्य प्रकारों की कटनी के बारे में बताता है। वे किसी भी प्रकार से संपूर्ण नहीं होती हैं परन्तु इसमें अनाज, नई दाख और तेल होता है। आप संपूर्ण बाइबल इसे देखेंगे - कम से कम पुराना नियम में - कि ये तीन मूल फसल होते हैं। अन्न का फसल, दाख का फसल और जैतून का फसल। और यहाँ उनका वर्णन किया गया है। मैं उस भाग को पढूँगा। व्यवस्थाविवरण 11 अध्याय 13 पद से प्रारंभ करते हुए।
और यदि तुम मेरी आज्ञाओं को जो आज मैं तुम्हें सुनाता हूँ ध्यान से सुनकर, अपने सम्पूर्ण मन और सारे प्राण के साथ, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो और उसकी सेवा करते रहो,
ध्यान दें कि यह परमेश्वर की ओर से एक उपहार है। बाइबल इस बात पर जोर देती है कि बारिश परमेश्वर के सर्वोच्च नियन्त्रण के अधीन है।
तो मैं तुम्हारे देश में बरसात के आदि और अन्त दोनों समयों की वर्षा को अपने अपने समय पर बरसाऊँगा,....
और तब परमेश्वर के अर्थशास्त्र के उद्देश्य पर ध्यान दें।
जिस से तू अपना अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल संचय कर सकेगा।
कटनी के तीन रूप पाए जाते हैं। और वास्तव में यह संपूर्ण बाइबल में पाया जाता है। जैसे कि हम इसे प्रकाशितवाक्य में देखेंगे।
संपूर्ण बाइबल में भी... और यह एक वर्णन करनेवाला प्रकाशन है। वर्षा पवित्र आत्मा के उण्डेले जाने की एक तस्वीर है। और पुनः, मैं मानता हूँ कि कलीसिया के इतिहास में पवित्र आत्मा का उण्डेला जाना अगली और पिछली बारिश से संबन्धित है। और पहली बारिश पिन्तेकुस्त के दिन और प्रारंभिक कलीसिया पर हुई। और यह उस समय की विश्वव्यापी कलीसिया पर हुई बारिश थी। और यह इस प्रक्रिया के अधीन गतिशील थी जो कि कटनी तक ले जाने के लिये रची गई थी।
तब संपूर्ण सर्दी के मौसम के दौरान् विश्व भर में हर सदी में कहीं न कहीं कलीसिया में पवित्र आत्मा अनियमित रूप से उण्डेला जाता रहा है। परन्तु संपूर्ण कलीसिया पर कोई बड़ा छिड़काव नहीं हुआ। तब जैसा कि मैं मानता हूँ और यह मेरी अपनी समझ है, वर्त मान सदी के प्रारंभ में - वास्तव में सदी के प्रथम दिन में, एक जनवरी सन् 1900 को - एक प्रकार से बाद की वर्षा प्रारंभ हुई। और मैं पहली जनवरी क्यों कहता हूँ? इसलिये कि उस दिन संयुक्त राज्य में कान्सास में स्थित टोपेका में बाइबल स्कूल में एक युवा छात्रा बाइबल स्कूल के शिक्षकों के पास गई और उनसे कहा, ‘‘मैं चाहती हूँ कि आप मेरे सिर पर हाथ रखें ताकि नया नियम की रीति पर मैं पवित्र आत्मा प्राप्त करूँ।’’ खैर, उन्होंने विश्वास नहीं किया कि इसका परिणाम अन्यभाषा में बात करना होगा। लेकिन जैसा उसने कहा था वैसा उन्होंने किया और उसने अन्यभाषा में बात की। और एक प्रकार से इस बात ने पवित्र आत्मा में बपतिस्मा के सत्य को स्थापित किया।
तब 1904 में लाॅस एन्जिल्स में स्थित आउजा स्टंीट में पवित्र आत्मा की आमद हुई।
यह रोचक बात है कि पिछली सदी के अन्त में अर्मेनिया में एक वास्तविकता के रूप में पवित्र आत्मा के छिड़काव के विषय में कुछ पूर्व सूचनाएँ रही हैं। परन्तु आप कह सकते हैं कि बाद की वर्षा वर्तमान सदी के प्रारंभ में शुरू हुई। और यह ऐसा दर्शन रहा जिसने अन्ततः पूरी कलीसिया को प्रभावित किया। नब्बे वर्षों के दौरान् जो कि बीत चुकी हैं, मूल रूप से ऐसा कोई देश नहीं है और कलीसिया का ऐसा कोई भाग नहीं है जिसमें पवित्र आत्मा का किसी न किसी प्रकार का अलौकिक मुलाकात प्राप्त न हुई हो। मैं मानता हूँ कि यह बाद की वर्षा है। मैं यह नहीं मानता कि यह बाद की वर्षा पूर्ति है। मैं मानता हूँ कि बहुत कुछ अभी आना बाकी है। परन्तु हमें हमेशा इस बात को मन में रखना है कि स्वाभाविक के समान आत्मिक में - ध्यान से सुनिए - कटनी के प्रयोजन से वर्षा दी जाती है। और यदि आप इसे नहीं समझते हैं तो आप अपने जीवन के लिये परमेश्वर के उद्देश्य से वंचित रह जाएँगे।
देखिए, मैं लगभग पचास वर्षों से पिन्तेकुस्तीय आन्दोलन में रहा हूँ। मैं आपसे कह सकता हूँ चाहे आप उन्हें पिन्तेकुस्तीय, करिस्मैटिक या जो कुछ आप उन्हें कहें - या अतिवादी कहें! आप जानते हैं, यदि वे आपकी कलीसिया के हैं तो वे करिस्मैटिक हैं। यदि वे किसी और कलीसिया के हैं तो वे अतिवादी हैं। परन्तु खैर, आप उन्हें कुछ भी कहें उनके दो प्रकार हैं। ऐसे लोग हैं जिन्होंने उण्डेले जाने का उद्देश्य समझा है और ऐसे लोग हैं जिन्होंने नहीं समझा है। और ऐसे लोग जिन्होंने छोटे-छोटे मुझे आशीष दो क्लब का गठन नहीं किया है और एक साथ इकट्ठे होते हैं और गहरे आत्मिक सत्य की बातें करते हैं और बहुत गहन बाइबल अध्ययन करते हैं और रविवार सुबह मिलत हैं, और जब बाहर आते हैं तो एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं और कहते हैं, ‘‘र्भाइ , परमेश्वर आपको आशीष दे, अगले इतवार को मिलते हैं।’’ और वे छोटे आत्मिक गुट होते हैं जो अपने आस-पास के लोगों पर वास्तव में कोई प्रभाव नहीं डालते हैं।
और तब अन्य लोग हैं जो इस बात को समझते हैं कि वर्षा क्यों दी गई है, फसल के लिये। और वे प्रायः उच्च-दक्ष या विशिष्ट रूप से शिक्षित या बुद्धिमान नहीं होते हैं परन्तु उनमें इस बात को समझने के लिये पर्याप्त चेतना र्पाइ जाती है कि बारिश कटनी के लिये दी गई है कि परमेश्वर के राज्य में आत्माओं को इकट्ठा किया जाए। और वे बाहर निकले हैं और राष्टंों को उलट-पुलट कर दिया है। यह उनकी क्षमता में अन्तर नहीं लाता है। यह परमेश्वर के उद्देश्य के विषय में उनकी समझ में अन्तर की बात है।
तो, मैं अपने आदेश में पूरा जोर लगाते हुए यह कहना चाहता हूँ कि वर्षा कटनी के लिये दी गई है। यह आपको अति आत्मिक या विशिष्ट रूप से आशीषित बनाने के लिये नहीं दी गई है; यह आपको परमेश्वर की कटनी में एक प्रभावशाली कार्यकर्ता बनाने के लिये दिया गया है।
अर्ब आइ ए, यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक 5 अध्याय 23 से 24 पद देखें। यिर्मयाह इस्राएल में अपने समय के लोगों को डाँट रहा है क्योंकि वे नहीं जानते थे कि परमेश्वर क्या कर रहा है। वे अपने आप में ही, अपनी सांसारिक चिन्ताओं में ही सीमित थे। और जो कुछ परमेश्वर कह और कर रहा था उसके प्रति वे अन्धे और बहरे थे। यिर्मयाह यह कहता है:
पर इस प्रजा का हठीला और बलवा करनेवाला मन है; इन्हों ने बलवा किया और दूर हो गए हैं।
अब प्रमाण क्या है? अगला पद।
वे मन में इतना भी नहीं सोचते कि हमारा परमेश्वर यहोवा तो बरसात के आरम्भ और अन्त दोनों समयों का जल समय पर बरसाता है, और कटनी के नियत सप्ताहों को हमारे लिये रखता है, इसलिये हम उसका भय मानें।
ध्यान दें कि वर्षा किस बात के लिये दी जाती है? फसल के लिये, सही है। इस्राएल ने कौन सी गलती की? उन्होंने इस बात को नहीं समझा कि वर्षा के लिये वे पूरी तरह परमेश्वर पर निर्भर हैं और कटनी के लिये वर्षा दी जाती है। वे परमेश्वर के उद्देश्य ये चूक गए। वचन कहता है कि परमेश्वर कटनी के नियत सप्ताहों को रखता है।
मेरे लिये कुछ वर्षों पूर्व यह एक आश्चर्यजनक प्रकाशन बना। वास्तव में, कुछ समय पहले मैं एक रेस्तरा में गया था, एक मेज का चुनाव किया और मैं उस पर बैठना चाहता था। और जब मैं मेज पर बैठने के लिये गया वहाँ एक छोटा सा चिन्ह था जिसने मुझे बताया कि मुझे वहाँ नहीं बैठना चाहिए। अनुमान लर्गाइ ए कि वहाँ क्या था? आरक्षित। और जब मैंने यह सन्देश सुना तब मैंने सोचा, अच्छा! परमेश्वर ने कुछ सप्ताहों पर एक छोटा चिन्ह रखा है जिसमें कटनी होना है। उसने उसे आरक्षित किया हुआ है। उसने शैतान से कहा, तुम्हारे पास वे सप्ताह नहीं हैं। मैंने उन्हें कटनी के लिये अलग किया है। महीनों नहीं परन्तु सप्ताह। आप में से वे लोग जो किसान हैं, या जो खेत में काम करते हैं और फसल उगाते हैं - जिनके पास बहुत अधिक पशु नहीं हैं - आप उस बात को जानेंगे और हमारे साथ सहमत होंगे कि वर्ष का जटिल मौसम कौन सा होता है? वर्ष का सबसे व्यस्त मौसम कौन सा होता है? वह कौन सा मौसम होता है जो सबको बाहर आना पड़ता है? कटनी का मौसम।
और नीतिवचन 10ः5 में:
जो बेटा धूपकाल में बटोरता है वह बुद्धि से काम करनेवाला है, परन्तु जो बेटा कटनी के समय भारी नींद में पड़ा रहता है, वह लज्जा का कारण होता है।
क्योंकि उस मौसम में जब हर व्यक्ति को सचेत और सक्रिय होने की जरूरत है वहाँ यह सो रहा है। और वह अपने पिता को शर्मिन्दगी में डाल रहा है। उसका पिता उसके कारण शर्मिन्दा हैं।
क्या आप सोचते हैं कि कलीसिया में ऐसे पुत्र पाए जाते हैं जो अपने पिता की शर्मिन्दगी का कारण बन रहे हैं? क्योंकि कटनी के समय वे सो रहे हैं। कलीसिया के बेन्च पर सो रहे हैं, वहाँ सन्देश सुनते हुए बैठे हैं, गीत गा रहे हैं और कटनी के बारे में पूरी तरह अनभिज्ञ हैं जिसे काटा जाना है। क्या ऐसा हो सकता है कि आपमें से एक या दो व्यक्ति उस समूह में हों? ध्यान रखिए, कि मैंने स्वार्थ के विषय में क्या कहा? यहाँ उसका एक और पहलू है। अपनी आत्मिक भलाई में लिपटे हुए, अपनी आत्मिक वरदानों में उत्साहित, आत्मिक भाषा बोलने योग्य। लेकिन जब फसल काटने की जरूरत है तब सो रहे हैं।
और तब हम योएल 2 अध्याय पर आते हैं और हम योएल की इस भविष्यद्वाणी में स्वाभाविक कटनी का आत्मिक पहलू देखते हैं। हम योएल के पूरे विषय में चर्चा नहीं कर सकते हैं, लेकिन योएल के तीन अध्यायों में वास्तव में तीन मुख्य भाग पाया जाता है। पहला भाग, अप्रसन्नता। दूसरा भाग, पुनःस्थापना। और तीसरा, न्याय। और यहाँ दूसरे अध्याय में हम पुनःस्थापना पर आते हैं और पुनस्र्थापना का कारक वह बारिश है जो कि पवित्र आत्मा की तस्वीर है। 2 अध्याय 23 पद में योएल कहता है:
हे सियोनियों, तुम अपने परमेश्वर यहोवा के कारण मगन हो, और आनन्द करो; क्योंकि तुम्हारे लिये वह वर्षा, अर्थात् बरसात की पहिली वर्षा बहुतायत से देगा (यह प्रारंभिक कलीसिया परर् आइ ); और पहिले के समान अगली और पिछली वर्षा (फसह का महीना, मार्च या अप्रैल) को भी बरसाएगा।
और वर्षा के उद्देश्य पर ध्यान दीजिए।
तब खलिहान अन्न से भर जाएंगे, और रासकुण्ड नये दाखमधु और ताजे तेल से उमड़ेंगे।
तीन मुख्य फसल कौन कौन से हैं? गेहू, दाखरस और तेल। कौन सी बात उन्हें उपजाता है? पिछली वर्षा।
पिछली वर्षा का आत्मिक पहलू क्या है? हम आगे योएल 2ः28 पर चलते हैं:
उन बातों के बाद मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा...
अब, आपमें से जो लोग कल यहाँ पर थे, हमने देखा था कि बाद की बात क्या है। और आपको स्मरण है कि यह तब की बात थी जब परमेश्वर के लोग एक साथ इकट्ठे हुए और उपवास किया और प्रार्थना किया और उसे पुकारा।
और परमेश्वर कहता है कि यह बाद में पूरा होगा, ‘‘मैं सब प्राणियों पर अपना आत्मा उण्डेलूँगा।’’
यह रोचक बात है कि पिन्तेकुस्त के दिन पतरस ने इस पद का उल्लेख किया और कहा, ‘‘योएल के द्वारा कही गई बात यही है।’’ परन्तु उसने बाद में शब्द का उपयोग नहीं किया, उसने पिछले दिनों कहा। परन्तु प्रेरितों के काम दूसरे अध्याय में उस भाग में, यदि आप सावधानीपूर्वक उसका अध्ययन करें, पतरस यह कहते हुए परमेश्वर का उल्लेख करता है, ‘‘मैं अपना आत्मा उण्डेलूँगा’’ - अपना कुछ आत्मा। परन्तु यहाँ वचन कहता है, ‘‘मैं अपना आत्मा उण्डेलूँगा।’’ मैं बाल्टी खाली करूँगा, मैं इसे पूरा उण्डेल दूँगा। और वह कहता है, ‘‘सब प्राणिायों पर।’’ एक अच्छे पिन्तेकुस्त विश्वासी के रूप में जब 1960 के दशक में मेरा सामना पहली बार करिस्मैटिक आन्दोलन के साथ हुआ तो मैं चकित रह गया। मैंने स्वयं से कहा, एंग्लिकन, प्रिसब्रिटेरियन, बापटिस्ट, उन्हें पवित्र आत्मा का कोई अधिकार नहीं है। वह हम पिन्तेकुस्त विश्वासियों के लिये है। परन्तु परमेश्वर ने नम्रता पूर्वक मुझे याद दिलाया कि एंग्लिकन, बापटिस्ट, प्रिसब्रिटेरियन और बहुमूखी ब्रदरेन सब ‘‘प्राणी’’ हैं। और उसने कहा, कि ‘‘मैं सब प्राणिायों पर उसे उण्डेलने जा रहा हूँ’’ और उसने ऐसा किया; उसने मुझ से नहीं पूछा। उसने मेरा विचार नहीं पूछा। उसने बस ऐसा कर दिया।
परन्तु मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि बहुत से प्राणी ऐसे हैं जिन पर अब तक उण्डेला नहीं गया है। पहले रूत आपसे मुस्लिम दुनिया के विषय में बात कर रही थी। पृथ्वी पर एक बिलियन से अधिक मुस्लिम हैं। और मूल रूप से कुछ बून्दें गिरी हैं बस, बस। आज संसार में जो आँकड़े हैं वे रोचक हैं। चीनी लोग एक बिलियन से ऊपर हैं। दूसरे शब्दों में, पृथ्वी पर हर पाँचवाँ व्यक्ति चीनी है। पृथ्वी पर एक आंशिक भाग मुस्लिम हैं। उनके विषय में हम क्या कर रहे हैं? क्या वे प्राणी नहीं हैं? परमेश्वर उनसे भेंट करने जा रहा है। क्योंकि उसने कहा, कि मैं अपना आत्मा सब प्राणियों पर उण्डेलूँगा। और तब वह अलौकिक बातों की चर्चा करता है जो कि अन्ततः अन्तिम दिनों तक पहुँचाएगा: प्रभु के भयानक दिन में लहू और आग और धुआँ।
और तब हम नए नियम में चलते हैं और मैं एक भाग पढ़ने जा रहा हूँ जिसे मैंने पूर्व की सत्र में पढ़ा था। मत्ती 13ः39, एक बहुत सामान्य कथ।
‘‘कटनी जगत का अन्त है।’’
भाइयों और बहनों, यह स्मरण करना महत्वपूर्ण है कि यह युग हमेशा के लिये बने रहनेवाला नहीं है। आपकी प्रतिक्रिया क्या है? क्या आप कहते हैं, परमेश्वर की स्तुति हो? मैं कहता हूँ। मैं नहीं चाहता कि वर्त मान युग हमेशा के लिये बना रहे। यह बहुत बुरा है और यह और बुरा हो रहा है। शुभसमाचार यह है कि यह हमेशा के लिये बना रहनेवाला नहीं है। इसका अन्त होनेवाला है और इसका अन्त कटनी के साथ होगा। और कटनी युग का अन्त है।
मैं उन दिनों ब्रिटिश कवि टी.एस्. इलियट को पढ़ा करता था जब मैं आत्मिक नहीं बुद्धिमान था। मुझे नहीं मालूम कि आज मैं क्या हूँ। उनकी एक कविता थी जिसका शीर्षक था, ‘‘दी वैस्टलैण्ड।’’ मुझे नहीं लगता कि आपमें से किसी ने कभी इसे पढ़ने में समय खर्च किया है। परन्तु उनके कथनों में से एक था, ‘‘संसार अपने अन्त की ओर बढ़ रहा है जैसे बूढ़ी स्त्री खाली बर्त न में इन्धन भर रही है। वह गलत हैं। संसार बिना किसी परिणिति के समाप्त होनेवाला नहीं है। यह अन्त की ओर जा रहा है। परमेश्वर अन्त विरोधी परमेश्वर नहीं है। और कटनी अन्त बननेवाला है; कटनी युग का अन्त है। और कटनी शब्द अन्त के लिये सामान्य शब्द नहीं है। यह युग का समाप्त होना है। यह फसल के सारी अवशिष्टों को एक बड़ी समाप्ति पर लाने का युग है।
तब नया नियम में से एक और भाग जो इन सबके अनुरूप है। याकूब 5ः7-8:
सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो।
कब तक? प्रभु के आगमन तक, सही है। लक्ष्य क्या है? हम आगे किस बात की ओर देख रहे हैं? प्रभु के आगमन की ओर, ठीक है। और हमें तब तक धीरज धरना है।
गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल (अर्थात् फसल) की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है।
ध्यान दें कि फसल इकट्ठा नहीं किया जा सकता है। भले ही किसान कटनी के लिये कितनी भी इच्छा करे, यह तब तक नहीं होगा जब तक किसान पहली और पिछली वर्षा प्राप्त न करे। स्वाभाविक में भी यह सच है। आत्मिक में भी यह सच है। और तब वह याकूब आगे इसे लागू करता है।
तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभ आगमन निकट है।
चरमावस्था क्या है? प्रभु का आगमन। लेकिन यह केवल तभी आ सकता है जब फसल इकट्ठा कर लिया गया हो। और फसल तब तक इकट्ठा नहीं किया जा सकता जब तक पिछली वर्षा न हो।
और तब इसके बाद तीन घटनायें होती है। मैं नहीं सोचता कि बाइबल इस युग के सटीक समय की ओर संकेत देता है। सबसे पहले, पिछले वर्षा। दूसरा, फसल का इकट्ठा किया जाना। तीसरा, प्रभु का आगमन। अब, कोई भी प्रभु के आगमन के समय को या दिन को नहीं जानता है। आगे मैं आपसे कहता हूँ, मैं तो वर्ष भी नहीं जानता हूँ। लेकिन मैं मानता हूँ कि यह बहुत निकट है। संभवतः उससे भी अधिक निकट जितना हम सबने सोच रखा है। मैं नहीं कहता हूँ कि वह इस सहस्राब्दी में आएगा। मैं नहीं जानता कि वह कब आएगा, परन्तु मुझे लगता है कि वह उससे भी जल्दी आएगा जितना हममें से अधिकांश उम्मीद करते हैं।
परन्तु वह ईश्वरीय समय में आनेवाला है। जैसा परमेश्वर ने कहा है वैसे ही बातें हो रही हैं। पिछली वर्षा, कटनी, आत्माओं का अन्तिम इकट्ठा किया जाना और प्रभु का आगमन।
और जनसंख्या विस्फोट के कारण जिसके कारण अगली सहस्राब्दी छः बिलियन लोग हो जाएँगे, वे हमसे कहते हैं, कि यह एक चकित कर देनेवाला आँकड़ा है, हम सचमुच नहीं समझ सकते हैं कि छः बिलियन लोग कितने होते हैं। यह पूरी तरह संभव है कि यदि कलीसिया पर पवित्र आत्मा का एक अलौकिक स्पर्श हो और लोगों पर उण्डेला जाए जो यह भी नहीं जानते कि मसीही क्या है और यदि कलीसिया वर्षा का उद्देश्य समझती है और सुसज्जित और आज्ञाकारी है और आत्मा की सामथ्र्य में आत्मा के अलौकिक वरदानों से सुसज्जित होकर बाहर जाती है, तो एक दशक में कि इतनी आत्माओं को बचा लिया जाएगा जितनी कलीसिया के पिछले इतिहास में बचाई नहीं गई। व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है यह एक प्रकार से कम आँकना है। मुझे लगता है कि परमेश्वर के राज्य में एक बहुत बड़ा एकत्रीकरण होनेवाला है। और मैं सोचता हूँ कि यह बहुत ही निकट है।
अब मैं, कुछ क्षण के लिये दर्शन के बारे में बात करना चाहता हूँ। नीतिवचन की पुस्तक कहती है, जहाँ दर्शन की बात नहीं होती वहाँ लोग निरंकुश हो जाते हैं। वे अनुशासनहीन हो जाते हैं। जो बात हमें अनुशासित रखती है वह दर्शन है। मुझे नहीं मालूम कि क्या आपने इसे समझा है। उदाहरण के लिये, आप खिलाड़ियों को लें जो ओलम्पिक में खेलते हैं। और निश्चय ही, काॅमन वेल्थ गेम्स होनेवाले हैं परन्तु खेल की दुनिया में उस स्तर पर पहुँचने के लिये आपको सबसे गहन अनुशासन और अपने पूरे जीवन पर शासन आवश्यक है - आप क्या खाते हैं, जो अभ्यास आप करते हैं, जो पुस्तकें आप पढ़ते हैं, आपकी मानसिक तैयारी, कितने घण्टे आप सोते हैं और प्रशिक्षण। यह गहन होता है। उन स्त्री-पुरुषों को कौन सी बात उस अनुशासन के अधीन रहने के लिये प्रेरित करती है? दर्शन। एक मनुष्य अपने आपको किसी भी व्यक्ति से ऊँचा कूदते हुए देखता है या सबसे तेज दौड़ते हुए देखता है या भाला फेंकते हुए देखता है। और इस दर्शन को अपनी आँखों में बसाए हुए वह स्वयं को एक अनुशासन के अधीन करता है जिसके विषय में अधिकांश मसीही सोचते भी नहीं हैं। परन्तु पौलुस मसीही जीवन की तुलना एक खिलाड़ी के साथ करता है और वह कहता है कि प्रत्येक खिलाड़ी जो कुछ करता है उसमें वह आत्म-नियन्त्रण रखता है। और मसीहियों को भी यदि वे सोने का मेडल जीतने जा रहे हैं तो ऐसा ही आत्म-नियन्त्रण रखना चाहिए। यह अन्त में 1 कुरिन्थियों 9 अध्याय का मेरा स्वयं का अनुवाद है। मैं उसे निकालना नहीं चाहता हूँ। जहाँ दर्शन की बातें नहीं होती है वहाँ लोग निरंकुश हो जाते हैं।
मैं इसे लागू करता है और मैं आप सबसे अभी अपने हाथों के बल बैठने के लिये कहता हूँ, अपने आपको दूर न रखें। परन्तु आपमें से कितने - याद रखें कि आप अपने हाथों के बल बैठे हुए है - आपमें से कितनों ने कम से कम एक बार डायटिन्ग करने और वजन कम करने का प्रयास किया है? आपमें से कितने लोग सफल हुए हैं? आपमें से कितनों ने दुबार प्रयास किया है?
खैर, हम उसमें न जाएँ। क्या आप सफल डायटिन्ग का मूलतत्व जानते हैं? दर्शन। आप अपने आपको उस प्रकार से देखते हैं जैसा आप सोचते हैं कि आपको दिखना चाहिए। और कब यह हुआ - आज मैंने क्या खाया, पावलोवा। जब वह पावलोवा आपके सामने है तब आप अपनी कमर को देखते हैं। मुझे पावलोवा नहीं चाहिए! वे मुझ पर हँसते हैं क्योंकि मैंने दो भाग खा लिया है! परन्तु दूसरी तरफ परमेश्वर की अनुग्रह से मैं सफल हुआ हूँ, मैं लिप्त रहा हूँ।
परन्तु इसमें दर्शन की आवश्यकता है और यह वैसा ही है, आपने देखा। यदि हमको फसल काटने में सफल होना है तो हमें फसल का दर्शन रखना है। और आज रात वास्तव में मेरा उद्देश्य आपको एक दर्शन देना है कि आप यहाँ से यह कहते हुए बाहर जाएँ। ‘‘ठीक है, अगर यह बलिदान की माँग करता है, अगर यह निद्राविहीन रात्रि की माँग करता है, अगर यह मेरी नौकरी छोड़ने की बात करता है, यदि यह पृथ्वी पर परमेश्वर द्वारा बुलाए गए किसी बंजर भूमि में जाने की माँग करता है तो मैंने दर्शन देखा है। दर्शन मेरी आँखों के सामने है।’’ देखें कि यीशु ने अपने शिष्यों से क्या कहा। उनकी समस्या थी वे दर्शन नहीं देख सके। यूहन्ना 4 अध्याय में उसके द्वारा सामरी स्त्री से बात करने के ठीक पश्चात् पद 35 में उसने अपने चेलों से कहाः
क्या तुम नहीं कहते, कि कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं? देखो, मैं तुम से कहता हूं, अपनी आंखे उठाकर खेतों पर दृष्टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं।
यीशु के दर्शन और शिष्यों के दर्शन में अन्तर देखिए। वे केवल स्वाभाविक को देख सके। उन्होंने कहा कि कटनी में अभी चार महीने बाकी हैं। यीशु ने कहा मैं ऐसा नहीं देखता हूँ। उसने कहा कि मैं खेतों को देखता हूँ और मैं उसे पक चुका हुआ देखता हूँ। और उसने कूएँ में एक बहुत ही अद्भुत पुले को काटा। वहाँ पर वे बारह बाइबल छात्र थे, वे गाँव में गए, भोजन लिया, बाहर आए, एक भी आत्मा को नहीं छुआ। यीशु ने स्त्री पर स्वयं को प्रगट किया, उसने अपना घड़ा छोड़ दिया, गाँव में गई, सारे गाँव को बताया और सारा गाँव यीशु से मिलने के लिये आया। एक स्त्री बनाम बारह बाइबल स्कूल छात्र। क्यों? उसके पास एक दर्शन था। तो यह दर्शन का सवाल है।
अब मत्ती 9 अध्याय में यीशु एक बहुत ही दुःखद कथन कहता है। हम पद 36 से शुरू करेंगे क्योंकि पुनः यह दर्शन का विषय है। यीशु लोगों को अपने शिष्यों से अलग दृष्टिकोण से देखता है। वचन कहता है:
जब उस ने भीड़ को देखा तो उस को लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाई जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे।
उनके पास रब्बी थे, उनके पास आराधनालय थे; परन्तु उनके पास कोई चरवाहा नहीं था।
तब उसने शिष्यों से कहा, ‘‘पक्के खेत तो बहुत हैं परन्तु मजदूर थोड़े हैं।’’
यदि उस समय यह सच था तो मैं कहता हूँ कि आज यह सौ बार सच है। फसल बहुत है परन्तु मजदूर दयनीय रूप से थोड़े हैं। एक अनुमान है कि हर एक मिलियन मुस्लिमों पर एक मिशनरी है और फिर भी फसल बहुत है।
मैं और रूत इण्डोनेशिया में रहे हैं जो कि मूल रूप से एक मुस्लिम देश है। परन्तु पिछले बीस या तीस वर्षों में यह अनुमान लगाया गया है कि जनसंख्या का तीस प्रतिशत मसीही बन गए हैं। और परमेश्वर के वचन के सत्य की माँग ऐसी है कि इसे सन्तुष्ट नहीं किया जा सकता है। हम वीडियो के बारे में बात करते रहे हैं। वहाँ पर एक र्भाइ है जिसके पास एक सेवकाई है जो कि इण्डोनेशिया के हर गाँव में बाइबल सिखानेवाले वीडियो दिखाना है। उनके पास बिजली नहीं है परन्तु वे उसे चलाने के लिये कार की बैटरी या कुछ ऐसे श्रोत का उपयोग करते हैं।
मलेशिया में एक बात जिसने हमें आश्चर्यचकित किया, जो कि एक और मुस्लिम राष्टं है, आप कई ऐसे गाँव पा सकते हैं जहाँ पर बहता पानी नहीं है, उनके पास कोई बड़ा भण्डार नहीं है, और उन सबके पास टीवी के एरियल मिलेंगे। यह सच है।
कुछ महीनों पहले र्टाइ म मैग्जीन में एक बड़ा लेख था जो बताता था कि एक वीडियो क्रान्ति आ गई है और यह राजनैतिक प्रणाली को परेशान कर रही है। मुझे लगता है कि पूर्वी ब्लक में हाल ही में हुए उथल-पुथल का एक कारण यह था कि लोगों के पास टीवी या वीडियो आ गया था जिसने दिखाया कि पश्चिम कैसा था। और राजनैतिक प्रणाली उन्हें शान्त नहीं कर सकी। राजनैतिक मुद्दों में मुझे रुचि नहीं है परन्तु मैं फसल काटने में रुचि रखता हूँ।
पिछले मई में सिंगापुर में हमारी एक सभा हुई और अन्तिम सभा में शाखा निदेशकों की सभा हुई। और इसके उद्देश्यों में से एक संसार को सिखाने के लिये एक माध्यम के रूप में वीडियो का उपयोग करना था। और जब हम सभा कर रहे थे तो फोर्ट लाउडरडेल की स्थानीय कलीसिया का पास्टर, मेरे हिसाब से एक युवा व्यक्ति - आप समझते हैं, इसका मतलब वैसा नहीं जैसा आप सोचते हैं, परन्तु बुजुर्ग ने - उन्होंने मुझे एक फैक्स भेजा और कहा, ‘‘आज सुबह मैं अपना मनन कर रहा था और मैं किसी बात के लिये प्रार्थना करने जा रहा था और मैं आपके लिये और मैं आप और आपकी सेवकाई को छोड़कर और किसी बात के लिये के लिये प्रार्थना नहीं कर सका।’’ और उसने कहा, ‘‘जब मैं प्रार्थना कर रहा था तब परमेश्वर ने मुझे एक दर्शन दिया और मैंने फसल को काटते हुए एक हसिया देखा। और यह न्यूजीलैण्ड के क्षेत्र में प्रारंभ हुआ और दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए चीन तक गया। और हसिए की धार एक वीडियो कैसेट था।’’ क्या आपके पास है? क्या आप जानते हैं कि क्या किया जा सकता है? या आप हमेशा की भाँति अपने काम से सन्तुष्ट हैं?
आप कहेंगे, ‘‘खैर, र्भाइ प्रिन्स, मेरे पास बहुत से वरदान नहीं है, मैं एक प्रचारक नहीं हूँ, मैं एक सुसमाचारक नहीं हूँ।’’ आप एक बड़े खतरे में हैं। क्या आप यह जानते हैं? आप तोड़ों का दृष्टान्त लें; उसमें तीन प्रकार के लोग थे। जिस व्यक्ति को पाँच तोड़े मिले थे, उसने उससे व्यवसाय किया और पाँच और कमाए, उसने दुगुना किया। जिस व्यक्ति को दो तोड़े मिले थे उसने भी उससे काम किया और दुगुना किया। उनकी बढ़ती सौ प्रतिशत थी। परन्तु जिस व्यक्ति ने एक तोड़ा प्राप्त किया था उस व्यक्ति ने उसे परवाह करने योग्य नहीं समझा। अतः उसने उसे भूमि में गाड़ दिया। और जब स्वामी वापस आया तो उसने कहा, ‘‘यह तुम्हारा तोड़ा है, मैं तुमसे डरता था। मैंने उसे जमीन में गाड़ दिया था।’’ याद कीजिए कि स्वामी ने क्या कहा। ‘‘हे दुष्ट और आलसी सेवक, क्या आप महसूस करते हैं कि आलस दुष्टता है।’’
तब उसने कहा, ‘‘यदि तुम उससे कुछ नहीं कर सकते थे तो तुम्हें उसे बैंक में जमा करना था और उस पर ब्याज मिलता। तब तुम मुझे मेरा व्याज दे सकते थे।’’ और आप जानते हैं कि उसने क्या कहा? ‘‘इस निकम्मे दास को बाहर अन्धेरे में डाल दो, वहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।’’ आप देखें, यह एक तोड़ेवाला व्यक्ति था जो सर्वाधिक खतरे में था क्योंकि उसका रवैया, ‘‘मेरे पास बहुत नहीं हैं, परमेश्वर मुझ से क्या अपेक्षा कर सकता है’’ वाला था। खैर, मुझे आपको सलाह देने दीजिए कि यदि आपके पास अपना कार्य करने के लिये पर्याप्त नहीं है, तो उसे बैंक में डाल दें। उसे किसी और सेवकाई में निवेश कर दें जो सेवा कर रहे हैं। देखा? हर कोई कुछ कर सकता है। आप कहते हैं, ‘‘र्भाइ प्रिन्स, मैं क्या निवेश करूँ?’’ खैर, एक सेवकाई है जो डेरेक प्रिन्स मिनिस्टंीज कहलाती है। हम एक बड़ी सेवकाई नहीं हैं परन्तु हम, परमेश्वर के अनुग्रह से फसल काटने के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। परन्तु मान लीजिए, यदि आपको ऐसी अगुर्वाइ नहीं मिलती है। मैं आपको कुछेक के नाम बताता हूँ - और मुझे इनमें से किसी से पैसा नहीं मिलता है। यूथ विथ ए मिशन नामक एक संस्था है, जो कि ऐसे लोगों का समूह है जो कटनी के दर्शन से समर्पित हैं। आॅपरेशन मोब्लाईजेशन नामक एक और संस्था है, जो ऐसा ही दर्शन रखती है। और संसार भर में सुसमाचार प्रचार करनेवाले लोगों का एक और समूह है, र्भाइ एन्डं्यू का ओपन डोर नामक सेवा है जिसका उद्देश्य उन लोगों तक सुसमाचार पहुँचाना है जिन तक नहीं पहुँचा है। मारानाथा मिनिस्टंीज नामक एक सेवा है जिसका उद्देश्य विश्य भर में छात्रों तक पहुँचना है और यह केवल चार या पाँच की सूची है। मैं आपको सलाह नहीं दे रहा हूँ कि इनमें से किसी में शामिल हों परन्तु आपको कलीसिया में बैठे रहना और कुछ नहीं रहना नहीं चाहिए। क्योंकि जब प्रभु आता है तब आपको एक तोड़े का हिसाब देना होगा और यह दुःखद होगा कि यदि वह आप में से किसी से कहे, ‘‘उसे बाहर अन्धेरे में डाल दो।’’
मत्ती 25 अध्याय में लोगों की तीन तस्वीरें हैं जो परमेश्वर के द्वारा पूरी तरह तिरस्कृत थे। मूर्ख कुँवारियाँ, अविश्वायोग्य दास जिसने अपने तोड़े का उपयोग नहीं किया और बकरी राष्टं जिन्होंने यीशु के भाइयों पर दया नहीं दिर्खाइ । और वे सभी अन्ततः बिना किसी विकल्प के परमेश्वर की उपस्थिति से तिरस्कृत किए गए। आप मुझ से पूछते हैं, उनमें सामान्य बात कौन सी थी? उन सबने क्या किया जिससे वे तिरस्कृत किये गए? मैं आपको एक शब्द में उत्तर दे सकता हूँ, अनुमान लर्गाइ ए कि वह शब्द क्या है। कुछ नहीं। तिरस्कृत होने के लिये आपको केवल ‘‘कुछ नहीं’’ करना है।
परन्तु मुझे लगता है कि यदि मैं पवित्र आत्मा को जानता हूँ और मैं त्रुटिहीन होने का दावा नहीं कर रहा हूँ परन्तु यदि मैं पवित्र आत्मा को महसूस करता हूँ तो आज रात वह यहाँ बहुत अधिक उत्सुक है। वह भीतर आना चाहता है और मुझे लगता है कि विशेष करके आराधना में जानेवालो में। परन्तु यह ऐसा नहीं था। मैं मानता हूँ कि हमें इकट्ठा होना भूलना नहीं चाहिए। मैं प्रत्येक कलीसिया के लिये परमेश्वर का धन्यवाद करता हूँ जो परमेश्वर की लोगों की देखभाल करती है और भेड़ों की रखवाली करती है। लेकिन जब आप इतवार को कलीसिया में गए और भजन गाए और प्रार्थनाएँ की तब आपने अपने कर्त व्य को छुट्टी नहीं दिया। व्यक्तिगत रूप से मैं मानता हूँ और मैं भावना में बहकर यह नहीं कहता हूँ, परन्तु बौद्धिक रूप से कायल होकर कहता हूँ कि हर मसीही किसी न किसी प्रकार फसल की कटनी में शामिल होने के लिये उत्तरदायी हैं। मैं नहीं मानता कि एक भी मसीही ऐसा होना चाहिए जो फसल को काटने की इस महिमामय कार्य में किसी भी प्रकार सम्मिलित नहीं है।
यीशु ने कहा कि फसल बहुत है परन्तु मजदूर थोड़े हैं। अगला उसने क्या कहा? प्रभु से विनती करो कि कटनी के लिये और मजदूर भेजे। मैं पक चुके हैं शब्द को पसन्द करता हूँ। यह यूनानी भाषा में एक बहुत ही शक्तिशाली शब्द है। यह वही शब्द है जिसका उपयोग यीशु ने तब किया जब वह लोगों में से दुष्टात्माओं को निकाल रहा था। प्रार्थना करो कि पवित्र आत्मा लोगों को कटनी के लिये भेजे। यीशु जानता था कि वह क्या कह रहा है। आप कटनी के खेत में सैर करने नहीं जाते हैं। यह कोई ऐसा काम नहीं है जिसे आप संयोग से करत हैं। इसमें पवित्र आत्मा से प्रेरणा मिलती है। इसका मतलब है कुछ छोड़ देना। आप आधुनिक कलीसिया की दो मूर्तियों को जानते हैं? सुरक्षा और सुविधा। वे ऐसी मूर्तियाँ हैं जिनकी पूजा प्रति रविवार सुबह की जाती है।
मैं कटनी के तस्वीर के साथ आगे जाना चाहता हूँ। मैं आपको कुछ ऐसी बातें बताना चाहता हूँ जिस पर मैंने अब तक बात नहीं किया। एक से अधिक कटनी होनेवाली है। एक अनुग्रह की कटनी होनेवाली है और एक न्याय की कटनी होनेवाली है। और वे बहुत जल्द ही एक दूसरे के बाद आनेवाली हैं। इन दोनों के बारे में प्रकाशितवाक्य 14 अध्याय में बताया गया है। मैं जानता हूँ कि प्रकाशितवाक्य के बारे में ऐसी बातें हैं जिन्हें हम नहीं समझते हैं, मैं नहीं समझता हूँ। परन्तु जिस बात को मैं नहीं समझता हूँ वह मुझे कभी भी उस बात को करने से नहीं रोकती है जो मैं समझता हूँ। मैं यह सोचते हुए परेशान नहीं घूमता हूँ कि जिसका उत्तर मुझे नहीं मालूम है उसका उत्तर मैं क्या दूँ और जो मैं करना जानता हूँ उसे न करूँ। याद रखिए कि गुप्त बातों के विषय में और जो प्रगट की गई हैं उनके विषय में मैंने क्या कहा। कुछ भेद की बातें हैं। मुझे लगता है कि प्रकाशितवाक्य की सटीक व्याख्या के विषय में कुछ भेद हैं जिसे हममें से कोई नहीं जानता, परन्तु बहुत सी ऐसी बातें हैं जो प्रगट की गई हैं। मुझे लगता है कि यह सत्य एक स्पष्ट दर्शन है। आईए, उस पर देखें। यह प्रकाशितवाक्य 14ः14 में प्रारंभ होता है। और सबसे पहले यहाँ अनाज की कटनी है। आप तीन कटनी के क्रम को याद करते हैं: अन्न, दाख और जैतून। यह क्रम यहाँ से प्रकाशितवाक्य तक चलता रहता है। और यहाँ हम सबसे पहले अन्न की कटनी की तस्वीर देखते हैं जो कि अनुग्रह की कटनी है, परमेश्वर के राज्य में आत्माओं का इकट्ठा किया जाना है। प्रकाशन बतानेवाला यूहन्ना कहता है:
और मैं ने दृष्टि की, और देखो, एक उजला बादल है, और उस बादल पर मनुष्य के पुत्रा सरीखा कोई बैठा है, जिस के सिर पर सोने का मुकुट और हाथ में चोखा हंसुआ है।
मैं विश्वास करता हूँ कि अवश्य ही यह यीशु होना चाहिए। इस तरह से किसी और का वर्णन नहीं किया जा सकता है। यह कटनी के प्रभु के रूप में यीशु है। उसने कहा, ‘‘खेत के स्वामी से विनती करो?’’
फिर एक और स्वर्गदूत ने मन्दिर में से निकलकर, उस से जो बादल पर बैठा था, बड़े शब्द से पुकारकर कहा, कि अपना हंसुआ लगाकर लवनी कर, क्योंकि लवने का समय आ पंहुचा है, इसलिये कि पृथ्वी की खेती पक चुकी है।
और यूनानी अनुवाद कहता है कि पृत्वी की खेती पक चुकी है। इस पर खो जाने का खतरा है। और वचन कहता है:
सो जो बादल पर बैठा था, उस ने पृथ्वी पर अपना हंसुआ लगाया, और पृथ्वी की लवनी की गई।
मैं अनुमान लगाता हूँ - और यह ठीक वैसा नहीं है जैसा होनेवाला है, परन्तु मैं प्रभु को पूरे विश्व में भूसी उड़ाते हुए देखता हूँ और मैं कुछ शीघ्र होनेवाली बात की कल्पना कर रहा हूँ ताकि संपूर्ण कटनी हो सकता है पाँच साल में, हो सकता है कम समय में, हो सकता है अधिक समय में हो जाए। यह अधिक समय नहीं लेनेवाला है। एक बात जो आज संसार में विशिष्ट है वह यह है कि सब कुछ गतिवर्धक है। क्या आपने इस पर ध्यान दिया है? जिन बातों में सौ साल लगते थे, अब दस साल लग रहे हैं। जो बातें दस वर्षों में होती थी, वह एक वर्ष में हो रहा है। शैतान के कार्य के विषय में यह सच है, लेकिन प्रभु के कार्य के विषय में भी यह सच है। वह जल्दी में है। एक तात्कालिकता का भाव है।
तो अन्न की कटनी और करुणा की कटनी हो रही है। इसके बाद क्या?
फिर एक और स्वर्गदूत उस मन्दिर में से निकला, जो स्वर्ग में है, और उसके पास भी चोखा हंसुआ था। फिर एक और स्वर्गदूत जिस आग पर अधिकार था, वेदी में से निकला, और जिस के पास चोखा हंसुआ था, उस से ऊंचे शब्द से कहा; अपना चोखा हंसुआ लगाकर पृथ्वी की दाख लता के गुच्छे काट ले; क्योंकि उस की दाख पक चुकी है।
मुझे नहीं लगता कि यहाँ जो कटनी कर रहा है वह प्रभु है; यह स्वर्ग के दूसरे प्राणी नहीं हैं। और अब यह अन्न की कटनी नहीं है, यह दाख की कटनी है। और आप जानते हैं, इस्राएल में - अब ऐसा नहीं होता है, परन्तु परम्परागत रूप से दाख की फसल को काटने के लिये उनके पास दो हौज होते थे जो कि अक्सर चट्टानों पर खोदे हुए दो गढ्हे होते थे। एक दूसरे से ऊँचा होता था, जिनमें ऊँचे से नीचेवाले तक एक छोटी नाली होती थी। काटी हुई दाख को वे ऊपर के भाग में डालते थे और तब वे उस पर कूदते और जोर-जोर से आनन्द के मारे चिल्लाते थे। बाइबल में कई चित्र पाए जाते हैं जो आनन्द पूर्वक दाख की फसल को इकट्ठा करने का है। और यशायाह 63 में बोसरा से आते हुए यीशु का एक चित्र है। और बोसरा दाख के फसल के लिये एक इब्रानी शब्द है। उसके वस्त्रों पर लहू का दाग है और भविष्यद्वक्ता कहता है, ‘‘तू कहाँ से आता है?’’ वह कहता है, ‘‘मैं परमेश्वर के न्याय के दाख को रौंदनेवालों के पास से आ रहा हूँ।’’ उसके वस्त्रों में उस प्रकार लहू के निशान थे जैसे निशान दाख रौंदनेवालों के वस्त्र पर दाखरस का निशान होता है, यही तस्वीर है। हाँ, मैं ने अपने क्रोध में आकर देश देश के लोगों को लताड़ा, अपनी जलजलाहट से मैं ने उन्हें मतवाला कर दिया, और उनके लोहू को भूमि पर बहा दिया।
तब उस स्वर्गदूत ने पृथ्वी पर अपना हंसुआ लगाया, और पृथ्वी की दाखलता के गुच्छे बटोरे, और उन्हें परमेश्वर के प्रकोप के बड़े दाखरस के हौद में डाल दिया।
गतसमने, आप उस शब्द को जानते हैं? गत का अर्थ दाख का हौद होता है, वह स्थान जहाँ पर जैतून या दाख को रौंदा जाता है। और दाख का हौद रौंद डाला गया। आप देखते हैं कि यह क्यों रौंदा गया? वे शहर से बाहर दाख को रौंदते थे और दाख की हौद से शहर में घोड़ों की लगाम तक 1600 फर्लन्ग तक लहू बहता हुआ आता था जो कि 184 मील होता है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रकाशितवाक्य की व्याख्या व्यन्जनापूर्ण है। मैं मैं बाइबल की भविष्यद्वाणी में अधिक व्यन्जना नहीं देखता हूँ। उनमें से एक नया नियम में पाया जाता है। पुराना नियम से नया नियम में यीशु की सारी भविष्यद्वाणियाँ अक्षरः पूरी हुई। आप एक भी व्यन्जनापूर्ण नहीं पा सकते हैं। और आप कम से कम तीस पास सकते हैं जो नहीं थे। बाइबल में भविष्यद्वाणी में अतिशयोक्ति के लिये कोई तरीका नहीं बताया गया है। यह कुछ ऐसा है जो बाइबल के समाप्त होने के पश्चात् खोजा गया है। परन्तु मैं आपसे एक प्रश्न करता हूँ, क्या आप सोचते हैं कि यह लहू व्यंजनापूर्ण लहू था? क्या व्यंजनापूर्ण लहू जैसा कुछ होता है? क्या आपका मन यह तथ्य स्वीकार करने के लिये तैयार है कि परमेश्वर दुष्ट का न्याय करने जा रहा है? आप देखें, मानवता का प्रभाव जो कि कलीसिया में बहुत ही प्रासंगिक है ने लगभग हमें उस स्थान पर ला दिया है जहाँ आप सोचते हैं कि किसी का भी न्याय करने के लिये परमेश्वर को क्षमा माँगना होगा। परमेश्वर की समस्या दुष्ट का न्याय करना नहीं है, परमेश्वर की समस्या दुष्ट को बचाने के लिये मार्ग ढूँढ़ना है। और क्रूस के द्वारा केवल परमेश्वर ही इस समस्या को हल कर सकता है। परन्तु कुछ भी हो किसी भी गलतफहमी में मत रहें। परमेश्वर अब भी न्यायी है और वह पृथ्वी के सब दुष्टों का न्याय करनेवाला है।
यह महत्वपूर्ण है, आप जानते हैं? क्योंकि यह उस बात को प्रभावित करता है जिस रीति से आप लोगों से संबन्धित होते हैं। यदि मैं परमेश्वर के न्याय में विश्वास नहीं रखता, तो मुझे नहीं लगता कि जिस प्रकार मैं प्रचार करता हूँ, उस तरह मैं प्रचार कर सकता था - चाहे यह अच्छा हो या बुरा। यदि न्याय नहीं होता तो सुसमाचार के सन्देश का उद्देश्य वास्तव में क्या होता? यूहन्ना बपतिस्मादाता क्या कहता है? उसने लोगों से कहा, ‘‘किसने तुम्हें चिताया कि आनेवाले क्रोध से भागो?’’ यह यीशु के बारे में कहता है, वही है जिसने हमें परमेश्वर के क्रोध से बचाया है।
परमेश्वर की समस्या दुष्टा का न्याय करना नहीं है। हमने पूरी तरह इस मुद्दे को समाप्त कर दिया है।
मैं एक अन्तिम भाग पर जाना चाहता हूँ, मुझे यह भी बताने दीजिए। मुझे लगता है कि यदि आप परमेश्वर के न्याय में भरोसा करते हैं, तो यह उस तरीके को प्रभावित करेगा जिस तरीके से आप लोगों से बात करते हैं। मेरे पास धर्मशास्त्र में से इसमें जाने के लिये समय नहीं है, परन्तु मैं जल्दी से प्रकाशितवाक्य 6 निकालना चाहता हूँ, जिसमें प्रकाशितवाक्य के चार घुड़सवारों का वर्णन है। जीतते हुए और जीतने के लिये जानेवाला सफेद घोड़ा; मृत्यु और हिंसा और लहू बहानेवाला लाल घोड़ा; अकाल, भूखमरी, और अभाव लानेवाला काला घोड़ा और अन्त में चारों ओर मृत्यु फैलानेवाला पीला घोड़ा। अब मुझे लगता है वे उन चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें परमेश्वर युग की अन्त की ओर ला रहा है। मैं इस बात को देख रहा हूँ कि चारों घोड़े स्वर्ग से एक क्रम से आते हैं। लाल घोड़ा, काला घोड़ा और पीला घोड़ा। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर का न्याय उसकी अनुसार होता है।
परन्तु मैं सफेद घोड़े में रुचि रखता हूँ। सफेद घोड़े के विषय में वचन कहता है, ‘‘वह जीतते हुए और जीतने के लिये गया।’’ अब कई सारे भिन्न सिद्धान्त पाए जाते हैं परन्तु मैं आपको बताऊँगा कि मेरे लिये इसका तात्पर्य क्या है। सफेद घोड़ा सुसमाचार पर यीशु है जो कि आगे जा रहा है और उसका चित्रण भजन 45 में दीन और धर्मी और परमप्रधान की तरवार लिये हुए के रूप में किया गया है। और यह मुझे बहुत ही अनिवार्यता के साथ सुसमाचार की तस्वीर प्रस्तुत करता है, चूँकि न्याय बहुत ही निकट है। लाल घोड़ा, काला घोड़ा और पीला घोड़ा। मुझे लगता है, चारों घोड़े आज दौड़ रहे हैं। मुझे लगता है कि लाल घोड़ा काम कर रहा है, और काला घोड़ा अफ्रीका में काम कर रहा है - अकाल, कुपोषण - पीला घोड़ा मृत्यु ला रहा है।
परन्तु मेरा मानना यह है, मुझे यह बात प्रेरणा देती है। मुझे लगता है कि अपने मन की आँखों से दिन-रात मैं और रूत यह देख सकते हैं। सफेद घोड़े को शेष घोड़ों से सामने रखा गया है। अन्य घोड़ों के आने से पहले हमें लोगों तक पहुँचना है। हमें परमेश्वर के न्याय के उतरने से पहले यह अति आवश्यक है। यह इन्तजार नहीं करता है, यह आपकी सुविधा की बात नहीं है। यह ऐसी बात नहीं है कि कब आप जाना चाहते हैं। यह तब फसल काटने की बात है जब फसल काटी जा सकती है। यह करोड़ों लोगों को करुणा का सन्देश देने की बात है, ऐसे बहुत से लोग प्रत्युत्तर देंगे बशर्ते कि वे समय से सुन लें। यदि आप संसार के कुछ कठिनतम देशों में यात्रा नहीं किए हैं, तो आप इस बात को नहीं समझते हैं कि मानवता के हृदय में एक अभिलाषा है जो कि यीशु की सत्य को सुनने के लिये पवित्र आत्मा के द्वारा रखा गया है।
हम पाकिस्तान में थे जो कि 98 प्रतिशत मुस्लिम राष्टं है और हमने सार्व जनिक रूप से तीन या चार शहरों में प्रचार किया। नो दिनों के दौरान् 9000 लोगों ने यीशु को स्वीकार करने की इच्छा प्रगट की और उनमें से कम से कम आधे मुसलमान थे। मैं नहीं कहता हूँ कि वे सभी बचाए गए, परन्तु मैं यह कहना चाहता हूँ कि वे सुसमाचार सुनना चाहते थे।
भाइयों और बहनों, यह कटनी का समय है और स्मरण रखिए, एक पुत्र जब कटनी के समय सोता है, वह पिता के लिये शर्मिन्दगी लाता है। काश कि हममें से किसी के विषय में ऐसा न कहा जाए। आमीन? परमेश्वर आपको आशीष दे।
कोड: MV-4338-100-HIN









